जीएम सोया (GM Soya) को आयात की अनुमति : डेली करेंट अफेयर्स

जीएम सोया (GM Soya) को आयात की अनुमति

चर्चा में क्यों?

हाल ही में केन्द्र सरकार ने पोल्ट्री उद्योग के लिए जीएम सोयाबीन के आयात की अनुमति प्रदान की है। साथ ही कृषि सहकारिता और किसान कल्याण विभाग ने राज्यों को बीटी बैगन और बीटी कपास के प्रसार को नियंत्रित करने के लिये निर्देश जारी किये है।

जीएम फसलेः जीएम फसल से तात्पर्य आधुनिक जैव प्रौद्योगिकीय के उपयोग से आनुवांशिक गुणों में परिवर्तन कर नया उत्पाद का निर्माण किया जाता है आनुवांशिक इंजीनियरिंग का प्रयोग कृत्रिम रूप से किया जाता है।
पारंपरिक पादप प्रजनन में माता-पिता दोनों के वांछित लक्षणों के साथ संतृति हेतु एक ही जीन की प्रजातियों का संकरण कराया जाता है।

कुछ प्रमुख जीएम फसलेः

  • बीटी कपास- भारत में एकमात्र आनुवांशिक रूप से संशोधित फसले है। इसमें बैसिलान युरि जेनेसिस जीवाणु, नामक विदेशी जीन होते है जो फसल को सामान्य कीटो बालवॉर्म से सुरक्षा प्रदान करने के लिए विवाक्त प्रोटीन का स्त्रव करता है।
  • बीटी बैगन - में प्रविष्ट जीन पौधे के फल और शाखाओं को क्षति पहुँचाने वाले छेदक कीटों के हमलों का विरोध करने में सक्ष्म बनता है।
  • डीएमएच 11 सरसो आनुवांशिक संशोधन, स्वपरागण के स्थान पर परंपरागण की अनुमति प्रदान करता है।

जीएम फसलों के लाभः

  • जीएम बीज साधारण बीज की तुलना में अधिक उत्पादन करने में खाद्यान्न कमी की समस्या को दूर कर सकता है।
  • जीएम फसलें सूखा रोधी और बाढ़ रोधी के साथ कीट प्रतिरोधी भी होती है जिससे फसल के नष्ट होने की समस्या नहीं उत्पन्न होती है।
  • जीएम फसले आर्थिक रूप किसानों के लिए लाभकारी है क्योंकि इनमें अधिक उर्वरक की आवश्यकता नहीं होती है।

जीएम फसलों से संबंधित मुद्देः

  • जीएम फसलों की प्रमुख समस्या स्वास्थ्य पर पड़ने वाले इसके प्रभाव से है। विशेषताओं का मानना जीएम फसले स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालती है।
  • जीएम फसलों का सबसे नकारात्मक पक्ष है कि इसके बीज फसलों से प्राप्त नहीं किए जा सकते है। इन बीजों का दुबारा प्रयोग नहीं किया जा सकता।
  • जीएम फसलों के प्रयोग स्थानीय किस्मों के लिए खतरा है साथ ही जैव विविधता के लिए खतरा बढ़ सकता है।
  • जीएम फसलों के उत्पादन के लिए भारतीय किसान विदेशी कंपनियों पर निर्भर होंगे।
  • जीएम फसले भारतीय कृषि प्रधान संस्कृति के लिए भी खतरा है।

जीएम फसलों के संबंध में भारत में कानूनी स्थितिः

  • पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत बिना अनुमोदन के जीएम फसलों के उपयोग करने पर 1 लाख का जुर्माना व 5 वर्ष की सजा का प्रावधान है।
  • भारत में आनुवांशिक इंजीनियरिंग मूल्यांकन समिति शीर्ष निकाय है जो जीएम फसलों को अनुमति देती है उनका वाणिज्यिक उत्पादन हो या नहीं।
  • भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक पराधिकरण भारत में आयातित फसलों को विनियमित करने के लिए अधिकृत निकाय है।

आगे की राहः

जीएम फसलों के प्रयोग से पूर्णतः सचेत रहने की आवश्यकता है क्योंकि जीएम फसलों के जीन तेजी से प्राकृतिक परिवेश में मिलकर हमारी खाद्य श्रृंखला का अंग न बन जाए। जीएम फसलों का मनुष्यों पर पड़ने वाले प्रभावों का दीर्घकालिक परीक्षण किए बिना भारत जैसे विकासशील देश में प्रयोग की अनुमति देना निश्चित ही खतरों से खाली नहीं होगा। परंतु शोध-अध्ययन को और अधिक दक्षता से कर_ इसके दुष्प्रभावों को कम किया जाना चाहिए जिससे मानव स्वास्थ्य व पर्यावरण को हानि न पहुंच सके।