इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष (Israel-Palestine Conflict) : डेली करेंट अफेयर्स

इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष (Israel-Palestine Conflict)

चर्चा में क्यों?

  • इजराइल और फिलिस्तीन के बीच संघर्ष कई दिनों से चल रहा है। अब यह संघर्ष धीरे-धीरे गंभीर रूप धारण करता जा रहा है।

प्रमुख बिन्दु

  • वर्तमान का इजराइल और फिलिस्तीन के बीच चल रहा खूनी संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है।
  • इजराइल के प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया है कि अब इजराइल किसी भी हाल में पीछे नहीं हटने वाला है। वहीं फिलिस्तीन के गाजा पट्टी में प्रभाव रखने वाला हमास संगठन भी संघर्ष विराम के पक्ष में नहीं है।
  • इसलिए विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान का इजराइल और फिलिस्तीन संघर्ष, मध्य-पूर्व (अर्थात पश्चिम एशिया) में काफी अस्थिरता बढ़ा देगा और इसके भयावह परिणाम हो सकते हैं।
  • इस संघर्ष से मध्य-पूर्व में फिर से आतंकवाद गति पकड़ सकता है। इसके अलावा, ईरान न्यूक्लियर डील पर भी विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।

वर्तमान के इजराइल और फिलिस्तीन के संघर्ष के कारण

  • वर्तमान के इजराइल और फिलिस्तीन के संघर्ष की शुरुआत, येरुशलम स्थित अल-अक्सा मस्जिद (Al-Aqsa Mosque) को लेकर हुई है।
  • अल-अक्सा मस्जिद से शुरू हुआ संघर्ष ने जल्दी ही व्यापक रूप ले लिया। जहां इजराइल ने फिलिस्तीन के गाजा पट्टी में स्थित हमास के ठिकानों पर हमला किया, वहीं हमास ने भी इजराइल पर हजारों राकेट दागे।
  • हमास द्वारा गाजा पट्टी से दागे जाने वाले रॉकेटों से बचने के लिए इजराइल ने अपने ‘आयरन डोम एयर डिफेंस सिस्टम’ (Iron Dome air defence system) का इस्तेमाल किया है।
  • उल्लेखनीय है कि येरुशलम स्थित अल-अक्सा मस्जिद (Al-Aqsa Mosque) को इस्लाम धर्म के अनुयायी काफी पवित्र मानते हैं। इस्लाम के अनुयायियों के लिए मक्का, मदीना के साथ यह तीसरा सबसे पवित्र स्थल है। हालांकि इस मस्जिद से यहूदी और ईसाई भी ताल्लुक रखते हैं।
  • गौरतलब है कि येरुशलम, तीन धर्मों (यहूदी, ईसाई और इस्लाम) के अनुयायियों का पवित्र स्थान है।
  • वर्ष 2016 में यूनेस्को ने अल-अक्सा मस्जिद से यहूदियों के दावे को खारिज कर दिया था। यूनेस्को ने अपने प्रस्ताव में कहा था कि अल-अक्सा मस्जिद पर यहूदियों के दावे और उनके कोई एतिहासिक प्रमाण नहीं मिलते हैं। हालांकि इस तरह के किसी प्रस्ताव को यहूदी मानने के लिए तैयार नहीं हैं।

विभिन्न देशों के मत

  • वर्तमान के इजराइल और फिलिस्तीन संघर्ष को लेकर संयुक्त राज्य अमेरिका ने कहा है कि इजराइल को अपनी रक्षा करने का आत्माधिकार है।
  • वहीं भारत ने भी इजराइल और फिलिस्तीन में बढ़ते तनाव के बीच बयान जारी किया है। भारत ने सभी हिंसक गतिविधियों, खासकर गाजा से किए गए रॉकेट हमलों की निंदा की है। इसके साथ ही हिंसा पर रोक लगाने की जरूरत पर भी जोर दिया है।
  • तुर्की व पाकिस्तान ने फिलिस्तीन का पक्ष लिया है। वहीं कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान ने फिलिस्तीन के गाजा पट्टी में प्रभाव रखने वाले ‘हमास संगठन’ को मदद बढ़ा दी है।

इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष

  • इज़राइल-फिलिस्तीनी संघर्ष की शुरुआत उन्नीसवीं शताब्दी के अंत में, मुख्य रूप से जमीन पर कब्जे संबंधी संघर्ष के रूप में हुई थी।
  • वर्ष 1948 के अरब-इज़राइल युद्ध के बाद, पवित्र भूमि को तीन भागों में विभाजित किया गयाः इज़राइल राज्य, वेस्ट बैंक (जॉर्डन नदी का पश्चिमी तट) और गाजा पट्टी।
  • वर्ष 1993 के ओस्लो समझौते द्वारा संघर्ष विराम की घोषणा की गयी तथा समाधान के रूप में दो राज्यों के गठन की रूपरेखा तैयार की गयी।
  • इस समझौते के तहत वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी के कुछ हिस्सों को सीमित स्वशासन का अधिकार देते हुए इन क्षेत्रें पर फिलिस्तीनी अधिकार को मान्यता प्रदान की गयी थी।
  • वेस्ट बैंक क्षेत्र पर इजराइल और फिलिस्तीन, दोनों ही अपना-अपना दावा करते हैं। यह क्षेत्र इजराइल और जॉर्डन के बीच स्थित है। गौरतलब है कि सन 1967 में इजराइल ने अरब-इजराइली युद्ध के दौरान वेस्ट बैंक क्षेत्र पर कब्जा कर लिया था और बाद के वर्षों में वहाँ बस्तियाँ स्थापित की हैं।