यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स (22 सितंबर 2020)

Daily Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC, RPSC and All State PCS Examinations


यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स

Daily Hindi Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC, RPSC and All State PCS Examinations


अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस 2020

चर्चा में क्यों?

  • प्रति वर्ष की तरह 21 सितंबर को दुनिया भर में विश्व शांति दिवस (International Day Of Peace) मनाया गया। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने 21 सितम्बर, को अन्तरराष्ट्रीय शान्ति दिवस पर दुनिया को यह सन्देश दिया कि “ वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण दुनिया भर में मची उथलपुथल के दौर में भी हर देश में लोगों को शान्ति क़ायम रखने को अपनी प्राथमिकता बनाए रखना होगा।”

अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस 2020 (International Peace Day)

अन्तरराष्ट्रीय शान्ति दिवस के बारे में

  • विश्व शांति दिवस अथवा 'अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस' प्रत्येक वर्ष '21 सितम्बर’ को मनाया जाता है।
  • यह दिवस सभी देशों और लोगों के बीच स्वतंत्रता, शांति और खुशी का एक आदर्श माना जाता है।
  • संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 1981 में सितम्बर माह के तीसरे मंगलवार को अन्तरराष्ट्रीय शान्ति दिवस के रूप में मनाने का निर्णय किया था और फिर दो दशक बाद सर्वमत से इसे अहिंसा और युद्धविराम की अवधि के रूप में आगे बढ़ाया गया।
  • वर्ष 1982 से शुरू होकर 2001 तक सितम्बर महीने का तीसरा मंगलवार 'अंतरराष्ट्रीय शांति दिवस' या 'विश्व शांति दिवस' के लिए चुना जाता था।
  • लेकिन वर्ष 2002 से इसके लिए 21 सितम्बर का दिन घोषित कर दिया गया।
  • इस वर्ष 2020 के अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस की थीम है ‘मिलकर शांति का निर्माण’ (Shaping Peace Together)।
  • गौरतलब है कि वर्ष 2019 में अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस की थीम “शांति के लिए जलवायु कार्रवाई” थी।

फेलुदा (Feluda) कोरोना टेस्ट किट

चर्चा में क्यों?

  • ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने कोरोना वायरस की जांच में टाटा समूह के नए कोविड-19 टेस्‍ट 'Feluda' के सार्वजनिक इस्‍तेमाल की मंजूरी दे दी है।

फेलुदा (Feluda) कोरोना किट के बारे में

  • टाटा समूह द्वारा बनाई गयी यह कोरोना टेस्ट किट ‘क्‍लस्‍टर्ड रेग्‍युलरली इंटरस्‍पेस्‍ड शॉर्ट पैलिनड्रॉमिक रिपीट्स कोरोना वायरस टेस्‍ट (CRISPR Corona Test) है।
  • टाटा समूह ने सीएसआईआर-इंस्‍टीट्यूट ऑफ जेनॉमिक्‍स एंड इंटिग्रेटिव बायोलॉजी (CSIR-IGIB) के साथ मिलकर इस कोरोना टेस्ट किट को तैयार किया है।
  • सीआरआईएसपीआर टेस्ट Cas-9 प्रोटीन का इस्तेमाल करने वाला दुनिया का पहला ऐसा परीक्षण है, जो सफलतापूर्वक कोविड-19 महामारी फैलाने वाले वायरस की पहचान करने में सक्षम है।
  • फेलुदा टेस्ट में सार्स-कोव 2 वायरस के जेनॉमिक सीक्वेंस का पता लगाने के लिए स्वदेशी CRISPR तकनीकी का प्रयोग किया गया है।
  • फेलुदा कोरोना टेस्ट किट भारत की पहली पेपर आधारित टेस्ट किट है।
  • विज्ञान और तकनीक मंत्रालय के अनुसार फेलुदा से किए गए कोरोना टेस्ट के परिणाम 98 फीसदी सटीक हैं। ये टेस्ट 96 फीसदी संवेदनशीलता के साथ कोरोना वायरस की पहचान करता है। लाभ
  • टाटा समूह की ओर से विकसित की गई यह टेस्ट मौजूदा सभी टेस्ट किटों से सस्ती है।
  • यह किट मात्र पांच सौ रुपये में आधे घंटे के भीतर कोविड-19 का परिणाम देने में सक्षम है।
  • भविष्य में इस टेक्‍नोलॉजी का इस्‍तेमाल दूसरी महामारियों के टेस्‍ट में भी किया जा सकेगा।
  • टाटा समूह ने सीएसआईआर-आईजीआईबी और आईसीएमआर के साथ मिलकर 'मेड इन इंडिया' उत्पाद विकसित किया है, जो सुरक्षित, विश्वसनीय, सस्ती और सुलभ है।

CRISPR तकनीकी

  • CRISPR तकनीकी किसी कोशिका के जीनोम को संपादित करने की एक नई तकनीकी है।
  • इसके द्वारा अत्यंत सरल एवं प्रभावी तरीके से जीनोम के किसी जीन को काटा जा सकता हैं और आनुवांशिक संशोधन किया जा सकता है।
  • यह प्रणाली मूल रूप से जीवाणुओं में पायी जाती है, जो जीवाणुओं को विषाणुओं के प्रति प्रतिरक्षा प्रदान करता है।
  • मानव कोशिका के संदर्भ में इस प्रणाली का पहली बार प्रयोग 2013 में किया गया था।
  • इस तकनीक से डीएनए काटने और जोड़ने की प्रक्रिया से आनुवंशिक रोगों में सुधार की उम्मीद बढ़ जाती है। इससे जेनेटिक डिफेक्ट्स दूर किए जाते हैं।
  • CRISPR टेक्नोलॉजी जीन में डीएनए के स्पेसिफिक सिकवेंस की पहचान सकती है। यह डीएनए सिकवेंस और जीन फंक्शन को बदलती है।

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP)

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही मे केंद्र सरकार ने रबी की 6 फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य को बढ़ा दिया है। गेहूं की MSP (Minimum Support Price) पर 50 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि का ऐलान किया है। सरकार के अनुसार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद जारी रहेगी और बढ़ी हुई दरों से किसानों को 106 प्रतिशत तक का लाभ होगा।

कितनी वृद्धि हुई है MSP में

  • गेहूं का समर्थन मूल्य 1975 रुपए प्रति क्विंटल घोषित किया गया है। चना का समर्थन मूल्य 5100 रुपए प्रति क्विंटल घोषित किया गया है। चना के समर्थन मूल्य में 225 रुपए प्रति क्विंटल की वृद्धि। इसके अलावा जौ का समर्थन मूल्य 1600 रुपए प्रति क्विंटल घोषित हुआ है और 75 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है। मसूर का समर्थन मूल्य 5100 रुपए प्रति क्विंटल घोषित। सरसों एवं रेपसीड का समर्थन मूल्य 4650 रूपए प्रति क्विंटल घोषित हुआ है।
  • कृषि मंत्री ने कहा, 'वर्ष 2013-2014 में गेहूं की MSP 1400 रुपये थी, जो 2020-2021 में बढ़कर 1975 रुपये हो गई। यानि एमएसपी में 41 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। 2013-2014 में धान की MSP 1310 रुपये थी, जो 2020-2021 में बढ़कर 1868 रुपये हो गई। 2013-2014 में मसूर की MSP 2950 रुपये थी, जो 2020-21 में बढ़कर 5100 रुपये हो गई। 2013-2014 में उड़द की MSP 4300 रुपये थी, जो 2020-21 में बढ़कर 6000 रुपये हो गई।'

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) क्या है?

  • न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), भारत में कृषि उपज के लिए न्यूनतम मूल्य की गारंटी है. MSP की घोषणा भारत सरकार द्वारा कुछ निश्चित फसलों के लिए बुवाई के मौसम की शुरुआत में की जाती है, ताकि उत्पादक यानी किसानों को इस बात की गारंटी प्रदान की जा सके कि देश में कितना भी अधिक खाद्यान्न उत्पन्न हो जाये, किसानों को उनकी फसल का एक निश्चित मूल्य मिलेगा. इस प्रकार MSP किसानों को अधिक फसल बुबाई के लिए प्रेरित करता है.

न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारण का उद्देश्य?

  • न्यूनतम समर्थन मूल्य का मुख्य उद्देश्य किसानों को बिचौलियों के शोषण से बचाकर उनकी उपज का अच्छा मूल्य प्रदान करना और सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिये अनाज की खरीद करना है। यदि किसी फसल का अत्यधिक उत्पादन होने या बाजार में उसकी अधिकता होने के कारण उसकी कीमत घोषित मूल्य की तुलना में कम हो जाती है तो सरकारी एजेंसियाँ किसानों की अधिकांश फसल को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद लेती हैं।

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSPs) कैसे तय किया जाता है?

  • कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) रबी और खरीफ फसलों के MSP को तय करते समय कई कारकों को ध्यान में रखता है. ये कारक हैं; उत्पादन लागत से कम से कम 50% अधिक मूल्य तय करना, मांग और आपूर्ति, इनपुट की कीमतों में बदलाव, इनपुट-आउटपुट मूल्य समता, जीवन यापन की लागत पर प्रभाव, सामान्य मूल्य स्तर पर प्रभाव, बाजार की कीमतों का रुझान, किसानों द्वारा प्राप्त कीमतों और उनके द्वारा भुगतान की गयी कीमतों के बीच समता, अंतर्राष्ट्रीय मूल्य स्थिति आदि |

सूरज का 25वां सोलर साइकिल

चर्चा में क्यों?

  • अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा के अनुसार हमारे सौरमंडल के ऊर्जा स्त्रोत सूर्य का 25वां सोलर साइकिल शुरू हो रहा है ।
  • नासा के वैज्ञानिकों के अनुसार हाल ही में सूरज की सतह पर एक तेज कोरोनियल लहर यानी सौर लपट दिखाई दी थी. उन्होंने अंदेशा जताया है कि सूर्य पर अब तेज सौर तूफान आ सकते हैं। इसके अलावा अन्य हलचल बढ़ने का भी अनुमान है । वैज्ञानिकों का मानना है कि पिछले कुछ महीने से सूर्य की रोशनी हल्की पड़ गई थी । अब जब नया साइकिल शुरू हुआ है, तो ये तेज रोशनी, लपटें आदि अंतरिक्ष में प्रसारित करेगा ।

सौर चक्र

  • सूर्य की सतह एक बहुत ही सक्रिय स्थान है। इसकी सतह पर विद्युत आवेशित गैसें शक्तिशाली चुंबकीय बलों के क्षेत्र उत्पन्न करती हैं, जिन्हें चुंबकीय क्षेत्र कहा जाता है। ये गैसें लगातार चलती रहती हैं। इस प्रकार, ये चुंबकीय क्षेत्र सौर गतिविधि के रूप में ज्ञात सतह पर खिंचाव या दबाव के कारण गति प्राप्त करते हैं। सौर गतिविधि सौर चक्र के विभिन्न चरणों को दर्शाती है, जो औसतन 11 वर्षों तक चलती है। सौर चक्रों का पृथ्वी पर जीवन और प्रौद्योगिकी के साथ-साथ अंतरिक्ष यात्रियों के लिए विशेष महत्व है।
  • वैज्ञानिक सूर्य के स्थानों का उपयोग करके एक सौर चक्र को ट्रैक करते हैं। ये सूर्य पर काले धब्बे होते हैं जो सौर गतिविधि से जुड़े होते हैं। सनस्पॉट सूर्य पर एक क्षेत्र है जो सतह पर गहरा दिखाई देता है और आसपास के हिस्सों की तुलना में अपेक्षाकृत ठंडा है। ये धब्बे सूर्य के चुंबकीय क्षेत्र के दृश्यमान सतह हैं। कुछ धब्बे 50,000 किमी व्यास से भी बड़े होते हैं।

कितना पुराना है सूर्य

  • मैक्स प्लैंक इंस्टीट्यूट के एक अध्ययन के मुताबिक सूर्य की सतह पर बनने वाले सोलर स्पॉट अध्ययन में उनकी काफी मदद करते हैं। इसके आधार पर उन्होंने पता लगाया कि सूर्य पिछले कुछ हजार सालों से शांत है, क्योंकि सोलर स्पॉट में कमी आई है। उन्होंने सूरज की तुलना 2500 तारों से भी की थी। उन्होंने बताया पिछले साल 264 दिनों तक एक भी स्पॉट सूरज पर नजर नहीं आया था। अभी तक के अध्ययन में सूर्य को 4.6 बिलियन साल पुराना बताया गया है।