(Wide Angle with Expert) अमेरिका - ईरान तनाव और विश्वसंकट द्वारा सुनील वर्मा (US - Iran Tensions & Global Crisis by Sunil Verma)

Wide Angle with Expert


(Wide Angle with Expert) अमेरिका - ईरान तनाव और विश्वसंकट द्वारा सुनील वर्मा (US - Iran Tensions & Global Crisis by Sunil Verma)


विषय का नाम (Topic Name): अमेरिका - ईरान तनाव और विश्वसंकट (US - Iran Tensions & Global Crisis)

विशेषज्ञ का नाम (Expert Name): सुनील वर्मा (Sunil Verma)


  • इन्हें USA के द्वारा बगदाद एयरपोर्ट के पास एयरस्ट्राइक में मारे जाने के बाद ईरान और USA के बीच तनाव बहुत अधिक बढ़ गया है।
  • यह ईरान की मिलिट्री के एक भाग के प्रमुख थे जिसका नाम QUDS फोर्स है।
  • यह ईरान रिवोल्युशनरी गार्ड का भाग है। यह ईरान के बाहर के खतरों से निपटने के लिए है। जैसे बाहरी देश से गोरिल्ला वार या आतंकी संगठन का मुकाबला आदि।
  • Islamic Revolutionary Guard Carps के अंतर्गत Joint Staff, Aerospace Force, Ground Force, Navy, Quds Force और Basij Mobilization Force आते हैं।
  • USA, बहरीन, सऊदी अरब के द्वारा IRGC को आतंकी संगठन माना जाता है। इसीलिए इस घटना को आतंकी संगठन के प्रमुख को मारने के रूप में USA द्वारा प्रजेंट किया जा रहा है।
  • USA ने कहा है कि जनरल सुलेमानी अमेंरिकी नागरिकों एवं राजनायिकों को बंधक बनाना चाहते थे और USA के खिलाफ काम कर रहे थे। इसलिए यह USA के रक्षार्थ किया गया है।
  • सुलेमानी पर यह आरोप है कि वह इराक में हो रहे आंदोलन को अमेंरिका के खिलाफ मोड़ने का प्रयास कर रहे थे और भीड़ को USA एम्बेसी पर हमला करने के लिए उकसा रहे थे।
  • इराक में इस समय लोखों लोग सड़कों पर आंदोलन कर रहे हैं, इस आंदोलन का नाम The Tishreen Revolution है। इस आंदोलन में ईरानी हस्तक्षेपए USA के हस्तक्षेपए बेरोजगारीए भ्रष्टाचारए खराब व्यवस्था आदि प्रमुख मुद्दे हैं।
  • USA का मानना है कि बगदाद में USA एम्बेसी पर जो हमला किया गया था भीड़ द्वारा उसमें IRGC की भूमिका सबसे ज्यादा थी।
  • ईरान ने USA को इसकी कीमत चुकाने की धमकी दी है।
  • ईरान एक शिया बहुल देश है एसका पश्चिमी पड़ोसी देश इराक भी शिया बहुल देश है लेकिन लगभग एक चैथाई जनसंख्या सुन्नी समुदाय का है।
  • इराक में जब सद्दाम हुसैन सत्ता में था तो यह सुन्नी समुदाय ज्यादा ताकतवर था, क्योंकि सद्दाम भी इसी समुदाय से था।
  • 2003 में USA के द्वारा जब इराक पर हमला किया गया उसके बाद से जो भी सरकारें बनी वह शिया समुदाय समूह से है।
  • सत्ता पर नियंत्रण को लेकर शिया और सुन्नी में संघर्ष बना रहता है।
  • इराक युद्ध के बाद इराक की सत्ता पर काबिज सभी शिया राष्ट्राध्यक्षों ने ईरान के साथ अपने संबंधों को बहुत मजबूत और मधुर रखने का प्रयास किया है।
  • ईरान की मंशा भी इराक को सहयोगी देश के रूप में संबंध विकसित करने की रही है। इसीकारण वहाँ ईरान हस्तक्षेप भी करता रहता है।
  • इराक USA एवं ईरान दोनों के महत्व को समझता है इसलिए वह दोनो से संबंध बनाकर रखना चाहता है।
  • ISIS से निपटने में USA ने सैन्य एवं वित्तीय मदद बड़ी मात्रा में की है।

बगदाद

  • इराक में स्थित अमेंरिकी एम्बेसी दूनियो की सबसे बड़ी एम्बेसी है। यह अपने आप में एक शहर की तरह है।
  • यह बगदाद के ग्रीन जोन में स्थित है इसलिए जब एम्बेसी हमला हुआ तो अमेरिका चिंतित हो गया।
  • USA की एम्बेसी पर 1979 में ईरान के तेहरान पर बड़ा हमला हो चुका है तो इसी प्रकार की एक बड़ी घटना 2012 में लीबिया Benghazi स्थित USA कांसुलेट पर हुई थी।
  • इराक में इस समय 5 हजार से ज्यादा अमेंरिकी सैनिक है जो ईराकी सेना को प्रशिक्षण और सहायता देते हैं।
  • इराक में सेना के साथ-साथ मिलिशिया बहुत प्रभावी है। यह वह समूह है जो इराक के सैनिक नहीं हैं लेकिन ISIS से लड़ने में सैनिक की तरह इराक की मदद किये थे।
  • इसी प्रकार का एक समूह Popular Mobilization Force (PMF) है। इनकी मांग है कि USA आर्मी इराक से चले जायें।
  • यह USA आर्मी और उनके बेस पर हमला करते आये हैं। इसी प्रकार का एक हमला 27 दिसम्बर 2019 इराक के किरकुक में हुआ जिसमें एक US कांट्रेक्टर मारा गया।
  • इसके लिए USA ने Katib Hezbollah को दोषी ठहराया। यह ईरान समर्पित Militia माना जाता है।
  • 27 दिसम्बर के हमले के बाद US रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इस हमले में Islamic Revolution Guard Corps के Quda Force का सहयोग प्राप्त है।
  • 39 दिसम्बर को US मिलिट्री ने कतायब हिजबुल्ला के ठिकानों पर हमला कर उसके कई लड़ाकों को मार गिराया।
  • इसके विरोध में प्रदर्शन करने के लिए Popular Mobilization Forces (PMF) ने USA एम्बेसी के सामने विरोध प्रदर्शन करेंगे।
  • PMF के कई लड़ाके एम्बेसी के अंदर प्रवेश कर गये और तोड़.फोड़ कर दिया।