यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स (26 जून 2020)


यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स

Daily Hindi Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC, RPSC and All State PCS Examinations


कोहला हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट (Kohala hydropower project)

चर्चा में क्यों?

  • भारत से सीमा पर तनाव एवं भारत की आपत्तियों के बावजूद के बीच एक चीनी कंपनी व पाकिस्तान और चीन की सरकारों के बीच 2.4 बिलियन अमरीकी डॉलर की लागत से झेलम नदी पर कोहला में 1,124 मेगावॉट जलविद्युत परियोजना के निर्माण के लिए एक त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए गए।
  • PoK में चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के तहत बीजिंग द्वारा 1,124 मेगावाट का कोहला हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को स्थापित किया जा रहा है।

China–Pakistan Economic Corridor (CPEC)

क्या है कोहला हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट?

  • CPEC प्रोजेक्ट के तहत कोहला हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट को PoK में बहने वाली झेलम नदी के ऊपर निर्माण किया जायेगा। इसका उद्देश्य पाकिस्तान को स्वच्छ और कम लागत वाली बिजली उपलब्ध करानी है। इसके पहले चीन ने CPEC के तहत दियामर बाशा परियोजना को भी मंजूरी दी थी।

क्या है दियामर बाशा परियोजना?

  • 2010 से पाकिस्तान POK के गिलगित-बाल्टिस्तान में सिंधु नदी पर दियामर बाशा बांध बनाने की कोशिश कर रहा है लेकिन आर्थिक तंगी के कारण यह संभव हो नहीं पा रहा था। कुछ समय पहले पाकिस्तानी सेना की कमर्शियल विंग ने इस बांध के निर्माण हेतु CPEC के तहत चीनी कंपनी चाइना पावर के साथ समझौता किया है जिसके कारण इस परियोजना में तेजी आने की संभावना बढ़ गई है।

क्या है CPEC परियोजना?

  • चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना OBOR(ONE BELT ONE ROAD) का हिस्सा है। इसके तहत पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट को बलूचिस्तान, POK, होते हुए चीन के शिनजिआंग प्रांत से जोड़ा जाएगा। इस परियोजना में पाकिस्तान में बंदरगाह, सड़कों, पाइपलाइन्स, दर्जनों फैक्ट्रियों और एयरपोर्ट जैसे कई अवसंरचनात्मक निर्माण शामिल है। इसके जरिए चीन अरब सागर के ग्वादर बंदरगाह तक अपनी कनेक्टिविटी मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

क्या है OBOR परियोजना?

  • ओबोर (ONE BELT ONE ROAD) चीन की एक महत्वाकांक्षी परियोजना है जिसे 21वी सदी का समुद्री सिल्करोड भी कहा जाता है एवं इसके जरिए वह प्राचीन सिल्क मार्ग को पुनः विकसित कर रहा है। इसके परियोजना के जरिए चीन सड़कों, रेल, बंदरगाह, पाइपलाइनों और अन्य बुनियादी सुविधाओं के जरिये मध्य एशिया से लेकर यूरोप और फिर अफ्रीका तक स्थलीय व समुद्री मार्ग तैयार कर रहा है।

क्यों भारत के लिए यह चिंता का सबब है?

  • चीन और पाकिस्तान के द्वारा यह निर्माण कार्य पाक अधिकृत कश्मीर में किया जा रहा है जो भारत का एक अभिन्न हिस्सा है इसके अलावा इस योजना से चीन की सेना की पहुंच POK तक हो गई हैं। अगर हम चीन द्वारा संचालित नीतियों जैसे स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स, BCIM (बांग्लादेश-चीन-म्यांमार-भारत) कारीडोर और CPEC को समन्वित रूप से देखें तो चीन चारों ओर से भारत को घेर लेगा जो कि भारत के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

गोधन न्याय योजना

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में छत्तीसगढ़ सरकार ने गोधन न्याय योजना शुरू करने का एलान किया है। इसका उद्देश्य गौ-पालन को आर्थिक रूप से लाभदायी बनाने तथा खुले में चराई पर रोकथाम लगाना है।

गोधन न्याय योजना

पृष्ठभूमि

  • भारत के सभी राज्यों समेत छत्तीसगढ़ में खुले में पशुओं के चरने की परंपरा रही है, जो मवेशियों और फसलों दोनों को ही नुकसान पहुंचाता है।
  • शहरों की सड़कों पर आवारा जानवरों के कारण सड़क दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती हैं।
  • प्रायः जानवरों से दूध निकालने के बाद उन्हें खुले में छोड़ दिया जाता है, जो अन्य विभिन्न समस्याओं का कारण बनता है।

गोधन न्याय योजना के बारे में

  • गोधन न्याय योजना के तहत पशु पालकों को लाभ पहुंचाने के राज्य सरकार किसानों से गाय का गोबर खरीदेगी। गौ-पालन को आर्थिक रूप से लाभदायी बनाने तथा खुले में चराई की रोकथाम के किसानों से गाय का गोबर खरीद उससे वर्मी कंपोस्ट खाद बनाएगी। इसके उपरान्त प्राप्त वर्मी कंपोस्ट खाद को बाद में किसानों, वन विभाग और उद्यानिकी विभाग को दिया जाएगा।
  • गोधन न्याय योजना की शुरुआत 21 जुलाई को हरेली त्योहार के दिन होगी। आपको बता दे छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य होगा जो गोबर की खरीद करेगा।
  • इस योजना के तहत गोबर की खरीदी निर्धारित दर पर होगी वहीं सहकारी समितियों से वर्मी कम्पोस्ट की‍ बिक्री होगी। गोबर की खरीद की दर तय करने पांच सदस्यीय मंत्री मण्डल की उप समिति गठित की गई है।

गोधन न्याय योजना के लाभ

  • गोधन न्याय योजना से गांवों में रोजगार और अतिरिक्त आय के अवसर बढ़ेंगे।
  • इस योजना से जैविक कृषि को बढ़ावा मिलेगा।
  • पशुओं के अतिचारण से मृदा का संरक्षण किया जाना संभव होगा
  • इससे ना केवल सड़क दुर्घटनाओं पर नियन्त्र लगाया जा सकेगा बल्कि इससे जुड़े अन्य विभिन्न समस्याओं को भी कम किया जा सकेगा ।

ई-ब्लड सर्विसेस ऐप

चर्चा का कारण

  • केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी (आईसीआरएस) द्वारा विकसित मोबाइल ऐप ‘ई-ब्‍लड सर्विसेस’ शुरूआत की।

ऐप से संबन्धित जानकारी

  • इस एप्‍लीकेशन को 2015 में शुरू की गई डिजिटल इंडिया योजना के अंतर्गत सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ़ एडवांस कंप्यूटिंग (सीडैक) की ई-रक्तकोष टीम ने विकसित किया है।
  • इस ऐप के माध्यम से, एक समय में चार यूनिट रक्त की मांग की जा सकती है और ब्लड बैंक इसे ले जाने के लिए व्‍यक्ति का 12 घंटे तक इंतजार करेगा।
  • ऐप के माध्यम से एक बार अनुरोध करने के बाद, मांगी गई इकाइयां आईआरसीएस, एनएचक्यू ब्लड बैंक के ई-रक्‍तकोष डैशबोर्ड में दिखाई देती हैं और यह निर्दिष्ट समय के भीतर सुनिश्चित डिलीवरी की अनुमति देता है।
  • इस सुविधा से रक्त की मांग करने वाले के लिए रक्त प्राप्त करना आसान हो जाएगा और सेवा में पूर्ण पारदर्शिता और एकल खिड़की के उपयोग का अतिरिक्त लाभ होगा।

रेड क्रॉस सोसाइटी

  • अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रॉस सोसाइटी एक गैर-सरकारी संगठन है जिसका मुख्यालय स्विट्ज़रलैंड के जिनेवा में स्थित है। यह युद्ध से प्रभावितों, शरणार्थियों, नागरिकों तथा कैदियों की सहायता करता है।
  • इसकी स्थापना हेनरी डुनेंट द्वारा 17 फरवरी 1863 में की गयी थी। अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रॉस सोसाइटी को तीन बार (1917,1944 तथा 1963) में नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है।
  • गौरतलब है की भारतीय रेडक्रोस सोसाइटी की स्थापना 1920 में हुई थी, इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है।
  • केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी के अध्यक्ष भी हैं।

शहरी मिशनों की 5वीं वर्षगांठ

चर्चा में क्यों

  • प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) (पीएमएवाई-यू), स्मार्ट सिटी मिशन (एससीएम) और अटल मिशन फॉर रेजुवनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (अमृत) की 5वीं वर्षगांठ के अवसर पर आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा एक वेबिनार आयोजन किया गया। इस ऑनलाइन कार्यक्रम का आयोजन शहरी मिशनों की उपलब्धियों और कार्यान्वयन को बढ़ावा देने के लिए किया गया था।

अटल मिशन फॉर रेजुवनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (अमृत)

  • अटल मिशन फॉर रेजुवनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (अमृत) की शुरुआत 25 जून, 2015में की गयी थी।
  • मिशन का लक्ष्य पीने के पानी की आपूर्ति का सार्वभौमिक कवरेज तथा वर्षा जल निकासी के साथ-साथ सीवरेज एवं सेप्टेज की कवरेज एवं उपचार क्षमताओं में उल्लेखनीय बढ़ोतरी, गैर-मोटरीकृत शहरी परिवहन एवं हरित स्थान, पार्क आदि सुनिश्चित करना है।
  • अमृत शहरों में सुधार के कार्यान्वयन के कारण भारत की रैंकिंग जो निर्माण अनुमतियों में व्यवसाय करने की सुगमता में विश्व बैंक डूइंग बिजनेस रिपोर्ट 2018 में 181 के स्थान पर थी, 2020 में 27वें स्थान पर पहुंच गई।

स्मार्ट सिटी मिशन (एससीएम)

  • स्मार्ट सिटी मिशन (एससीएम) की स्थापना 25 जून, 2015 को ऐसे शहरों के निर्माण के उद्देश्य से की गई जिसमें अहम बुनियादी ढांचे का विकास हो और जो अपने निवासियों को गुणवत्तापूर्ण जीवन, एक स्वस्छ और दीर्घकालिक वातावरण और ‘स्मार्ट’ साधनों से पूर्ण सुविधा प्रदान करे।
  • स्मार्ट सिटी मिशन के तहत विकसित एकीकृत कमान और नियंत्रण केंद्र (आईसीसीसी) ने शहरों को कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में काफी मदद की है।
  • स्मार्ट सिटी मिशन के तहत क्लाइमेट स्मार्ट सिटी और डेटा स्मार्ट सिटी दो प्रमुख कार्यक्रम हैं।
  • स्मार्ट सिटी मिशन म्युनिसिपल बॉन्ड के जरिए धन उगाहने में रुचि लेने वाले शहरों की भी मदद कर रहा है। हाल ही में, म्युनिसिपल बॉन्ड के लिए यूएस ट्रेजरी विभाग से तकनीकी मदद हासिल करने के लिए 6 शहरों का चयन किया गया है।

प्रधानमंत्री आवास योजना - शहरी (पीएमएवाई-यू)

  • 25 जून 2020 को प्रधानमंत्री आवास योजना - शहरी (पीएमएवाई-यू) के भी पांच साल पूरे हो गए।
  • यह योजना ‘सभी के लिए आवास’ के विजन के साथ वर्ष 2022 तक शहरी भारत के सभी पात्र लाभार्थियों को पक्का मकान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वर्ष 2015 में लॉन्च की गई थी।
  • पांच साल में आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (एमओएचयूए) को पीएमएवाई (यू) के तहत लगभग 1.12 करोड़ मकानों की सत्यापित मांग प्राप्त हुई है।
  • जिनमें से 65 लाख मकानों की नींव डाल दी गई है और 35 लाख मकान निर्मित किए जा चुके हैं एवं देश भर में लाभार्थियों के बीच इनका वितरण भी हो चुका है।

किफायती किराया आवास परिसर (एआरएचसी) योजना

  • आत्मनिर्भर भारत’ की तर्ज पर शहरी प्रवासियों/गरीबों को जीवन यापन में आसानी प्रदान करने के लिए किफायती किराया आवास परिसर (एआरएचसी) योजना की घोषणा 14 मई, 2020 को माननीय वित्त मंत्री द्वारा की गई है।
  • एआरएचसी योजना के लाभार्थी ईडब्ल्यूएस/एलआईजी श्रेणियों के शहरी प्रवासी/गरीब होंगे जिनमें मजदूर, शहरी गरीब (रेहड़ी-पटरी वाले या स्ट्रीट वेंडर, रिक्शा चालक, अन्य सेवा प्रदाता, इत्यादि), औद्योगिक श्रमिक, शैक्षणिक/स्वास्थ्य संस्थान, आतिथ्य सेक्टर, दीर्घकालिक पर्यटक, विद्यार्थी या ऐसी अन्य कोई भी श्रेणी शामिल है जिसे राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा उपयुक्त माना जाता है।

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