(इनफोकस - InFocus) राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (National Clean Air Programme)


(इनफोकस - InFocus) राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (National Clean Air Programme)



सुर्खियों में क्यों?

  • हाल ही में, राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण यानी NGT ने वायु प्रदूषण के मुद्दे पर केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय को फटकार लगाई है.

  • NGT ने मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) पर पेश की गई रिपोर्ट को नकार दिया है.

  • इस रिपोर्ट में एक समिति ने निष्कर्ष निकाला है कि NCAP के तहत वायु प्रदूषण में साल 2024 तक 20-30 फ़ीसदी की कमी लाना संभव है।

महत्वपूर्ण बिंदु

  • NGT ने कहा कि पर्यावरण मंत्रालय का नजरिया भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत संवैधानिक अधिदेश के विरुद्ध था।
  • 'स्वच्छ वायु का अधिकार' 'जीवन के अधिकार' का ही एक हिस्सा है. अगर सरकार वायु प्रदूषण में कमी नहीं ला पाती है तो लोग अपने 'जीवन जीने के अधिकार' से वंचित हो सकते हैं।
  • पर्यावरण मंत्रालय ने NGT को बताया कि वायु गुणवत्ता के स्तर पर तकनीकी एवं नीतिगत दखलअंदाजी के प्रभाव का आकलन करने के लिये जरूरी तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से एक मध्यावधि राष्ट्रव्यापी समीक्षा की जा सकती है.
  • साथ ही, अगर जरूरी हुआ तो लक्ष्य में भी आवश्यक बदलाव किए जा सकते हैं।

राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम

  • इस कार्यक्रम को 10 जनवरी, 2019 को शुरू किया गया था।
  • NCAP समयबद्ध तरीके से लागू किया जाने वाला एक पाँच वर्षीय कार्यक्रम है।
  • इसका मुख्य मक़सद वायु प्रदूषण को रोकना है।
  • इस प्रोग्राम में प्रदूषण रोक-थाम से जुड़े केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों, स्थानीय निकायों और अन्य हितधारकों को शामिल किया गया है।
  • इस कार्यक्रम में 102 प्रदूषित शहरों में वायु प्रदूषण कम करने का लक्ष्य रखा गया है।
  • इसके तहत 2017 को आधार वर्ष मानते हुए वायु में मौज़ूद PM 2.5 और PM10 पार्टिकल्स को 20 से 30 फीसदी तक कम करने का ‘अनुमानित राष्ट्रीय लक्ष्य’ रखा गया है।
  • इस प्रोग्राम के तहत राज्यों को आर्थिक मदद भी दी जानी है, ताकि वे वायु प्रदूषण को रोकने के लिए बेहतर तरीके से काम कर सकें।
  • इसमें हर शहर को प्रदूषण रोकने के लिए अपना अलग-अलग एक्शन प्लान बनाना होगा, क्योंकि हर शहर में प्रदूषण का जरिया अलग-अलग है।
  • इसके अलावा, NCAP में और भी कई चीज़ें शामिल हैं मसलन दोपहिया वाहनों के क्षेत्र में ई-मोबिलिटी की राज्य-स्तरीय योजनाएँ, चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ाना, बीएस-VI स्टैण्डर्ड को कड़ाई से लागू करना, पब्लिक ट्रांसपोर्ट को बढ़ावा देना और प्रदूषणकारी उद्योगों के लिये थर्ड पार्टी ऑडिट को अपनाना।

पार्टिकुलेट मैटर है सबसे बड़ी चुनौती

  • दरअसल भारत में PM 2.5 यानी पार्टिकुलेट मैटर का बढ़ता स्तर वायु प्रदूषण के लिहाज से सबसे गंभीर समस्या है।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक PM 2. 5 की सुरक्षित सीमा – 40 माइक्रोग्राम प्रति मीटर क्यूब निर्धारित की गयी है, जबकि देश की राजधानी दिल्ली में ये स्तर अक्सर ही 200 माइक्रोग्राम प्रति मीटर क्यूब के करीब बना रहता है।
  • पार्टिकुलेट मैटर को अभिकणीय पदार्थ के नाम से जाना जाता है। ये हमारे वायुमंडल में उपस्थित बहुत छोटे कण होते हैं जिनकी मौजूदगी ठोस या तरल अवस्था में हो सकती है।
  • पार्टिकुलेट मैटर वायुमंडल में निष्क्रिय अवस्था में होते हैं, जोकि अतिसूक्ष्म होने के कारण साँसों के ज़रिये हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं और कई जानलेवा बीमारियों का कारण बनते हैं।

पर्यावरण से जुड़े संवैधानिक प्रावधान

  • संविधान का अनुच्छेद -21 हमें स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार प्रदान करता है और अनुच्छेद 48ए में पर्यावरण के संरक्षण, सुधार और जंगलों और वन्य जीवों की सुरक्षा की बात गई है।
  • इसके अलावा अनुच्छेद 51ए (जी) के तहत भारतीय नागरिकों का ये कर्तव्य है कि वे प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा करें।
  • सतत विकास लक्ष्यों यानी SDG के तहत पर्यावरणीय खतरों को कम करने के लिये कुछ लक्ष्य तय किये गए हैं।
  • संसद ने वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम, 1981 नाम का एक क़ानून भी बनाया है।