विश्व खाद्य पुरस्कार - 2021 (World Food Prize - 2021) : डेली करेंट अफेयर्स

विश्व खाद्य पुरस्कार - 2021 (World Food Prize - 2021)

चर्चा में क्यो?

  • हाल ही में भारतीय मूल की डॉ शकुंतला हरकसिंह थिलस्टेड (Dr Shakuntala Haraksingh Thilsted) को 'विश्व खाद्य पुरस्कार-2021' (World Food Prize-2021) दिया गया है।

डॉ शकुंतला हरकसिंह थिलस्टेड

  • डॉ शकुंतला हरकसिंह थिलस्टेड (Dr Shakuntala Haraksingh Thilsted) को जलीय कृषि और खाद्य प्रणालियों पर कार्य करने हेतु ‘विश्व खाद्य पुरस्कार-2021’ प्रदान किया गया है।
  • उल्लेखनीय है कि डॉ शकुंतला हरकसिंह थिलस्टेड, भारतीय मूल की एक वैश्विक पोषण विशेषज्ञ हैं।
  • इन्होंने समुद्री भोजन और खाद्य तंत्र के लिए समग्र और पोषण के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण विकसित किया है।
  • विशेषज्ञों का कहना है कि डॉ शकुंतला हरकसिंह थिलस्टेड द्वारा बांग्लादेश की छोटी मछली की प्रजातियों पर किया गया शोध, सभी स्तरों पर समुद्री भोजन प्रणाली हेतु पोषण के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण को विकसित करने में सहायक साबित होगा। इसके अलावा, इसकी मदद से एशिया एवं अफ्रीका में रहने वाले लाखों गरीब लोगों को बेहतर पोषक आहार मिल सकेगा।

विश्व खाद्य पुरस्कार (World Food Prize)

  • विश्व खाद्य पुरस्कार (World Food Prize) एक वैश्विक पुरस्कार है। यह पुरस्कार वैश्विक स्तर पर किसी व्यक्ति की विशिष्ट उपलब्धियों को मान्यता प्रदान करता है।
  • विश्व खाद्य पुरस्कार को उन व्यक्तियों को दिया जाता है जिन्होंने भोजन की गुणवत्ता, मात्रा या उपलब्धता में सुधार करके वैश्विक स्तर पर मानव विकास को बढ़ाने में अपना उल्लेखनीय योगदान दिया हो।
  • इस पुरस्कार के तहत 2, 50,000 अमेरिकी डॉलर की राशि प्रदान की जाती है।
  • विश्व खाद्य पुरस्कार को ‘विश्व खाद्य पुरस्कार फाउंडेशन’ प्रदान करती है।
  • उल्लेखनीय है कि विश्व खाद्य पुरस्कार की परिकल्पना वर्ष 1970 में वैश्विक स्तर apr हरित क्रांति के जनक डॉ. नॉर्मन ई बोरलॉग (Norman E. Borlaug) द्वारा की गयी थी। जबकि इस पुरस्कार का गठन वर्ष 1986 में किया गया था।
  • वहीं विश्व खाद्य पुरस्कार को ‘खाद्य और कृषि क्षेत्र का नोबेल पुरस्कार’ के रूप में भी जाना जाता है।
  • विश्व खाद्य पुरस्कार को सर्वप्रथम पाने वाले भारतीय ‘डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन’ थे। इन्हें यह पुरस्कार वर्ष 1987 में दिया गया था। गौरतलब है कि डॉ. एम.एस. स्वामीनाथन को भारत की हरित क्रांति का जनक कहा जाता है।