महेंद्रगिरि बायोस्फीयर रिजर्व (Mahendragiri Biosphere Reserve) : डेली करेंट अफेयर्स

महेंद्रगिरि बायोस्फीयर रिजर्व (Mahendragiri Biosphere Reserve)

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में ओडिशा राज्य की सरकार ने ‘महेंद्रगिरी बायोस्फीयर रिजर्व’ को ओडिशा राज्य का दूसरा ‘बायोस्फीयर रिजर्व’ बनाने का प्रस्ताव किया है।

महेंद्रगिरी बायोस्फीयर रिजर्व के बारे में

  • महेंद्रगिरी बायोस्फीयर रिजर्व, ओडिशा राज्य के दक्षिणी भाग में स्थिति है।
  • यह एक जैव विविधता से समृद्ध एक पर्वतीय पारिस्थितिकी तंत्र है। दरअसल महेंद्रगिरि पर्वत , भारत के ओडिशा राज्य के गजपति जिले में एक पर्वत है। यह लगभग 1,501 मीटर की ऊंचाई पर पूर्वी घाट के बीच स्थित है।
  • इस क्षेत्र में ओडिशा राज्य की ‘सौरा जनजाति’ निवास करती है, जो कांधा जनजाति के साथ ‘विशेष रूप से कमजोर आदिवासी समूह’ है।
  • गौरतलब है कि ओडिशा का पहला ‘बायोस्फीयर रिजर्व’ सिमिलीपाल बायोस्फीयर रिजर्व है, इसे 20 मई, 1996 को अधिसूचित किया गया था।

सिमिलीपाल बायोस्फीयर रिजर्व (Similipal Biosphere Reserve) के बारे में

  • सिमिली शब्द को ओडिशा में वृहद रूप से पाये जाने वाले एक पेड़ (सिमुल या सिल्क काटन) के नाम से लिया गया है।
  • सिमिलीपाल बायोस्फीयर रिजर्व, एक नेशनल पार्क और टाइगर रिजर्व भी है।
  • भारत सरकार ने सिमिलीपाल बायोस्फीयर रिजर्व को बायोस्फीयर रिजर्व का दर्जा 1994 में दिया था।
  • यह बायोस्फीयर रिजर्व ओडिशा के मयूरभंज जिले में अवस्थित है।
  • सिमिलीपाल बायोस्फीयर रिजर्व, वर्ष 2009 से ‘यूनेस्को वर्ल्ड नेटवर्क आफ बायोस्फीयर रिजर्व’ का हिस्सा है।
  • इस बायोस्फीयर रिजर्व में टाइगर और हाथी के अलावा विभिन्न प्रकार के पक्षी पाये जाते हैं।
  • यहाँ एरेंगा और मनकीरदियाह नामक दो प्रमुख जनजातियाँ पाई जाती हैं।

बायोस्फीयर रिज़र्व (Biosphere Reserves)

  • बायोस्फीयर अथवा जैवमंडल रिज़र्व (Biosphere Reserves) में वन्यजीवों एवं प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा, रखरखाव, प्रबंधन या पुनर्स्थापन इन-सीटू संरक्षण (In-situ Conservation) विधि के तहत किया जाता है। इसके अतिरिक्त, यह बायोस्फीयर रिजर्व, प्राकृतिक और सांस्कृतिक परिदृश्य का प्रतिनिधित्व भी करता है।
  • इन्हें तीन भागों में विभाजित किया जाता है- कोर क्षेत्र (Core Zone), बफर क्षेत्र (Buffer Zone) और संक्रमण क्षेत्र (Transition Zone)।
  • कोर क्षेत्र (Core Zone), काफी संवेदनशील होता है,यहाँ मानवीय गतिविधियों की अनुमति नहीं है।
  • बफर क्षेत्र (Buffer Zone), कोर क्षेत्र और संक्रमण क्षेत्र के बीच में स्थित होता है। यहाँ वैज्ञानिक अनुसंधान की अनुमति दी जाती है।
  • संक्रमण क्षेत्र (Transition Zone), बायोस्फीयर रिजर्व का सबसे बाहरी हिस्सा है। यह सामान्यतया एक सीमांकित क्षेत्र नहीं बल्कि सहयोगात्मक क्षेत्र है। इस क्षेत्र के अंतर्गत मानव बस्तियां, फसल भूमि, प्रबंधित जंगल, मनोरंजन का क्षेत्र और अन्य आर्थिक उपयोग वाले क्षेत्र शामिल हैं।
  • 1986 में स्थापित ‘नीलगिरि बायोस्फीयर रिज़र्व’ भारत का पहला बायोस्फीयर रिज़र्व था ।
  • यूनेस्को ने ‘बायोस्फीयर रिजर्व’ की शुरुआत प्राकृतिक क्षेत्रें में विकास और संरक्षण के बीच संघर्ष को कम करने के उद्येश्य से की है।
  • बायोस्फीयर रिजर्व का चुनाव राष्ट्रीय सरकार द्वारा किया जाता है जिसमें यूनेस्को के मानव और बायोस्फीयर रिजर्व कार्यक्रम के अंतर्गत तय न्यूनतम मापदंड पाये जाते हैं एवं वे बायोस्फीयर रिजर्व के वैश्विक नेटवर्क में शामिल होने के लिए निर्धारित शर्तों का पालन करते हैं।

बायोस्फियर रिजर्व के लिए मानदंड

  • प्रकृति संरक्षण के दृष्टिकोण से संरक्षित और न्यूनतम अशांत क्षेत्र होना चाहिए।
  • संपूर्ण क्षेत्र एक जैव-भौगोलिक इकाई की तरह होना चाहिए और इतना बड़ा होना चाहिए जो पारिस्थितिकी तंत्र के सभी पौष्टिकता स्तरों का प्रतिनिधित्व कर रहे जीवों की आबादी को संभाल सकें।
  • प्रबंधन प्राधिकरण को स्थानीय समुदायों की भागीदारी / सहयोग सुनिश्चित करना चाहिए ताकि जैव विविधता के संरक्षण और सामाजिक-आर्थिक विकास को आपस में जोड़ते समय प्रबंधन और संघर्ष को रोकने के लिये उनके ज्ञान और अनुभव का लाभ उठाया जा सके।
  • वह क्षेत्र जिनमे पारंपरिक आदिवासी या ग्रामीण स्तरीय जीवनयापन के तरीको को संरक्षित रखने की क्षमता हो ताकी पर्यावरण का सामंजस्यपूर्ण उपयोग किया जा सके।