'शिल्पगुरू' और 'राष्ट्रीय शिल्प पुरस्कार' ('Shilpaguru' and 'National Crafts Award') : डेली करेंट अफेयर्स

बीते 28 नवंबर को उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड ने नई दिल्ली में देश के उत्कृष्ट शिल्पकारों को 2017, 2018 और 2019 के शिल्पगुरू और राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए। ये पुरस्कार हर वर्ष प्रसिद्ध हस्तशिल्पकारों को प्रदान किए जाते हैं। देश के लगभग सभी भाग से शिल्पकारों और कलाकारों की पहचान की जाती है। ये सभी अलग अलग शिल्प शैलियों से जुड़े होते हैं। इस बार 30 सिद्धहस्त शिल्पियों को शिल्प गुरु और 78 शिल्पकारों को राष्ट्रीय पुरस्कार दिया गया, जिनमें 36 महिलाएं भी शामिल हैं। कोरोना महामारी के चलते यह पुरस्कार पिछले तीन वर्षो नहीं दिए जा सके थे। इसलिए इस वर्ष इन तीनो वर्षों के पुरस्कार एक साथ दिए गए हैं।

वस्त्र मंत्रालय की ओर से 1965 से प्रमुख शिल्पकारों के लिए यह राष्ट्रीय पुरस्कार योजना चलाई जा रही है। शिल्प गुरू पुरस्कार 2002 में शुरू किया गया था। यह पुरस्कार देश की समृद्ध और विविध शिल्प विरासत के सरंक्षण के लिए हस्तशिल्प क्षेत्र में विशेष योगदान करने वाले शिल्पकारों को प्रत्येक वर्ष दिया जाता है। पुरस्कार का मुख्य उद्देश्य हस्तशिल्प के क्षेत्र में विशिष्ट शिल्पकारों को सम्मानित करना है। शिल्प गुरु हस्तशिल्प के क्षेत्र में 20 वर्ष के अनुभव वाले 50 वर्ष से अधिक आयु के कारीगरों को दिया जाता है। इसी प्रकार हस्तशिल्प के क्षेत्र में 10 वर्ष का अनुभव रखने वाले 30 वर्ष से अधिक आयु के शिल्पकार को राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया जाता है।

दरअसल हाथों की कारीगरी से बनायी जाने वाली वस्तुओं की कला को हस्तशिल्प कहा जाता है यानी जब बिना किसी मशीन की मदद से कोई वस्तु बनायी जाती है इसे हस्तशिल्प कहा जाता है। इसमें कागज की वस्तुओं से लेकर, लकड़ी, मिट्टी, शंख, चट्टानों, पत्थरों, धातुओं आदि से बनी सजावटी वस्तुएं शामिल होती हैं।

हस्तशिल्प क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह ग्रामीण और अर्ध शहरी क्षेत्रों में शिल्पकारों के एक बड़े तबके को रोजगार तो देता ही है साथ ही साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित भी करता है। इससे देश के लिए पर्याप्त विदेशी मुद्रा भी आती है। इसलिए हस्तशिल्प को रोजगार और निर्यात के लिए अहम माना जाता है।