यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स (23 सितंबर 2020)

Daily Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC, RPSC and All State PCS Examinations


यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स

Daily Hindi Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC, RPSC and All State PCS Examinations


अभ्‍यास (ABHYAS)

चर्चा में क्यों?

  • रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने मंगलवार को रक्षा क्षेत्र में एक और उपलब्धि हासिल करते हुए ‘अभ्‍यास (ABHYAS)’ का सफल परीक्षण किया है।

अभ्‍यास (ABHYAS)

क्या है ‘ABHYAS’?

  • ‘ABHYAS’ वैमानिकी विकास प्रतिष्ठान (ADE) द्वारा विकसित किया जाने वाला एक हाई-स्पीड एक्सपेंडेबल एरियल टारगेट (HEAT) है।
  • दुसरे शब्दों में कहा जाये तो यह एक अभ्यास हाई-स्पीड ड्रोन है जिसका प्रयोग मिसाइल्स को टेस्ट करने में टार्गेट के रूप में किया जाएगा। यह हथियार प्रणालियों के अभ्यास के लिए एक यथार्थवादी खतरा परिदृश्य प्रदान करता है।
  • ‘ABHYAS’ को ऑटोपायलट की मदद से स्वायत्त उड़ान के लिए तैयार किया गया है, जो एडीई में विकास के तहत है।
  • ‘ABHYAS’ के पास हथियार अभ्यास के लिए आवश्यक आरसीएस, विज़ुअल और आईआर वृद्धि प्रणाली हैं।
  • एयर वाहन के लाँच में ट्विन अंडरस्लैंग बूस्टर का उपयोग किया गया है। यह एक छोटे गैस टरबाइन इंजन द्वारा संचालित है और इसमें मार्गदर्शन और नियंत्रण के लिए उड़ान नियंत्रण कंप्यूटर (एफसीसी) के साथ नेविगेशन के लिए एमईएमएस आधारित इनरट्रियल नेविगेशन सिस्टम (आईएनएस) है।
  • परीक्षण के दौरान ड्रोन ने 5 किलोमीटर उड़ान ऊंचाई, 0.05 मैक की गति आदि जरूरतों को सफलतापूर्वक हासिल किया।
  • पहली बार 13 मई 2019 को अभ्यास का सफल परीक्षण किया गया था।

एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (ADE)

  • एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (ADE) डीआरडीओ का एक प्रमुख एरोनॉटिकल सिस्टम डिज़ाइन हाउस है।
  • यह भारतीय सशस्त्र बलों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अत्याधुनिक मानवरहित हवाई वाहनों और वैमानिकी प्रणालियों और प्रौद्योगिकियों के डिज़ाइन और विकास में शामिल है।
  • इसका विजन सेनाओं के लिए अत्याधुनिक वैमानिकीय पद्धतियों के विकास के लिए केन्द्र बनना है।
  • 1959 में अपने गठन के बाद, एडीई भारतीय सशस्त्र सेनाओं द्वारा अपेक्षित विभिन्न प्रकार के वैमानिकीय पद्धतियों के डिजाइन एवम् विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

श्रम संहिता विधेयक 2020

चर्चा में क्यों?

  • लोक सभा द्वारा तीन ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण परिवर्तन लाने वाली श्रम संहिताओं को पारित किया गया है। इसमें निम्नलिखित तीन श्रम संहिताओं को शामिल किया गया हैं-
  1. औद्योगिक संबंध संहिता, 2020
  2. व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशाएं संहिता, 2020 तथा
  3. सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020

श्रम संहिता विधेयक 2020 ( Labor Code Bill 2020)

औद्योगिक संबंध संहिता, 2020

औद्योगिक संबंध संहिता, 2020 के माध्यम से सरकार द्वारा कामगारों के विवादों को शीघ्रता पूर्वक सुलझाने के लिए प्रयास किए गए हैं:

  • औद्योगिक अधिकरण में एक सदस्य के बजाय दो सदस्यों का प्रावधान किया गया है, ताकि एक सदस्य के अनुपस्थित रहने की स्थिति में भी कार्य सुचारू रूप से किया जा सकता है।
  • समझौते के स्तर पर विवाद के न सुलझने की स्थिति में मामले को सीधे अधिकरण में ले जाने का प्रावधान है। वर्तमान में, मामले को समुचित सरकार द्वारा अधिकरण को भेजा जाता है।
  • अधिकरण के निर्णय के बाद 30 दिनों के भीतर उस निर्णय का क्रियान्वयन।
  • नियत कालिक रोज़गार की मान्यता के बाद कामगारों को ठेका श्रम के बजाय नियत कालिक रोज़गार का विकल्प प्राप्त होगा। इसके अंतर्गत उन्हें नियमित कर्मचारी के समान ही कार्य घंटे, वेतन सामाजिक सुरक्षा तथा अन्य कल्याणकारी लाभ प्राप्त होंगे।
  • ट्रेड यूनियनों की बेहतर और प्रभावी भागीदारी के उद्देश्य से किसी विवाद पर विचार विमर्श करने के लिए वार्ताकार यूनियन और वार्ताकार परिषद् का प्रावधान किया गया है। इस मान्यता को प्रदान किए जाने से विवादों का बातचीत से समाधान करने को बढ़ावा मिलेगा और कामगार अपने अधिकारों को बेहतर तरीके से प्राप्त कर सकेंगे।
  • ट्रेड यूनियनों के बीच उत्पन्न विवादों का समाधान करने के लिए अधिकरण में जाने की व्यवस्था भी की गई है। इससे उनके विवादों का निपटान करने में कम समय लगेगा।
  • ट्रेड यूनियनों को केन्द्रीय और राज्य स्तर पर मान्यता प्रदान करने हेतु प्रावधान किए गए हैं। यह व्यवस्था मान्यता श्रम कानूनों में पहली बार प्रदान की गई है और इस मान्यता के बाद ट्रेड यूनियनें केन्द्रीय और राज्य स्तर पर और अधिक सकरात्मक तथा प्रभावी तरीके से योगदान करने में समर्थ होंगी।
  • पहली बार कानून में पुन: कौशल निधि का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य उन कामगारों को पुन: कौशल प्रदान करना है जिन्हें काम से निकाल दिया गया है ताकि उन्हें पुन: आसानी से रोजगार मिल सके। इसके लिए कामगारों को 45 दिनों की अवधि के भीतर 15 दिनों का वेतन दिया जाएगा।
  • औद्योगिक संबंध संहिता के अंतर्गत निम्नलिखित तीन कानूनों को संहिताबद्ध किया गया है-
  1. ट्रेड यूनियन अधिनियम, 1926
  2. औद्योगिक नियोजन (स्थायी आदेश) अ‎धिनियम, 1946
  3. औद्योगिक विवाद अधिनियम, 1947

व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशाएं संहिता, 2020

इस संहिता के प्रमुख प्रावधान निम्नलिखित हैं-

  • नियोक्ता द्वारा एक निर्धारित आयु से अधिक आयु वाले कामगारों के लिए वर्ष में एक बार निःशुल्क चिकित्सा जांच।
  • इसके माध्यम से पहली बार कामगारों को नियुक्ति पत्र प्राप्त करने का कानूनी अधिकार दिया गया है।
  • सिने कामगार को श्रव्य-दृश्य कामगार के रूप में नामित किया गया है, ताकि अधिक से अधिक कामगार व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशाएं संहिता के दायरे में शामिल हो सकें। पहले यह सुरक्षा केवल फिल्मों में काम करने वाले कलाकारों को दी जा रही थी।
  • व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य दशाएं के अंतर्गत निम्नलिखित 13 कानूनों को संहिताबद्ध किया गया है-
  1. कारखाना अधिनियम, 1948
  2. बागान श्रमिक अ‎धिनियम, 1951
  3. खान अधिनियम, 1952
  4. श्रमजीवी पत्रकार एवं अन्य समाचार-पत्र कर्मचारी (सेवा-शर्तें) एवं प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 1955
  5. श्रमजीवी पत्रकार (वेतन की दरों का निर्धारण) अधिनियम, 1958
  6. मोटर परिवहन कामगार अधिनियम, 1961
  7. बीड़ी एवं सिगार कामगार (रोजगार की शर्तें) अधिनियम, 1966
  8. ठेका श्रम (विनियमन एवं उत्सादन) अधिनियम, 1970
  9. विक्रय संवर्धन कर्मचारी (सेवा-शर्तें) अधिनियम,1976
  10. अंतर-राज्यिक प्रवासी कामगार (रोजगार का विनियमन एवं सेवा-शर्तें) अधिनियम, 1979
  11. सिने कामगार तथा सिनेमा थियेटर कामगार (रोजगार का विनियमन) अधिनियम, 1981
  12. गोदी कामगार (सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कल्याण) अधिनियम, 1986
  13. भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार (रोजगार का विनियमन एवं सेवा-शर्तें) अधिनियम, 1996

सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020

सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के अंतर्गत निम्नलिखित 9 कानूनों को सम्मिलित किया गया है-

  1. कर्मकार प्रतिकर अधिनियम, 1923
  2. कर्मचारी राज्य बीमा अ‎धिनियम, 1948
  3. कर्मचारी भविष्य निधि एवं प्रकीर्ण उपबंध अधिनियम, 1952
  4. रोजगार कार्यालय (रिक्तियों की अनिवार्य अधिसूचन अधिनियम, 1959
  5. प्रसूति प्रसुविधा अधिनियम, 1961
  6. उपदान संदाय अधिनियम, 1972
  7. सिने कामगार कल्याण निधि अधिनियम, 1981
  8. भवन एवं अन्य सन्निर्माण कामगार कल्याण उपकर अधिनियम, 1996
  9. असंगठित कामगार सामाजिक सुरक्षा अधिनियम, 2008

ईएसआईसी की पहुंच का विस्तार करना: ईएसआईसी के अंतर्गत अधिकतम संभावित कामगारों को स्वास्थ्य सुरक्षा का अधिकार देने के प्रयास किए गए हैं:-

  • ईएसआईसी की सुविधा अब सभी 740 जिलों में उपलब्ध कराई जाएगी। वर्तमान में, यह सुविधा केवल 566 जिलों में दी जा रही है।
  • जोखिमकारी क्षेत्रों में कार्यरत प्रतिष्ठान अनिवार्य रूप से ईएसआईसी से संबद्ध किए जाएंगे, चाहे इनमें केवल एक ही कामगार हो।
  • असंगठित क्षेत्र और गिग कामगारों को ईएसआईसी से संबद्ध करने के लिए योजना बनाने हेतु प्रावधान।
  • बागान के मालिकों को बागानों में कार्यरत कामगारों को संबद्ध करने का विकल्प दिया जा रहा है।
  • ईएसआईसी का सदस्य बनने का विकल्प 10 से कम कामगारों वाले प्रतिष्ठानों को भी दिया जा रहा है।
  • ईपीएफओ की पहुंच का विस्तार करना:
  • ईपीएफओ की कवरेज 20 कामगारों वाले सभी प्रतिष्ठानों पर लागू होगी। वर्तमान में, यह केवल अनुसूची में शामिल प्रतिष्ठानों पर लागू थी।
  • 20 से कम कामगारों वाले प्रतिष्ठानों को भी ईपीएफओ में शामिल होने का विकल्प दिया जा रहा है।
  • ‘स्व-नियोजित’ वर्ग या किसी अन्य वर्ग के अंतर्गत आने वाले कामगारों को ईपीएफओ के तत्‍वावधान में शामिल करने के लिए योजनाएं बनाई जाएंगी।
  • असंगठित क्षेत्र के कामगारों को व्यापक सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए विभिन्न योजनाएं तैयार करने हेतु प्रावधान किया गया है। इन योजनाओं को कार्यान्वित करने के लिए वित्तीय पक्ष पर एक “सामाजिक सुरक्षा निधि” सृजित की जाएगी।
  • “प्लेटफॉर्म कामगार या गिग कामगार” जैसी बदलती प्रौद्योगिकी के साथ सृजित रोजगार के नए स्वरूपों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने का कार्य सामाजिक सुरक्षा संहिता में किया गया है।
  • पहली बार नियत कालिक कर्मचारी को नियमित कर्मचारी की तरह ही सामाजिक सुरक्षा का अधिकार प्रदान करने के लिए उपदान का प्रावधान किया गया है और इसके लिए न्यूनतम सेवा अवधि की कोई शर्त नहीं होगी।
  • असंगठित क्षेत्र के कामगारों को विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ आसानी से उपलब्ध कराने के लिए एक राष्ट्रीय डेटाबेस तैयार करने के उद्देश्य से, इन सभी कामगारों का पंजीकरण एक ऑनलाइन पोर्टल पर किया जाएगा और यह पंजीकरण एक साधारण प्रक्रिया के माध्यम से स्व-प्रमाणन के आधार पर किया जाएगा।
  • इसी लक्ष्य से 20 या उससे अधिक कामगारों वाले सभी प्रतिष्ठानों के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वे अपने प्रतिष्ठानों में रिक्त पदों की सूचना दें। यह सूचना ऑनलाइन पोर्टल पर दी जाएगी।

प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR)

चर्चा में क्यों?

  • केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), डॉ जितेंद्र सिंह ने राज्यसभा को एक लिखित जवाब में कहा कि प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) का निर्माण भारतीय नाभिकीय विद्युत निगम लिमिटेड (BHAVINI) द्वारा अक्टूबर 2022 तक चालू होने की उम्मीद है। यह भारत के तीन चरण वाले नाभिकीय ऊर्जा कार्यक्रम के दूसरे चरण में सफलतापूर्वक प्रवेश का सूचक है। कमीशन के पूरा होने पर, PFBR राष्ट्रीय ग्रिड से 500 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा।

क्या है प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR)?

  • ब्रीडर रिएक्टर वह होता है जिसमें परमाणु विखंडन की प्रक्रिया के लिए जिस ईंधन का इस्तेमाल किया जाता है उसे यह रिएक्टर दोबारा इस्तेमाल योग्य ईंधन में बदलकर उत्सर्जित करता है। इस रिएक्टर में जितना ईंधन डाला जाता है उससे ज्यादा उससे वापस मिल जाता है। पीएफबीआर में ईंधन के रूप में प्लूटोनियम और यूरेनियम ऑक्साइड का इस्तेमाल किया जाएगा, जिसे मॉक्स फ्यूल कहा जाता है।

पृष्ठभूमि

  • डा. होमी भाभा द्वारा 1950 के दशक में देश की दीर्घावधिक ऊर्जा आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के लिए तैयार किया गया था। इसमें दक्षिण भारत के समुद्रतटीय क्षेत्रों की मोनाजाईट रेत में पाए जाने वाले यूरेनियम और थोरियम के भंडारों का उपयोग किया जाना था। भारतीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम एक तीन चरणीय कार्यक्रम है:
  1. भारत में नाभिकीय कार्यक्रम के प्रथम चरण में दाबित भारी जल रिएक्टर (पीएचडब्ल्यूआर) प्रौद्योगिकी पर आधारित है । पीएचडब्ल्यूआर तकनीक में मंदक या शीतलक के रूप में भारी जल का उपयोग किया जाता है ।
  2. परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के द्वितीय चरण में फास्ट ब्रीडर रिएक्टर का उपयोग किया गया। फास्ट ब्रीडर रिएक्टर प्रथम चरण में प्रयुक्त ईंधन के पुनर्प्रसंस्करण से प्राप्त प्लूटोनियम-239 और प्राकृतिक यूरेनियम का प्रयोग करता है। इस रिएक्टर में शीतलक के रूप में सोडियम का प्रयोग किया जाता है।
  • तीसरे चरण के रिएक्टर में थोरियम-233 तथा यूरेनियम-233 ईंधनों का प्रयोग करना शामिल है जिससे परमाणु ईंधन के मामले में आत्मनिर्भरता हासिल की जा सके। तीसरे चरण के परमाणु रिएक्टर ब्रीडर रिएक्टर होंगे जिन्हें पुनः ईंधन से भरा जा सकता है।
  • उल्लेखनीय है कि आज भारत सोची समझी रणनीति के तहत फास्ट ब्रीडिंग रिऐक्टरों पर महारत हासिल कर रहा है। यह महारत थोरियम के अपार भंडारों के इस्तेमाल में मददगार हो सकती है।

विश्व गैंडा दिवस (World Rhino Day)

चर्चा में क्यों?

  • 22 सितंबर 2020 को वैश्विक स्तर पर विश्व गैंडा दिवस (World Rhino Day) मनाया गया।

विश्व गैंडा दिवस (World Rhino Day)

विश्व गैंडा दिवस

  • विश्व गैंडा दिवस की सर्वप्रथम घोषणा वर्ष 2010 में डब्ल्यूडब्ल्यूएफदक्षिण अफ्रीका द्वारा की गई थी। यह दिवस विशेष रूप से गैंडे की पाँच प्रजातियों के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए मनाया जाता है। यह पाँच प्रजातियाँ हैं काला , सफेद, एक श्रंगी एवं सुमात्रा और जावा राइनो।
  • भारत में इस दिन, काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान (असम), मानस राष्ट्रीय उद्यान (असम) और लाओखोवा बुराचपोरी (असम) में जागरूकता कार्यक्रमों चलाया गया।

विश्व में गैंडों की वर्तमान स्थिति

  • सेव द राइनो संगठन के अनुसार वर्तमान में विश्व में 29000 गैंडे हैं। यह संख्या वर्ष 1970 में 70000 थी. इनमे से काले गैंडों की संख्या 5055, सफ़ेद गैंडों की संख्या 20405, एक श्रंगी गैंडों की 3333, सुमात्रा गैंडों की संख्या 100 और जावा गैंडों की संख्या 61 है। इसके अतिरिक्त ओएल पेजेता कन्जर्वेंसी केन्या में ‘सूडान’ नाम का सिर्फ एक सफ़ेद गैंडा है।

भारत में गैंडों की वर्तमान स्थिति और उनका संरक्षण

  • भारत में एक सींग वाले गैंडों की संख्या सबसे अधिक है। असम, पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश में एक सींग वाले 3000 गैंडे हैं। भारत में सबसे अधिक गैंडे काजीरंगा नेशनल पार्क में पाए जाते हैं।
  • उल्लेखनीय है कि इस समय भारत में एक सींग और विशाल आकार वाले गैंडों की कुल संख्या की 75 प्रतिशत तीन प्रमुख राज्यों असम, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में हैं।
  • गैंडों की आबादी की गणना समय-समय पर राज्य सरकारी द्वारा कराई जा रही है। गैंडों की वर्तमान प्रजाति को संरक्षित करने के लिए प्रयास जारी है। साथ ही इंडियन राइनों विजन (आईआरवी) 2020 कार्यक्रम के तहत इस प्रजाति का वितरण बढ़ाने पर भी काम किया जा रहा है।
  • विश्व धरोहर स्थल मानस राष्ट्रीय पार्क में एक वन से दूसरे वन में गैंडों के आदान-प्रदान का प्रयास सपफल रहा है। एक सींग वाले गैंडों को रिकवरी का कार्यक्रम के तहत उन 21 प्रजातियों में शामिल किया है, जो खतरे में है। पर्यावरण मंत्रालय ने एक सींग वाले भारतीय गैंडों की संख्या बढ़ाने के लिए भी राष्ट्रीय संरक्षण नीति का आरंभ किया है। इसके तहत वैज्ञानिक विधि भी अपनाई जाएगी।
  • मंत्रालय असम उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल की मदद से नई दिल्ली घोषणा पत्र के अनुरूप वह सभी कदम उठा रहा है जो 26-28 फरवरी 2019 को हुए दूसरे एशियाई राज्य संरक्षण सम्मेलन में तय किए गए थे। इस सम्मेलन में भारत के अलावा भूटान मलेशिया, नेपाल के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।