पृथ्वी के अक्ष में विस्थापन (Shift in Earth’s Axis) : डेली करेंट अफेयर्स

पृथ्वी के अक्ष में विस्थापन (Shift in Earth’s Axis)

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में एक अध्ययन से पता चला है कि वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन के चलते पृथ्वी के अक्ष (Earth’s axis) में विस्थापन (Shift) हुआ है।

प्रमुख बिन्दु

  • अमेरिकन जियोफिजिकल यूनियन (American Geophysical Union - AGU) के जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स(Geophysical Research Letters) में उक्त अध्ययन प्रकाशित हुआ है।
  • इस अध्ययन में बताया गया है कि वैश्विक तापमान (global temperature) में वृद्धि के परिणामस्वरूप, वैश्विक स्तर पर जलवायु परिवर्तन देखने को मिल रहा है। जिसके कारण ग्लेशियरों में जमी बर्फ भारी मात्रा में पिघली है।
  • ग्लेशियरों में जमी बर्फ के भारी मात्रा में पिघलने से 1990 के दशक के बाद से पृथ्वी के अक्ष (Earth’s axis) में सामान्य से अधिक गति से विस्थापन (Shift) हुआ है।
  • 1990 के दशक के बाद से वैश्विक तापमान (global temperature) में असामान्य वृद्धि हुई है। ग्लेशियरों के रूप में जमी अरबों टन हिमाच्छादित बर्फ ने पिघलकर समुद्री जलस्तर को बढ़ाया है, जिसके कारण पृथ्वी के ध्रुवों का नई दिशाओं में विस्थापन हुआ है।
  • पृथ्वी के ध्रुवों का नई दिशाओं में विस्थापन से ही पृथ्वी के अक्ष (Earth’s axis) में सामान्य से अधिक गति से विस्थापन (Shift) हुआ है।

पृथ्वी का अक्ष (Earth’s axis)

  • पृथ्वी के घूर्णन अक्ष (axis of rotation) को ही सामान्य भाषा में पृथ्वी का अक्ष (Earth’s axis) कहते हैं।
  • पृथ्वी का अक्ष (Earth’s axis), पृथ्वी के केंद्र से होती हुई खींची गई वह काल्पनिक रेखा है जिसके सहारे पृथ्वी अपने अक्ष या धुरी पर घूर्णन (rotation) करती है।
  • दरअसल पृथ्वी, सूर्य के चारों ओर परिक्रमण करने के साथ-साथ पृथ्वी अपने अक्ष के परितः घूर्णन भी करती है। पृथ्वी, जिस अक्ष या धुरी के परितः घूर्णन करती है वह पृथ्वी का अक्ष (Earth’s axis) कहलाता है।

जलवायु परिवर्तन क्या है?

  • किसी स्थान की दीर्घकालीन मौसम संबंधी दशाओं (यथा- आर्द्रता, वायुमंडलीय दबाव और तापमान आदि) के औसत को जलवायु कहते हैं। जब इस जलवायु में मानवीय एवं प्राकृतिक कारणों से परिवर्तन आ जाता है तो उसे जलवायु परिवर्तन की संज्ञा दी जाती है।
  • वर्तमान में देखा जा रहा है कि मानवीय हस्तक्षेप की वजह से जलवायु में कई अवांछनीय परिवर्तन आ रहे हैं। ग्लोबल वार्मिंग गैसों के उत्सर्जन के कारण पृथ्वी का औसत तापमान काफी बढ़ रहा है। जिसके कारण जलवायु परिवर्तन गंभीर होता चला जा रहा है।
  • जलवायु परिवर्तन के तहत तापमान में बढ़ोत्तरी, बारिश का बदलता पैटर्न और तूफान एवं सूखा जैसी विनाशकारी घटनाएँ शामिल हैं। इन सभी घटनाओं का समाज के न केवल आर्थिक जीवन-स्तर पर बल्कि अन्य आयामों पर दीर्घकालिक प्रभाव देखने को मिलता है।

जलवायु परिवर्तन से निपटने हेतु वैश्विक प्रयास

  • जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल (IPCC): यह जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी पैनल (IPCC) जलवायु परिवर्तन से संबंधित वैज्ञानिक आकलन करने हेतु संयुक्त राष्ट्र का एक निकाय है।
  • संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन फ्रेमवर्क सम्मेलन (UNFCCC): यह एक अंतर्राष्ट्रीय समझौता है जिसका उद्देश्य वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को नियंत्रित करना है। यह समझौता जून, 1992 के पृथ्वी सम्मेलन के दौरान किया गया था।
  • पेरिस समझौता: वर्ष 2015 में ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने के लक्ष्य के साथ संपन्न पेरिस समझौते को ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के लिये एक ऐतिहासिक समझौते के रूप में मान्यता प्राप्त है।

जलवायु परिवर्तन से निपटने हेतु भारत के प्रयास

  • जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना (NAPCC): इसे वर्ष 2008 में शुभारंभ किया गया था। इस कार्य योजना में मुख्यतः 8 मिशन शामिल हैं-
  1. राष्ट्रीय सौर मिशन
  2. विकसित ऊर्जा दक्षता के लिये राष्ट्रीय मिशन
  3. सुस्थिर निवास पर राष्ट्रीय मिशन
  4. राष्ट्रीय जल मिशन
  5. सुस्थिर हिमालयी पारिस्थितिक तंत्र हेतु राष्ट्रीय मिशन
  6. हरित भारत हेतु राष्ट्रीय मिशन
  7. सुस्थिर कृषि हेतु राष्ट्रीय मिशन
  8. जलवायु परिवर्तन हेतु रणनीतिक ज्ञान पर राष्ट्रीय मिशन
  • राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC): भारत के लिए राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) के घोषित लक्ष्य को 2030 तक प्राप्त करना है।
  • अंतर्राष्ट्रीय सौर ऊर्जा संधि (आईएसए): आईएसए भारत और फ्रांस द्वारा 30 नवम्बर, 2015 को पेरिस में शुरू की गई प्रथम संधि आधारित अंतर्राष्ट्रीय अंतरसरकारी संगठन है जो 6 दिसंबर, 2017 को अस्तित्व में आया।
  • 'वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड’ परियोजना: आईएसए के साथ ही भारत ने “वन सन वन वर्ल्ड वन ग्रिड’(OSOWOG) परियोजना के तहत अक्षय ऊर्जा संसाधनों को आपस में जोड़ने के लिए वैश्विक पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की एक पहल शुरू की है।