(इनफोकस - InFocus) ट्रांसजेंडर का प्राइड (Transgender's Pride)


(इनफोकस - InFocus) ट्रांसजेंडर का प्राइड (Transgender's Pride)


सुर्ख़ियों में क्यों?

पिछले दिनों नोएडा मेट्रो रेल निगम ने सेक्टर-50 स्थित मेट्रो स्टेशन का नाम बदलकर ‘प्राइड स्टेशन’ कर दिया. यह उत्तर भारत में ट्रांसजेंडर समुदाय को समर्पित पहला मेट्रो स्टेशन है. ग़ौरतलब है कि इस मेट्रो स्टेशन पर ट्रांसजेंडर समुदाय के लोग कर्मचारी के रूप में काम भी करेंगे.

किसे कहा जाता है ट्रांसजेंडर?

ट्रांसजेंडर, किसी भी उम्र या लिंग के व्यक्ति होते हैं जो व्यक्तिगत विशेषताओं या व्यवहारों के बारे में पुरुषों और महिलाओं से भिन्न पाए जाते हैं।

  • इसे दूसरे शब्दों में कहें तो जब किसी व्यक्ति के जननांगों और मस्तिष्क का विकास उसके जन्म से निर्धारित लिंग के मुताबिक नहीं होता है तो उन्हें ट्रांसजेंडर की कैटेगरी में रख दिया जाता है.
  • इसमें महिला को यह लगने लगता है कि वह पुरुष है और पुरुष यह लगता है कि वह महिला है।
  • साल 2011 की जनगणना के मुताबिक देशभर में किन्नरों की संख्या करीब 20 लाख है.

ट्रांसजेंडर से जुड़ी समस्याएं क्या-क्या है?

ट्रांसजेंडर समुदाय को होने वाली मुख्य समस्याएं रोज़गार, शैक्षिक सुविधाओं की कमी, आवास और चिकित्सा सुविधाओं में होने वाला भेदभाव है। इन सबसे ऊपर, उनके लिए जो सबसे ज्यादा दुखद बात है वह यह कि उन्हें सामाजिक बहिष्कार का सामना करना पड़ता है.

  • अधिकांश परिवारों को जब यह भान होता है कि उनका लड़का लड़कियों जैसा व्यवहार कर रहा है या फिर उनकी लड़की लड़कों जैसी व्यवहार कर रही है तो वे इसे मानसिक तौर पर स्वीकार नहीं कर पाते. लिहाजा वे अपने बच्चों को धमकाते हैं, डराते हैं या कभी-कभी हिंसात्मक रास्ता भी अपनाते हैं ताकि उनका बच्चा एक खास लिंग के मुताबिक ही व्यवहार रखे. अगर ऐसा संभव नहीं होता है तो कई बार ये बच्चे परिवार से बाहर निकाल दिए जाते हैं.
  • यह समुदाय, संपत्ति की विरासत या बच्चे को गोद लेने के सम्बन्ध में उपेक्षित महसूस करता है। इसकी वजह से इन्हें भीख मांगने और नाचने-गाने जैसे कामों को मजबूरी में करना पड़ता है।
  • इतना ही नहीं, कभी-कभी खुद को जीवित रहने के लिए इन्हें सेक्स वर्कर के रूप में भी काम करना पड़ता है.
  • ट्रांसजेंडर समुदाय को कलंक और भेदभाव का सामना करना पड़ता है और इसलिए दूसरों की तुलना में उनके पास कम अवसर होते हैं। चूँकि वे समाज द्वारा स्वीकार नहीं किए जाते हैं और इसलिए उचित स्कूली शिक्षा प्राप्त नहीं करते हैं।
  • यहां तक कि अगर वे एक शैक्षिक संस्थान में नामाँकित हैं, तो उन्हें उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है और हर दिन उन्हें धमकाया जाता है. उन्हें स्कूल छोड़ने के लिए कहा जाता है या वे अपने आप बाहर निकल जाते हैं।

सरकार द्वारा कौन-से क़दम उठाए गए हैं?

पिछले साल, संसद द्वारा 'ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम,2019 पारित किया गया था। केंद्र सरकार के इस अधिनियम में ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों के लिए सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक सशक्तीकरण की दिशा में एक मज़बूत कार्य प्रणाली उपलब्ध कराने के प्रावधान शामिल किये गए हैं।

  • इस कानून के मुताबिक ट्रांसजेंडर वह व्यक्ति होता है जिसका लिंग जन्म के समय निर्धारित लिंग से मेल नहीं खाता है।
  • कानून में व्यवस्था की गई है कि किसी ट्रांसजेंडर व्‍यक्ति के साथ शैक्षणिक संस्‍थानों, रोजगार, स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं आदि में भेदभाव नहीं किया जाएगा।
  • साथ ही, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के अधिकारों की रक्षा के लिए उन्‍हें सलाह देने, उनकी देख-रेख और मूल्यांकन उपायों के लिए एक राष्ट्रीय परिषद के गठन का का प्रावधान किया गया है।
  • इसी प्रावधान के मुताबिक हाल ही में केंद्र सरकार ने एक राष्ट्रीय परिषद का गठन किया है. इसका मकसद समुदाय से जुड़े लोगों को बराबरी और समाज में मान्यता दिलाना है.
  • इसके अलावा, इस दिशा में कुछ राज्यों ने ही सराहनीय कदम उठाए हैं जैसे ओडिशा ने ट्रांसजेंडरों को बीपीएल श्रेणी में रखा है ताकि उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।

आगे क्या किया जा सकता है?

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 15 देश में धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव को पूरी तरह से प्रतिबंधित करता है।

  • जिस तरह महिलाओं और पुरुषों को गरिमा पूर्ण जीवन का अधिकार है उसी तरह ट्रांसजेंडर समुदाय को भी सम्मान पूर्ण जीवन जीने का अधिकार है।
  • सुप्रीम कोर्ट कहता है कि तीसरे लिंग के रूप में ट्रांसजेंडर्स की मान्यता एक सामाजिक या चिकित्सा मुद्दा नहीं है, बल्कि एक मानवाधिकार मुद्दा है.
  • ज़रूरी है कि ट्रांसजेंडर समुदाय की चिंताओं को गंभीरता से सुना जाए और उनका समाधान करने का प्रयास किया जाए।
  • इस समुदाय के कल्याण के लिए जो भी योजनाएं बनाई जा रही हैं ज़मीनी स्तर पर उनका क्रियान्वयन अच्छे से किया जाए.