ईरान परमाणु कार्यक्रम : डेली करेंट अफेयर्स

ईरान परमाणु कार्यक्रम

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में संयुक्त राष्ट्र के परमाणु एजेंसी ‘अंतरराष्‍ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी’ ने यह स्वीकार किया है कि ईरान के तेहरान में स्थित नतांज परमाणु केंद्र पर परमाणु संवर्धन का कार्य किया जा रहा है।
  • अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के द्वारा ‘नतांज परमाणु केंद्र’ पर किए जा रहे कार्यों के उपग्रह चित्र के आधार पर पुष्टि की गई जिसमें इस संयंत्र पर निर्माण कार्यों के कई सारे उपकरण दिखाई दिए।
  • हालांकि ईरान ने दो संदिग्ध जगहों पर अंतरराष्‍ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी’ के परमाणु निरीक्षकों को भेजे जाने पर सहमति जता चुका है। उल्लेखनीय ही कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसी 2015 में हुए परमाणु समझौते के तहत नियमित रूप से ईरान के परमाणु परीक्षण की निगरानी करता है।

ईरान के परमाणु कार्यक्रम एक नजर में

  • वर्ष 2002 में पश्चिमी देशों को ईरान के परमाणु कार्यक्रम के बारे में सैटेलाइट तस्वीरों से जानकारी मिली जिसके तहत पता चला कि ईरान अपनी राजधानी तेहरान से 200 किलोमीटर दूर ‘नतांज परमाणु केंद्र’ का निर्माण किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि ईरान के प्रमुख परमाणु केन्द्रों में नतांज, अरक, बुशहर, फोर्डो, बोनाब, अर्दकन, करज (Arak, Bushehr, Fordow,Bonab, Ardakan, Karaj) इत्यादि शामिल है।
  • वर्ष 2003 में अंतरराष्‍ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी’ के सदस्यों द्वारा ‘नतांज परमाणु केंद्र’ का दौरा किया गया एवं इस दौरे के उपरांत ईरान अपने परमाणु हथियार बनाने में प्रयुक्त होने वाले सेंट्रीफ्यूज को कंक्रीट में दफन करने का आश्वासन दिया।
  • कुछ वर्ष पूर्व संभवत: अमेरिका और इजरायल द्वारा निर्देशित वायरस स्टक्सनेट (Stuxnet) द्वारा साइबर हमला कर इस परमाणु संयंत्र को लक्षित किया गया।
  • वर्ष 2015 में ईरान और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों जर्मनी तथा यूरोपीय संघ के बीच ईरान परमाणु समझौता संपन्न हुआ जिसे ‘ज्वाइंट कंप्रिहेंसिव प्लान आफ एक्शन (Joint Comprehensive Plan of Action-JCPA)’ भी कहा जाता है।
  • ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम और क्षेत्रीय संघर्ष में उसकी भागीदारी रोकने हेतु नए समझौते की मांग करते हुए वर्ष 2018 में अमेरिका के द्वारा ईरान परमाणु समझौते से एक तरफा पीछे हटते हुए ईरान पर प्रतिबंधों की घोषणा कर दी। हालांकि जर्मनी, यूरोपीय संघ समेत सुरक्षा परिषद के बाकी सदस्यों के द्वारा इस संधि को जारी रखा गया है।

ईरान परमाणु समझौता 2015 के बारे में

  • ईरान परमाणु समझौता 2015 में ईरान और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों जर्मनी तथा यूरोपीय संघ के बीच वियना में हुआ था ।जुलाई 2015 में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के दौरान लंबे समय से कूटन‍ीतिक पहल के बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को सीमित करने वाले इस परमाणु समझौते पर बात बनी थी।
  • समझौते के मुताबिक़ ईरान को अपने संवर्धित यूरेनियम के भंडार को कम करना था। साथ ही अपने परमाणु संयंत्रों को निगरानी के लिए खोलना था। इसके अलावा समझौते के ज़रिए ईरान को अपने उच्च संवर्धित यूरेनियम भंडार का 98 प्रतिशत हिस्सा नष्ट करना था और ईरान को अपने मौजूदा परमाणु सेंट्रीफ्यूज में से दो तिहाई को भी हटाना था।

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के बारे में

  • संयुक्त राष्ट्र की विशेषीकृत एजेंसियों में एक अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) है जो संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी एजेंसी के रूप में कार्य करती है।
  • यह परमाणु प्रौद्योगिकियों के सुरक्षित और शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने के लिए अपने सदस्य राज्यों और दुनिया भर में कई भागीदारों के साथ काम करती है।
  • इसका उद्देश्य परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना और परमाणु हथियारों सहित किसी भी सैन्य उद्देश्य के लिए इसके उपयोग को रोकना है।
  • अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी का गठन 29 जुलाई, 1957 को हुआ था। इसका मुख्यालय वियना, आस्ट्रिया में है।