यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स (22 जून 2020)


यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स

Daily Hindi Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC, RPSC and All State PCS Examinations


भौगोलिक संकेत (Geographical Indication)

चर्चा में क्यों?

  • UP के गौरजीत, बनारसी लंगड़ा और चौसा आम को GI टैग दिलाने के लिए प्रयास शुरू कर दिया गया है।
  • इस समय आम की मलिहाबाद और दशहरी (UP) रत्नागिरी का अल्फांसो, गिर (गुजरात) का केसर, मराठवाड़ा का केसर, आंध्र प्रदेश का बंगनापल्ली, भागलपुर का जरदालु, कर्नाटक के शिमोगा का अप्पीमिडी, मालदा (बंगाल) का हिमसागर, लक्ष्मण भोग और फजली को GI टैग मिल चुका है।

भौगोलिक संकेत (Geographical Indication)

GI टैग क्या है?

  • जीआई टैग या भौगोलिक संकेत(Geographical Indication) किसी भी उत्पाद के लिए एक प्रतीक चिन्ह के समान होता है।
  • यह उत्पाद की विशिष्ट भौगोलिक उत्पत्ति, विशेष गुणवत्ता और पहचान के आधार पर दिया जाता है।
  • जीआई टैग उस उत्पाद की गुणवत्ता और उसकी विशेषता को दर्शाता है।
  • किसी उत्पाद के जीआई टैग के लिए आवश्यक है कि “उत्पाद का उत्पादन या प्रोसेसिंग उसी क्षेत्र में होना चाहिए जहाँ के लिए जीआई टैग लिया जा रहा है।”
  • भारत में जीआई टैग को किसी विशेष फसल, प्राकृतिक और निर्मित उत्पादों को प्रदान किए जाते हैं।
  • कई बार जीआई टैग को एक से अधिक राज्यों में पाई जाने वाली फसलों या उत्पादों को प्रदान की जाती है। उदाहरण के लिए- बासमती चावल( पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड)
  • भारत में सबसे पहले दार्जिलिंग की चाय को 2004 में जीआई टैग प्राप्त हुआ था।
  • भारत के कुछ महत्वपूर्ण उत्पाद जिन्हें जीआई टैग प्राप्त है- महाबलेश्वर-स्ट्रॉबेरी, जयपुर -ब्लू पोटरी, बनारसी साड़ी, तिरुपति के लड्डू, मध्य प्रदेश के झाबुआ के कड़कनाथ मुर्गा, कांगड़ा की पेंटिंग, नागपुर का संतरा, कश्मीर की पाश्मीना, हिमाचल का काला जीरा, छत्तीसगढ़ का जीराफूल और ओडिशा की कंधमाल हल्दी इत्यादि।

GI टैग का विनियमन

  • औद्योगिक संपत्ति के संरक्षण हेतु जीआई टैग को पेरिस कन्वेंशन के अंतर्गत बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपीआर) के रूप में शामिल किया गया था।
  • अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जीआई टैग का विनियमन विश्व व्यापार संगठन( डब्ल्यूटीओ) के द्वारा किया जाता है।
  • भारत में जीआई टैग का विनियमन वस्तुओं के भौगोलिक सूचक (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम 1999 के अंतर्गत किया जाता है।
  • वस्तुओं के भौगोलिक सूचक (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 15 सितंबर, 2003 से लागू हुआ था।
  • जीआई टैग का अधिकार हासिल करने के लिए चेन्नई स्थित जी आई डेटाबेस में अप्लाई करना पड़ता है।
  • एक बार जीआई टैग का अधिकार मिल जाने के बाद 10 वर्षों तक जीआई टैग मान्य होते हैं। इसके उपरांत उन्हें फिर रिन्यू कराना पड़ता है।

जीआई टैग से लाभ

  • जीआई टैग किसी क्षेत्र में पाए जाने वाले उत्पादन को कानूनी संरक्षण प्रदान करता है।
  • जीआई टैग के द्वारा उत्पादों के अनधिकृत प्रयोग पर अंकुश लगाया जा सकता है।
  • यह किसी भौगोलिक क्षेत्र में उत्पादित होने वाली वस्तुओं का महत्व बढ़ा देता है।
  • जीआई टैग के द्वारा सदियों से चली आ रही परंपरागत ज्ञान को संरक्षित एवं संवर्धन किया जा सकता है।
  • जीआई टैग के द्वारा स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने में मदद मिलती है।
  • इसके द्वारा टूरिज्म और निर्यात को बढ़ावा देने में मदद मिलती है।

जल जीवन मिशन

चर्चा में क्यों

जल जीवन मिशन (JJM) के लिए वित्तपोषण की कमी को पुरा करने के लिए जल शक्ति मंत्रालय 2024 तक प्रत्येक ग्रामीण परिवार को पेयजल नल कनेक्शन प्रदान करने की परियोजना के लिए 15 वें वित्त आयोग से 82,000 करोड़ रूपये की अतिरिक्त धनराशि मांग की है। वर्तमान में केवल 18% घरों तक ही पेयजल नल कनेक्शन की पहुँच है।

जल जीवन मिशन (Jal Jeevan Mission)

जल जीवन मिशन

  • पिछले वर्ष स्‍वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘जल जीवन मिशन (JJM)’ प्रारंभ किए जाने की घोषणा की थी।
  • जल जीवन मिशन का उद्देश्य वर्ष 2024 तक प्रत्येक ग्रामीण परिवार को नियमित आधार पर, निर्धारित गुणवत्ता का तथा पर्याप्त मात्रा में पीने योग्य जल उपलब्ध कराना है।
  • इसके तहत 2024 तक कार्यात्मक ग्रामीण नल कनेक्शन (FHTC) के माध्यम से प्रत्येक ग्रामीण परिवार को प्रति व्यक्ति प्रति दिन 55 लीटर पानी की आपूर्ति किए जाने का लक्ष्य रखा गया है।
  • वर्तमान में, देश के लगभग 17.8 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से केवल 3.3 करोड़ परिवारों के पास ही नल जल कनेक्शन की सुविधा है। अत: जल जीवन मिशन के अंतर्गत, वर्ष 2024 तक शेष लगभग 14.6 करोड़ परिवारों को घरेलू नल कनेक्शन उपलब्ध कराया जाना है।
  • इसका उद्देश्य कृषि उपयोग के लिए वर्षा जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और घरेलू अपशिष्ट जल के प्रबंधन हेतु स्थानीय बुनियादी ढाँचा तैयार करना भी है।

योजना की मुख्य चुनौतियां

  • उपलब्ध मात्रा - सरकारी आंकड़ों के अनुसार 2050 तक उपलब्ध कुल पानी सभी क्षेत्रों में बढ़ती पानी की मांग को पूरा नहीं कर पाएगा, इसमें घरेलू क्षेत्र भी शामिल हैं। अगर पानी की मांग का प्रबंधन और पानी का कुशलता से उपयोग नहीं किया गया तो घरों तक पानी की आपूर्ति करने में समस्या पैदा होगी।
  • सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण पेय जल की व्यवस्था - यह योजना न केवल घरों को पाइप नेटवर्क से जोड़ने के लिए है बल्कि घरों में सुरक्षित और गुणवत्ता पानी की आपूर्ति करने के लिए है। यह मिशन पर्याप्त और बेहतर स्वच्छता की भी बात करता है। स्वच्छ और स्वस्थ तरीके से लोगों तक सुरक्षित और सस्ता पानी पहुँचाना भी एक चुनौती होगी।
  • सुदूर गाँवों तक पानी पहुँचाना - इस संबंध में मुख्य कठिनाई उन ग्रामीण परिवारों और वंचित समूहों तक पानी पहुंचाने में आएगी जो सुदूर बाहरी क्षेत्रों में रहते हैं जहाँ पाइप के ज़रिए पानी पहुँचाना और नेटवर्क का निर्माण करना महंगा होगा और टिकाऊ भी नहीं होगा। उनके लिए विकेंद्रीकृत समाधान की ज़रूरत है न कि केंद्रीकृत नेटवर्क की।

आकांक्षी ज़िला कार्यक्रम

चर्चा में क्यों

  • हाल ही में केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ जितेंद्र सिंह ने उत्तर पूर्व राज्यों पर विशेष ध्यान देने के साथ-साथ आकांक्षी जिलों में COVID-19 की स्थिति और स्वास्थ्य सुविधा की समीक्षा की।
  • कोविड-19 महामारी के मद्देनजर आठ उत्तर पूर्वी राज्यों में स्वास्थ्य सेवा की सुविधा के लिए, विशेष रूप से संक्रामक रोगों के प्रबंधन संबंधी बुनियादी ढाँचा विकसित करने हेतु 90 करोड़ रुपये निवेश करने का भी निर्णय लिया है।

क्या है आकांक्षी ज़िला कार्यक्रम?

  • देश के कम विकसित क्षेत्रों में लोगों के जीवन में समयबद्ध तरीके से बदलाव लाने के लिये यह कार्यक्रम जनवरी 2018 में आरंभ किया गया। भारत में परिवर्तन सुनिश्चित करने हेतु संस्थान-नीति आयोग द्वारा तैयार इस कार्यक्रम का उद्देश्य 115 सर्वाधिक पिछड़े ज़िलों का कायाकल्प करना है।
  • इन ज़िलो में विशेष रूप से स्वास्थ्य और पोषण, शिक्षण, कृषि और जल प्रबंधन, वित्तीय समावेशन और कौशल विकास पर ध्यान दिया जाना है।
  • आकांक्षी ज़िला कार्यक्रम एक ऐतिहासिक पहल है, जिसका उद्देश्य विभिन्न प्रयासों से प्रशासन संबंधी मुद्दों का समाधान करना है।
  • इन प्रयासों में दूरदर्शिता और ज़िला योजना, पर्याप्त संस्थागत व्यवस्था, सभी पक्षों के प्रयासों में तालमेल और विभिन्न ज़िलों के बीच रैंकिंग आधारित प्रतियोगिता के माध्यम से उनमें विकास की इच्छा और तत्परता की भावना को जागृत करना है।

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