यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स (24 सितंबर 2020)

Daily Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC, RPSC and All State PCS Examinations


यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स

Daily Hindi Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC, RPSC and All State PCS Examinations


शिंकुन ला सुरंग (Shinkun La Tunnel)

चर्चा में क्यों?

  • राष्ट्रीय राजमार्ग और अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) ने विश्व की सबसे लंबी हाई-एल्टीट्यूड शिंकुन ला सुरंग के निर्माण के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) पर शीघ्रता से कार्य प्रारंभ कर दिया है। इसके साथ ही राष्ट्रीय राजमार्ग और अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) केन्द्र शासित प्रदेश लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले में इससे जुड़े उपमार्गों पर शीघ्रता से निर्माण करना प्रारंभ कर दिया है।

पृष्ठभूमि

  • गौरतलब है की कुछ समय पूर्व सरकार द्वारा निमू-पदम-दार्चा से होते हुए मनाली से लेह तक का वैकल्पिक रास्ता बनाने को मंजूरी प्रदान किया गया है जोकि श्रीनगर से जोजिला पास से गुजरने वाले मौजूदा मार्गों और सरचू होते हुए मनाली से लेह तक के मार्ग की तुलना में कम समय लेगा।

शिंकुन ला सुरंग के बारे में

  • भारत में शिंगो ला एक उच्च पर्वतीय दर्रा है जोकि जम्मू और कश्मीर और हिमाचल प्रदेश के बीच की सीमा पर स्थित है। इस दर्रे को लुगनाक घाटी- ज़ांस्कर में प्रवेश बिंदु के रूप में माना जा सकता है। ज़ांस्कर की तरफ से सबसे नज़दीकी गाँव कुर्गियाख है और लाहौल की तरफ सबसे नज़दीकी गाँव चिक्का है।
  • शिंकुन ला सुरंग बनने के बाद यह विश्व की सबसे लंबी हाई-एल्टीट्यूड सुरंग होगी।
  • इस सुरंग की लंबाई 13.5 किलोमीटर है और इस सुरंग के निर्माण के बाद हिमाचल प्रदेश के मनाली तथा कारगिल राजमार्ग को वर्षभर खुला रखने में मदद मिलेगी।
  • इसके लिए सड़क, परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग और अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) ने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) कार्य और केन्द्र शासित प्रदेश लद्दाख और हिमाचल प्रदेश के लाहौल-स्पीति जिले में इससे जुड़े उपमार्गों पर शीघ्रता से निर्माण करना प्रारंभ कर दिया है।

राष्ट्रीय राजमार्ग और अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड

  • राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, भारत सरकार की एक पूर्ण स्वामित्व वाली कंपनी है।
  • कंपनी पड़ोसी देशों के साथ,अंतर्राष्ट्रीय सीमा साझा करने वाले देश के हिस्सों में अंत: परस्पर संबद्ध (इंटर-कनेक्टिंग) सड़कों सहित राष्ट्रीय राजमार्ग एवं रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सड़कों को उन्नत बनाने, सर्वेक्षण करने, स्थापना करने, डिजाइन करने, निर्माण करने, प्रचालन करने, अनुरक्षण करने एवं उन्नयन करने का कार्य करती है।

लेजर गाइडेड एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल (ATGM)

चर्चा में क्यों?

  • 22 सितंबर 2020 को अहमदनगर में केके रेंज, आर्मर्ड कॉर्प्स सेंटर एंड स्कूल में एमबीटी अर्जुन टैंक से लेजर गाइडेड एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल (एटीजीएम) का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया।

लेजर गाइडेड एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल से संबन्धित जानकारी

  • इन परीक्षणों में, एटीजीएम ने 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित लक्ष्य को सफलतापूर्वक अपना निशाना बनाया।
  • लेजर गाइडेड एटीजीएम डेज़िग्नेशन की सहायता से अपने निर्धारित लक्ष्य पर जाकर सटीकता से हमला करना सुनिश्चित करती है।
  • इसके अलावा इसमें हीट (हाई स्पीड एक्सपेंडेबल एरियल टारगेट) वारहेड के जरिए एक्सप्लोसिव रिऐक्टिव आर्मर (ईआरए) प्रोटेक्टेड वेहिकल्स (बख़्तरबंद वाहनों) को भी उड़ाने की क्षमता है।
  • यह मिसाइल मॉडर्न टैंक्‍स से लेकर भविष्‍य के टैंक्‍स को भी नेस्‍तनाबूद करने में सक्षम होगी।
  • मिसाइल का हेड ऐसा है जो इसे मूविंग टारगेट को एंगेज करने की क्षमता देता है।
  • ATGM के जरिए कम ऊंचाई पर उड़ने वाले हेलिकॉप्‍टर्स को भी ढेर किया जा सकता है।
  • एटीजीएम को कई-प्लेटफ़ॉर्म लॉन्च क्षमता के साथ विकसित किया गया है और वर्तमान में एमबीटी अर्जुन में लगी बंदूक से फायर कर इसका तकनीकी मूल्यांकन किया जा रहा है।
  • आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (एआरडीई) पुणे ने हाई एनर्जी मेटेरियल रिसर्च लेबोरेटरी (एचईएमआरएल) पुणे और इंस्ट्रूमेंट्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (आईआरडीई) देहरादून के सहयोग से यह मिसाइल विकसित की है।

अन्य गाइडेड मिसाइल

  • भारत के पास 'नाग' जैसी गाइडेड मिसाइल पहले से है। फिलहाल उसे NAMICA मिसाइल कैरियर (Nag Missile Carrier) से छोड़ा जाता है। 'नाग' मिसाइल बड़े-बड़े टैंक्‍स को किसी भी मौसम में निशाना बना सकता है। इसमें इन्‍फ्रारेड भी है जो लॉन्‍च से पहले टारगेट को लॉक करता है। यह मिसाइल अचानक ऊपर उठती है कि फिर तेजी से ऐंगल पर मुड़कर अपने टारगेट की ओर जाती है।

ब्रुसेल्लोसिस रोग (Brucellosis Diseases)

चर्चा में क्यों?

  • डेयरी उद्योग को भारी नुकसान पहुंचाने वाले ब्रुसेलोसिस बीमारी को नियंत्रित करने के लिए हाल ही मे भारत सरकार के अनुसंधान निकाय आईसीएआर- आईवीआरआई ने हेस्टर बायोसाइंस लिमिटेड के साथ मिलकर एक नई पीढ़ी का टीका विकसित करने की तकनीक हासिल कर ली है। विदित है कि हेस्टर बायोसाइंस लिमिटेड ने ब्रूकेला एबोर्टस एस 19 डेल्टा वैक्सीन विकसित करने के लिए आईसीएआर-आईवीआरआई से समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।’’

ब्रुसेल्लोसिस रोग के बारे में

  • ब्रुसेल्लोसिस गाय, भैंस, भेड़, बकरी, शुकर एवं कुत्तों में फैलने वाली एक संक्रामक बीमारी हैं। ये एक प्राणीरूजा अथवा जीव जनति (Zoonotic) बीमारी है जो पशुओं से मनुष्यों एवं मनुष्यों से पशुओं में फैलती है। इस बीमारी से ग्रस्त पशु 7-9 महीने के गर्भकाल मे गर्भपात हो जाता है। ये रोग पशुशाला में बड़े पैमाने पर फैलता है तथा पशुओं में गर्भपात के लिए जिम्मेदार होता है जिससे भारी आर्थिक हानि होती है। ये बीमारी मनुष्य के स्वास्थ्य एवं आर्थिक दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण बमारी है। विश्व स्तर पर लगभग 5 लाख मनुष्य हर साल इस रोग से ग्रस्त हो जाते हैं।
  • गाय, भैंस में ये रोग ब्रूसेल्ला एबोरटस नामक जीवाणु द्वारा फैलता है। ये जीवाणू गाभिन पशु के बच्चेदानी में रहता है तथा अंतिम तिमाही में गर्भपात करता है। एक बार संक्रमित हो जाने पर पशु अपने पूरे जीवन काल तक इस जीवाणू को अपने दूध तथा गर्भाश्य के स्त्राव में निकालता है।

संक्रमण का मार्ग

  • पशुओं में ब्रुसेल्लोसिस रोग संक्रमित पदार्थ के खाने से, जननांगों के स्त्राव के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष सम्पर्क से, योनि स्त्राव से संक्रमित चारे के प्रयोग से तथा संक्रमित वीर्य से कृत्रिम गर्भाधान द्वारा फैलता है। मनुष्यों में ब्रूसेल्लोसिस रोग सबसे ज्यादा रोगग्रस्त पशु के कच्चे दूध पीने से फैलता है। कई बार गर्भपात होने पर पशु चिकित्सक या पशु पालक असावधानी पूर्व जेर या गर्भाश्य के स्त्राव को छूते है। जससे ब्रुसेल्लोसिस रोग का जीवाणु त्वचा के किसी कटाव या घाव से शरीर में प्रवेश कर जाता है।

लक्षण

  • पशुओं में गर्भावस्था की अंतिम तिमाही में गर्भपात होना इस रोग का प्रमुख लक्षण है। पशुओं में जेर का रूकना एवं गर्भाशय की सूजन एवं नर पशुओं में अंडकोष की सूजन इस रोग के प्रमुख लक्षण हैं। पैरों के जोड़ों पर सूजन आ जाती है जिसे हाइग्रोमा कहते हैं। मनुष्य को इस रोग में तेज बुखार आता है जो बार बार उतरता और चढ़ता रहता है तथा जोड़ों और कमर में दर्द भी होता रहता है। निदान
  • इस रोग का निदान अंतिम तिमाही में गर्भपात का इतिहास, रोगी पशु के योनि स्त्राव / दूध / रक्त / जेर की जांच एवं रोगी मनुष्य के वीर्य / रक्त की जांच करके की जाती है। गर्भपात के बाद चमड़े जैसा जेर कानिकलना इस रोग की खास पहचान है।

विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2020

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में लोकसभा में विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2020 पास हो गया। इस विधेयक का उद्देश्य विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम 2010 में संशोधन करना है।

संशोधन के मुख्य प्रावधान :-

  • संशोधन अधिनियम के द्वारा , कुछ व्यक्तियों को किसी भी विदेशी योगदान को स्वीकार करने के लिए निषेध कर दिया गया है। जिसमे चुनावी उम्मीदवार ,समाचार पत्रों के संपादक या प्रकाशक, न्यायाधीश, सरकारी कर्मचारी, किसी भी विधायिका के सदस्य, तथा राजनीतिक दल सम्मिलित हैं।
  • विधेयक इस सूची में लोक सेवकों (भारतीय दंड संहिता के तहत परिभाषित) को जोड़ता है। लोक सेवक में कोई भी व्यक्ति शामिल होता है जो सरकार की सेवा में होता है, तथा सरकार द्वारा उसे किसी भी सार्वजनिक कर्तव्य के प्रदर्शन के लिए पारिश्रमिक दिया जाता है।
  • अधिनियम के तहत, विदेशी योगदान को किसी अन्य व्यक्ति को तब तक स्थानांतरित नहीं किया जा सकता है जब तक कि ऐसे व्यक्ति को विदेशी योगदान स्वीकार करने के लिए पंजीकृत नहीं किया जाता है। यदि व्यक्ति प्राप्तकर्ता के रूप में पंजीकृत नहीं है तो उसे केंद्र सरकार से पूर्व अनुमति लेनी होगी। अधिनियम के तहत 'व्यक्ति' शब्द में एक व्यक्ति, एक एसोसिएशन या एक पंजीकृत कंपनी शामिल है।
  • अधिनियम में कहा गया है कि पंजीकृत होने या अनुमति प्राप्त करने के उपरान्त किसी भी व्यक्ति को पहचान पत्र के रूप में आधार कार्ड, किसी संस्था को अपने पदाधिकारियों, निदेशकों या प्रमुख अधिकारियों की आधार संख्या प्रदान करनी होगी । विदेशी निकाय होने ही स्थिति में उन्हें पहचान के लिए पासपोर्ट या ओवरसीज़ सिटीजन ऑफ इंडिया कार्ड की एक प्रति प्रदान करनी होगी।
  • अधिनियम के अंतर्गत एक पंजीकृत व्यक्ति को केवल उनके द्वारा निर्दिष्ट एक निर्धारित बैंक की एक शाखा में विदेशी योगदान को स्वीकार करना होगा। हालांकि, वे योगदान के उपयोग के लिए अन्य बैंकों में अधिक खाते खोल सकते हैं।
  • विधेयक में यह कहा गया है कि केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित भारतीय स्टेट बैंक, नई दिल्ली की ऐसी शाखा में बैंक द्वारा "एफसीआरए खाता" के रूप में निर्दिष्ट खाते में केवल विदेशी अंशदान प्राप्त किया जाना चाहिए।
  • विदेशी योगदान के अलावा कोई धन इस खाते में प्राप्त या जमा नहीं किया जाना चाहिए। प्राप्त योगदान को रखने या उपयोग करने के लिए व्यक्ति अपनी पसंद के किसी भी अनुसूचित बैंक में एक और एफसीआरए खाता खोल सकता है।
  • यदि किसी व्यक्ति ने (जिसने विदेशी अंशदान प्राप्त करने की अर्हता प्राप्त की हो ) नियमो का उलंघन किया हो तो केंद्र सरकार उनके पंजीकरण को रद्द करने की क्षमता रखती है।
  • अधिनियम के तहत, हर व्यक्ति को, जिसे पंजीकरण का प्रमाण पत्र दिया गया है,पंजीकरण समाप्ति के छह महीने के भीतर प्रमाणपत्र को नवीनीकृत करना होगा।
  • विधेयक उपबंध करता है कि सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रमाण पत्र को नवीनीकृत करने से पहले एक जांच का आयोजन कर सकती है जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि व्यक्ति धार्मिक रूपांतरण में, धन के विचलन या धन के दुरुपयोग के लिए दोषी नहीं पाया गया हो ।
  • अधिनियम के अंतर्गत , विदेशी योगदान प्राप्त करने वाले व्यक्ति को केवल उसी उद्देश्य के लिए इसका उपयोग करना चाहिए जिसके लिए योगदान प्राप्त होता है।उस उद्देश्य को प्राप्त करने के निम्मित निकाय उस राशि के 20% (संशोधन पूर्व 50%) का उपयोग ही प्रशासनिक व्यय हेतु कर सकता है।
  • विधेयक केंद्र सरकार को एक व्यक्ति को अपने पंजीकरण प्रमाण पत्र को समर्पण करने की अनुमति देने के लिए एक प्रावधान जोड़ता है।
  • अधिनियम के तहत, सरकार किसी व्यक्ति के पंजीकरण को 180 दिनों से अधिक की अवधि के लिए निलंबित कर सकती है। इस तरह के निलंबन को अतिरिक्त 180 दिन तक बढ़ाया जा सकता है

इस विधेयक से संबन्धित विवाद

  • प्रशासनिक प्रयोजनों के लिए विदेशी निधियों के उपयोग को सीमित करने संबंधी प्रावधान। यह प्रावधान अनुसंधान और पक्षसमर्थन संगठनों के प्रशासनिक कार्यों संबंधी लागतों को प्रभावित करेगा।
  • FCRA द्वारा अनुमोदित संस्थाओं के लिए ‘अनप्रयुक्त विदेशी अनुदान राशि को प्रयोग करने अथवा शेष विदेशी अनुदान को प्राप्त करने से रोकने के लिए’ केंद्र सरकार को अविलंबित जांच करने की अनुमति दिए जाने संबंधी प्रावधान।

विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम के बारे में

  • विदेशी योगदान के इस्तेमाल को नियमित करने के लिए भारत सरकार ने विदेशी योगदान की स्वीकृति और विनियमन के उद्देश्य से वर्ष 1976 में विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) लागू किया। वर्ष 2010 में इस अधिनियम संशोधन करते हुए कई नए प्रावधान भी जोड़े गये।
  • विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम के तहत राजनीतिक प्रकृति का कोई भी संगठन, ऑडियो, ऑडियो विजुअल न्यूज या करंट अफेयर्स कार्यक्रम के निर्माण और प्रसारण में लगे किसी भी संगठन को विदेशी योगदान स्वीकार करने के लिये प्रतिबंधित किया गया है।
  • विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम, 2010 को लोगों या एसोसिएशन या कंपनियों द्वारा विदेशी योगदान के इस्तेमाल को नियमित करने के लिए लागू किया गया था। राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा पहुंचाने वाली किसी भी गतिविधि के लिए विदेशी योगदान को लेने या इसके इस्तेमाल पर पाबंदी है।