यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स (31 अगस्त 2020)

Daily Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC, RPSC and All State PCS Examinations


यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स

Daily Hindi Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC, RPSC and All State PCS Examinations


17 वीं आसियान-भारत व्यापार मंत्रियों की बैठक

चर्चा में क्यों?

  • भारत और आसियान के व्यापार मंत्रियों ने मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की समीक्षा पर विचार विमर्श के लिए वर्चुअल बैठक का आयोजन किया गया।

ASEAN-India

बैठक से संबधित तथ्य

  • इस बैठक में भारत के साथ 10 आसियान देशों के वाणिज्य मंत्रियों ने भाग लिया। इसमें मलेशिया, थाईलैंड, लाओस, वियतनाम, इंडोनेशिया, सिंगापुर, ब्रुनेई, म्यांमार, कंबोडिया और फिलीपींस शामिल थे।
  • बैठक में वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने, लचीला आपूर्ति श्रृंखला और आवश्यक सामानों दवाइयों के बेरोक प्रवाह के लिए में प्रतिबद्धताएं जाहिर की गयी
  • बैठक के दौरान आसियान-भारत व्यापार परिषद की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई। रिपोर्ट में आसियान-भारत वस्तु व्यापार समझौते (ASEAN-India Trade in Goods Agreement-AITIGA) की समीक्षा करने की सिफारिश की गई थी।

आसियान-भारत वस्तु व्यापार समझौता (AITIGA)क्या है?

  • AITIGA 10 आसियान सदस्यों और भारत के बीच एक मुक्त वस्तु-व्यापार समझौता है।
  • 2010 में इस समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे।
  • समझौते के अनुसार, भागीदारों ने यथासंभव अधिक सामानों पर सीमा शुल्क को समाप्त करने समयसीमा निर्धारित करने की बात तय की थी।

आसियान के बारे में

  • आसियान (Association of South-East Asian Nations- ASEAN) की स्थापना 1967 में आसियान घोषणापत्र (बैंकॉक घोषणा) पर संस्थापक देशों के हस्ताक्षर के साथ हुई थी।
  • इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर और थाईलैंड आसियान के संस्थापक देश थे। इसके वर्तमान सदस्यों की संख्या 10 है।
  • आसियान में शामिल अन्य सदस्य देश है ब्रुनेई, वियतनाम, लाओस, म्यांमार, और कंबोडिया।
  • आसियान का सचिवालय इंडोनेशिया के राजधानी जकार्ता में है।

मिशन अल्फा और गगनयान

चर्चा में क्यों?

  • भारत और फ्रांस की अंतरिक्ष एजेंसियों के बीच गगनयान के अंतरिक्ष यात्रियों को आवश्यक उपकरण मुहैया कराने के लिए अग्रिम चरण की बातचीत हो रही है। अधिकारियों ने बताया कि अगले साल ‘मिशन अल्फा’ के लिए फ्रांस के अंतरिक्ष यात्री थॉमस पेसक्वेट द्वारा इसी तरह के उपकरण का इस्तेमाल होगा।

मिशन अल्फा के बारे में

  • मिशन अल्फा फ्रांस के अंतरिक्ष यात्री थॉमस पेसक्वेट को अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) भेजने के लिए शुरू किया गया मिशन है।
  • अंतरिक्ष यात्री थॉमस पेसक्वेट अगले साल की शुरुआत में क्रू ड्रैगन अंतरिक्ष यान से अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन वापस जाएंगे।
  • थॉमस पेसक्वेट पहले भी नवंबर 2016 से जून 2017 के बीच आईएसएस पर छह महीना रह चुके हैं।

मिशन गगनयान के बारे में

  • इसरो के मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम के तहत गगनयान पहला भारतीय अंतरिक्षयात्री यान है।
  • गगनयान को 2022 तक अन्तरिक्ष में भेजने की योजना है।
  • इसे शक्तिशाली GSLV-Mk-III रॉकेट द्वारा प्रक्षेपित किया जाएगा।
  • गगनयान उन्नत संस्करण डॉकिंग क्षमता से युक्त होगा। इसमें एक क्रू मॉड्यूल और एक सर्विस मॉड्यूल होगा।
  • मिशन गगनयान की एक अन्य खासियत यह भी है कि इसकी कमान एक महिला के हाथ में होगी।

गोद लेने और उसका संरक्षक बनने की प्रक्रिया

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में किसी को गोद लेने और उसका संरक्षक बनने की कानूनी प्रक्रिया में शामिल विसंगतियों को दूर करने के लिए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है।
  • इसमें मांग की गई है कि गोद लेने की प्रक्रिया सभी नागरिकों के लिए एक समान की जाए।
  • याचिका में विधि आयोग को यह निर्देश देने की मांग की गई है कि वह तीन महीने के अंदर “गोद लेने और संरक्षण संबंधी समान आधार” पर एक रिपोर्ट तैयार करे और ऐसा करने के दौरान वह कानून और अंतरराष्ट्रीय संधियों की श्रेष्ठ प्रक्रियाओं को ध्यान में रखे।
  • सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका में कहा गया कि गोद लेना और संरक्षण प्राप्त करना इंसानी जीवन का एक बेहद महत्वपूर्ण और अहम पहलू है लेकिन आजादी के 73 सालों बाद भी भारत में लैंगिक समानता और धार्मिक समानता वाला कोई ऐसा कानून गोद और संरक्षण संबंधी नहीं है जो सभी नागरिकों के लिये एक समान हो। गोद लेने और उसका संरक्षक बनने की प्रक्रिया में वर्तमान विसंगतियाँ
  • याचिकाकर्ता का कहना है कि गोद लेने की वर्तमान प्रक्रिया भेदभावपूर्ण प्रतीत होती है, क्योंकि हिंदुओं में गोद लेने के लिये संहिताबद्ध कानून है लेकिन मुसलमानों, ईसाइयों और पारसियों में ऐसा नहीं है।
  • सुप्रीम कोर्ट में दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि हिंदूओं के लिए कानून में गोद लिए गए बच्चे को प्रतिपाल्य की संपत्ति में अधिकारी बनाया गया है; लेकिन मुस्लिम, ईसाई या पारसियों में गोद लिए गए बच्चे को इस प्रकार का अधिकार नहीं मिलता है।
  • हिंदू द्वारा गोद लिया गया बच्चा कानूनी वारिस बन सकता है जबकि ईसाइयों, मुसलमानों और पारसियों द्वारा गोद लिया गया नहीं।
  • हिंदुओं द्वारा अपनाया गया बच्चा दत्तक माता-पिता के एक जैविक बच्चे के बराबर है, जबकि मुस्लिम, ईसाई और पारसी में ऐसा नहीं है।
  • याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट से गोद लेने और संरक्षक बनने के भेदभावपूर्ण तरीके को संविधान के अनुच्छेद 14, 15 व 21 का उल्लंघन घोषित करने की मांग की है।
  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद-14 में सभी नागरिकों के लिए समानता के अधिकार की बात की गई है। अनुच्छेद 15 धर्म, नस्ल, जाति, लिंग, जन्म स्थान के आधार पर भारतीयों में भेदभाव का निषेध करता है और अनुच्छेद 21 कहता है कि कानून द्वारा स्थापित प्रक्रियाओं को छोड़कर किसी भी व्यक्ति को उसके जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित नहीं किया जा सकता है।

क्या है हिंदुओं में गोद लेने की कानूनी प्रक्रिया?

  • भारत में हिन्दू लोग हिंदू अडॉप्शन एंड मेंटेनेंस एक्ट, 1956 के तहत किसी बच्चे को गोद ले सकते हैं। इस कानून के अंतर्गत हिंदूओं के अलावा जैन, बौद्ध और सिख भी आते हैं।
  • 2015 में भारत सरकार ने इस कानून में संशोधन भी किए थे।
  • देश की अनेक राज्य सरकारों ने इसके प्रावधानों के अनुसार कानून व नियम बनाए हैं। अल्पसंख्यकों में गोद लेने की कानूनी प्रक्रिया: संरक्षक और प्रतिपाल्य अधिनियम, 1890
  • मुस्लिम, ईसाई, पारसी या यहूदी पर 1956 का अधिनियम लागू नहीं होता है, उनके लिए अलग कानून है।
  • मुस्लिम, ईसाई, पारसी और यहूदी समुदाय के अपने निजी कानून (पर्सनल लॉ) द्वारा इस तरह के मामलों का नियमन होता है।
  • इस समुदाय के दंपत्ति संरक्षक और प्रतिपाल्य अधिनियम, 1890 (Guardians and Wards Act, 1890) के तहत किसी बच्चे को अपनाकर उसके संरक्षक बन सकते हैं। परंतु वे माता-पिता के रूप में मान्यता प्राप्त नहीं कर पाते हैं। बच्चे के अठारह वर्ष का होने पर संरक्षक की भूमिका भी स्वत: समाप्त हो जाती है।
  • सभी मुस्लिमों, ईसाइयों और पारसियों के लिए एक सामान्य कानून नहीं होने के कारण, ये लोग गोद लेने से संबन्धित मामलों में संरक्षक और प्रतिपाल्य अधिनियम, 1890 के तहत कोर्ट का दरवाजा खटखटाते हैं।
  • मुस्लिम, ईसाई और पारसी उक्त अधिनियम(1890 के अधिनियम) के अंतर्गत केवल पालक फोस्टर केयर (foster care) के तहत एक बच्चे को गोद ले सकते हैं। एक बार फोस्टर केयर के तहत एक बच्चा वयस्क हो जाता है, तो वह चाहे तो अपने सभी संबंधों को दत्तक माता-पिता से तोड़ सकता है।

सेंट्रल अडॉप्शन रिसोर्स एजेंसी के बारे में

  • भारत सरकार द्वारा गोद से संबन्धित मामले को देखने हेतु ‘सेंट्रल अडॉप्शन रिसोर्स एजेंसी ‘(कारा) नामक की संस्था की स्थापना की गयी है ।
  • कारा , महिला एवं बाल कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्त निकाय है।

गोद लेने से संबन्धित सुप्रीम कोर्ट का पूर्व का निर्णय

  • वर्ष 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख) अधिनियम 2000 में, वर्ष 2006 में किए गए संशोधनों की व्याख्या की थी। इसी आधार पर ऐतिहासिक निर्णय दिया था कि किसी भी धार्मिक पृष्ठभूमि के व्यक्ति को बच्चा गोद लेने का अधिकार है।
  • सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा था कि मुस्लिम पर्सनल लॉ, मुस्लिम समुदाय के किसी भी व्यक्ति को बच्चा गोद लेने से रोक नहीं सकता और व्यक्तिगत धार्मिक मान्यताओं के कारण किशोर न्याय अधिनियम के प्रावधानों को नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता।
  • न्यायालय ने कहा कि बच्चा गोद लेने वाले माता-पिता ऐसा करने या न करने के लिए स्वतंत्र हैं। चाहें तो वे अपने पर्सनल लॉ की मान्यता का पालन करें। हालांकि, गोद लेने को मौलिक अधिकार की मान्यता नहीं दी गई है।

असामाजिक गतिविधि रोकथाम (पासा) अधिनियम, 1985

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में गुजरात सरकार ने असामाजिक गतिविधि रोकथाम (पासा) अधिनियम , 1985 में संशोधन करने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है।

प्रमुख बिन्दु

  • गुजरात सरकार ने राज्य में साइबर अपराध और महिलाओं की सुरक्षा के लिए अपने दायरे को बढ़ाकर असामाजिक गतिविधि रोकथाम (पासा) अधिनियम, 1985 (Prevention of Anti-Social Activities (PASA) Act, 1985) में संशोधन करने का निर्णय लिया है।
  • इस कानून में आदी अपराधियों को एहतियाततन हिरासत में रखने का प्रावधान है ।
  • गुजरात सरकार के गृहविभाग का भी कामकाज देख रहे मुख्यमंत्री ‘विजय रूपाणी’ असामाजिक गतिविधि रोकथाम (पासा) अधिनियम, 1985 में संशोधन करने के लिए अध्यादेश का प्रस्ताव मंत्रिमंडल की बैठक में रखेंगे।
  • गुजरात सरकार के मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, इस संशोधन का लक्ष्य गुजरात की शांतिपूर्ण व सुरक्षित राज्य के रूप में पहचान बनाना है। इस संशोधन का लक्ष्य ‘कमजोर तबकों के साथ शारीरिक हिंसा और धौंसपट्टी’ को भी उसके दायरे में लाना है।
  • भारतीय अपराध संहिता, 1860 और यौन अपराधों के खिलाफ बच्चों का संरक्षण (पास्को ) अधिनियम के तहत आने वाले अपराध को अब पासा (PASA) दंड संहिता में अलग से शामिल किया जाएगा। असामाजिक गतिविधि रोकथाम (पासा) अधिनियम, 1985 के बारे में
  • गुजरात में पासा (PASA) अधिनियम 1985 से लागू है।
  • फिलहाल गुजरात के पासा कानून में हथियार की अवैध खरीद-बिक्री, अवैध शराब की बिक्री, जुआ, वेश्यावृति और गौहत्या जैसे अपराध शामिल हैं।