यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स (30 जून 2020)


यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स

Daily Hindi Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC, RPSC and All State PCS Examinations


पीएम फॉरमलाइजेशन ऑफ माइक्रो फूड प्रोसेसिंग एंटरप्राइसेस (पीएम एफएमई) योजना

चर्चा में क्यों?

  • खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्रीमती हरसिमरत कौर बादल ने “आत्मनिर्भर भारत अभियान” के एक भाग के रूप में खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए पीएम फॉरमलाइजेशन ऑफ माइक्रो फूड प्रोसेसिंग एंटरप्राइजेज (पीएम एफएमई) योजना की शुरुआत की।

पीएम एफएमई योजना का विवरण

  • मौजूदा सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों के उन्नयन के लिए वित्तीय, तकनीकी और व्यावसायिक सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से अखिल भारतीय स्‍तर पर शुरू की गई इस योजना को 10,000 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ 2020-21 से 2024-25 तक पांच वर्षों की अवधि में लागू किया जाएगा।
  • इस योजना में होने वाले व्यय को केन्‍द्र और राज्य सरकारों के बीच 60:40 के अनुपात में, पूर्वोत्‍तर और हिमालयी राज्यों के साथ 90:10 के अनुपात में, संघ शासित प्रदेशों में (जहाँ विधान सभा नहीं है) केन्‍द्र द्वारा 100 प्रतिशत साझा किया जाएगा।
  • इस योजना में एक जिला एक उत्‍पाद (ओडीओडीपी) के दृष्टिकोण को अपनाया गया है।
  • एफपीओ / एसएचजी / निर्माता सहकारी समितियों को मूल्य श्रृंखला के साथ पूंजी निवेश के लिए 35 प्रतिशत का क्रेडिट लिंक्ड अनुदान प्रदान किया जाएगा।
  • योजना में क्षमता निर्माण और अनुसंधान पर विशेष ध्यान केन्द्रित किया गया है।

अन्य जानकारी

  • ऑपरेशन ग्रीन्स का विस्तार: खाद्य प्रसंस्करण मंत्रालय कार्यान्वित की जा रही ऑपरेशन ग्रीन्स योजना का अधिसूचना की तारीख से छह महीने की अवधि के लिए टमाटर, प्याज और आलू (टीओपी) फसलों से लेकर अन्य अधिसूचित बागवानी फसलों तक विस्‍तार कर दिया गया है।
  • कृषक उत्पादक संगठनों (एफपीओज), कृषि लॉजिस्टिक्स, प्रसंस्करण सुविधाओं तथा व्यावसायिक प्रबंधन के प्रोत्साहन के लिए केंद्रीय बजट 2018-19 के बजट भाषण में “ऑपरेशन फ्लड” की तर्ज पर 500 करोड़ रुपए के परिव्यय से एक नई योजना “ऑपरेशन ग्रीन्स” की घोषणा की गई थी ।

यूनेस्को ग्लोबल एजुकेशन मोनेटरिंग रिपोर्ट 2020

चर्चा में क्यों :

  • हाल ही में यूनेस्को द्वारा ग्लोबल एजुकेशन मोनेटरिंग रिपोर्ट प्रस्तुत किया गया है। ग्लोबल एजुकेशन मॉनिटरिंग रिपोर्ट (जीईएम रिपोर्ट) एक स्वतंत्र टीम तैयार करती है और इसे यूनेस्को ने प्रकाशित किया है। इसे शिक्षा पर सतत विकास लक्ष्य पूरा करने में हुई प्रगति की निगरानी का आधिकारिक आदेश प्राप्त है।

UNESCO Global Education Monitoring (GEM) Report

रिपोर्ट के विषय में :

  • यह रिपोर्ट सतत विकास लक्ष्य 4 : समावेशन तथा शिक्षा पर संदर्भित रहती है। इस वर्ष की रिपोर्ट मुख्यतः कोरोना वायरस के कारण बढ़ी हुई वैश्विक शिक्षा असमानता पर केंद्रित है।

रिपोर्ट की मुख्य प्राप्तियां

  • जहाँ पूर्व कोरोना विश्व में माइग्रेशन , आतंकवाद, गरीबी इत्यादि कारणों से 5 में से 1 बलात विद्यालय छोड़ने पर विवस होता था वहीँ कोरोना के कारण स्कूल बंदी से लगभग 90% लोग शिक्षा की पहुंच से बाहर हो गए।
  • लगभग 40 % लोअर मिडिल आय वाले देश कोरोना से उत्पन्न शिक्षा जोखिम से बचाव में सफल नहीं हो पाए। सामाजिक व डिजिटल वंचना ने समाज के वंचित वर्ग से शिक्षा को दूर कर दिया।
  • यद्यपि रेडियो , टेलीविज़न तथा ऑनलाइन प्लैटफॉर्म्स के माध्यम से शिक्षा देने का प्रयास किया जा रहा है परन्तु इसकी क्षमता क्लासरूम से कम है।
  • यहाँ भी वैश्विक तकनीकी विभाजन स्पष्ट दृष्टिगोचर होता है क्योंकि जहाँ अधिक आय वाले देश लगभग पूर्ण रूप से ऑनलाइन प्लैटफॉर्म्स का उपयोग कर रहे वहीँ निम्न तथा मध्य आय वर्ग में ऑनलाइन प्लैटफॉर्म्स का उपयोग 55 % से 70 % है तथा गरीब देश शिक्षा विस्तार हेतु रेडियो तथा टेलीविज़न पर निर्भर है।
  • कई निम्न मध्य आयवर्ग के देशों द्वारा नवीन शिक्षक भर्ती तथा रेमेडियल क्लासेज पर विचार किया जा रहा है
  • इबोला क्राइसिस के उपरांत कई लड़कियां दोबारा विद्यालय न जा सकीं अतः इस प्रकार के स्वास्थ्य संकट भविष्य पर भी संकट उत्पन्न करते हैं।
  • भारत ने अपनी शिक्षा को समानता हेतु ऑनलाइन प्लैटफॉर्म्स रेडियो तथा टेलीविज़न तीनो का प्रयोग किया है। क्योंकि भारत की असमानता भी अधिक है

प्रमुख अनुशंसा

  • एजुकेशन फॉर आल के सिद्धांत हेतु राष्ट्र राज्य की सीमाओं से परे साझा मानवता के सिद्धांत पर विचार करना आवश्यक है।
  • सभी राष्ट्रों को अपनी क्षमता के अनुसार डिजिटल बुनियादी ढांचा तथा डिजिटल शिक्षा पर ध्यान केंद्रित करना होगा।

यूनेस्को

  • संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक तथा सांस्कृतिक संगठन (यूनेस्को) संयुक्त राष्ट्र का एक घटक निकाय है। इसका कार्य शिक्षा, प्रकृति तथा समाज विज्ञान, संस्कृति तथा संचार के माध्यम से अंतराष्ट्रीय शांति को बढ़ावा देना है। संयुक्त राष्ट्र की इस विशेष संस्था का गठन 16 नवम्बर 1945 को हुआ था। इसका उद्देश्य शिक्षा एवं संस्कृति के अंतरराष्ट्रीय सहयोग से शांति एवं सुरक्षा की स्थापना करना है,
  • यूनेस्को के 193 सदस्य देश हैं और 11 सहयोगी सदस्य देश और दो पर्यवेक्षक सदस्य देश हैं। । इसका मुख्यालय पेरिस (फ्रांस) में है।
  • भारत 1946 से यूनेस्को का सदस्य देश है।

क्या है सतत विकास लक्ष्य 4 :

  • गुणवत्तापूर्ण शिक्षा. समावेशी और समान गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना तथा सबके लिए आजीवन सीखने के अवसरों का निर्माण

प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्म निर्भर निधि (PM SVANidhi)

चर्चा में क्यों

  • आवास एवं शहरी कार्य सचिव, श्री दुर्गा शंकर मिश्रा ने पीएम स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि, "पीएम स्वनिधि" पोर्टल के बीटा संस्करण की शुरुआत की। डिजिटल प्रौद्योगिकी समाधान की सहायता से, इस पोर्टल में योजना के अंतर्गत लाभ प्राप्त करने के लिए उपयोगकर्ताओं को एकीकृत सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

पोर्टल से सम्बंधित अन्य तथ्य

  • सिडबी द्वारा योजना प्रबंधन के लिए एंड-टू-एंड समाधान प्रदान करने के लिए एक एकीकृत आईटी मंच विकसित किया जा रहा है, जो योजना कार्यान्वयन के लिए पीएम स्वनिधि का साझेदार है। इस पोर्टल के माध्यम से विभिन्न योजना कार्यों की सुविधा प्रदान की जाएगी जैसे ऋण आवेदन प्रवाह, मोबाइल ऐप, आवेदकों के लिए ई-केवाईसी, यूआईडीएआई, उदयमित्र, एनपीसीआई, पीएआईएसए, ऋणदाताओं, राज्यों, यूएलबी और अन्य हितधारकों के साथ एकीकरण, डिजिटल प्रोत्साहनों की गणना और ब्याज सब्सिडी का भुगतान आदि।
  • डिजिटल भुगतान एग्रीगेटरों के साथ लाभार्थियों को जोड़कर उन्हें डिजिटल लेन-देन के लिए आकर्षित करना, इस योजना की महत्वपूर्ण विशेषताओं में से एक है। मंत्रालय को इन सभी की ओर से उत्कृष्ट प्रतिक्रिया मिली है। अमेजनपे, एफटीकैश, एमस्वाइप, पेटीएम, पेस्विफ और फोनपे ने अपने खर्चों को समावेशित करके विक्रेताओं को मुफ्त में इस पटल पर लाने की पेशकश की है।
  • इसके अतिरिक्त, इस पटल में पहले से शामिल बैंकों के अलावा, पोर्टल में 15 एमएफआई को शामिल किया गया है और आने वाले सप्ताहों में कई अन्य के शामिल होने की उम्मीद है। इसमे कार्यक्षमताओं को जोड़ने के लिए पोर्टल को लगातार अपग्रेड किया जाएगा।

क्या है पीएम स्वनिधि योजना?

  • आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय ने पीएम स्वनिधि योजना को 01 जून, 2020 को लॉन्च किया था। इसका उद्देश्य रेहड़ी-पटरी वालों को अपनी आजीविका शुरू करने के लिए सस्ती कार्यशील पूंजी ऋण मुहैया कराना है।
  • पीएम स्वनिधि योजना के तहत रेहड़ी-पटरी वालों के लिए एक विशेष माइक्रो क्रेडिट सुविधा प्रदान की जा रही है। इस योजना के तहत रेहड़ी-पटरी वाले 10 हजार रुपये तक की कार्यशील पूंजी ऋण ले सकते हैं जिसे एक वर्ष की अवधि में मासिक किश्तों में चुकाने होगा।
  • इस योजना के तहत देशभर में करीब 50 लाख रेहड़ी-पटरी वालों को फायदा मिलने की उम्मीद है। यह योजना 24 मार्च, 2020 और उससे पहले शहरी क्षेत्रों में वेंडिग कर रहे सभी रेहड़ी-पटरी वालों के लिए उपलब्ध है।

4 मीटर इंटरनेशनल लिक्विड मिरर टेलीस्कोप (आईएलएमटी)

चर्चा में क्यों?

  • 4 मीटर इंटरनेशनल लिक्विड मिरर टेलीस्कोप के जल्द ही चालू होने से अंतरिक्ष विज्ञान क्षेत्र में जल्द नैनीताल के नाम बड़ी उपलब्धि जुड़ने जा रही है। नैनीताल के मुक्तेश्वर स्थित देवस्थल में दस करोड़ की लागत से एशिया की सबसे बड़ी 4 मीटर इंटरनेशनल लिक्विड मिरर टेलीस्कोप (आईएलएमटी) की स्थापना लगभग पूरी हो चुकी है। आईएलएमटी प्रोजेक्ट से जुड़े वैज्ञानिकों का दावा है कि अक्तूबर में यह शुरू हो जाएगी।

Liquid Mirror Telescope

4 मीटर इंटरनेशनल लिक्विड मिरर टेलीस्कोप (आईएलएमटी) के बारे में

  • बेल्गो-इंडियन नेटवर्क फॉर एस्ट्रोनॉमी एंड एस्ट्रोफिजिक्स प्रोजेक्ट के तहत साल 2012 में इंटरनेशनल लिक्विड मिरर टेलीस्कोप (आईएलएमटी) के लिए एक प्रोजेक्ट तैयार किया गया। इसमें भारत, बेल्जियम के साथ कनाडा संयुक्त भागीदार बना।
  • दूरबीन स्थापित करने के लिए यूरोपियन देशों में नैनीताल स्थित आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान एवं शोध संस्थान (एरीज) के अधीन देवस्थल का चयन किया गया। आपको बता दे इससे पहले भारत ने बेल्जियम की मदद से एशिया की सबसे बड़ी 3.6 मीटर प्रकाशीय दूरबीन भी यहां स्थापित की है।
  • देवस्थल में एशिया की बड़ी दूरबीन स्थापित होने के बाद स्टार गठन, तारा समूहों, आकाशीय पिंडों की खोज, बाइनरीज स्टार्स, आकाशगंगाओं, सक्रिय गांगेय नाभिक, गुरुत्वाकर्षण लेंस प्रणाली समेत अनेक अनसुलझे अंतरिक्ष विषयों के शोधों को आगे बढ़ाया जाएगा।

क्या है लिक्विड मिरर दूरबीन?

  • मिरर दूरबीन सीमित आकाशीय क्षेत्र में लंबे अध्ययन के लिए प्रयोग होती है। दुनिया में फिलहाल लिक्विड मिरर दूरबीन चिली और कनाडा के पास ही है। इस दूरबीन में लेंस में मरकरी इस्तेमाल होने से यह दर्पण की तर्ज पर काम करता है। इससे टकराकर लौटने वाले प्रकाश को कैमरे में कैद कर अध्ययन किया जाता है, इसलिए इसे लिक्विड मिरर दूरबीन कहा जाता है। इसके तहत किसी तारामंडल या समूहों पर 5 वर्ष तक नजर रखी जाती है। इससे ब्रह्मांड को और करीब से जानने का मौका मिलेगा।

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