(Wide Angle with Expert) अफ़ग़ान संकट: पृष्ठभूमि (भाग - 1) - द्वारा विनय सिंह (Afghan Crisis: Background "Part - 1" by Vinay Singh)

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(Wide Angle with Expert) अफ़ग़ान संकट: पृष्ठभूमि (भाग - 1) - द्वारा विनय सिंह (Afghan Crisis: Background "Part - 1" by Vinay Singh)


विषय का नाम (Topic Name): अफ़ग़ान संकट: पृष्ठभूमि (भाग - 1) - द्वारा विनय सिंह (Afghan Crisis: Background "Part - 1" by Vinay Singh)

विशेषज्ञ का नाम (Expert Name): विनय सिंह (Vinay Singh)


सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी में समसामयिक विषयों के महत्व से हम भलीभांति परिचित हैं। इन समसामयिक विषयों में कुछ मुद्दे ऐसे होते हैं जो लंबे समय से चर्चा में बने रहते हैं, उदाहरण के तौर पर अफगानिस्तान संकट, मध्य-पूर्व का संकट और दक्षिण चीन सागर आदि के संकट। अपनी इन कक्षाओं में हम लोग इन मुद्दों का समग्र दृष्टि से अध्ययन करेंगे, ताकि अगर वर्तमान में इनसे जुड़ी कोई घटना होती है तो हम इन मुद्दों का पूरी तरह विश्लेषण करने में सक्षम हो सकें।

अपनी आज की कक्षा में हम लोग अफग़ानिस्तान के संकट की बात करेंगे।

चर्चा में क्यों?

गत 6 सितंबर को अफग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में एक तालिबानी हमले में एक अमेरिकी सैनिक के साथ-साथ 11 अन्य लोगों की मृत्यु हो गई। इस घटना से कुपित होकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तालिबान के साथ चल रही शांति वार्ता प्रक्रिया को रद्द कर दिया।

अफग़ानिस्तान संकट की पृष्ठभूमि को समझने के लिए हमें कुछ प्रश्नों पर दृष्टि डालना जरूरी है-

  • आखिर क्या कारण है कि अफग़ानिस्तान में इतने लंबे से गृह युद्ध चल रहा है?
  • क्या अफग़ानिस्तान में आधुनिक राज्य बनने की क्षमता नहीं है?
  • अफग़ानिस्तान को आधुनिक राज्य बनाने की दिशा में ब्रिटेन, रूस और अमेरिका जैसे बड़े देश क्यों असफल रहे?
  • आखिर रूस और अमेरिका जैसी बड़ी महाशक्तियों की अफग़ानिस्तान में इतनी रुचि क्यों है?

आखिर क्या कारण है कि अफग़ानिस्तान में इतने लंबे से गृह युद्ध चल रहा है?

अफग़ानिस्तान में अधिकांशतः लोग कबीलाई परंपरा के अनुसार रहते हैं। जिनमें पश्तून, हजारा, उजबेक और ताजिक समेत कई कबीले शामिल है। इनमें पश्तूनों की संख्या सबसे अधिक है। ये कबीले ज्यादातर समुदाय से जुड़ी परंपराओं के अनुसार अपने शासन को चलाते हैं। इस प्रक्रिया में हर कबीला अपने अपनी-अपनी परंपराओं के अनुसार शासन को चलाना चाहता है। जिसके परिणामस्वरूप अफग़ानिस्तान में सत्ता और वर्चस्व को लेकर एक संघर्ष शुरू हो गया।

भारतीय उपमहाद्वीप हमेशा से ही प्राकृतिक दृष्टि से संपन्न रहा है जिसके कारण यहां पर कृषि समेत अन्य गतिविधियाँ उन्नत किस्म की रही हैं। भारतीय उपमहाद्वीप की इस संपन्नता ने सदा ही विदेशी आक्रांताओं को अपनी तरफ आकर्षित किया है। लेकिन इन विदेशी आक्रांताओं को भारत में प्रवेश करने से पहले अफ़गानों का सामना करना पड़ता था। इन परिस्थितियों के कारण अफ़ग़ानियों में स्वाभाविक रूप से लड़ाकू प्रवृत्ति विकसित हो गई।

क्या अफग़ानिस्तान में आधुनिक राज्य बनने की क्षमता नहीं है?

अफग़ानिस्तान को आधुनिक राज्य बनाने की सबसे पहली कोशिश अहमद शाह अब्दाली ने की थी। उसके बाद कई और शासकों ने अफगानिस्तान को एक आधुनिक राज्य बनाने का प्रयास तो किया लेकिन उन्हें बहुत बड़ी सफलता हासिल नहीं हुई। इस कड़ी में सबसे अंतिम प्रयास अब्दुल रहमान खान का था। अब्दुल रहमान खान वर्ष 1880 से लेकर 1901 तक अफगानिस्तान का अमीर था। वस्तुतः किसी भी समाज के आंतरिक संघर्षों को समायोजित करना उसके विभिन्न समूहों को एक मंच पर लाना और उन्हें एक साझा और बेहतर भविष्य के लिए तैयार करना यह काम कोई दूरदर्शी नेता ही कर सकता है। लेकिन अब्दुल रहमान खान के बाद अफगानिस्तान इस तरह के दूरदर्शी नेतृत्व की कमी से जूझ रहा है।

अफग़ानिस्तान को आधुनिक राज्य बनाने की दिशा में ब्रिटेन, रूस और अमेरिका जैसे बड़े देश क्यों असफल रहे?

अफगानी कबीलों के शासन के अपने कुछ सिद्धांत होते हैं। यह सिद्धांत विशेषकर वहां की भौगोलिक और अन्य परिस्थितियों की परिणित के रूप में देखे जा सकते हैं। पश्तूनवली इन सिद्धांतों का एक बेहतर उदाहरण है। इस तरह के सिद्धांतों का अनुसरण करने के कारण यहां रहने वाले कबीलों का उग्र स्वभाव का होना स्वाभाविक है। ऐसे में, अगर कोई भी नियम या परंपरा बाहर से थोपी गई या यहाँ कोई विदेशी शासन लागू करने प्रयास किया गया तो अफ़ग़ानियों द्वारा इसका विरोध स्वाभाविक है।

आखिर रूस और अमेरिका जैसी बड़ी महाशक्तियों की अफग़ानिस्तान में इतनी रुचि क्यों है?

19वीं सदी में अफग़ानिस्तान सोवियत संघ और ब्रिटिश इंडिया के बीच संघर्षो का केंद्र बन गया था, अर्थात अफग़ानिस्तान एक बफर जोन की तरह काम कर रहा था। इतिहास में इसे ‘ग्रेट गेम’ की संज्ञा दी गई। 20वीं सदी तक आते-आते सोवियत संघ की जगह पर रूस और ब्रिटिश साम्राज्य की जगह अमेरिका मैदान में आ गए थे। 21वीं सदी में भी अफग़ानिस्तान में इन महाशक्तियों की रुचि कम नहीं हुई है। अब एक तरफ रूस और चीन मैदान में डटे हुए हैं, तो दूसरी तरफ अमेरिका है।

अफग़ानिस्तान की घरेलू राजनीति: अगर हम अफग़ानिस्तान के मानचित्र को देखें तो यह पूरी एशिया के लिए एक कनेक्टिंग बिंदु की तरह है। इसके उत्तर भी मध्य एशिया, पूर्व में पूर्वी एशिया, पश्चिम में मध्य-पूर्व क्षेत्र और दक्षिण में दक्षिण एशिया स्थित है। ऐसा कहा जाता है कि अगर बीसवीं सदी अमेरिका की थी, तो 21वीं सदी एशिया की होने वाली है। ऐसे में, अगर किसी देश का अफग़ानिस्तान में बेस है तो वह पूरे एशिया पर अपना नियंत्रण बनाए रख सकता है।