पीरियड चार्ट अभियान (Padmitra Campaign: Period chart) : डेली करेंट अफेयर्स

हाल ही में मेरठ की महिलाओं ने माहवारी से फैलने वाली बीमारियों से जागरूक करने के लिए घरों में माहवारी चार्ट लगाने शुरू किये हैं।

क्या होती है महिला माहवारी?

पीरियड या माहवारी एक सामान्य प्राकृतिक जैविक प्रक्रिया है जिसमें महिला के गर्भाशय के अंदर से जननांग के रास्ते रक्त और ऊतक बाहर निकलता है। यह आमतौर पर 28 दिन में एक बार होता है।

लड़कियों के शरीर में पीरियड की शुरुआत होने का मतलब है कि उनका शरीर अपने आप को संभावित गर्भावस्था के लिए तैयार करता है। अधिकांश लड़कियों को 11-12 वर्ष की आयु में माहवारी आनी शुरू हो जाती है।

इस प्रक्रिया में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्ट्रोन जैसे हॉर्मोन अंडाशय (ओवरी) से निकलते हैं। ये वो फ़ीमेल सेक्स हॉर्मोन हैं जो यूटेरिन लाइनिंग या एंडोमेट्रियम का बनना शुरू कराते हैं जोकि एक फर्टिलाइज़्ड एग को पोषित करते हैं। यही हॉर्मोन ऑव्युलेशन के दौरान किसी एक ओवरी में से एग निकालने की प्रक्रिया को भी शुरू करते हैं। यह अंडाणु फेलोपियन ट्यूब से होकर गुजरता है और यूटेरिन लाइनिंग से जुड़ जाता है - जोकि फ़र्टिलाइज़ेशन के लिए तैयार है। यह लाइनिंग बनने, टूटने और निकलने में करीब 28 दिन लेती है। ज़्यादातर महिलाओं में पीरियड साइकिल 21 से 35 दिनों के बीच में कभी भी होती है।

माहवारी से जुड़ी शारीरिक समस्याएं

माहवारी के दौरान महिलाओं में चिड़चिड़ापन, थकान, बार-बार पेशाब की इच्छा, सिर व पेट में दर्द, कब्ज, स्तनों में तनाव और कभी–कभी पैरों में सूजन जैसी शारीरिक समस्याएं पैदा हो जाती हैं।

माहवारी से जुड़ी सामाजिक समस्याएं

माहवारी को लेकर जागरूकता का अभाव है और अक्सर यह देखा जाता है कि समय से पीरियड न होने पर महिलाओं में कई प्रकार की बीमारियां होने लगतीं हैं। इस जैविक प्रक्रिया से इस तरह की सामाजिक वर्जना जोड़ दी गई है कि महिलाएं लोक लाजवश इस पर खुलकर बात नहीं कर पाती हैं। समाज में महिलाओं को माहवारी के दौरान अपवित्र माना जाता है। घर की रसोई से लेकर मंदिर तक जाने पर रोक लगा दी जाती है। विडंबना यह है कि पुरुष वर्ग इन महिलाओं की समस्या समझ ही नहीं पाता है।

इन्हीं सारी दिक्कतों को देखते हुए ‘सेल्फी विद डॉटर फाउंडेशन संस्था ने यू.पी. में एक ‘पीरियड चार्ट’ नामक अभियान शुरू किया है। इसका उद्देश्य महिलाओं को माहवारी के दौरान होने वाली समस्याओं से बचाना और इस संबंध में समाज को जागरूक करना है। इसके तहत लड़कियों तथा महिलाओं द्वारा घर-घर पीरियड चार्ट लगाने का कार्यक्रम शुरू किया गया है। ‘पीरियड चार्ट’ में परिवार की सभी महिलाओं और बेटियों के नाम और उनकी माहवारी की तिथि लिखी जाती है।

अभियान के कुछ सकारात्मक परिणाम दिख रहे हैं। इस मुहिम को न केवल बेटियों और महिलाओं द्वारा बल्कि घर के सभी पुरुषों द्वारा भी काफी प्रोत्साहन मिल रहा है। बेटियां बकायदा वीडियो जारी कर खुलकर अपनी माहवारी से जुड़ी समस्याओं को कह रही हैं।

माहवारी के संबंध में अन्य प्रयास

माहवारी के संबंध में समाज को जागरूक करने के लिए तमाम अन्य तरह के भी प्रयास किए जा रहे हैं। उदाहरण के तौर पर

  • महिलाओं को माहवारी की समस्याओं से बचाव हेतु 28 मई को पूरी दुनिया में ‘मासिक धर्म स्वच्छता दिवस’ मनाया जाता है।
  • यूनिसेफ इंडिया ने सभी लोगों में सुरक्षा एवं स्वच्छता को बढ़ावा देने हेतु #RedDotChallenge अभियान की शुरुआत की है। यह अभियान मशहूर हस्तियों और प्रभावशाली लोगों सहित सभी क्षेत्रों के लोगों को सोशल मीडिया के ज़रिए से इस मुद्दे पर आपनी बात रखने हेतु प्रोत्साहित करता है।
  • अंतराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर केंद्र सरकार ने 2.50 रूपये के दर पर महिलाओं को सैनिटरी नैपकीन मुहैया कराने का ऐलान किया है।
  • माहवारी स्वच्छता प्रबंधन के द्वारा महिलाओं को राष्ट्रीय स्तर पर प्रशिक्षित करने की भी कोशिश की जा रही है।

हालांकि कोई भी अभियान तभी असल मायने में सफल होगा जब उसमें आमजन की भागीदारी हो। इसीलिए अब जरूरत है कि माहवारी जैसी एक जैविक प्रक्रिया को कलंक के तौर पर न देखा जाए, बल्कि इस पर खुलकर बात किया जाना चाहिए, क्योंकि माहवारी शर्म नहीं सेहत की बात है।