(डाउनलोड) यूपीपीएससी सहायक वन संरक्षक/क्षेत्रीय वन अधिकारी मुख्य परीक्षा वैकल्पिक विषय "सांख्यिकी" पाठ्यक्रम हिंदी में (Download) UPPSC ACF, RFO Mains Optional Subject "Statistics" Exam Syllabus in Hindi


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:: प्रश्न पत्र - 1 (Paper - I) ::

प्रायिकताः

प्रतिदर्श समष्टि एवं घटनाएं-प्रायिकता मेय और प्रायिकता समष्टि, मेय फलन के रूप से यादृच्छिक चर, यादृच्छिक चर का बंटन फलन, असंतत तथा संतत प्रकार के यादृच्छिक चर, प्रायिकता द्रव्यमान फलन, प्रायिकता घनत्व फलन, सदिश-मान यादृच्छिक चर, उपान्त और सप्रतिबन्ध बंटन, घटनाओं और यादृच्छिक चरों की प्रसंभाव्य स्वतंत्रता, यादृच्छिक चर की प्रत्याशा तथा आघूर्ण, सप्रतिबन्ध प्रत्याश, यादृच्छिक चरों की श्रृंखला का बंटन में प्रायिकता में, प्रय, माध्यम में, तथा लगभग सर्वत्र स्थिति में अभिसरण उनका मानदण्ड तथा पारस्परिक सम्बन्धः मोरेल-केटेली प्रमेयिका, चेबीशेब तथा खिंचिन के बृहत संख्याओं के दुर्बल नियम, बृहत संख्याओं के सबल नियम तथा कोल्मोगोरोब के प्रमेय, ग्लीबैन्की-कैटैली प्रमेय, प्राथमिकता जनक फलन, अभिलाक्षणिक फलन, प्रतिलोमन प्रमेय, लाप्लेस का रूपान्तरण सम्बन्धित अद्वितीयत, असांततय की विभिन्न प्रमेय, बंटन का उसके अघूर्ण द्वारा निर्धारण, लिंडनबर्ग तथा लबी के केन्द्रीय सीमा प्रमेय, मानक संतत व असंतत प्रायिकतता बंटन, उनका पारस्परिक सम्बन्ध तथा सीमान्त बंटन, परिमित मार्कोव श्रृंखला के सामान्य गुणधर्म।

सांख्यिकीय अनुमितिः

संगति, अनिभिनतता, दक्षता, पर्याप्तता, न्यूनतम पर्याप्तता, पूर्णता सहायक प्रतिदर्शन, गुणन खण्डन प्रमेय, बन्टन का चरघातांकी समूह व इसके गुणधर्म, स्वरूप न्यूनतम प्रसरण अनभिनत (यू.एमपी.यू.) आंकलन, राव-ब्लैकबैल और लेहमैन-शेफे प्रमेय, बंटन के एकल व बहु-प्राचल समूहों के लिए क्रामर-राब असमिका न्यूनतम प्रसरण, परिबद्ध, आकलन तथा उसके गुण धर्म, क्रामर-राव असमिका के आपरिवर्तन व विस्तार, चैवमैन रौबिन्स असमिका, भट्टाचार्य के परिबद्ध, आघूर्ण विधि द्वारा आकलन, अधिकतम संभाविता, न्यूनतमं वर्ग, न्यूनतम काई-वर्ग तथा अपरिवर्तित न्यूनतम काई-वर्ग, अधिकतम संभाविता व अन्य आकलकों के गुणधर्म, उपगामी दक्षता की धारणा, पूर्व तथा पश्च बंटनों की धारणा, बेज आकलक।

अयादृच्छिकृत व यादृच्छिकृत परीक्षण, क्रांसिक फलन एम.पी. परीक्षण, नेमन पियर्सन प्रमेयिका, यू.एम.पी परीक्षण, एकदिष्ट संभाविता अनुपात, सामान्यीकृत नेमन पियर्सन प्रमेयिका, समरूप व अनभिनत परीक्षण,
एकल व बहु-प्राचल बंटन समूहों के यू.एम.पी.यू., परीक्षण, संभाविता अनुपात परीक्षण और इसके वृह्त प्रतिदर्श गुणधर्म, काई-वर्ग समंजन-सुष्ठुता परीक्षण व इसके उपगामी बंटन।

विश्वास्यता परिबद्ध तथा परीक्षणों के साथ इसके सम्बन्ध, एकसमान यथार्थतम (यू.एम.ए.) व यू.एम.ए. अनभिनत विश्वस्यता परिबद्ध।

समंजन सुष्ठुता के लिए कोल्मोगोरोव का परीक्षण और इसकी संगति, चिन्ह परीक्षण का इसका इष्टतमत्व, बिलकोक्सन चिह्नित-कोटि परीक्षण और इसकी संगति, कोल्मोगोरोब-स्मिरनोव का दो-प्रतिदर्श परीक्षण, परम्परा परीक्षण विलकोक्सन-मैन व्हिटनी परीक्षण व माध्यिका परीक्षण, उनकी संगति व उपगामी प्रसामान्यता।

वाल्ड का एस.पी.आर.टी व इसके गुणधर्म, ओ.सी. व ए.एस.एन. फलन, बाल्ड की मूल सर्वसमिका, अनुक्रमिक आकलन।

रैखिक अनुमति और बहुचर विश्लेषणः

रैखिक सांख्यिकीय निदर्श, न्यूनतम वर्गों का सिद्धान्त और प्रसरण विश्लेषण, गास-मार्कोक सिद्धान्त, सामान्य समीकरण, न्यूनतम वर्ग आकलन व इनकी परिशुद्धता, एकधा, द्विधा व त्रिधा वर्गीकृत आकलनों में न्यूनतम वर्ग सिद्धान्त पर आधारित सार्थकता परीक्षण एवं अन्तराल आकलन, समाश्रयण विश्लेषण, रैखिक समाश्रयण, वक्ररेखी समाश्रयण व लम्ब कोणीय बहुपद, बहुपदीय समाश्रयण, बहु व आंशिक सहसम्बन्ध, समाश्रयण नैदानिक व संवेदिता विश्लेषण, अंशशोधन समस्याएं, प्रसरण व सहप्रसरण घटकों को आकलन, MINQUE सिद्धान्त, बहुचरप्रसामान्य बंटन, महालोनाबिब्व का D2 व होटेलिंग का T2 प्रतिदर्शज व उनके अनुप्रयोग व गुणधर्म, बिबिक्सर, विश्लेषण, विहित सहसम्बन्ध, एकधा, MANOVA: मुख्य घटक विश्लेषण, उपादान विश्लेषण के अवयय।

प्रतिचयन सिद्धान्त तथा प्रयोगों की अभिकल्पनाः

निश्चित समष्टि व महा-समष्टि उपगमन की रूपरेखा, परिमित समष्टि प्रतिचयन के सुस्पष्ट लक्षण, प्रायिकता प्रतिचयन अभिकल्पना, सरल यादृच्छिक प्रतिचयन-प्रतिस्थापन के साथ और बिना प्रतिस्थापन के, स्तरीकृत यादृच्छिक प्रतिचयन और संरचित समष्टि के लिए उसकी प्रभाविता, गुच्छ प्रतिचयन, द्विचरण तथा बहुचरण प्रतिचयन, एक अथवा अधिक सहायक चरों के लिए अनुपात व समाश्रयण पद्धतियां, द्विचरण प्रतिचयन, प्रतिस्थापन के साथ व उसके बिना, प्रायिकता अनुपातिक आमाप, प्रतिचयन, हैन्सन-हरबिट्ज और हरबिट्ज थॉम्पसन के आकलन हरविट्ज थॉम्पसन आकलन के सन्दर्भ में ऋणोत्तर प्रसरण आकलन, अप्रतिचयन त्रुटियां, संवेदनशील अभिलक्षणों के लिए वार्नर की यादृच्छिक उत्तर तकनीक।

नियम प्रभाव निदर्श (द्विधा वर्गीकरण), यादृच्छिक एवं मिश्रित प्रभाव निदर्श (सम संख्या प्रति कोष्ठिका प्रेक्षणों के साथ द्धिधा वर्गीकरण) सी.आर.डी., आर.बी.डी., एल.एस.डी. व उनके विश्लेषण, अपूर्ण खण्ड अभिकल्पना, लम्बकोणीयता व सन्तुलन की संकल्पना बी.आई.बी.डी. अप्राप्त क्षेत्रक प्रतिधि, क्रमगुणित अभिकल्पनाः 21 , 32  एवं 33 क्रमगुणित प्रयोगों में संकरण, विभक्त-क्षेत्र और सरल जालक अभिकल्पनाएं।

:: प्रश्न पत्र - 2 (Paper - II) ::

I. औद्योगिक सांख्यिकीः

प्रक्रिया एवं उत्पाद नियंत्रणः नियंत्रण सचित्रों के सामान्य सिद्धान्तों: चरों एवं गुणों के लिए विभिन्न प्रकार की नियंत्रण संचित्रः X, R, S, Pnp एवं C संचित्र योग संचित्रः V.मास्क: गुणों के लिए एकल, द्वि, बहु एवं अनुक्रमिक प्रतिचयन योजनाएं: ओ.सी., ए.एस.एन., ए.ओ.क्यू. एवं ए.टी.आई. वक्र, उत्पादकों एवं उपभोक्ताओं के जोखिमों की अवधारणाएं, ए.क्यू.एल., एल.टी.पी.डी. एवं ए.ओ.क्यू.एल.ः चरों के लिए प्रतिचयन योजना, डॉज-रोमिग एवं सैनिक मानक सारणियों का उपयोग।

विश्वसनीयता की संकल्पनाः अनुरक्षणीयता एवं उपलब्धताः श्रृंखला एवं समान्तर पद्धति की विश्वसनीयता और अन्य सरल विन्यास पुनः स्थापना घनत्व एवं पुनः स्थापना फलन, अतिजीविता निदर्श (चरघातांकी, बेबुल, लघुगूणक, रैले और बाथ-टब) अतिरिक्तता के विभिन्न प्रकार और विश्वसनीय सुधार में अतिरिक्तता का उपयोग; आयु परीक्षण में समस्याएं; चरघातांकी प्रतिरूपों के लिए छिन्न और खण्ड वर्जित प्रयोग।

II. इष्टतमीकरण प्रविधियां:

संक्रिया विज्ञान में विभिन्न प्रकार के निदर्श, उनकी संरचना और हल करने की सामान्य विधियां: अनुकरण और मांटेकालो विधि, रेखित प्रोगामन (एल.पी.) समस्या की संरचना और सूत्रण, सरल रैखिक प्रोग्रामन प्ररूप और उसका आलेखी हल, एकधा प्रक्रिया, द्विचरण विधि और कृत्रिम चरों सहित एम.-तकनीक; रैखिक प्रोग्रामन का द्वैध सिद्धान्त और उसका आर्थिक निर्वचन; सुग्राहिता विश्लेषण, परिवहन एवं नियतन समस्या; आयातीत खेल; द्विव्यक्तीक शून्य-योग खेल; हल करने की विधियां (आलेखी एवं बीजगणितीय)।

विफल एवं गुणाहृसित मदों का प्रतिस्थापन; समूह और व्यष्टि प्रतिस्थापन नीतियां; वैज्ञानिक तालिका प्रबन्धन की संकल्पना तथा तालिका समस्याओं की विश्लेषिक संरचना; अग्रता काल के साथ तथा उसके बिना निर्धारणात्मक एवं प्रसंभाव्य मांग के सरल निदर्श, डैम प्रकार के विशेष सन्दर्भ सहित संचयन निदर्श। समाघात विबिक्त-काल मार्कोव श्रृंखलाएं, संक्रमण प्रायिकता आव्यूह, स्थितियों का वर्गीकरण तथा अभ्यतिप्राय के प्रमेय, समघात सतत्-काल मार्कोव श्रृंखलाएं, प्वासो प्रक्रिया, पंक्ति सिद्धान्त के अवयव, एम/एम/1, एम/एम/के, जी/एम/1 एवं एम/जी/1। पंक्तियां। प्रचलित सॉफ्टवेयर पैकेज, जैसे एस.पी.एस.एस., के उपयोग से सांख्यिकीय समस्याओं का कम्प्यूटर हल।

III. मात्रात्मक अर्थशास्त्र व राजकीय सांख्यिकीः

प्रवृत्ति निर्धारणः मौसमी व चक्रीय घटकः बॉक्स-जैनकिन्स विधि: श्रृंखला की स्थिरता के लिए परीक्षण, ए.आर.आई.एम.ए. (अरिमा) निदर्श तथा स्वसमाश्रयण व गतिमान माध्य अवययों का क्रम निर्धारण, पूर्वानुमान।

साधारणतया प्रयुक्त सूचकांक-लैसपियर व पाशे एवं फिशर का आदर्श सूचकांकः श्रृंखला-आधारित सूचकांक, सूचकांक के प्रयोग व सीमाएं, थोक मूलों का सूचकांक, उपभोक्ता, मूल का सूचकांक, कृषि व औद्योगिक उत्पादन का सूचकांक, सूचकांक के परीक्षण जैसे आनुपातिकता परीक्षण, काल-विषर्यज, उपदान उत्क्रम परीक्षण, श्रृंखलिक परीक्षण व विमीय निश्चरता परीक्षण, व्यापक रैखिक निदर्श, आकलन की साधारण न्यूनतम वर्ग व व्यापकीकृत न्यूनतम वर्ग विधियां, बहुसरेखता की समस्या, बहुसरेखता के परिणाम व समाधान, स्वतहल सम्बन्ध व इसके परिणाम, विक्षोभ की विषम विचालिता व इसका परीक्षण, विक्षोभ की स्वतत्रंता हेतु परीक्षण, जैलनर का प्रतीयमान, असम्बद्ध, समाश्रयण समीकरण निदर्श व इसका आकलन, संरचना की संकल्पना और युगवत् समीकरण हेतु निदर्श अभिनिर्धारण की समस्या अभिनिर्धारण के हेतु कोटि एवं क्रम प्रतिबन्ध, आकलन की द्विस्तरीय न्यूनतम वर्ग विधि।

भारत में जनसंख्या, कृषि, औद्योगिक उत्पादन, व्यापार और मूल्य की वर्तमान शासकीय सांख्यिकीय प्रणाली; शासकीय आंकड़ों के संग्रह करने की विधियां उनकी विश्वसनीयता एवं सीमा और प्रधान प्रकाश, जो ऐसे आंकड़ों को अन्तर्विष्ट करते हों, आंकड़ों के संग्रह के लिए उत्तरदायी विभिन्न शासकीय एजेसिन्यां और उनके मुख्य कार्य।

IV. जनसांख्यिकी और मनोमितिः

जनगणना से प्राप्त जनसांख्यिकी आंकड़े पंजीकरण, राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण तथा अन्य सर्वेक्षण, उनकी सीमा और उपयोग, परिभाषा, जीवन-मरण दर और अनुपात की रचना और उपयोग, उर्वरता की माप, जन्म दर, अस्वस्थता दर, मानकीकृत मृत्युदर, पूर्ण और संक्षिप्त वय सारणियां, जन्म-मरण आंकड़ों और जनगणना विवरणियों के आधार पर वय सारणी का निर्माण, वय सारिणयों का उपयोग, वृद्धिघात और अन्य जनवृद्धि वक्र वृद्धिपात वक्र संजन, जनसंख्या प्रक्षेप; स्थाई जनसंख्या सिद्धान्त, जनसांख्यिकीय प्राचलों के आकलन में स्थाई और कल्प-स्थाई जनसंख्या प्रविधियों के उपयोग, अस्वस्थता और उसकी माप, मृत्यु के कारण द्वारा मानक वर्गीरकण, स्वास्थ्य सर्वेक्षणों और अस्पताल के आंकड़ों का उपयोग।

मापक्रमों और परीक्षणों की मानकीकरण पद्धतिर्यां Z.समंक, मानक समंक, T.समंक, शत्तमक समंक, बौद्धिक स्तर और उसकी माप तथा उपयोग, परीक्षण समंक की मान्यता और उसका निर्धारण मनोमित के उपादान, विश्लेषण और पथ-विश्लेषण का उपयोग।

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