यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स (25 अगस्त 2020)

Daily Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC, RPSC and All State PCS Examinations


यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स

Daily Hindi Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC, RPSC and All State PCS Examinations


डीएनए प्रौद्योगिकी (उपयोग और अनुप्रयोग) विनियमन विधेयक 2019

चर्चा में क्यों?

  • विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर संसद की स्थायी समिति ने अपनी ड्राफ्ट रिपोर्ट में कहा है कि जाति आधारित प्रोफाइलिंग के लिए डीएनए प्रौद्योगिकी (उपयोग और अनुप्रयोग) विनियमन विधेयक में दिये गए प्रावधानों का दुरुपयोग किया जा सकता है। इस विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर संसदीय स्थायी समिति की अध्यक्षता जयराम रमेश कर रहे है।

पृष्ठभूमि

  • व्यक्ति की पहचान करने के लिए डीएनए तकनीक के इस्तेमाल को नियंत्रित करने वाले डीएनए प्रौद्योगिकी विनियमन विधेयक को जांच के लिए संसद की स्थायी समिति के पास भेजा गया था। पिछले मानसून सत्र के दौरान जुलाई में यह विधेयक लोकसभा में पारित हो चुका है। समिति के अध्यक्ष कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने जनता से इस विधेयक पर सुझाव मांगे थे।

डीएनए प्रौद्योगिकी (उपयोग और अनुप्रयोग) विनियमन विधेयक 2019 (DNA Technology Bill)

समिति द्वारा ड्राफ्ट रिपोर्ट में प्रकट की गयी चिंता

  • डीएनए प्रोफाइल किसी व्यक्ति की अत्यंत संवेदनशील जानकारी जैसे कि वंशावली, त्वचा का रंग, व्यवहार, बीमारी, स्वास्थ्य की स्थिति और रोगों जैसी जाकारी का दुरुपयोग व्यक्तियों और उनके परिवारों को लक्षित करने के साथ इसका उपयोग किसी विशेष जाति / समुदाय को आपराधिक गतिविधियों से जोड़ने के लिए भी किया जा सकता है।
  • विधेयक में गोपनीयता और अन्य सुरक्षा उपायों की उपेक्षा की गई है।
  • भविष्य की जांच के लिए संदिग्धों, अपराधियों, पीड़ितों और उनके रिश्तेदारों के डीएनए प्रोफाइल को संग्रहीत करने का प्रस्ताव है जिसका कोई कानूनी या नैतिक औचित्य नहीं है।
  • समिति ने सिफारिश की है कि जैविक नमूनों को नष्ट करने और डेटाबेस से डीएनए प्रोफाइल को हटाने के प्रस्तावों की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए।
  • विधेयक अपराध स्थल पर पाए गए डीएनए को संरक्षित करने की अनुमति देता है, भले ही अपराधी को दोषी ठहराया गया हो। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि यदि व्यक्ति निर्दोष पाया गया है तो उसका डीएनए प्रोफाइल डेटा बैंक से तुरंत हटाया जाना चाहिए।
  • डीएनए प्रोफाइल को डेटा बैंकों में संग्रहीत जाना और डीएनए प्रोफाइल के भंडारण, निजता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन करता है और किसी सार्वजनिक उद्देश्य की पूर्ति नहीं करता है। मजबूत डेटा संरक्षण कानून के अभाव में इसके दुरूपयोग होने की अत्यधिक सम्भावना है।

डीएनए प्रौद्योगिकी (उपयोग और अनुप्रयोग) विनियमन विधेयक 2019

  • अपराधों की जांच और लापता व्यक्तियों की पहचान करने के लिए डीएनए आधारित प्रौद्योगिकियों का उपयोग करने के उद्देश्य यह विधेयक संसद में लाया गया है ताकि देश की न्याय वितरण प्रणाली को और मजबूत किया जा सके।

विधेयक की प्रमुख विशेषताएं:

  • विधेयक में गुमशुदा व्यक्तियों तथा देश के विभिन्न हिस्सों में पाए जाने वाले अज्ञात शवों की जानकारी एकत्र करने और बड़े पैमाने पर आपदाओं में पीड़ितों की पहचान स्थापित करने के लिए सक्षम प्रावधान किए गए है।
  • इसमें पीड़ितों की पहचान, संदिग्धों, लापता व्यक्तियों और अज्ञात मानव अवशेषों के लिए एक राष्ट्रीय डेटाबेस बनाए जाने का प्रावधान किया गया है। इसके लिए राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर डीएनए डाटा बैंक स्थापित किए जाएंगे।
  • इस विधेयक के अनुसार, डीएनए प्रोफाइल, डीएनए नमूने और रिकॉर्ड सहित सभी डीएनए से संबन्धित जानकारी का उपयोग केवल संदिग्ध/अपराधी व्यक्ति की पहचान करने के लिए ही किया जाएगा, किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं किया जाएगा।
  • इसके विधेयक में डीएनए प्रोफाइल की जानकारी के किसी भी दुरुपयोग के लिए सजा के रूप में तीन साल तक की जेल और 1 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
  • इस विधेयक में किसी व्यक्ति की पहचान स्थापित करने के लिए डीएनए नमूनों का विश्लेषण वाली डीएनए प्रयोगशालाओं को मान्यता देने के लिए एक डीएनए नियामक बोर्ड की स्थापना का भी पप्रावधान किया गया है।

यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (Unified Payments Interface-UPI)

चर्चा में क्यों?

  • दिल्ली उच्च न्यायालय ने ''गूगल पे'' द्वारा नियमों के उल्लंघन के आरोप लगाने वाली याचिका पर केंद्र और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से जवाब मांगा है।

यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (Unified Payments Interface-UPI) (National Payments Corporation of India - NPCI)

याचिका से संबन्धित जानकारी

  • याचिका में गूगल पे पर आरबीआई के डाटा स्थानीयकरण, भंडारण और साझा करने के मानकों संबंधी दिशा-निर्देशों के उल्लंघन के आरोप लगाते हुए कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है।
  • याचिका में गूगल इंडिया डिजिटल सर्विस को यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस) प्रक्रिया के तहत अपने ऐप पर डाटा (विवरण) का भंडारण नहीं करने और इसे किसी तीसरे पक्ष के साथ साझा नहीं करने संबंधी एक शपथपत्र दायर करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया।

यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस क्या है?

  • एकीकृत भुगतान अन्तरापृष्ठ (Unified Payments Interface-UPI) भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम एवं भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा शुरू किया गया ऑनलाइन भुगतान का एक नया तरीका है।
  • यह अंतर बैंक लेनदेन को सुविधाजनक बनाता है।
  • इस इंटरफ़ेस को भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा नियंत्रित किया जाता है।
  • यह मोबाइल प्लेटफ़ॉर्म पर दो बैंक खातों के बीच तुरंत धनराशि स्थानांतरित करके काम करता है।

भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई)

  • भारत में खुदरा भुगतान और निपटान प्रणालियों के संचालन को एक छतरी के नीचे लाने के लिए एनपीसीआई का गठन किया गया था।
  • इसकी स्थापना 2008 में कंपनी अधिनियम 2013 की धारा 8 के तहत पंजीकृत एक गैर-लाभकारी संगठन के रूप में की गयी थी।
  • इसने देश में एक मजबूत भुगतान और निपटान बुनियादी ढांचा तैयार किया है।
  • एनपीसीआई रूपे कार्ड, तत्काल भुगतान सेवा (आईएमपीएस), यूपीआई, भारत इंटरफेस फॉर मनी (भीम), भीम आधार, नेशनल इलेक्ट्रॉनिक टोल कलेक्शन (एनईटीजी फास्टटैग) और भारत बिल पे जैसे खुदरा भुगतान उत्पादों के माध्यम से भुगतान की सुविधा को विकसित किया गया है।

सिन टैक्स और जीएसटी परिषद

चर्चा में क्यों?

  • सॉफ्ट ड्रिंक्स बनाने वाली कंपनियों की संस्था इंडिया बेवरेज एसोसिएशन (Indian Beverage Association-IBA) ने कोला(Cola) को सिन टैक्स (sin tax) कैटगरी से हटाने की मांग की है।
  • आईबीए ने इस बारे में जीएसटी काउंसिल और वित्त मंत्रालय को पत्र लिखा है ताकि जीएसटी काउंसिल की अगली बैठक में सिन टैक्स (sin tax) को हटाने पर विचार किया जा सके ।
  • गौरतलब है कि आईबीए में कोका-कोला, पेप्सिको, पार्ले एग्रो और रेड बुल जैसी बड़ी- बड़ी कंपनियां शामिल हैं।
  • वर्तमान में देश में नॉन अल्कोहॉलिक बेवरेज सेक्टर लगभग 70 हजार करोड़ रुपये का है। इसमें सॉफ्ट ड्रिंक्स, पैकेज्ड ड्रिंकिग वाटर, जूस आदि शामिल हैं। क्या होता है सिन टैक्स (sin tax)?
  • सिन टैक्स (sin tax) , एक प्रकार का उत्पाद कर(excise tax) है जो विशेष रूप से समाज और व्यक्तियों के लिए हानिकारक वस्तुओं पर लगाया जाता है: उदाहरण के लिए - शराब, तम्बाकू, कैंडी(candies), ड्रग्स, शीतल पेय, फास्ट फूड, कॉफी, चीनी, जुआ आदि।
  • सिन टैक्स (sin tax) को अनिष्ट कर और पाप कर के नामों से भी जाना जाता है।
  • अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था ‘जीएसटी’(GST) में शराब, तंबाकू, कोला(Cola) आदि जैसे समाज के नजरिये से हानिकारक या स्वास्थ्य के हिसाब से नुकसानदेह उत्पादों पर सिन टैक्स (sin tax) लगाया जाता है।

क्या है जीएसटी?

  • जीएसटी(वस्तु एवं सेवा कर), भारत में लागू एक अहम अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था है जिसे 1 जुलाई, 2017 को लागू किया गया था।
  • इस कर व्यवस्था में केन्द्र और राज्य सरकारों द्वारा अलग अलग दरों पर लगाए जाने वाले तमाम करों को हटाकर पूरे देश के लिए एक ही अप्रत्‍यक्ष कर प्रणाली लागू की गई है।
  • भारतीय संविधान में इस कर व्यवस्था को लागू करने के लिए 101वां संशोधन किया गया था।
  • सरकार व कई अर्थशास्त्रियों ने इसे आज़ादी के बाद सबसे बड़ा आर्थिक सुधार बताया है।

जीएसटी परिषद के बारे में

  • वस्तु एवं सेवा कर प्रणाली के तहत जीएसटी परिषद(Goods and Services Tax- GST Council) एक मुख्य निर्णय लेने वाली संस्था है जो कि जीएसटी कानून के अंतर्गत होने वाले कार्यो के संबंध में सभी महत्वपूर्ण निर्णय लेती है।
  • 101वें संविधान संशोधन अधिनियम से संविधान में अनुच्छेद 279A जोड़ा गया, जिसमें वस्तु एवं सेवा कर को लागू करने के लिए जीएसटी परिषद के गठन की बात कही गयी हैं।
  • जीएसटी परिषद केंद्र और राज्यों के लिए एक संयुक्त मंच होता है। इसमें निम्नलिखित सदस्य होते हैं :-
    1. केंद्रीय वित्त मंत्री, (अध्यक्ष)
    2. सदस्य के रूप में, केंद्रीय राज्य मंत्री (राजस्व)
    3. प्रत्येक राज्य और दिल्ली, पुदुचेरी एवं जम्मू-कश्मीर केंद्र-शासित प्रदेशों के वित्त या कराधान के प्रभारी मंत्री या सदस्य के रूप में नामित कोई अन्य मंत्री।
  • जीएसटी परिषद का प्रत्येक निर्णय बैठक में कम से कम कुल उपस्थित सदस्यों के 3/4 के बहुमत से मतदान करने के बाद लिया जाता है।
  • बैठक में कुल डाले गये मतों के 1/3 हिस्से मूल्य केंद्र सरकार के मतों का होता है बाकी सभी राज्य सरकारों का एक साथ मिलकर कुल डाले गये मतों का मूल्य 2/3 होता है।
  • जीएसटी परिषद के सदस्यों की कुल संख्या में से आधे के साथ बैठकों का कोरम गठित होता है।
  • गौरतलब है कि जीएसटी परिषद सहकारी संघवाद का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है जहाँ केंद्र और राज्यों दोनों को उचित प्रतिनिधित्व मिलता है।

पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (पीसीए), 1960

चर्चा में क्यों?

  • भारत सरकार पशु क्रूरता कानून को और सख्त बनाने पर विचार कर रही है। इससे पशु क्रूरता के लिए 50 रुपये का जुर्माना जल्द ही अतीत की बात हो सकती है।
  • हाल ही में कुछ सांसदों ने भी केंद्रीय पशुपालन और डेयरी मंत्री को पत्र लिखकर मौजूदा पशु क्रूरता से संबन्धित कानून को कठोर बनाने और जुर्माना बढ़ाने की मांग की है।

पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (पीसीए), 1960

क्या है जीएसटी?

  • जीएसटी(वस्तु एवं सेवा कर), भारत में लागू एक अहम अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था है जिसे 1 जुलाई, 2017 को लागू किया गया था।
  • इस कर व्यवस्था में केन्द्र और राज्य सरकारों द्वारा अलग अलग दरों पर लगाए जाने वाले तमाम करों को हटाकर पूरे देश के लिए एक ही अप्रत्‍यक्ष कर प्रणाली लागू की गई है।
  • भारतीय संविधान में इस कर व्यवस्था को लागू करने के लिए 101वां संशोधन किया गया था।
  • सरकार व कई अर्थशास्त्रियों ने इसे आज़ादी के बाद सबसे बड़ा आर्थिक सुधार बताया है।

पृष्ठभूमि

  • भारत में पशु क्रूरता कानून के कमजोर रहने की वजह से कई लोग पशुओं के साथ निर्ममता करने वाले आराम से बच निकलते थे।
  • केंद्रीय पशुपालन और डेयरी सचिव ने हाल ही में कहा है कि उनका मंत्रालय "मौजूदा कानून में संशोधन करके पशुओं के साथ क्रूरता के लिए मौजूदा दंड को बढ़ाने से संबंधित मुद्दे की सक्रियता से जांच कर रहा है।"

पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (पीसीए), 1960

  • पशु क्रूरता निवारण अधिनियम (पीसीए), 1960 के तहत अभी जानवरों के खिलाफ क्रूरता (यथा- मारना, प्रताड़ित करना, भूखा रखना, अंगों को काटना आदि ) के लिए 10 रुपये से लेकर 50 रुपये तक का जुर्माना लगता है।
  • 60 साल पुराने इस कानून के तहत अभी इनमें से किसी को भी संज्ञेय अपराध नहीं माना जाता है। केवल जानवरों की लड़ाई और शूटिंग मैच के आयोजन को ही इस कानून के तहत रखा गया है।
  • पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 में प्रावधान है कि पशुओं को सिर्फ बूचड़खानों में ही काटा जाएगा और बीमार व गर्भ धारण किए हुए पशुओं को काटने से मनाही है।