राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (National Human Rights Commission - NHRC) : डेली करेंट अफेयर्स

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (National Human Rights Commission - NHRC)

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (National Human Rights Commission-NHRC) ने केंद्र और राज्य सरकारों को कोविड-19 महामारी से मरने वालों की गरिमा बनाए रखने के लिए कानून बनाने के लिए कहा है।

प्रमुख बिन्दु

  • वर्तमान में देश में कोविड-19 महामारी की दूसरी लहर चल रही है। इससे भारी संख्या में लोग मर रहे हैं।
  • इसी बीच कई राज्यों में शवों को नदियों में फेंके जाने, बालू में दबाने जैसे कई मामले सामने आए हैं। इन्हीं रिपोर्ट्स को संज्ञान में लेते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने केंद्र और राज्य सरकारों को कोविड-19 महामारी से मरने वालों की गरिमा बनाए रखने के लिए कानून बनाने के लिए कहा है।
  • राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय आदि के अलावा सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों को विस्तृत एडवायजरी भेजी है।
  • इस एडवायजरी में कहा गया है कि संविधान का ‘अनुच्छेद 21’ न केवल जीवित व्यक्तियों पर बल्कि मृतकों के लिए भी लागू है। इसलिए मृतकों के अधिकारों की रक्षा करना और शव पर अपराध को रोकना सरकार का कर्तव्य है।
  • इसके अलावा, एडवायजरी में आयोग ने यह भी सिफारिश की है कि परिवहन के दौरान सामूहिक अंत्येष्टि / दाह संस्कार या शवों का ढेर नहीं होना चाहिए क्योंकि यह मृतकों की गरिमा के अधिकार का उल्लंघन है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के बारे में

  • राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (National Human Rights Commission-NHRC) एक स्वतंत्र वैधानिक संस्था है, जिसकी स्थापना मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के प्रावधानों के तहत 12 अक्टूबर, 1993 को की गई थी।
  • मानवाधिकार आयोग का मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।
  • यह संविधान द्वारा दिये गए मानवाधिकारों जैसे - जीवन का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार और समानता का अधिकार आदि की रक्षा करता है और उनके प्रहरी के रूप में कार्य करता है।

मानवाधिकार क्या होते हैं?

  • संयुक्त राष्ट्र (UN) की परिभाषा के अनुसार ये अधिकार जाति, लिंग, राष्ट्रीयता, भाषा, धर्म या किसी अन्य आधार पर भेदभाव किये बिना सभी को प्राप्त हैं।
  • मानवाधिकारों में मुख्यतः जीवन और स्वतंत्रता का अधिकार, गुलामी और यातना से मुक्ति का अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार और काम एवं शिक्षा का अधिकार आदि शामिल हैं।

क्या है संविधान का अनुच्छेद 21?

  • भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 ‘प्राण और दैहिक स्वतंत्रता का संरक्षण’ प्रदान करता है। इस अनुच्छेद में कहा गया है कि किसी व्यक्ति को उसके प्राण या दैहिक स्वतंत्रता से विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया के अनुसार ही वंचित किया जाएगा, अन्यथा नहीं।
  • सुप्रीम कोर्ट ने अपने कई मामलों के द्वारा अनुच्छेद 21 की सूक्ष्म व्याख्या की है और इसमें कई अधिकारों को शामिल करके , इसे व्यापक बनाया है, यथा- जीवन जीने का अधिकार, निजता का अधिकार, स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार,स्वास्थ्य का अधिकार, त्वरित सुनवाई का अधिकार, अमानवीय व्यवहार के विरुद्ध का अधिकार,निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार आदि।
  • कोई भी व्यक्ति बिना किसी भेदभाव के इन अधिकारों को प्राप्त करने का हक़दार होता है।