भारतीय ओलंपिक संघ की पहली महिला अध्यक्ष (First woman president of Indian Olympic Association) : डेली करेंट अफेयर्स

भारत की महान एथलीट पी.टी. उषा भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) के 95 वर्षों के इतिहास में पहली महिला अध्यक्ष चुनी गयीं। पी.टी. उषा इस पद के लिए निर्विरोध चुनी गई हैं। साथ ही वह इस पद पर पहुंचने वाली पहली ओलिंपियन और अंतर्राष्ट्रीय पदक विजेता खिलाड़ी भी हैं। दरअसल चुनाव 10 दिसंबर को होने थे पर वो इस पद की वो इकलौती उम्मीदवार थीं। इस वजह से उन्हें निर्विरोध चुन लिया गया। इसके अलावा पीटी उषा आईओए के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी सँभालने वाली दूसरी खिलाड़ी भी हैं। इसमें पहले खिलाडी अध्यक्ष महाराजा यादविंदर सिंह थे। लगे हाथ आपको बताते चलें कि इसी वर्ष उषा को राज्यसभा का सदस्य भी मनोनीत किया गया है।

अगर ओलंपिक संगठन के इतिहास की बात करें तो सर दोराबजी टाटा ने सबसे पहले 1920 के आसपास ओलंपिक के लिए एक निकाय बनाने का सुझाव दिया था। इसके बाद, 1923-24 में एक अखिल भारतीय ओलंपिक समिति का गठन किया गया। फिर वर्ष 1927 में भारतीय ओलंपिक संघ यानी IOA का गठन किया गया। इसके संस्थापक अध्यक्ष सर दोराबजी टाटा थे और डॉ. ए.जी. नोहरेन इसके सचिव थे।

IOA देश में ओलंपिक में भारतीय भागीदारी को बढ़ावा देने के लिए काम करता है। इसके अलावा यह खेल शिक्षा के लिए विभिन्न कदम उठाता है। IOA के सदस्यों में राष्ट्रीय खेल संघों, राज्य ओलंपिक संघों, अंतर्राष्ट्रीय ओलंपिक समिति और अन्य चुनिंदा बहु-खेल संगठनों के सदस्य शामिल हैं। भारतीय ओलंपिक संघ की 32 सदस्यीय कार्यकारी परिषद होती है जिसकी अध्यक्षता एक अध्यक्ष करता है। कार्यकारी परिषद का चुनाव हर 4 साल में एक बार होता है। इसके पहले 2017 में अंतिम चुनाव हुआ था।

भारत की उड़न परी : पीटी उषा की उपलब्धियां

पिलाउल्लाकांडी थेक्केपरांबिल उषा यही पूरा नाम है हमारे देश की उड़न परी का। जिन्हे देश की "ट्रैक एंड फील्ड की रानी" और 'पय्योली एक्सप्रेस' के नाम से भी जाना जाता है। यह 1980 के दशक के अधिकांश समय में एशियाई ट्रैक-एंड-फील्ड की प्रतियोगिताओं में हावी रही हैं। पीटी उषा 16 साल की उम्र में 1980 के मास्को ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली सबसे कम उम्र की धावक थीं। उषा ने अपने शानदार करियर में लगभग 102 राष्ट्रीय/अंतर्राष्ट्रीय पदक और पुरस्कार जीते हैं। एशियाई चैंपियनशिप में 13 स्वर्ण पदक और कुल 33 अंतर्राष्ट्रीय पदक जीते। खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन दिखाने के लिए उन्हें अर्जुन पुरस्कार और पद्मश्री मिला। साल 1985 में, उन्हें जकार्ता एशियन एथलीट मीट में सर्वश्रेष्ठ महिला एथलीट घोषित किया गया। 1986 में सियोल एशियाई खेलों में, भारतीय ओलंपिक संघ ने उन्हें एडिडास गोल्डन शू से सम्मानित किया और उन्हें सदी का खिलाड़ी नामित किया गया।