यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स (27 अगस्त 2020)

Daily Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC, RPSC and All State PCS Examinations


यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स

Daily Hindi Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC, RPSC and All State PCS Examinations


निर्यात तैयारी सूचकांक (ईपीआई)

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में नीति आयोग ने निर्यात तैयारी सूचकांक (ईपीआई)-2020 पर रिपोर्ट जारी की है।

NITI Aayog Releases Report on Export Preparedness Index (EPI) 2020

महत्वपूर्ण बिन्दु

  • भारत का प्रति व्यक्ति निर्यात 241 डॉलर पर है। वहीं, दक्षिण कोरिया में प्रति व्यक्ति निर्यात 18,000 डॉलर पर है तो वहीं, चीन में यह 18,000 डॉलर पर है। ऐसे में भारत में निर्यात के लिए बहुत अधिक संभावनाएं मौजूद हैं।
  • विश्व निर्यात में भारत की हिस्सेदारी सिर्फ 1.7 प्रतिशत है, जिसे भारत सरकार द्वारा इस दशक में पाँच प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
  • एपीडा द्वारा पहचाने गए क्लस्टर के विकास के लिए एएफसी कार्य करेगा और इसके लिए विभिन्न मंत्रालयों की योजनाओं के समन्वय से संपूर्ण मूल्य श्रृंखला में विभिन्न परियोजनाओं को लागू करेगा।

निर्यात तैयारी सूचकांक (ईपीआई)

  • भारतीय अर्थव्यवस्था में विश्व स्तर पर एक मजबूत निर्यातक बनने की असीम क्षमता है। इस क्षमता का उपयोग करने के लिए, यह महत्वपूर्ण है कि भारत अपने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ओर मुड़े और उन्हें देश के निर्यात प्रयासों में सक्रिय सहभागी बनाये। इस विजन को प्राप्त करने की एक कोशिश में, निर्यात तैयारी सूचकांक 2020 राज्यों की संभावनाओं एवं क्षमताओं का मूल्यांकन करता है।
  • ईपीआई का उद्वेश्य भारतीय राज्यों की निर्यात तैयारी और निष्पादन की जांच करनना ,चुनौतियों और अवसरों की पहचान करना, सरकारी नीतियों की प्रभावोत्पादकता को बढ़ाना और एक सुविधाजनक नियामकीय संरचना को प्रोत्साहित करना इत्यादि है।
  • ईपीआई की संरचना में 4 स्तंभ- नीति, व्यवसाय परितंत्र, निर्यात परितंत्र, निर्यात निष्पादन तथा 11 उप स्तंभ - निर्यात संवर्धन नीति, संस्थागत संरचना, व्यवसाय वातावरण, अवसंरचना, परिवहन संपर्क, वित्त की सुविधा, निर्यात अवसंरचना, व्यापार सहायता, अनुसंधान एवं विकास अवसंरचना, निर्यात विविधीकरण और विकास अनुकूलन शामिल हैं।

ईपीआई -2020 के निष्कर्ष

  • ईपीआई -2020 में गुजरात को शीर्ष स्थान हासिल हुआ है। महाराष्ट्र और तमिलनाडु इस सूचकांक में क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं ।
  • ईपीआई -2020 रिपोर्ट के मुताबिक छह तटीय राज्य गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, ओडिशा, कर्नाटक और केरल पहले 10 राज्यों में शुमार हैं।
  • मैदानी क्षेत्र के राज्यों में राजस्थान का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा है। इसके बाद तेलंगाना और हैदराबाद का स्थान आता है।
  • हिमालयी अर्थात पहाड़ी राज्यों की बात की जाए तो ईपीआई -2020 में उत्तराखंड शीर्ष पर रहा। इसके बाद त्रिपुरा और हिमाचल प्रदेश का स्थान आता है।
  • केंद्रशासित प्रदेशों में दिल्ली का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा है। उसके बाद गोवा और चंडीगढ़ का स्थान आता है।

निर्यात बढ़ाने हेतु ईपीआई -2020 के सुझाव

  • निर्यात, आत्मनिर्भर भारत अभियान का अभिन्न हिस्सा है और भारत को जीडीपी और विश्व व्यापार में निर्यात की हिस्सेदारी को बढ़ाने के लिए लगातार कोशिश जारी रखनी चाहिए।
  • भारत सरकार को आने वाले वर्षों में विश्व व्यापार में भारत की हिस्सेदारी को दोगुना करने का प्रयत्न करना चाहिए ।
  • राज्यों को निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एक अलग से विभाग बनाने पर विचार करना चाहिए।
  • निर्यात तैयारी सूचकांक (ईपीआई) सभी हितधारकों को राष्ट्रीय एवं राज्यीय दोनों ही स्तरों पर निर्यात परितंत्र को सुदृढ़ बनाने के लिए दिशा- निर्देशित करेगा।

हरिकेन लॉरा (Hurricane Laura)

चर्चा में क्यों?

  • कोरोना महामारी ( Corona Epidemic ) से सबसे अधिक प्रभावित देशों में से एक संयुक्त राज्य अमेरिका पर अब चक्रवाती तूफान लॉरा का एक और संकट आया है।
  • कैटेगरी 4 में वर्गीकृत हरिकेन लॉरा ( Hurricane Laura) अपना खतरनाक रूप धारण कर चुका है जिससे यह तूफान यहाँ भारी तबाही मचा सकता है।
  • हरिकेन लॉरा के कारण अमेरिका के फ्लोरिडा ( Florida Coast ) और खाड़ी तट ( Gulf Coast ) पर भारी नुकसान की संभावना है।
  • इस तूफान के कारण अरकांसस (Arkansas) और ओहियो (Ohio) के अलावा टेनेसी वैली (Tennessee valleys) में बाढ़ का भी खतरा है।

Hurricane Laura

क्या होते है हरिकेन (Hurricane)?

  • हरिकेन एक प्रकार का ‘उष्णकटिबंधीय चक्रवात’ (tropical cyclone) होता है|
  • उष्णकटिबंधीय चक्रवातों में हरिकेन सबसे अधिक शक्तिशाली एवं विनाशकारी तूफान होते हैं|
  • जब किसी तूफान की अधिकतम गति 74 मील प्रति घंटे हो जाती है तो उसे “हरिकेन” कहा जाता है| तूफ़ान की गति के अनुसार हरिकेन का वर्गीकरण किया जाता है| हरिकेन” की गति 157 मील प्रति घंटे से भी ज्यादा हो सकती है|

क्या होते है उष्णकटिबंधीय चक्रवात?

  • परिवर्तनशील , अस्थिर व उच्च गतिशील हवाओं (वायु) का ऐसा चक्र, जिसके केंद्र में निम्न वायुदाब तथा बाहर उच्च वायुदाब होता है, उसे ‘चक्रवात’( cyclone) की संज्ञा दी जाती है।
  • अवस्थिति के आधार पर चक्रवात दो प्रकार के होते हैं- उष्णकटिबंधीय चक्रवात (Tropical Cyclones) तथा शीतोष्ण कटिबंधीय या वाताग्री चक्रवात (Temperate Cyclones)।
  • उत्तरी गोलार्द्ध में उष्णकटिबंधीय चक्रवातों को हरिकेन, टाइफून आदि के नामों से जाना जाता है।
  • उष्णकटिबंधीय चक्रवात 5° से 30° उत्तर तथा 5° से 30° दक्षिणी अक्षांशों के बीच सागरीय क्षेत्र में उत्पन्न होते हैं।
  • कोरिऑलिस बल के न्यूनतम या नगण्य होने के कारण उष्णकटिबंधीय चक्रवात भूमध्य रेखा के नजदीक उत्पन्न नही होते हैं।
  • दक्षिणी गोलार्द्ध में उष्णकटिबंधीय चक्रवात घड़ी की सुइयों की दिशा (Clockwise) में तथा उत्तरी गोलार्द्ध में घड़ी की सुइयों की विपरीत दिशा में (Counter-Clockwise) तथा चलते हैं।
  • संयुक्त राष्ट्र के ‘विश्व मौसम संगठन’ (world metereological organisation-WMO) के द्वारा उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के नामकरण हेतु सूचियाँ तैयार की जाती हैं|

‘स्वास्थ्य आंकड़ा प्रबंधन नीति’

चर्चा में क्यों?

  • राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन (एनडीएचएम) के तहत लोगों से एकत्रित गोपनीय स्वास्थ्य आंकड़ों की सुरक्षा के लिए सरकार ने मान्य कानूनों और विनियमों के अनुपालन के साथ ही न्यूनतम मापदंडों के एक ड्रॉफ्ट का प्रस्ताव रखा है।

संबन्धित जानकारी

  • ‘स्वास्थ्य आंकड़ा प्रबंधन नीति’ का मसौदा ‘आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ के क्रियान्वयन के लिए जिम्मेदार राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) ने जारी किया है।
  • यह मसौदा राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन की सरकारी वेबसाइट पर डाला गया है और उस पर लोगों से तीन सितंबर तक राय मांगी गयी है।
  • इस मसौदा नीति में ‘व्यक्तियों के निजी एवं संवेदनशील आंकड़ों के सुरक्षित उपयोग/रखरखाव’ के लिए एक प्रारूप तैयार करने की कोशिश की गयी है।
  • ये आंकड़े राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य पारितंत्र का हिस्सा हैं। दस्तावेज के अनुसार राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य परितंत्र (एनडीएचई) के तहत जुटाये गये आंकड़े केंद्रीय स्तर पर, राज्य या केंद्रशासित स्तर और स्वास्थ्य सुविधा केंद्र पर न्यूनता के सिद्धांत का पालन करते हुए संभालकर रखे जायेंगे।
  • दस्तावेज के अनुसार संघीय ढांचे में ऐसे प्रारूप का विकास जरूरी हो जाता है जिसका गोपनीय स्वास्थ्य आंकड़ों की निजता की सुरक्षा के लिए पूरे एनडीएचई में इस्तेमाल किया जा सके।

राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन के बारे में

  • स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने पूरे देश के लिए एक “नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन” की घोषणा की थी।
  • इस मिशन के तहत, प्रत्येक भारतीय को हेल्थ आईडी प्रदान की जाएगी। इस हेल्थ आईडी में व्यक्ति की पिछली चिकित्सा स्थिति, उपचार और निदान से संबंधित सभी जानकारी होगी।
  • हर मरीज का पूरा मेडिकल डेटा रखने के लिए अस्पताल, क्लीनिक और डॉक्टर्स को एक सेंट्रल सर्वर से लिंक किया जाएगा। यानी इसमें अस्पताल, क्लीनिक और डॉक्टर भी रजिस्टर होंगे।
  • डॉक्टर और मरीज की तरह ही प्रत्येक स्वास्थ्य सुविधा जो एक यूनिक इलेक्ट्रॉनिक पहचान दी जाएगी।
  • निजी रिकॉर्ड्स में नागरिक की सभी स्वास्थ्य संबंधी जानकारियाँ सम्मिलित होंगी। जब एक व्यक्ति अपने रिकॉर्ड दिखाने की अनुमति देगा तभी कोई डॉक्टर या दूसरा व्यक्ति उस नागरिक की सारी जानकारी देख पाएगा।
  • अगर कोई व्यक्ति किसी तरह का कैश ट्रांसफर स्कीम का लाभ उठाना चाहता है तो ही उसे अपनी हेल्थ आईडी को आधार कार्ड से लिंक करना होगा और अगर ऐसा नहीं है तो आधार कार्ड से लिंक करने की कोई जरुरत नहीं पड़ेगी।

राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (Nationally Determined Contribution-NDC)

चर्चा में क्यों?

  • नीति आयोग 27 अगस्त को राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान- एशिया के लिए परिवहन पहल (एनडीसी-टीआईए) के भारत के घटक का वर्चुअल शुभारंभ करेगा।

NDC-TIA कार्यक्रम के बारे में

भारत, वियतनाम और चीन में कार्बन मुक्त परिवहन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से, NDC-TIA एक कार्यक्रम है जोकि प्रकृति संरक्षण और परमाणु सुरक्षा के जर्मन मंत्रालय (बीएमयू) के अंतर्राष्ट्रीय जलवायु पहल (IKI) द्वारा समर्थित है। इसके अलावा इसमें 7 संगठन भी कॉन्सॉर्टियम के रूप ने शामिल है:

  1. डॉयचे गेसल्सचाफ्ट फर इंटरनेशनेल ज़ुसमेनारबीट (GIZ) GmbH
  2. स्वच्छ परिवहन पर अंतर्राष्ट्रीय परिषद (ICCT)
  3. विश्व संसाधन संस्थान (WRI)
  4. अंतर्राष्ट्रीय परिवहन मंच (ITF)
  5. अगोरा वेर्चरस्वेन्द (AGORA)
  6. सतत, कम कार्बन परिवहन (SLoCaT) फाउंडेशन पर साझेदारी
  7. 21 वीं शताब्दी के लिए अक्षय ऊर्जा नीति नेटवर्क ई.वी. (REN21)
  • भारत में (SLoCaT को छोड़कर) सभी को छह कंसोर्टियम संगठनों द्वारा योजनाओं को कार्यान्वित किया जाता है । भारत सरकार की ओर से, देश की प्रमुख थिंक टैंक NITI Aayog इसका कार्यान्वयन भागीदार है।
  • एनडीसी-टीआईए कार्यक्रम की अवधि 4 वर्ष है और यह भारत और अन्य भागीदार देशों को विभिन्न कार्यकलापों के माध्यम से क्षेत्रीय योगदान के द्वारा बड़ी संख्या में हितधारकों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए दीर्घकालिक लक्ष्य प्राप्त करने की अनुमति देगा। यह उनके NDC को प्राप्त करने और 2025 NDC के परिवहन क्षेत्र में उनकी सहभागिता को बढ़ाने की दिशा में योगदान देगा।
  • यह कार्यक्रम भारत में परिवहन, ऊर्जा और जलवायु हितधारकों को आगामी वर्ष के लिए योजनाबद्ध परियोजना गतिविधियों के बारे में सूचित करेगा।
  • यह भारत के CO 2 उत्सर्जन को कम करने वाले प्रयासों से जुड़ी परिवहन चुनौतियों को उजागर करने का अवसर भी प्रदान करेगा।
  • एनडीसी-टीआईए इंडिया कंपोनेंट भारत में परिवहन को कार्बन रहित करने और ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन में कमी के उपायों पर तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए एक बहु-हितधारक संवाद मंच स्थापित करने पर ध्यान केंद्रित करेगा।
  • एनडीसी-टीआईए कार्यक्रम भारत की सरकारी एजेंसियों, स्थानीय निर्णयकर्ताओं, शोधकर्ताओं, उद्योग विशेषज्ञों, थिंक टैंक और नागरिक समाज संगठनों के साथ निकट सहयोग और समन्वय में काम करेगा।

क्या है राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान

  • पेरिस समझौते में राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (Nationally Determined Contribution) की संकल्पना को प्रस्तावित किया गया था।
  • दिसंबर 2015 में पेरिस में हुये संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (UNFCCC) के COP-21 के दौरान यह समझौता हुआ था।
  • यह एक प्रकार से प्रत्येक राष्ट्र द्वारा ऐच्छिक तौर पर अपने लिये उत्सर्जन के लक्ष्यों का निर्धारण करने की अपेक्षा है।