शंघाई सहयोग संगठन - एससीओ (Shanghai Cooperation Organization - SCO) : डेली करेंट अफेयर्स

शंघाई सहयोग संगठन - एससीओ (Shanghai Cooperation Organization - SCO)

चर्चा में क्यों?

भारतीय प्रधानमंत्री 16-17 सितंबर को केंद्रीय एशियाई देश तजाकिस्तान में आयोजित होने वाले शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में भाग लेंगे।

Shanghai Cooperation Organisation (SCO) : Daily Current Affairs ...

पृष्ठभूमिः

एससीओ एक स्थाई अंतर्राष्ट्रीय संगठन है जिसमें आठ सदस्य देश- रूस, चीन, भारत, पाकिस्तान और चार केंद्रीय एशियाई देश (कजाकिस्तान, किर्गिज़स्तान, तजाकिस्तान और उज्बेकिस्तान) शामिल है। पर्यवेक्षक देश के रूप में मंगोलिया, ईरान, अफगानिस्तान ओर बेलारूस शामिल है।

एससीओ के लक्ष्य

  1. सदस्य देशों में परस्पर विश्वास तथा सद्भाव को मजबूत करना।
  2. राजनैतिक व्यापार एवं अर्थव्यवस्था, अनुसंधान व प्रौद्योगिकी में सहयोग को बढ़ावा देना।
  3. शिक्षा, ऊर्जा, परिवहन, पर्यटन, पर्यावरण संक्षरण में सहयोग को बढ़ाना।
  4. क्षेत्र में शांति, सुरक्षा व स्थिरता बनाये रखना।

विशेषतायें:

  1. एससीओ के अंतर्गत वैश्विक जनसंख्या का 40 प्रतिशत, वैश्विक जीडीपी का लगभग 20 प्रतिशत तथा विश्व के कुल भू-भाग का 22 प्रतिशत शामिल है।
  2. भौगोलिक महत्त्व के चलते एशियाई क्षेत्र में रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण है। एससीओ को पूर्व का नाटो भी कहा जाता है।

एससीओ के समक्ष प्रमुख चुनौतियाँ:

  1. आतंकवाद, अलगाववाद का मुकाबला करना, मादक पदार्थों तथा हथियारों की तस्करी रोकना एवं अवैध अप्रवासन की रोकथाम करना।
  2. भौगोलिक रूप से निकटता होते हुये भी संगठन के सदस्यों के इतिहास, पृष्ठभूमि, भाषा, राष्ट्रीय हितों व संस्कृति के रूप में विविधता, एससीओ के निर्णय लेने की प्रक्रिया को चुनौतीपूर्ण बनाती है।

भारत के लिये एससीओ का महत्त्वः

  1. यह दुनिया का सबसे बड़ा क्षेत्रीय संगठन है, जिसमें रूस, चीन के बाद भारत तीसरा बड़ा देश है। भारत का अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व इस संगठन में शामिल होने से बढ़ा है।
  2. भारत के राष्ट्रीय हित (जैसे- केंद्रीय एशिया से जुड़कर ऊर्जा सुरक्षा (प्राकृतिक तेल गैस भण्डार, यूरेनियम के भण्डार) आतंकवाद पर सहयोग को बढ़ाना, व्यापारिक रिश्ते मजबूत करना शामिल) को संबोधित करने में महत्त्वपूर्ण।
  3. एससीओ की क्षेत्रीय आतंकवाद रोधी संरचना (आरएटीएस) के माध्यम से भारत गुप्त सूचनायें साझा करने, प्रौद्योगिकी के विकास में कार्य कर आतंकवाद विरोधी क्षमताओं में सुधार कर सकता है।
  4. भारत रूस के साथ रिश्ते मजबूत कर सकता है।
  5. चीन-रूस के परंपरागत प्रभाव वाले क्षेत्र केंद्रीय एशिया (विस्तारित पड़ोसी) में सक्रिय भूमिका निभा सकता है।

एससीओ में होने से भारत के लिये चुनौतीः

  1. एससीओ का रूख कई मामलों में पश्चिम विरोधी है, इसकी वजह से भारत को पश्चिमी देशों के साथ रिश्ते तनावपूर्ण हो सकते हैं।
  2. रूस और चीन का एससीओ में खासा प्रभाव है, दोनों सह-संस्थापक सदस्य हैं ऐसे में भारत के लिये इस संगठन में नेतृत्वकारी भूमिका के निर्वहन के अवसर कम हैं।