यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स (24 अगस्त 2020)

Daily Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC, RPSC and All State PCS Examinations


यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स

Daily Hindi Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC, RPSC and All State PCS Examinations


पाक अधिकृत कश्मीर और CPEC

चर्चा में क्यों?

  • चीन और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद जम्मू कश्मीर में वस्तु स्थिति बदलने वाली एकतरफा कार्रवाई के विरोध में बयान जारी किया गया जिसे भारत ने खारिज कर किया है। इसके साथ ही भारत ने चीन- पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) पर भी अपना विरोध दर्ज करवाया।

यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग ...

पृष्ठभूमि

  • चीन और पाकिस्तान के विदेश मंत्री शुक्रवार को हैनान प्रांत में मिले। इस दौरान चीन ने जहां भारत और पाकिस्तान के बीत कश्मीर के मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में सुलझाने की बात कही है, वहीं पाकिस्तान ने शिनजियांग प्रांत के मुद्दे पर चीन का समर्थन किया है। इसके साथ ही इस बैठक में चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) की भी चर्चा हुई।
  • चीनी कश्मीर मुद्दे पर कहा कि “यह भारत एवं पाकिस्तान के बीच ऐतिहासिक मुद्दा है, यह एक वस्तुनिष्ठ तथ्य है और इस विवाद का हल संयुक्त राष्ट्र घोषणा-पत्र, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों और द्विपक्षीय समझौतों के जरिए शांतिपूर्ण एवं उचित तरीके से होना चाहिए। चीन ऐसी किसी भी एकतरफा कार्रवाई का विरोध करता है जिससे हालात जटिल होते हों।''

चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) क्या है?

  • चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना OBOR (ONE BELT ONE ROAD) का हिस्सा है।
  • इसके तहत चीन पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट को बलूचिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर (POK) होते हुए चीन के शिनजिआंग प्रांत से जोड़ा जाएगा।
  • इस परियोजना में पाकिस्तान में बंदरगाह, सड़कों, पाइपलाइन्स, फैक्ट्रियों और एयरपोर्ट जैसे कई अवसंरचनात्मक निर्माण शामिल है।
  • इसके जरिए चीन अरब सागर के ग्वादर बंदरगाह तक अपनी कनेक्टिविटी मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।

पाक अधिकृत कश्मीर कश्मीर के बारे में

  • पाक अधिकृत कश्मीर भारत के जम्मू व कश्मीर केन्द्र शासित प्रदेश का हिस्सा है।
  • पाक अधिकृत कश्मीर पर पाकिस्तान ने कबीलाई विद्रोहियों के साथ अपने सैनिक शामिल कर 1947 में अधिकार कर लिया था।
  • पाकिस्तान ने इसे गिलगित-बाल्टिस्तान और आजाद कश्मीर दो हिस्सों में बाँट रखा है।
  • चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) पाक अधिकृत कश्मीर के गिलगित-बाल्टिस्तान से होकर गुजरता है।

राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर परिषद

चर्चा में क्यों?

  • सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए राष्ट्रीय परिषद का गठन किया है। इस परिषद का गठन ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 के तहत किया गया है।

राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर परिषद (National Council for Transgender Persons)

राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर परिषद की संरचना

  • परिषद में ट्रांसजेंडर समुदाय के सदस्यों के साथ-साथ पांच राज्यों व केंद्र सरकार के 10 विभागों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
  • केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री इसके अध्यक्ष और राज्यमंत्री उपाध्यक्ष होंगे।
  • अन्य सदस्यों में स्वास्थ्य और परिवार कल्याण, गृह मंत्रालय, आवास और शहरी मामलों, अल्पसंख्यक मामलों, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, श्रम और रोजगार मंत्रालय के साथ-साथ कानूनी मामलों का विभाग, पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग और नीति आयोग के अधिकारी शामिल होंगे।
  • राज्य सरकार और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों में उत्तर, दक्षिण, पूर्व और पश्चिम तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र के एक-एक प्रतिनिधि होंगे।
  • परिषद में ट्रांसजेंडर समुदाय के पांच नामांकित सदस्य लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी, गोपी शंकर मदुरै, मीरा परिदा, ज़ैनब जावीद पटेल और काक चिंगताबम श्यामकंद शर्मा भी शामिल हैं।

राष्ट्रीय ट्रांसजेंडर परिषद के कार्य

  • परिषद् का कार्य किन्नरों के संबंध में नीतियां, कार्यक्रम, कानून और परियोजनाएं बनाने में केंद्र को सलाह देना।
  • ट्रांसजेंडर व्यक्तियों कर समानता हासिल करने और पूरी तरह भागीदारी करने के लिए बनाई गई नीतियों और कार्यक्रमों की निगरानी करना और नीतियों के प्रभाव का आकलन करना।
  • परिषद् के अन्य कार्य ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के मामले को देख रहे सरकार के सभी विभागों, अन्य सरकारी एवं गैर सरकारी संगठनों की गतिविधियों की समीक्षा करना और उनके बीच समन्वय करना।
  • इसके अलावा समय-समय पर केंद्र सरकार द्वारा निर्देशित अन्य कार्य। ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019
  • संसद द्वारा ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के सामाजिक, आर्थिक एवं शैक्षणिक सशक्तीकरण के लिये ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 पारित किया गया है।
  • इसके अनुसार ट्रांसजेंडर व्यक्ति वह व्यक्ति है जिसका लिंग जन्म के समय नियत लिंग से मेल नहीं खाता। इसमें ट्रांसमेन (परा-पुरुष) और ट्रांस-विमेन (परा-स्त्री), इंटरसेक्स भिन्नताओं और जेंडर क्वीर आते हैं।
  • यह अधिनियम ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के साथ शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवा, सार्वजनिक सेवाओं के उपभोग, संपत्ति अर्जन, आदि के मामलों में होने वाले भेदभाव पर प्रतिबंध लगाता है।
  • यह अधिनियम प्रत्येक ट्रांसजेंडर व्यक्ति को अपने परिवार के साथ रहने का अधिकार देता है। अगर किसी ट्रांसजेंडर व्यक्ति का निकट परिवार उसकी देखभाल करने में अक्षम है तो न्यायालय के आदेश पर उसे पुनर्वास केंद्र में भेजा जा सकता है।
  • एक ट्रांसजेंडर व्यक्ति जिला मेजिस्ट्रेट से ट्रांसजेंडर के रूप में उसकी आइडेंटिटी से जुड़ा सर्टिफिकेट प्राप्त कर सकता है।
  • इस अधिनियम के अनुसार ट्रांसजेंडर व्यक्तियों से भीख मंगवाना, बलपूर्वक या बंधुआ मजदूरी करवाना, उन्हें सार्वजनिक सेवाओं के उपभोग से रोकना, उन्हें परिवार, गांव इत्यादि में निवास करने से रोकना, और उनका शारीरिक, यौन, मौखिक, भावनात्मक और आर्थिक उत्पीड़न करना अपराध माना जाएगा जिसके लिए छह महीने से दो वर्ष तक की जेल और जुर्माना भी भरना पड़ सकता है।

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए)

चर्चा में क्यों?

  • अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के प्रमुख अगले हफ्ते तेहरान जाएंगे ताकि ईरान के अधिकारियों पर उन स्थलों तक पहुंच देने के लिए दबाव बना सकें जहां समझा जाता है कि उसने ज्यादा परमाणु सामग्रियां एकत्र कर रखी हैं।
  • अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के प्रमुख की तेहरान यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब JOINT COMPREHENSIVE PLAN OF ACTION (JCPOA या साझी व्यापक कार्ययोजना) जिसे ईरान परमाणु समझौता भी कहा जाता है से निकलने के बावजूद, अमरीका ने ईरान के ख़िलाफ़ संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों की बहाली के लिए समझौते के "स्नैपबैक" प्रावधान के इस्तेमाल का दावा किया है।

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी - आईएईए (International Atomic Energy Agency - IAEA)

अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए)

  • संयुक्त राष्ट्र की विशेषीकृत एजेंसियों में एक अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) है जो संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी एजेंसी के रूप में कार्य करती है।
  • यह परमाणु प्रौद्योगिकियों के सुरक्षित और शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देने के लिए अपने सदस्य राज्यों और दुनिया भर में कई भागीदारों के साथ काम करती है।
  • इसका उद्देश्य परमाणु ऊर्जा के शांतिपूर्ण उपयोग को बढ़ावा देना और परमाणु हथियारों सहित किसी भी सैन्य उद्देश्य के लिए इसके उपयोग को रोकना है।
  • अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी का गठन 29 जुलाई, 1957 को हुआ था। इसका मुख्यालय वियना, आस्ट्रिया में है।

ईरान परमाणु समझौता के बारे में

  • ईरान ने 2015 में विश्व शक्तियों(अमेरिका , रूस, यूके,फ़्रांस ,चीन और जर्मनी) के साथ परमाणु समझौता किया था।
  • अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प 2018 में ईरान के साथ परमाणु समझौते से एकतरफा अलग हो गए थे। इसके बाद से फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी, रूस और चीन इस समझौते को बरकरार रखने के लिए संघर्षरत हैं।

माउंट सिनाबंग

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में इंडोनेशिया के सुमात्रा आइलैंड में माउंट सिनाबंग ज्वालामुखी में भयंकर विस्फोट हुआ है। इससे लगातार गर्म राख और धुआं निकलने का सिलसिला जारी है।

माउंट सिनाबंग (Mount Sinabung)

माउंट सिनाबंग ज्वालामुखी

  • सिनाबंग पर्वत कारो जिले में उत्तरी सुमात्रा प्रांत में स्थित है। इसकी ऊंचाई 2,475 मीटर है।
  • सिनाबंग पर्वत ज्वालामुखी, इंडोनेशिया में 120 से अधिक सक्रिय ज्वालामुखियों में से एक है, जो प्रशांत महासागरीय क्षेत्र के 'रिंग ऑफ फायर' में आता है। इसीलिए यह अपनी अवस्थिति के कारण भूकंपीय उथल- पुथल के लिए प्रवण है।
  • इसमें वर्ष 2014 में भी ज्वालामुखी विस्फोट हुआ था , जिसमें लगभग 16 लोग मारे गए थे और हजारों बेघर हुए थे।
  • ज्वालामुखी में विस्फोट का असर अर्थव्यवस्था पर काफी पड़ा है।
  • इससे पहले मई, 2020 में इंडोनेशिया के ही माउंट अगुंग ज्वालामुखी के सक्रिय होने से उत्पन्न राख की वजह से एक दर्जन से अधिक उड़ानों को रद्द कर दिया गया था ।

'रिंग ऑफ फायर'(Ring of Fire)

  • ‘रिंग ऑफ फायर’, प्रशांत महासागर के चारों-ओर स्थित एक ऐसा विस्तृत क्षेत्र है जहाँ विवर्तनिक प्लेटें आकर आपस में मिलती हैं। यहाँ विवर्तनिक प्लेटों के आपस में मिलने से ज्वालामुखी विस्फोट या उद्गार तथा भूकंपीय घटनाओं की निरंतरता रहती है।
  • ‘रिंग ऑफ फायर’ को परिप्रशांत महासागरीय मेखला (Circum-Pacific Belt) के नाम से भी जाना जाता है।
  • विश्व के लगभग 75% ज्वालामुखी ‘रिंग ऑफ फायर’ क्षेत्र में ही पाए जाते हैं।
  • क्राकाटोआ(इंडोनेशिया),माउंट फ्यूजी(जापान) और सेंट हेलेना(संयुक्त राज्य अमेरिका) जैसे विश्व प्रमुख ज्वालामुखी इसी क्षेत्र में पाए जाते हैं|
  • पोपोकैटेपिटल (मेक्सिको) ‘रिंग ऑफ़ फायर’ (Ring of Fire) में स्थित सबसे अधिक विनाशक ज्वालामुखी है|
  • विश्व का सबसे गहरा महासागरीय स्थान ‘मैरियाना खाई’ (35,827 फीट) पश्चिमी प्रशांत महासागर में मैरियाना द्वीप के पूर्व में स्थित है|
  • द्वीपीय देश जापान,जो विवर्तनिकी (Tectonic) दृष्टि से पृथ्वी के सबसे सक्रिय स्थानों में से एक है,’रिंग ऑफ़ फायर’ (Ring of Fire) के पश्चिमी किनारे पर स्थित है|
  • ‘रिंग ऑफ़ फायर’ (Ring of Fire) के सहारे महासागरीय खाईयाँ, वलित पर्वत और भूकम्पीय कंपन पाए जाते हैं|
  • ईफुकू ज्वालामुखी के उत्तर-पूर्व में ‘शैम्पेन छिद्र’ जल के अन्दर स्थित एकमात्र ऐसा ज्ञात क्षेत्र है जहाँ तरल कार्बन डाई ऑक्साईड (Carbon Dioxide ) पाई जाती है|

क्या होती है ज्वालामुखी

  • ज्वालामुखी पृथ्वी की सतह(भूपटल) पर उपस्थित ऐसी दरार या मुख होता है जिससे पृथ्वी के भीतर का गर्म लावा, गैस, राख आदि बाहर आते हैं।
  • पृथ्वी के सतह के अंदर पिघले हुए पदार्थ को मैग्मा कहते हैं वही जब यह मैग्मा पृथ्वी से बाहर आता है तो इसे लावा कहा जाता है। ज्वालामुखी विस्फोट के समय पृथ्वी से यही मैग्मा बाहर निकलता है एवं इसके साथ भारी मात्रा में जलवाष्प, राख एवं विभिन्न प्रकार के गैस इत्यादि बाहर निकलते हैं।

ज्वालामुखी के प्रकार

  • ज्वालामुखी तीन प्रकार होते हैं-
  • सक्रिय ज्वालामुखी
  • सुषुप्त ज्वालामुखी
  • मृत ज्वालामुखी
  • सक्रिय ज्वालामुखी- उन ज्वालामुखीयों को कहा जाता है जिन पर समय- समय पर विस्फोट होता रहता है। संसार के कुछ सक्रिय ज्वालामुखी में हवाई द्वीप का मौना लोआ, सिसली का एटना और स्ट्राम्बोली, इटली का विसुवियस , इक्वेडोर का कोटोपैक्सी, अंडमान और निकोबार का बैरन द्वीप ज्वालामुखी एवं फिलीपींस का ताल ज्वालामुखी इत्यादि शामिल है।
  • सुषुप्त ज्वालामुखी- उन ज्वालामुखीयों को कहा जाता है जो वर्षों से शांत पड़े होते हैं लेकिन उनमें कभी भी ज्वालामुखी विस्फोट होने की संभावना बनी रहती है संसार के निष्क्रिय ज्वालामुखीयों में इटली का विसूवियस, जापान का फ्यूजीयामा, इंडोनेशिया का क्राकाटोआ एवं अंडमान और निकोबार का नारकोंडम ज्वालामुखी इत्यादि शामिल है।
  • मृत ज्वालामुखी- ऐसे ज्वालामुखीयों को कहा जाता है जो कई युगो से शांत है एवं उनमें विस्फोट होना बंद हो गया है। संसार की कुछ मृत ज्वालामुखीयों में म्यांमार का पोपा, अफ्रीका का किलिमंजारो, दक्षिण अमेरिका का चिम्बराजो, हवाई द्वीप का मोंनाको, ईरान का कोह सुल्तान इत्यादि शामिल है।
  • ज्वालामुखी विस्फोट से व्यापक पैमाने पर धन-जन की व्यापक हानि होती है। इतिहास में कई ऐसी घटनाएं घटी जब पूरे के पूरे शहर ज्वालामुखी से होने वाले विस्फोट के कारण काल के ग्रास में समा गए। उदाहरण के लिए इटली के दो प्रसिद्ध शहर पम्पियाई और हरक्युलैनियम ज्वालामुखी विस्फोट से बर्बाद हो गए। हालांकि ज्वालामुखी विस्फोट कई तरीके से लाभकारी भी होते है। इससे ना केवल नवीन संरचनाओं का निर्माण होता है जैसे की क्रेटर झील, लैकोलिथ, फैकोलिथ इत्यादि बल्कि कई खनिजों समेत काली मिट्टी के स्रोत भी ज्वालामुखी के लावा होते हैं।