अफ्रीकी स्वाइन फीवर (African Swine Fever - ASF) : डेली करेंट अफेयर्स

थाइलैंड में अफ्रीकन स्वाइन फीवर की पहचान होने से हड़कंप मच गया है। बूचड़खाने से मिले मांस के सैंपल की जांच के बाद इसकी आधिकारिक पुष्टि हुई है। ऐसे में थाईलैंड अपने यहाँ लाखों सुअरों को मारने की तैयारी कर सकता है। गौरतलब है कि अप्रैल 2021 में भारत में भी इस बीमारी का पता चला था।

अफ्रीकी स्वाइन फीवर घरेलू और जंगली पशुओं में होने वाला एक बेहद ही संक्रामक रक्तस्रावी वायरल रोग है। यह एसफेरविरिडे (Asfarviridae) परिवार के एक बड़े DNA वाले वायरस की वजह से होता है। इसे पहली बार 1920 के दशक में अफ्रीका में देखा गया था। पेश है इस बारे में एक रिपोर्ट

इस रोग में पशुओं की केवल उत्पादकता ही नहीं प्रभावित होती है, बल्कि इससे इनकी मृत्यु भी हो जाती है। सूअर को तेज बुखार, लड़खड़ा कर चलना, सफेद सूअर के शरीर पर नीले चकते होना, सुस्ती, खाना-पीना छोड़ देना - यह सभी अफ्रीकी स्वाइन फीवर के लक्षणों में शामिल है। फार्म वाले सूअर इस बीमारी से सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं, क्योंकि जंगली सूअर या देसी सूअर की प्रतिरोधक क्षमता काफी अच्छी होती है। पशुओं में यह बीमारी संक्रमित घरेलू या जंगली सूअरों के संक्रमण से सामने आता है। इसके साथ ही यह बीमारी अप्रत्यक्ष संपर्क जैसे खाद्य पदार्थ, अवशिष्ट या कचरे आदि से भी फैलता है। इसके अलावा, ये वायरस सुअर के मांस, सलाइवा, खून और टिशू से भी फैलता है। इस बीमारी में संक्रमित पशुओं के हताहत होने की दर 100% है। वैसे तो अफ्रीकन स्वाइन फीवर और सामान्य स्वाइन फीवर के लक्षण एक ही जैसे होते हैं, लेकिन यह स्वाइन फीवर से अलग है। राहत की बात यह है कि यह बीमारी कोई जूनोटिक बीमारी नहीं है यानी यह पशुओं से इंसानों में नहीं फैलता है। मौजूदा वक्त में इस रोग का कोई भी सिद्ध टीका या इलाज उपलब्ध नहीं है। इसके रोकथाम के लिए तमाम देशों के द्वारा स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग तरह की रणनीतियां अपनाई जाती हैं। इसमें संक्रमित देशों से आने जाने वाले पशु आहार, पशुधन आयात और वाहनों आदि पर रोक लगा दी जाती है। साथ ही, संक्रमित सूअरों की ट्रेसिंग कर उन्हें मार दिया जाता है। रोग के प्रसार को रोकने के लिए पशुओं की गतिविधियों पर नियंत्रण लगाया जाता है। इसके अलावा, पशुधन के प्रयोग में लाए जाने वाले अवशिष्ट, भोजन समेत अन्य कचरों का उचित तरीके से निस्तारण किया जाता है।

अफ्रीकी स्वाइन फीवर, विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन (OIE) के पशु स्वास्थ्य कोड में सूचीबद्ध एक ऐसी बीमारी है जिसके बारे में पता चलने पर तुरंत इस संगठन को सूचित करना जरूरी होता है। बता दें कि विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन दुनिया-भर में पशुओं के स्वास्थ्य में सुधार हेतु उत्तरदायी एक अंतर-सरकारी संगठन है। मौजूदा वक्त में भारत समेत इसके कुल 182 सदस्य देश हैं। यह नियमों से संबंधित मानक दस्तावेज़ तैयार करने का काम करता है जिसका इस्तेमाल करके सदस्य देश बीमारियों और रोगजनकों से स्वयं को सुरक्षित कर सकते हैं।