संगठित अपराध व आतंकवाद - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस परीक्षाओं के लिए समसामयिकी


संगठित अपराध व आतंकवाद - यूपीएससी, आईएएस, सिविल सेवा और राज्य पीसीएस  परीक्षाओं के लिए समसामयिकी


सन्दर्भ :-

हाल ही में वित्तीय कार्यवाही कार्य बल द्वारा हाफिज सईद को आतंक वित्तीयन के मामले में अपराधी स्वीकारते हुए कारावास की सज़ा प्रदान की है।

सामान्य परिचय:

वह अपराध जो किसी संगठन द्वारा योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया जाता है संगठित अपराध कहलाता है। इसमें संगठन के पास पर्याप्त प्रशिक्षित कार्यबल होता है।

पारपंरिक संगठित अपराध:- अवैध शराब का धंधा,जबरन वसूली ,अपहरण,,डकैती,समुद्रीडकैती,लूट,ब्लैकमेल

आधुनिक संगठित अपराध :- मनी लांड्रिंग,हवाला कारोबार,साइबर अपराध,जाली नोटों का वितरण, मानव तस्करी,हथियारों एवं पदार्थों की तस्करी,अवैध व्यापार

क्षेत्रीय विस्तार:

संगठित अपराध के एक राष्ट्र के अनेक क्षेत्रें तक या अनेक राष्ट्रों तक नेटवर्क हो सकता है। व्यापक नेटवर्क के साथ प्रतिबद्ध व्यक्तियों की एक बड़ी संख्या होती है।

भारत के लिए खतरा

भारत को संगठित अपराध द्वारा आंतरिक सुरक्षा को निम्नलिखित खतरों का सामना करना पड़ता हैं:

  1. भारत में विभिन्न वर्गों के बीच मतभेदों की उपस्थिति होना। ये मतभेद आर्थिक, सामाजिक, क्षेत्रीय, नृजातीय, जातिगत, सांप्रदायिक अनेक प्रकार के हैं। अपराधियों द्वारा मतभेदों को भुनाने का प्रयास किया जाता है जो कि आंतरिक सुरक्षा की दृष्टि से खतरनाक है।
  2. अनेक क्षेत्रें में नृजातीय संघर्ष एवं अलगाववादी आंदोलन चल रहे हैं और इन आंदोलनों का आपराधिक संगठनों से जुड़ाव भी महत्त्वपूर्ण समस्या है।
  3. भारत में शिक्षित बेरोजगारों की बड़ी संख्या में है जिन्हें प्रशिक्षित करके संगठित अपराधों के योग्य बनाया जा सकता है। ये युवा इसके लिए सामाजिक आधार पर कार्य करते हैं।
  4. पड़ोसी देशों के साथ भारत के संबंधों में तनाव अतः विभिन्न पड़ोसियों द्वारा आपराधिक संगठनों को आर्थिक सहायता तथा प्रशिक्षण एवं अस्त्र-शस्त्र की व्यवस्था करना।
  5. विकासशील देश होने के कारण भारत के पास आंतरिक सुरक्षा पर खर्च के लिए सीमित आर्थिक संसाधन जबकि आपराधिक संगठनों के पास पर्याप्त वित्त की उपलब्धता की समस्या के कारण संगठित अपराधियों और राजनीतिज्ञों के बीच सहयोग विकसित होने की संभावना बनी रहती है।
  6. राजनीतिक-प्रशासनिक जीवन में सबसे भ्रष्टाचार के कारण सीमा पार के आपराधिक संगठनों एवं राजनीतिक दलों के बीच गठबंधन विकसित होने की संभावना भी बनी रहती है।
  7. भारत की ‘गोल्डन ट्रेंगल’ तथा ‘गोल्डन क्रिसेंट’ के बीच अवस्थिति जबकि यह संगठित अपराधों के लिए वित्ततीय स्रोत का कार्य करते हैं। विशेषतौर पर मादक मूल्यों के माफियाओं द्वारा भारत के अलगाववादी गुटों को आर्थिक सहायता दी जाती है तथा प्ैप् के साथ ऐसे माफियाओं का संबंध भी दिखा है।

संगठित अपराध तथा आतंकवाद के बीच संबंध:

  • आतंकवादी अपने संगठन को वित्तीय मदद लेने के लिए संगठित अपराध का सहारा लते हैं। मादक पदार्थ की तस्करी, मनी लांड्रिंग, जाली नोट, अनुबंधित हत्या, जबरन धन ऐंठना कुछ ऐसे मुख्य संगठित अपराध हैं जो आतंकवादी धन इकट्ठा करने हेतु करते हैं।
  • संगठित अपराधी दल तथा आतंकवादी प्रायः एक ही नेटवर्क ढांचे पर कार्य करते हैं। आतंकवादी अंतर्राष्ट्रीय संगठित अपराध दलों की आड़ में फलते-फूलते हैं। संगठित अपराधी दल तथा आतंकवादी दोनों ही ऐसे क्षेत्र में काम करते हैं जहाँ न्यूनतम सरकारी नियंत्रण, कमजोर प्रशासन तथा खुली सीमा होती है। संगठित अपराधी दल तथा आतंकवादी संचार के लिए प्रायः समान आधुनिक तकनीक का उपयोग करते हैं।
  • संगठित अपराधी दल मादक पदार्थ तथा डायमंड के बदले में आतंकवादी दलों को तस्करी द्वारा बारूद तथा हथियार देते हैं। आतंकवादी दल विश्व के विभिन्न देशों में अपने सदस्यों को भेजने के लिए संगठित अपराधी दलों द्वारा स्थापित तस्करी जाल का उपयोग करते हैं। संगठित अपराधी दल भी मनी लांड्रिंग का कार्य करते हैं। अपने नियंत्रित क्षेत्र में सुरक्षा देने के लिए आतंकवादी दल मादक पदार्थों के तस्करों के ऊपर कर लगाते हैं।
  • संगठित अपराधी दल तथा आतंकवादी, प्रभावहीन प्रशासन तथा कमजोर कानून व्यवस्था के कारण फलते-फूलते हैं। दोनों के बीच सहजीवी का संबंध हैं। अधिकांश विकसित देशों में संगठित अपराध बिना किसी आतंकवादी गतिविधि के कार्य करते हैं। अधिकांश विकासशील देशों में संगठित अपराध के विभिन्न स्तरों के साथ आतंकवादी सक्रिय है।

आतंकवाद और संगठित अपराध में अंतर:

  • आतंकवादी किसी भी सत्तारूढ़ सरकार की यथास्थिति में परिवर्तन कर उसे गिराने का उद्देश्य रखते हैं। आतंकवाद मुख्यतः भय एवं डर फैलाने की रणनीति पर काम करा है और आम जनता में भय फैलाकर इसका प्रसार करता है जबकि संगठित अपराध का उद्देश्य मौजूदा सरकार के साथ-साथ एक समानांतर सरकार की स्थापना करना है। सरकार की यथास्थिति में कोई भी बदलाव परिस्थितिजन्य होता है और यह संशोधित नीति के बजाए सुगमता से पनपता है।
  • आतंकवादी मुख्य रूप से हिसंक तरीकों का सहारा लेता है जबकि संगठित अपराध हिंसक और गैर-हिंसक गतिविधियों को तरजीह देता है।
  • आतंकवाद अपने उद्देश्यों को हासिल करने के लिए क्षेत्रीय, राष्ट्रीय एवं धार्मिक भावनाओं को भुनाने के बावजूद मुख्य रूप से राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित होता है। इसके विपरीत आर्थिक उद्देश्य, संगठित अपराध के संचालनात्मक कारक होते हैं।

विस्तार के कारण:

  • संगठित अपराध के नेटवर्क का विस्तार।
  • आतंकी समूह तथा संगठित अपराध में गठजोड़।
  • आपराधिक संगठनों के द्वारा आपराधिक गतिविधियों के संचालन हेतु विभिन्न क्षेत्रें में धन भेजने के कारण।
  • आतंकी समूहों को विभिन्न क्षेत्रें में आतंकी उद्देश्यों के लिए धन से प्रवाह को बनाए रखने की आवश्यकता।
  • बढ़ते हुए भ्रष्टाचार के कारण अवैध धन का भण्डारण बढ़ना।
  • अपहरण, अवैध वसूली आदि से प्राप्त धन को खपाने की आवश्यकता।
  • मादक पदार्थों, मानव तस्करी तथा गैर-कानूनी हथियारों की तस्करी एवं व्यापार से प्राप्त धन के उपयोग को सुनिश्चित करना।
  • वैश्वीकरण ने इस प्रक्रिया को तीव्र कर दिया। MNCs तथा विभिन्न बैंकों, शेयर मार्केट आदि से इसका व्यापक विस्तार हो गया।

भारत द्वारा समाधान के प्रयास

  1. संगठित अपराध पर ARC की अनुशंसाओं को लागू करना, संगठित अपराध को परिभाषित करना, उसके विरोध में कठोर कानून बनाना चाहिए।
  2. रोजगार सृजन एवं कौशल विकास को प्राथमिकता देकर बेरोजगारी को कम करना चाहिए।
  3. राष्ट्रीय जीवन के सभी मतभेदों को दूर करने के लिए ईमानदार प्रयास करने तथा उन्हें प्राथमिकता सूची में रखने की जरूरत चाहिए।
  4. भ्रष्टाचार को रोकना

समाधान के अंतर्राष्ट्रीय उपाय:

  1. कूटनीतिक प्रयासः पड़ोसियों के साथ संबंधों को बेहतर बनाना तथा मतभेदों को भावनात्मक रूप से देखने की बजाय वास्तविकता की दृष्टि से देखना।
  2. UNCTOC (UN convention on transnational organised crime) इसे प्रभावी रूप से लागू कराना। यह संधि UNODC (UN office of drung crime) के क्षेत्रधिकार में है। इसके लागू होने से संगठित अपराध तथा मादक पदार्थों के तस्करी के बीच संबंध भी टूटेगा। UNCTOC के पूरक के रूप में विशिष्ट क्षेत्र संबंधी तीन प्रोटोकॉल भी हैं:
  1. व्यक्तियों (स्त्रियों एवं बच्चों) के अवैध-अनैतिक व्यापार को रोकना।
  2. अवैध प्रवासियों की तस्करी पर प्रतिबंध।
  3. हथियारों के अवैध व्यापार का सामना करना।

3. UNCC (UN-Convention on corruption) को प्रभावी रूप से लागू करना। यह संधि 14 दिसम्बर, 2005 से लागू है। भारत द्वारा दिसंबर 2005 में ही हस्ताक्षर किया गया था। मई 2001 में इसे संसद की स्वीकृति भी मिली थी। यह संधि भी UNODC के क्षेत्रधिकार में है। इसलिए संगठित अपराध और भ्रष्टाचार का गठबंधन भी टूटेगा।

निर्णय का भारत पर प्रभाव :-

भारत द्वारा निरंतर ही पाक समर्थित आतंकवाद का विरोध किया जा रहा है। संसद हमले से लेकर मुंबई , पठानकोट हमले तक ,सभी में पाक समर्थित संगठनों का योगदान रहा है। हाफिज सईद पर यह कार्यवाही भारत की एक बड़ी जीत है तथा यह आतंकवाद को रोकने में सहायक होगा।

आगे की राह :-

आतंकवाद अब एक क्षेत्रीय समस्या न होकर वैश्विक समस्या हो चुका है। फ्रांस , अमेरिका , भारत , चीन जैसे देश इससे ग्रस्त हैं। अतः आवश्यक है की आपसी मतभेदों को भूल कर इस वैश्विक समस्या का वैश्विक समाधान किया जाये। यह निर्णय इस दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगा।

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र- 3

  • आंतरिक सुरक्षा

मुख्य परीक्षा प्रश्न :

  • आतंकवाद व संगठित अपराध के मध्य सम्बन्ध बताते हुए इनके प्रभावों का वर्णन करें ?
  • सरकार द्वारा निरंतर प्रयासों के उपरांत संगठित अपराध निरंतर बढ़ रहे ? आलोचनात्मक समीक्षा करें ?


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