यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स (27 जून 2020)


यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स

Daily Hindi Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC, RPSC and All State PCS Examinations


टारपीडो डिकोय सिस्टम : मारीच

चर्चा में क्यों:-

  • हाल ही में उन्नत टारपीडो डिकोय सिस्टम ‘मारीच’ को नौसैनिक बेड़े में शामिल कर लिया गया है। मारीच उन्नत टारपीडो प्रणाली किसी भी टॉर्पीडो हमले को विफल करने में नौसेना की मदद करेगी।

क्या है मारीच?

  • इस एंटी टारपीडो डिकोय सिस्टम मारीच का डिज़ाइन और विकास स्वदेशी डीआरडीओ प्रयोगशालाओं (एनएसटीएल और एनपीओएल) में किया गया है।
  • टारपीडो का पता लगाने और टॉर्पीडो हमले को विफल के लिए यह एक अत्याधुनिक स्वदेशी प्रणाली है.
  • टारपीडो हमले के विरुद्ध यह प्रणाली किसी भी नौसेना की रक्षा उपायों को लागू करने में सहयोग प्रदान करने में सक्षम होगा।
  • यह प्रणाली आने वाले टारपीडो का पता लगाने, हटाने,भ्रमित करने और नष्ट करने में सक्षम है.
  • दुश्मन की लोकेशन मिलते ही मारीच को लॉन्च कर दिया जाता है जिसके उपरान्त यह लगातार अपनी स्थिति बदलते हुए रॉकेट लॉन्च करता रहता है।
  • मारीच उन्नत टारपीडो प्रणाली में कुल 10 रॉकेट लॉन्चर हैं। जहाँ मारीच से निकलने वाली किरणें दुश्मन को गुमराह करती हैं वहीँ दूसरी ओर सबमरीन अपनी लोकेशन बदलकर दुश्मन की सबमरीन को टारगेट कर लेती है।
  • सार्वजनिक क्षेत्र का रक्षा उपक्रम भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड इस डिकॉय सिस्टम के उत्पादन का कार्य करेगा।

Maareech Advanced Torpedo Defence System

इस प्रणाली से लाभ :-

  • यह प्रणाली रक्षा क्षेत्र की निर्भरता के साथ मेक इन इंडिया तथा आत्मनिर्भर भारत को सहयोग देगा।
  • इस प्रणाली के विकास से भारत दुनिया के उन देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है जिनके पास नौसेना प्लेटफार्म और हथियार प्रणालियों के व्यापक हाइड्रोडायनामिक मॉडल परीक्षण का कार्य करने की क्षमता है।

भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड

  • यह रक्षा क्षेत्र की सार्वजानिक नवरत्न कंपनी है।
  • इसकी स्थापना 1954 में की गई थी।
  • कंपनी मुख्यतया रक्षा संचार, रडार एंड मिसाइल सिस्टम , सोनार एवं फायर कंट्रोल सिस्टम पर कार्य करती है।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ)

  • रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय का आर एंड डी विंग है, जो अत्याधुनिक रक्षा प्रौद्योगिकियों और महत्वपूर्ण रक्षा प्रौद्योगिकियों और प्रणालियों में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए दिशा में कार्यरत है ।
  • डीआरडीओ का गठन 1958 में तकनीकी विकास प्रतिष्ठान (TDEs) और रक्षा विज्ञान संगठन (DSO) के साथ तकनीकी विकास एवं उत्पादन निदेशालय (DTDP) के पुनर्गठन से किया गया था।

नशा मुक्त भारत : वार्षिक कार्य योजना (2020-21)

चर्चा में क्यों?

  • केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री श्री रतन लाल कटारिया ने “अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ सेवन और तस्करी निरोध दिवस” के अवसर पर “सबसे ज्यादा प्रभावित 272 जिलों के लिए नशा मुक्त भारत : वार्षिक कार्य योजना (2020-21)” का ई-शुभारम्भ किया
  • सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय नशीले पदार्थों की मांग में कमी लाने के लिए एक नोडल मंत्रालय है, जो नशीले पदार्थों के दुरुपयोग को रोकने से जुड़े सभी पहलुओं का समन्वय और निगरानी करता है जिसमें समस्या की सीमा का आकलन, निवारक कदम, नशे से प्रभावित लोगों के उपचार और पुनर्वास, सूचना एवं जन जागरूकता का प्रसार शामिल है।
  • आपको बता दे प्रतिवर्ष 26 जून को पुरे विश्व में “अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ सेवन और तस्करी निरोध दिवस” के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष 2020 के इस दिवस की थीम (26 जून,“Better Knowledge for Better Care है।

नशा मुक्त भारत : वार्षिक कार्य योजना (2020-21)

  • नशा मुक्त भारत वार्षिक कार्य योजना, 2020-21 में सबसे ज्यादा प्रभावित 272 जिलों पर ध्यान केन्द्रित किया गया है।
  • नशा मुक्ति हेतु नारकोटिक्स ब्यूरो, सामाजिक न्याय द्वारा जागरूकता और स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से उपचार के संयुक्त प्रयासों से इसके निदान हेतु प्रयास आरम्भ किया गया है।

कार्य योजना के भाग इस प्रकार हैं :

  1. जागरूकता फैलाने से जुड़े कार्यक्रम;
  2. उच्च शैक्षणिक संस्थानों, विश्वविद्यालय परिसरों और विद्यालयों पर जोर;
  3. अस्पतालों में उपचार सुविधाओं पर जोर
  4. सेवा प्रदाता के लिए क्षमता निर्माण कार्यक्रम।
  • इसका प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के क्रम में एनएपीडीडीआर के अंतर्गत कार्यक्रमों के लिए निगरानी प्रक्रिया में राज्य सरकारों को भी शामिल किया गया है।
  • नेशनल सर्वे ऑन एक्स्टेंट एंड पैटर्न ऑफ सब्सटैंस यूज इन इंडिया के निष्कर्षों और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो के दृष्टिकोण से आपूर्ति के लिहाज से संवेदनशील जिलों की सूची तैयार की गई है

नशा मुक्ति हेतु अन्य पहल :-

  • मंत्रालय ने 2018-2025 की अवधि के लिए नशीले पदार्थों में कमी लाने को एक राष्ट्रीय कार्य योजना भी तैयार की है, जिसका उद्देश्य प्रभावित लोगों और उनके परिवारों को शिक्षा, नशा मुक्ति और पुनर्वास की एक बहु-स्तरीय रणनीति के माध्यम से नशाखोरी के नकारात्मक प्रभावों में कमी लाना है।
  • मंत्रालय स्वैच्छिक संगठनों के माध्यम से नशे के आदियों की पहचान, उपचार और पुनर्वास के लिए समुदाय आधारित सेवाएं उपलब्ध कराता है।
  • मंत्रालय नशा मुक्ति केन्द्र चलाने के लिए देश भर के एनजीओ को वित्तीय सहायता उपलब्ध कराता है।
  • मंत्रालय ने नशीले पदार्थों के पीड़ितों, उनके परिवारों और व्यापक स्तर पर समाज की सहाचता के लिए 24x7 राष्ट्रीय टोल फ्री नशा मुक्ति हैल्पलाइन नंबर 1800110031 भी स्थापित किया है।

आसियान का 36 वां शिखर सम्मेलन

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आसियान के 36 वां शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस वर्ष 2020 के सम्मेलन की मेजबानी वियातनाम कर रहा है जिसके कारण वियतनामी प्रधानमंत्री गुयेन जुआन फुच इस सम्मलेन के अध्यक्ष है।

आसियान का 36 वां शिखर सम्मेलन

सम्मलेन से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदु

  • इस शिखर सम्मलेन का मुख्य बल कोविड-19 की चुनौतियों पर रहा क्योंकि इसके गंभीर दुष्प्रभाव के कारण सिंगापुर, इंडोनेशिया, थाईलैंड और मलेशिया समेत आसियान की अग्रणी अर्थव्यस्थाएं इस सदी की सबसे गंभीर आर्थिक मंदी का सामना कर रही हैं।
  • वियतनाम द्वारा शिखर वार्ता उपरान्त आसियान राष्ट्रों की तरफ से मसौदा विज्ञप्ति में कहा, “हम क्षेत्र में और विश्व पर कोरोना वायरस वैश्विक महामारी के कारण आई अभूतपूर्व चुनौतियों एवं इसकी कीमत को पहचानते हैं। हम मानवीय और सामाजिक आर्थिक स्थिति पर कोविड-19 के कारण उत्पन्न चुनौतियों एवं कीमतों को समझते हैं और उन लक्षित नीतियों को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध हैं जो यह विश्वास जगाए कि आसियान इस नाजुक संघर्ष से अग्रिम मोर्चे पर लोहा लेने के लिए तैयार है।
  • इस सम्मलेन में उच्च प्रथामिकता के तहत आसियान कोविड-19 प्रतिक्रिया कोष स्थापित किया जाएगा जिसका प्रयोग चिकित्सीय आपूर्ति एवं सुरक्षात्मक उपकरणों की खरीद में सदस्य राष्ट्रों की मदद करना है।
  • इस सम्मलेन में आसियान देशों के द्वारा चीन की क्षेत्रीय प्रतिस्पर्धा के विरुद्ध एकजुटता भी प्रदर्शित किया किया गया।

आसियान क्या है?

  • आसियान का पूरा नाम दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के संगठन (Association of Southeast Asian Nations-ASEAN) है| इसकी स्थापना 1967 में पांच देशों द्वारा की गयी थी| इस संगठन का उद्देश्य क्षेत्र में राजनैतिक, सुरक्षा, आर्थिक विकास और सामाजिक तथा सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ाना हैं|
  • आसियान देशों की कुल संख्या 10 है जिनमे इंडोनेशिया, थाईलैंड, सिंगापुर, मलेशिया, फिलीपीन्स, वियतनाम, म्यांमार, कंबोडिया, ब्रूनेई और लाओस जैसे दक्षिण पूर्वी एशियाई देश शामिल हैं|आसियान का मुख्यालय इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में स्थित है।
  • आर्थिक सामरिक और सांस्कृतिक नज़रिये से भारत का आसियान देशों के साथ सम्बन्ध काफी महत्त्वपूर्ण रहा है साल 1992 में भारत आसियान देशों का क्षेत्रीय स्टार पर साझेदार बनने के बाद वर्ष 1996 से ही आसियान शिखर सम्मलेन में शिरकत करता रहा है|

जल जीवन मिशन (JJM)

चर्चा में क्यों?

  • केन्द्रीय जल शक्ति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने गोवा के मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में 2021 तक ग्रामीण क्षेत्रों को 100 प्रतिशत कार्यशील घरेलू नल कनेक्शन (एफएचटीसी) उपलब्ध कराने की राज्य की योजना पर खुशी जाहिर की है।
  • गोवा 2021 तक सभी ग्रामीण घरों के लिए 100 प्रतिशत एफएचटीसी सुनिश्चित करने की योजना बना रहा है। राज्य में 2.6 लाख घरों में से 2.29 लाख को पहले ही घरेलू नल कनेक्शन (एफएचटीसी) उपलब्ध कराए जा चुके हैं। सचिव, पेयजल एवं स्वच्छता, गोवा की अध्यक्षता वाली एक बैठक में 2020-21 के लिए जेजेएम के कार्यान्वयन को वार्षिक कार्य योजना प्रस्तुत की गई, जिसमें गोवा ने 2021 तक 100 प्रतिशत नल कनेक्शन उपलब्ध कराने का भरोसा दिलाया और ऐसा करके गोवा इस उपलब्धि को हासिल करने वाले शुरुआती कुछ राज्यों में से एक होगा तथा 100 प्रतिशत ‘हर घर जल’ राज्य बन जाएगा।
  • वर्ष 2020-21 में गोवा को पंचायती राज संस्थानों के लिए 15वें वित्त आयोग अनुदान के रूप में 75 करोड़ रुपये मिलेंगे और इस कोष के 50 प्रतिशत हिस्से को अनिवार्य रूप से जल आपूर्ति एवं स्वच्छता पर व्यय करना होगा। एसबीएम (जी) के अंतर्गत उपलब्ध कराई गई धनराशि को घरों से उत्सर्जित जल (ग्रे वाटर) के शोधन और पुनः उपयोग से संबंधित कार्य में इस्तेमाल किया जाना है।

जल जीवन मिशन (JJM)

क्या है जल जीवन मिशन (JJM)?

  • 'जल जीवन मिशन' (जेजेएम) का उद्देश्य देश के प्रत्येक ग्रामीण परिवार को पीने के पानी के लिए एक एफएचटीसी उपलब्ध कराना है ताकि परिवार को किफायती दर पर निर्धारित गुणवत्ता के अनुरूप और नियमित रूप से पर्याप्त मात्रा में पीने के पानी मिल सके जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार हो सके।
  • केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने 13.08.2019 को जल जीव मिशन को मंजूरी दी थी । इसके तहत 2024 तक प्रत्येक ग्रामीण परिवार को पीने के पानी की आपूर्ति करने वाले घरेलू नल कनेक्शन प्रदान करना है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, देश के 17.87 करोड़ ग्रामीण घरों में से, लगभग 14.6 करोड़ में यानी 81.67 प्रतिशत के पास अभी भी घरेलू पानी के नल कनेक्शन नहीं हैं। जल जीवन मिशन पर कुल परियोजना लागत लगभग 3.60 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान है जिसमें केंद्रीय अंशदान 2.08 लाख करोड़ रूपए होगा। हिमालयी और पूर्वोत्तर राज्यों के लिए केन्‍द्र और राज्‍यों के बीच अंशदान 90:10; के अनुपात में तथा अन्य राज्यों के लिए 50:50 और संघ शासित प्रदेशों के लिए यह 100 प्रतिशत होगा।

डेली करेंट अफेयर्स को पीडीऍफ़ में डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें



<< << मुख्य पृष्ठ पर वापस जाने के लिये यहां क्लिक करें