(डाउनलोड) यूपीपीएससी सहायक वन संरक्षक/क्षेत्रीय वन अधिकारी मुख्य परीक्षा वैकल्पिक विषय "कृषि इंजीनियरिंग" पाठ्यक्रम हिंदी में (Download) UPPSC ACF, RFO Mains Optional Subject "Agricultural Engineering" Exam Syllabus in Hindi


(डाउनलोड) यूपीपीएससी सहायक वन संरक्षक/क्षेत्रीय वन अधिकारी मुख्य परीक्षा वैकल्पिक विषय "कृषि इंजीनियरिंग" पाठ्यक्रम हिंदी में (Download) UPPSC ACF, RFO Mains Optional Subject "Agricultural Engineering" Exam Syllabus in Hindi


:: प्रश्न पत्र - 1 (Paper - I) ::

:: खण्ड-क (Section - A) ::

1. मृदा तथा जल संरक्षण: मृदा तथा जल संरक्षण का क्षेत्र भूमि कटाव की प्रक्रिया तथा प्रकार और उनके कारण वर्षा, अपवाह तथा अवसादन सापेक्षता और उनका मापन भूमि कटाव के जैविक तथा अभियांत्रिकी नियंत्रक उपाय जिनमें धारा-किनारा संरक्षण, वनस्पतिक (वेजिटेटिव) अवरोधक, समोच्य बांध, समोच्य खाइयाँ, समोच्य पथरीली दीवारें, वेदिकाएं (टैरेस), निकासी तथा घासाच्छादित जलमार्ग शामिल है, नाली नियंत्रण संरचनाएं- अस्थायी तथा स्थायी- स्थायी मृदा संरचनाएं जैसे ढ़लवीं नाली (शूट), जलप्रपात तथा वेग-नियंत्रक, उत्थूलव मार्ग का अभिकल्प फार्म तालाब तथा अन्तःस्रावी तालाबों का अभिकल्प, बाढ़ नियंत्रण-बाढ़ अनुशीलन के सिद्धान्त, जल विभाजन प्रबन्ध-अन्वेषण, योजना तथा कार्यान्वयन-प्राथमिकताओं पर क्षेत्रों का चयन तथा जल विभाजन कार्य योजना, जल हार्बेस्टिंग तथा आर्द्रता संरक्षण, भूमि विकास-समतलन, खनन मिट्टी आयतन का आकलन और लागत निर्धारण, वायु कटाव प्रक्रम-शेल्टर बैल्टो तथा वायु अवरोधों का अभिकल्प तथा उनका प्रबन्ध, वन (संरक्षण) अधिनियम।

2. वायवीय फोटोग्राफी तथा सुदूर संवेदन: फोटोग्राफिक छवि की मूलभूत विशेषताएं, व्याख्या शैलियाँ, व्याख्या के लिए उपस्कर, भूमि उपयोग, भूविज्ञान, मृदा तथा वानिकी के लिए छवि व्याख्या, सुदूर संवेदन-परम्परागत तथा सुदूर संवेदी उपगमन के गुण तथा अवगुण, उपग्रह छवियों के प्रकार उपग्रह छवि व्याख्या के मूल सिद्धान्त, मृदा जल तथा भूमि उपयोग के प्रबन्ध के लिए दृश्य तथा अंकीय निर्वचन की तकनीकें वन व्यवस्था, जलस्रोतों आदि सहित जल विभाजकों, वनों की योजना तथा विकास में जीआईएस का उपयोग।

:: खण्ड-ख (Section - B) ::

3. सिंचाई तथा जलनिकास (ड्रेनेज): सिंचाई के लिए जल के स्रोत, लघु सिंचाई परियोजनाओं की योजना तथा डिजाइन-मृदा आर्द्रता मापन की तकनीकें-प्रयोगशाला तथा स्वस्थानें, मृदा-जल-पादप सम्बन्ध, फसल की जल अपेक्षाएं, भूतल तथा भूमिगत जल के कंजक्टिव प्रयोग की योजना, सिंचाई जल का मापन, मापने के साधन मुखछेद, बंधारा तथा अवनलिका, सिंचाई की पद्धतियाँ-सतही, छिड़काव तथा टपकना, फर्टिगेशन, सिंचाई कुशलताएं और उनका आकलन, नहरों, खेतों में जलमार्ग, भूमिगत पाइपलाइन, निकासद्वार, दिश परिवर्तन कक्ष तथा सड़क पार करने की संरचनाओं का डिजाइन तथा निर्माण।

भूजल की प्राप्ति, कुओं की जल व्यवस्था, कुओं के प्रकार (ट्यूबवैल तथा ओपेन वेल) और उनका निर्माण कुओं का विकास और परीक्षण, पम्पों के प्रकार, चयन तथा स्थापना, रुग्ण तथा विफल कुओं की पुर्नस्थापना, जल निकास जल ग्रसन के कारण तथा लवण समस्याएं, जल निकास की पद्धतियाँ-सिंचित तथा असिंचित भूमि का जल विकास, सतह, उपसतह तथा उर्ध्वाधर जल निकास पद्धतियाँ, निकृष्ट जल का सुधार तथा उपयोग, सेलीन और अल्काली मृदाओं का उद्धार, सिंचाई तथा जल निकास प्रणालियों का अर्थशास्त्र/व्यर्थ जल का सिंचाई के लिए उपयोग-दीर्घवधि सिंचाई, संगतता तथा अर्थोपाय के लिए व्यर्थ जल के मानक स्तर।

4. कृषिक संरचनाएं: फार्म प्रतिष्ठान, फार्म हाउस, पशुगृह, डेयरी भुसौरा, मुर्गी-गृह, शूकर गृह, मशीनें तथा उपस्कर स्थल के लिए स्थान का चयन, डिजाइन व निर्माण, खाद्यान्नों, भोजन तथा चारे के लिए भंडारण संरचनाएं, बाड़ा तथा कृषि सड़कों के लिए डिजाइन और निर्माण, पादप पर्यावरण के लिए संरचनाएं, ग्रीन हाउस, पॉली हाउस तथा शेड हाउस, निर्माण में प्रयोग की जाने वाली सामान्य भवन निर्माण सामग्री, टिम्बर, ईंट, पत्थर, टाइलें, कंक्रीट आदि और उनके गुणधर्म, जल आपूर्ति, जलनिकास तथा स्वच्छता प्रबन्ध पद्धतियाँ।

:: प्रश्न पत्र - 2 (Paper - II) ::

खण्ड-क (Section - A)

1. फार्म पावर तथा मशीनरीः कृषि यंत्रीकरण और इसका क्षेत्र फार्म पावर के स्रोत-सजीव तथा इलेक्ट्रो यांत्रिक, तापगतिकी, आंतरिक दहन इंजिनों की संरचना और कार्यप्रणाली आंतरिक दहन इंजिनों के लिए ईंधन, प्रज्वलन, स्नेहन, शीतलन तथा नियंत्रण प्रणाली, विभिन्न प्रकार के ट्रैक्टर तथा पावर ट्रिल्लर पावर ट्रासमिशन, ग्राउण्ड ड्राइव, पावर टेक-ऑफ तथा कंट्रोल सिस्टम प्राथमिक तथा द्वितीयक जुताई के लिए।

फार्म मशीनरी का प्रचालन तथा रख-रखाव, कर्षण सिद्धान्त बुआई, प्रतिरोपण तथा निराई-गुड़ाई उपकरण तथा औजार, पादप संरक्षण यंत्र छिड़काव तथा प्रकीर्णन, फसल कटाई, थ्रेसिंग तथा कम्बाइन उपकरण, अर्थ-मूविंग तथा भूमि विकास मशीनरी-पद्धतियाँ तथा लागत आंकलन अर्गोनामिक्स ऑफ मेन-मशीन सिस्टम बागवानी तथा कृषि वानिकी के लिए उपकरण, भोज्य एवं चारा, कृषि तथा वन उत्पादों की ढुलाई।

2. कृषि ऊर्जाः कृषि सम्बन्धी कार्यों तथा कृषि संसाधनों की ऊर्जा जरूरतें, कृषि अनुप्रयोगों के लिए बिजली की मोटरों का चुनाव, अधिष्ठापन, सुरक्षा तथा रख-रखाव, सौर (थर्मल तथा फोटोवोल्टेक) पवन तथा बायोगैस ऊर्जा और कृषि में उनका उपयोग, आईसी इंजिनों के प्रचालन तथा इलैक्ट्रिक पावर उत्पादन के लिए बायोगैस का गैसीकरण ऊर्जा दक्ष कुकिंग स्टोव तथा विकल्पी कुकिंग ईंधन, कृषि तथा कृषि उद्योग अनुप्रयोगों के लिए बिजली का वितरण।

खण्ड-ख (Section - B)

3. कृषि संसाधन इंजीनियरिंगः  फसलों की उपजोत्तर प्रौद्योगिकी और इसका क्षेत्र, कृषि उत्पादों और उत्पादों के इंजीनियरिंग गुणधर्म, यूनिट प्रचालन-कृषि उत्पादों तथा उपोत्पादों की सफाई, ग्रेडिंग, आकार, न्यूनन, घनीकरण सांद्रण, शुष्कन/निर्जलीकरण, वाष्पन, फिल्टरन, प्रशीतन तथा संवेष्टन-सामग्री संभालने के उपकरण।

बैल्ट तथा स्क्रूवाहक, बाल्टी उत्थापक, उनकी क्षमता तथा शक्ति अपेक्षाएं दुग्ध तथा डेयरी उत्पादों का संसाधन-समांगीकरण, क्रीम पृथक्करण, पाश्च्युरीकरण, निर्जर्मीकरण, स्प्रे तथा रोलर शुस्कन, मक्खन बनाना, आईसक्रीम, पनीर तथा श्रीखण्ड बनाना अवशेष तथा उपोत्पाद उपयोग-चावल की भूसी, चालव का चोकर, गन्ने की खोई, पादप अवशिष्ट तथा क्रोयर मज्जा।

4. कृषि इंजीनियरिंग में माप यंत्रण तथा कम्प्यूटर अनुप्रयोगः इलेक्ट्रानिक साधन तथा उनके लक्षण- दिष्टकारी, प्रवर्धक, दोलित्र, बहुकम्पित्र, अंकीय-सर्किट-अनुक्रमिक तथा संयुक्त प्रणालियाँ, आंकड़े प्राप्त करने तथा कृषि इंजीनियरी प्रक्रम नियंत्रण में माइक्रोप्रोसेसरों का अनुप्रयोग, तल, प्रवाह, विकृति, बल, बल-आघूर्ण, शक्ति, दबाव, निर्वात तथा तापमान के लिए, माप पद्धतियाँ, कम्प्यूटर-परिचय, इनपुट/आउटपुट डिवाइसेस, सेन्ट्रल प्रोसेसिंग यूनिट, मैमोरी डिवाइसेस, आपरेटिंग सिस्टम, प्रोसेसर की-बोर्ड तथा प्रिन्टर्स, कृषि इंजीनियरी में कलनविधि प्रवाह चार्ट विनिर्देश, प्रोग्राम रूपान्तरण तथा समस्या विश्लेषण, मल्टीमीडिया तथा श्रव्यदृश्य सहायक सामग्री।

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