यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स (25 जून 2020)


यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स

Daily Hindi Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC, RPSC and All State PCS Examinations


पशुपालन बुनियादी ढांचा विकास फंड की स्थापना

चर्चा में क्यों?

आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने आत्मनिर्भर भारत अभियान प्रोत्साहन पैकेज के तहत 15,000 करोड़ रुपये के पशुपालन बुनियादी ढांचा विकास कोष(एएचआईडीएफ) की स्थापना के लिए अपनी मंज़ूरी दी है।

एएचआईडीएफयोजना के लाभ

  • पशुपालन बुनियादी ढांचा विकास फंड (एएचआईडीएफ) के द्वारा निजी क्षेत्र में डेयरी एवं मीट प्रसंस्करण के लिए बेहतरीन बुनियादी ढांचे के विकास को प्रोत्साहन मिलेगा।
  • यह पशु आहार संयंत्र की स्थापना में, निवेश के अति आवश्यक प्रोत्साहन को बढ़ावा देने के लिए उचित सुविधा उपलब्ध कराएगा।
  • एएचआईडीएफ योजना के योग्य लाभार्थी-किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), एमएसएमई, सेक्शन 8 कंपनियां, निजी कंपनियां और निजी उद्यमी होंगे।
  • सरकार योग्य लाभार्थी को ब्याज पर 3 प्रतिशत की आर्थिक सहायता मुहैया कराएगी। योग्य लाभार्थियों को मूल कर्ज के लिए दो वर्ष की अधिस्थगन अवधि के साथ कर्ज उपलब्ध कराया जाएगा और कर्ज की पुनर्भुगतान अवधि 6 साल होगी।
  • भारत सरकार 750 करोड़ रुपये के क्रेडिट गारंटी फंड की स्थापना भी करेगी जिसका प्रबंधन नाबार्ड करेगा।
  • एएचआईडीएफ के अंतर्गत कर्जदार को क्रेडिट सुविधा की 25 प्रतिशत तक गारंटी कवरेज दी जाएगी।
  • योग्य लाभार्थियों द्वारा प्रसंस्करण और मूल्य वर्धन इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश से इन प्रसंस्कृत और मूल्य वर्धित सामानों का निर्यात बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।
  • एएचआईडीएफ में निवेश से न सिर्फ निजी निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा बल्कि यह किसानों को भी पशुपालन में निवेश बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करेगा जिससे उत्पादन में वृद्धि होगी और उनकी आय में भी बढ़ोतरी होगी।
  • इस योजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर लगभग 35 लाख लोगों को आजीविका का साधन मिल सकेगा।

सहकारी बैंकों का विनियमन

चर्चा में क्यों

हाल ही मे केंद्रीय कैबिनेट द्वारा अध्यादेश के जरिए सभी 1540 सहकारी और बहु-राज्य सहकारी बैंकों को रिजर्व बैंक के दायरे में लाने का फैसला लिया गया है।

अध्यादेश का प्रभाव

  • भारतीय रिजर्व बैंक के सभी बैंकिंग नियम इन सहकारी बैंकों पर लागू होंगे।
  • इससे 8 करोड़ 60 लाख खाताधारकों की जमा राशि सुरक्षित होगी। इन 1540 बैंकों में 4.84 लाख करोड़ रुपए जमा है।
  • बैंकिंग रेगुलेशन एक्ट में संशोधन से सरकारी बैंकों में प्रोफेशनलिज्म बढ़ेगा और को ऑपरेटिव गवर्नेंस में सुधार होगा।

क्या होते हैं सहकारी बैंक

  • सहकारी बैंक वे बैंक होते हैं, जिनका गठन एवं कार्यकलाप सहकारिता के आधार पर होता है।
  • सहकारी बैंकों का स्वामित्व और नियंत्रण इसके सदस्यों द्वारा ही किया जाता है, जो लोकतांत्रिक रूप से निदेशक मंडल का चुनाव करते हैं।
  • इनका नियमन राज्य सरकार तथा भारतीय रिजर्व बैंक के बैंकिंग विनियमन अधिनियम, 1949 के साथ-साथ बैंकिंग कानून अधिनियम, 1965 के तहत किया जाता है।

प्रधान मंत्री मुद्रा योजना : शिशु ऋण

सन्दर्भ :-

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने पात्र उधारकर्ताओं को प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) के अंतर्गत सभी शिशु ऋण खाताधारकों को 12 महीने की अवधि के लिए 2 प्रतिशत की ब्याज सबवेंशन (छूट) को मंजूरी दी।

प्रधान मंत्री मुद्रा योजना : शिशु ऋण (Mantri Mudra Yojana)

पृष्ठ्भूमि :-

इस कदम का उद्देश्य आत्मनिर्भर भारत के अंतर्गत MSME's की मदद करना है। वर्तमान कोविड संकट ने सूक्ष्म , मध्यम व लघु उद्योगों को नकारात्मक रूप से प्रभावित किया है अतः यह पहल इन उद्योगों के पुनुरुत्थान हेतु सहायक होगी। यह योजना उन शिशु ऋणधारकों तक विस्तारित होगी जिनका ऋण 31 मार्च 2020 तक गैर निष्पादित परिसंपत्ति के रूप में वर्णित नहीं था।

योजना का कार्यान्वयन :-

योजना का कार्यान्वयन भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (SIDBI) के माध्यम से की जाएगी और 12 महीने तक परिचालन में रहेगी। इस योजना के अंतर्गत उधारकर्ता अधिस्थगन की अवधि के उपरांत 1 वर्ष तक अर्थात 1 सितम्बर 2020 से 31 अगस्त 2021 तक रहेगी। इस योजना की लागत लगभग 1542 करोड़ होगी।

शिशु ऋण :-

  • प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अंतर्गत ,रु. 50,000 आय सृजन गतिविधियों के लिए प्रदान किए गए ऋण को शिशु ऋण कहा जाता है।
  • 31 मार्च 2020 तक, लगभग 1.62 लाख करोड़ रुपये की कुल ऋण राशि के साथ PMMY के शिशु वर्ग के तहत लगभग 9.37 करोड़ ऋण बकाया थे।

प्रधान मंत्री मुद्रा योजना :-

  • यह योजना अप्रैल `2015 में प्रधानमंत्री द्वारा MSME's के लिए आरम्भ की गई थी।
  • यह लघु वित्तीयन का प्रयोग कर आर्थिक विकास को गति देने हेतु एक बेहतर पहल थी ।
  • यह आर्थिक न्याय से सामाजिक न्याय की पूर्ती करता है क्योंकि इसमें समाज का सर्वहारा वर्ग लाभान्वित होता है।

ऋण की श्रेणियाँ :-

  • शिशु ऋण - 50000 तक
  • किशोर ऋण : 50001 से 500000 तक
  • तरुण ऋण : 500001 से 10 लाख तक

वार्षिक क्षय रोग प्रतिवेदन

सन्दर्भ :-

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन द्वारा हाल ही में क्षय रोग पर वार्षिक प्रतिवेदन , वर्चुअल रूप से प्रस्तुत किया गया |

वार्षिक क्षय रोग प्रतिवेदन (Annual TB Report 2020)

रिपोर्ट के मुख्य विन्दु :-

  • रिपोर्ट के अनुसार, 2019 में 24 लाख से अधिक टीबी रोगियों को अधिसूचित किया गया है। यह मात्रा 2018 की तुलना में 14 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है।
  • NIKSHAY प्रणाली के माध्यम से टीबी रोगियों की लगभग पूर्ण ऑन-लाइन अधिसूचना प्राप्त की गई है।
  • 2017 में 10 लाख से अधिक मामलों के मुकाबले गुमनाम मामलों की संख्या घटकर 2.9 लाख हो गई है। इसका अर्थ है कि अब क्षय रोग की रिपोर्टिंग बढ़ रही है।
  • 6.78 लाख टीबी रोगियों के साथ निजी क्षेत्र की अधिसूचनाओं में 35 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
  • आणविक निदान की आसान उपलब्धता के कारण, 2018 में 6 प्रतिशत की तुलना में 2019 में टीबी के निदान वाले बच्चों का अनुपात बढ़कर 8 प्रतिशत हो गया।
  • सभी अधिसूचित टीबी रोगियों के लिए एचआईवी परीक्षण का प्रावधान 2018 में 67 प्रतिशत से बढ़कर 2019 में 81 प्रतिशत हो गया।
  • उपचार सेवाओं के विस्तार से अधिसूचित रोगियों की उपचार सफलता दर में 12% सुधार हुआ है। 2019 में 81 % था जबकि यह 2018 में 69 % था ।
  • 4.5 लाख से अधिक डॉट सेंटर देश भर के लगभग हर गाँव में उपचार प्रदान कर रहे हैं।

NIKSHAY ने कार्यक्रम के चार प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT) योजनाओं के प्रावधान का भी विस्तार किया -

  • टीबी के मरीजों को निक्षय पोषण योजना (एनपीवाई)
  • उपचार समर्थकों को प्रोत्साहन
  • निजी प्रदाताओं के लिए प्रोत्साहन
  • अधिसूचित आदिवासी क्षेत्रों में टीबी रोगियों को परिवहन प्रोत्साहन

क्षय रोग तथा एसडीजी

  • सतत विकास लक्ष्य के लक्ष्य 3 में क्षय रोग के निदान की बात की गई है।

क्षय रोग

क्षय रोग विभिन्न प्रकार के माइक्रोबैक्टीरियम के कारण होता है । क्षय रोग आमतौर पर फेफड़ों में फैलता है, पर ये शरीर के अन्य भागों को प्रभावित कर सकता है । टीबी संक्रमण, संक्रमित लोगों के खांसने, छींकनें, या सांस से फैलता है। यह एक गंभीर रोग है, लेकिन उचित और नियमित उपचार से इसे ठीक किया जा सकता है ।

क्षय रोग उन्मूलन वर्ष 2017-2025 हेतु राष्ट्रीय रणनीतिक योजना’-

आरएनटीसीपी (संशोधित राष्ट्रीय क्षय रोग नियन्त्रण कार्यक्रम) ने वर्ष 2025 तक भारत में टीबी नियंत्रण और उन्मूलन के लिए 'क्षयरोग वर्ष 2017-2025' (एनएसपी) के लिए 'राष्ट्रीय रणनीतिक योजना' जारी की है। एनएसपी टीबी उन्मूलन के अनुसार "पता लगाना (डिटेक्ट)- उपचार करना (ट्रीट)- रोकथाम (प्रिवेंट) –निर्माण (बिल्ड)" (डीटीपीबी) को चार रणनीतिक स्तंभों में एकीकृत किया गया है।

निक्षय:

टीबी अधिसूचना की सुगम्यता के लिए आरएनटीसीपी ने सरकारी और निजी स्वास्थ्य देखभाल सुविधा केंद्रों के लिए केस-आधारित, वेब-आधारित टीबी निगरानी प्रणाली विकसित की है जिसे "निक्षय" (https://nikshay.gov.in) कहा जाता है।

डेली करेंट अफेयर्स को पीडीऍफ़ में डाउनलोड करने के लिए यहां क्लिक करें



<< << मुख्य पृष्ठ पर वापस जाने के लिये यहां क्लिक करें