अंटार्कटिका महाद्वीप में विशालकाय पक्षी के जीवाश्म की खोज : डेली करेंट अफेयर्स

अंटार्कटिका महाद्वीप में विशालकाय पक्षी के जीवाश्म की खोज

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में वैज्ञानिकों ने एक ऐसे विशालकाय पक्षी के जीवाश्म की पहचान की है जो लगभग पांच करोड़ साल पहले पाया जाता था और जिसके पंख 21 फुट लंबे होते थे।

खोजे गए विशालकाय पक्षी के जीवाश्म से जुड़े प्रमुख बिन्दु

  • इस पक्षी के जीवाश्म, अंटार्कटिका महाद्वीप से 1980 के दशक में पाये गए थे।
  • वैज्ञानिकों ने अब अपनी रिसर्च में पाया है कि अंटार्कटिका से प्राप्त जीवाश्म दक्षिणी समुद्रों में विचरण वाले पक्षियों के एक विलुप्त समूह के सबसे पुराने विशालकाय सदस्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
  • गौरतलब है कि समुद्र के ऊपर विचरण करने वाले पक्षियों में वांडरिंग अल्बाट्रॉस (wandering albatross)को सबसे बड़ा उड़ने वाला पक्षी कहा जाता है और इनके पंख, सभी परिंदों में सबसे ज्यादा लंबे यानी साढ़े 11 फुट तक फैल सकते हैं।
  • लेकिन हाल ही में किए गए अध्ययन से यह ज्ञात होता है कि अंटार्कटिका महाद्वीप से जिस पक्षी के जीवाश्म मिले हैं , वे भी वांडरिंग अल्बाट्रॉस (wandering albatross) की ही तरह विशाल थे।
  • पेलेगोर्निथिड (Pelagornithids) कहे जाने वाले इन पक्षियों ने एक लंबे समय तक पृथ्वी के महासागरों में व्यापक रूप से यात्रा की।
  • ‘जर्नल साइंटिफिक रिपोर्ट्स’ में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, एक दुसरे पेलगोर्निथिड जीवाश्म के जबड़े की हड्डी का हिस्सा लगभग चार करोड़ साल पहले का है।
  • विशेषज्ञों का कहना है कि इस खोज से पता चलता है कि डायनासोर के विलुप्त होने के बाद अपेक्षाकृत तेजी से विशाल आकार के पक्षी वास्तव में विकसित हुए और कई वर्षों तक महासागरों के ऊपर घूमते रहे।

अंटार्कटिका महाद्वीप के बारे में

  • अंटार्कटिका महाद्वीप की खोज लगभग 200 वर्ष पूर्व हुई थी। वर्तमान में अंटार्कटिका महाद्वीप पर मानव हस्तक्षेप में काफी वृद्धि आई है। उल्लेखनीय है कि विभिन्न अध्ययनों से ज्ञात हुआ है कि अंटार्कटिक महाद्वीप का अपरिवर्तित आदिम क्षेत्र (Pristine areas) मानव हस्तक्षेप से मुक्त एक बहुत छोटे क्षेत्र (अंटार्कटिका के 32%से कम) को कवर करता है जो मानवीय गतिविधियों के कारण क्षीण हो रहा है ।
  • विंट्स यूनिवर्सिटी (Wits University) के वैज्ञानिकों द्वारा अगस्त ,2020 में किए गए शोध के मुताबिक अंटार्कटिका महाद्वीप के 99.6% क्षेत्र को अभी भी निर्जन क्षेत्र माना जा सकता है, लेकिन इस क्षेत्र में कुछ जैव विविधता अभी भी विद्यमान है।
  • अंटार्कटिका, विश्व का सबसे ठंडा, शुष्क और तेज हवाओं वाला महाद्वीप है। अंटार्कटिका को एक बर्फीला रेगिस्तान माना जाता है।
  • अंटार्कटिका का कोई स्थायी निवासी नहीं है। पुरे वर्ष भर में लगभग 1,000 से 5,000 व्यक्ति इस महाद्वीप पर फैले विभिन्न अनुसंधान केन्द्रों पर उपस्थित रहते हैं।
  • यहाँ पेंगुइन, सील, निमेटोड, टार्डीग्रेड, पिस्सू, विभिन्न प्रकार के शैवाल और सूक्ष्मजीव के अलावा टुंड्रा वनस्पति भी पायी जाती है।
  • अंटार्कटिका पृथ्वी का दक्षिणतम महाद्वीप है, जिसमें दक्षिणी ध्रुव स्थित है। यह चारों ओर से दक्षिणी महासागर से घिरा हुआ है।
  • अपने लगभग 140 लाख वर्ग किलोमीटर (54 लाख वर्ग मील) क्षेत्रफल के साथ यह, एशिया, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका और दक्षिणी अमेरिका के बाद, पृथ्वी का पांचवां सबसे बड़ा महाद्वीप है। अंटार्कटिका का 98% भाग औसतन 1.6 किलोमीटर मोटी बर्फ़ से आच्छादित है।
  • अंटार्कटिका पर पहुँचने वाले प्रथम भारतीय नागरिक गिरिराज सिरोही थे। श्री सिरोही एक प्लांट फिजियोलॉजिस्ट थे तथा वे एक अमरीकी अभियान दल के सदस्य के रूप में वर्ष 1960 में अंटार्कटिका पहुँचे थे।

अंटार्कटिक के संरक्षण हेतु ‘अंटार्कटिक संधि’-

  • अंटार्कटिक संधि पर 1 दिसंबर, 1959 को वाशिंगटन(यूएसए) में 12 देशों द्वारा हस्ताक्षर किये गए थे। भारत द्वारा वर्ष 1983 में इस संधि पर हस्ताक्षर किये गए थे।
  • 23 जून, 1961 को अंटार्कटिक संधि लागू हुई थी।
  • यह संधि अंटार्कटिका महाद्वीप के संबंध में अंतरराष्ट्रीय संबंधों (International Relationas) को विनियमित करती है।
  • इस संधि में प्रावधान किया गया है कि सभी सदस्यों द्वारा अंटार्कटिका महाद्वीप के क्षेत्र का उपयोग केवल शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिये किया जाएगा।
  • अंटार्कटिक संधि के वाशिंगटन(यूएसए) में होने के कारण, इसे वाशिंगटन संधि के नाम से भी जाना जाता है।