(Wide Angle with Expert) आपदा प्रबंधन और वैश्विक पहल (द्वारा विवेक ओझा) (Disaster Management and Global Initiatives by Vivek Ojha)

Wide Angle with Expert


(Wide Angle with Expert) आपदा प्रबंधन और वैश्विक पहल द्वारा विवेक ओझा (Disaster Management and Global Initiatives by Vivek Ojha)


विषय का नाम (Topic Name): आपदा प्रबंधन और वैश्विक पहल (Disaster Management and Global Initiatives)

विशेषज्ञ का नाम (Expert Name): विवेक ओझा (Vivek Ojha)


भारत सरकार ने हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय सौर संगठन के तर्ज पर एक बार फिर ग्लोबल कोअलीशन ऑन डिजास्टर रेसिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर के गठन और उसके सचिवालय के गठन का प्रस्ताव करते हुए अपनी पर्यावरणीय सक्रियता दिखाई है । 27 जून , 2019 को भारतीय प्रधानमंत्री ने जी 20 के ओसाका समिट के दौरान ही जापान के प्रधानमंत्री शिंजो अबे के साथ हुई बैठक में ग्लोबल कोअलिशन फॉर डिजास्टर रेसीलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर के गठन का मुद्दा उठाया और उनसे इस विषय पर समर्थन मांगा । हाल ही में इस बात पर सहमति बनी है कि भारत और ब्रिटेन सितंबर, 2019 में आयोजित होने वाले यूएन क्लाइमेट समिट में मिलकर इस वैश्विक संगठन को लॉन्च करेंगे । जापान ने भी इसके समर्थन की बात की है । भारत ने इस नए संगठन के सचिवालय के लिए 480 करोड़ रूपए व्यय करने की प्रतिबद्धता जताई है । वैसे तो इस प्रकार के वैश्विक संगठन के गठन का प्रस्ताव प्रधानमंत्री मोदी ने 2017 के जर्मनी के हैम्बर्ग में आयोजित जी 20 समिट में दिया था । लेकिन हाल के समय में भारत ने इस दिशा में कुछ ऐसे काम किए जिससे समूचे वैश्विक समुदाय का ध्यान इस तरफ आकर्षित हुआ है । सबसे पहले तो वर्ष 2020 के लिए भारत को सर्वसम्मति से ग्लोबल फेसिलिटी फॉर डिजास्टर रिडक्शन एंड रिकवरी का सह अध्यक्ष चुना गया है । इसकी अध्यक्षता करने वाले संगठनों में शामिल रहेंगे - अफ्रीका कैरेबियन एंड पैसिफिक ग्रुप ऑफ स्टेट्स यानि एसीपी , यूरोपीय संघ और वर्ल्ड बैंक । भारत को जीएफडीआरआर के परमार्शकारी समूह का सह अध्यक्ष बनाने का निर्णय मई 2019 में ग्लोबल प्लेटफार्म फॉर डिजास्टर रिस्क रीडक्शन के छठवें सत्र में स्विट्जरलैंड के जेनेवा में लिया गया । जीएफडीआरआर ने यूनाइटेड नेशंस ऑफिस फॉर डिजास्टर रिस्क रिडक्शन और यूरोपियन यूनियन के साथ मिलकर इसी संदर्भ में 13 और 14 मई , 2019 को आपदाओं के जोख़िम से निपटने संबंधी चौथे वर्ल्ड रिकंस्ट्रक्शन कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया ।

क्या है जीएफडीआरआर?

यह एक वैश्विक साझेदारी है । यह विश्व भर में आपदा जोख़िम चुनौतियों से निपटने के लिए उन्हें वित्तीय सहायता प्रदान करने वाला अनुदान पोषण क्रियाविधि यानि ग्रांट फंडिंग मैकेनिज्म है। इसका प्रबंधन वर्ल्ड बैंक के द्वारा किया जाता है । यह विकासशील देशों को प्राकृतिक आपदाओं , जलवायु परिवर्तन से जुड़े जोखिमों को समझने में मदद करता है । यह वर्तमान में 400 से अधिक स्थानीय , राष्ट्रीय, अंतर्राष्ट्रीय, क्षेत्रीय पार्टनर्स के साथ जुड़कर विकासशील देशों को आपदा जोख़िम ज्ञान और साक्षरता , वित्तीय सहायता और तकनीकी सहायता देता है ।

भारत और जीएफडीआरआर?

भारत वैश्विक आपदा प्रबंधन में नेतृत्वकारी भूमिका निभाने की चाह रखता है । इसलिए भारत 2015 में जीएफडीआरआर के परामर्शकारी समूह का सदस्य बन गया । इसके बाद भारत ने 2017 के जी 20 के हैम्बर्ग समिट में इस दिशा में एक वैश्विक संगठन बनाने का प्रस्ताव किया । इसी विचार को मजबूती देते हुए भारत ने अक्टूबर , 2018 में जीएफडीआरआर के परामर्शकारी समूह की सह अध्यक्षता करने की इच्छा जाहिर की । इसके बाद भारत , यूनाइटेड नेशंस ऑफिस फॉर डिजास्टर रिस्क रिडक्शन , यूनाइटेड नेशंस डेवलपमेंट प्रोग्राम और वर्ल्ड बैंक ने मिलकर 19 और 20 मार्च , 2019 को आपदा का आघात सहने योग्य अवसंरचना ( डिजास्टर रेसेलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर ) पर अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया । इसके पूर्व भारत सरकार ने ऐसी अवसंरचना के विकास के लिए एक वैश्विक संगठन के विकास के लिए सुझाव देने के लिए एक टास्क फोर्स का गठन किया था जिसने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की भी राय ली गई । एनडीएमए ने इस संबंध में एक ब्लू प्रिंट भी तैयार किया ।

यूनाइटेड नेशंस ऑफिस फॉर डिजास्टर रिस्क रिडक्शन की रिपोर्ट , 2018:

यूनाइटेड नेशंस ऑफिस फॉर डिजास्टर रिस्क रिडक्शन की 13 अक्टूबर , 2018 को आपदा से संबंधित एक गंभीर रिपोर्ट आई । इस रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले 20 वर्षों में यानि 1997 से 2008 के बीच प्राकृतिक आपदाओं से भारत को 80 बिलियन डॉलर की आर्थिक क्षति हुई है । वर्ल्ड बैंक के भारतीय डायसपोरा के द्वारा भेजे गए रेमिटेंस ( वित्त प्रेषण) से संबंधित 2018 की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में 80 बिलियन डॉलर का रेमिटेंस भेजा गया है । आसियान देशों के साथ 81 बिलियन डॉलर का , चीन के साथ 84 बिलियन डॉलर का हमारा द्विपक्षीय व्यापार है । इतनी बड़ी रकम का नुकसान हमें आपदाओं से हुआ है । रिपोर्ट का कहना है कि पिछले 20 वर्षों में सभी आपदाओं में से 91 प्रतिशत आपदाओं से वैश्विक स्तर पर 3 ट्रिलियन डॉलर की आर्थिक क्षति हुई है । रिपोर्ट के मुताबिक बाढ़ , तूफान , सूखा , हीट वेव्स और अन्य गंभीर मौसमी दशाओं के चलते ऐसा हुआ है । रिपोर्ट का यह भी कहना है कि प्रत्येक वर्ष वैश्विक स्तर पर 520 बिलियन डॉलर की आर्थिक क्षति आपदाओं के चलते हो रही है और इससे हर साल 26 मिलियन लोग निर्धनता की श्रेणी में शामिल होते जा रहे हैं । 2019 मेें अफ़्रीकी देश मोजांबिक की पोर्ट सिटी बेइरा जो लगभग 5 लाख लोगों का निवास स्थान है , वहां आई भीषण प्राकृतिक आपदा के बाद एक वैश्विक संगठन के गठन पर अधिक बल दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक प्राकृतिक आपदाओं से पिछले 20 वर्षों में सबसे ज्यादा आर्थिक क्षति जिन देशों को पहुंची है उनमें शामिल हैं - अमेरिका ( 945 बिलियन डॉलर) , चीन ( 492 बिलियन डॉलर) , जापान ( 376.3 बिलियन डॉलर) , भारत ( 80 बिलियन डॉलर) और प्यूर्टो रिको ( 71.7 बिलियन ) आदि । 20 मार्च को 33 देशों ने मिलकर निर्णय लिया कि ग्लोबल कोअलिशन फॉर डिजास्टर रीसिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर का अंतरिम सचिवालय भारत के नई दिल्ली में स्थापित किया जाएगा । भारत ने जिस ग्लोबल कोअलिशन फॉर डिजास्टर रिसिलिएंट इंफ्रास्ट्रक्चर के गठन का प्रस्ताव किया है उसे संयुक्त राष्ट्र संघ , वर्ल्ड बैंक और कई अन्य बहुपक्षीय विकास बैंकों ने अपना समर्थन दे दिया है । 33 देशों जिनमें यूके , इटली, ऑस्ट्रेलिया, साउथ अफ्रीका के अलावा यूरोपीय संघ भी शामिल है , ने भारत के इस प्रस्ताव का समर्थन कर दिया है । अब सितंबर अक्टूबर , 2019 में आयोजित होने वाले यूएन क्लाइमेट समिट में औपचारिक रूप से भारत के इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिए जाने की प्रबल संभावना व्यक्त की जा रही है।

आपदा प्रबंधन के लिए वैश्विक रणनीति अथवा कार्य योजना:

अब तक प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर तीन रणनीति या कार्य योजना बनाई गई । पहला 1994 में योकोहामा स्ट्रेटजी एंड प्लान ऑफ एक्शन जो कि एक सुरक्षित विश्व से संबंधित था । इसके बाद 2005 से 2015 के लिए ह्यूगो फ्रेमवर्क फॉर एक्शन का गठन किया गया । इसके बाद 18 मार्च , 2015 को 2015 से 2030 के लिए सेंडाई फ्रेमवर्क फॉर डिजास्टर रिस्क रेडक्शन को अपनाया गया । सेंडाई फ्रेमवर्क कहता है कि डिजास्टर रिस्क में कटौती के लिए प्रत्येक 1 डॉलर के खर्च पर 7 डॉलर के लाभ की प्राप्ति होगी । बात सच भी है प्राकृतिक आपदाओं से भवन , राजमार्ग , रेलमार्ग सब कुछ प्रभावित होता है , नष्ट होता है । ऐसी आपदाओं के जोख़िम को जितना ही कम किया जाएगा उतने ही परिसंपत्ति को सुरक्षित किया जा सकता है । भारत ने भी कुछ इसी सोच के साथ अपनी पर्यावरणीय कूटनीति को तेज करना शुरू किया है । सितम्बर , 2019 में ही भारत पहली बार संयुक्त राष्ट्र मरूस्थलीकरण निरोधक अभिसमय के कोप 14 का आयोजन नई दिल्ली में करेगा । 1994 में आए इस अभिसमय का आयोजन भारत पहली बार करेगा । इसके बाद भारत पर भी मरूस्थलीकरण से निपटने का दबाव बढ़ेगा।