यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स (19 सितंबर 2020)

Daily Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC, RPSC and All State PCS Examinations


यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स

Daily Hindi Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC, RPSC and All State PCS Examinations


राष्ट्रीय तकनीकी कपड़ा मिशन

चर्चा में क्यों?

  • केंद्र सरकार ने 1480 करोड़ रुपये के कुल परिव्‍यय के साथ देश को तकनीकी टेक्‍सटाइल्‍स क्षेत्र में वैश्विक रूप से अग्रणी राष्‍ट्र के रूप में स्‍थापित करने की दृष्टि से राष्‍ट्रीय तकनीकी कपड़ा मिशन के गठन को अपनी स्‍वीकृति दे दी है। इस मिशन की चार वर्षीय कार्यान्‍वयन अवधि वित्‍तीय वर्ष 2020-21 से 2023-24 तक होगी।

इस मिशन के चार घटक होंगे :-

1. अनुसंधान, नवाचार और विकास: इसके अंतर्गत 1000 करोड़ रुपये के परिव्‍यय की योजना तैयार की गई है जिसमें-

  • कार्बन फाइबर, अरामिड फाइबर, नाइलॉन फाइबर और कम्‍पोजिट में शानदार तकनीकी उत्‍पादों के उद्देश्‍य से फाइबर स्‍तर पर मौलिक अनुसंधान और
  • भू-टेक्‍सटाइल, कृषि- टेक्‍सटाइल, चिकित्‍सा-टेक्‍सटाइल, मोबाइल- टेक्‍सटाइल और खेल- टेक्‍सटाइल एवं जैवनिम्‍नीकरण त‍कनीकी टेक्‍सटाइल के विकास पर आधारित अनुसंधान अनुप्रयोग को शामिल किया गया है।

2. संवर्द्धन और विपणन विकास:

  • भारतीय तकनीकी कपड़ा श्रेणी का अनुमानित आकार 16 अरब डॉलर है जो 250 अरब डॉलर के वैश्विक तकनीकी कपड़ा बाजार का लगभग 6 प्रतिशत है।
  • भारत में तकनीकी कपड़ा की पहुंच 5 से 10 प्रतिशत ही है। जबकि विकसित देशों में यह आंकड़ा 30 से 70 प्रतिशत है।
  • इस मिशन का उद्देश्‍य बाजार विकास, बाजार संवर्धन, अंतर्राष्ट्रीय तकनीकी सहयोग, निवेश प्रोत्साहन और 'मेक इन इंडिया' पहल के माध्यम से सालाना 15 से 20 प्रतिशत की औसत वृद्धि के साथ घरेलू बाजार के आकार 2024 तक 40 से 50 अरब डॉलर करना है।

3. निर्यात संवर्धन:

  • इसका उद्देश्‍य तकनीकी कपड़ा के निर्यात को बढ़ाकर वर्ष 2021-22 तक 20,000 करोड़ रुपये करना है जो वर्तमान में लगभग 14,000 करोड़ रुपये है।
  • साथ ही वर्ष 2023-24 तक प्रति वर्ष निर्यात में 10 प्रतिशत औसत वृद्धि सुनिश्चित करना है।
  • इस श्रेणी में प्रभावी बेहतर तालमेल और संवर्द्धन गतिविधियों के लिए एक तकनीकी कपड़ा निर्यात संवर्धन परिषद की स्थापना की जाएगी।

शिक्षा, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास:

  • यह मिशन उच्चतर इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी स्‍तर पर तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देगा और इसके अनुप्रयोग का दायरा इंजीनियरिंग, चिकित्सा, कृषि, जलीय कृषि और डेयरी जैसे क्षेत्रों तक बढ़ाएगा।
  • कौशल विकास को बढ़ावा दिया जाएगा और अत्यधिक कुशल मानव संसाधनों का पर्याप्त भंडार तैयार करेगा ताकि अपेक्षाकृत परिष्कृत तकनीकी कपड़ा विनिर्माण इकाइयों की आवश्यकता पूरी की जा सके।

तकनीकी टेक्‍सटाइल्‍स का महत्व

  • तकनीकी वस्त्र ऐसे कपड़ा सामग्री और उत्पाद हैं जो सौंदर्य विशेषताओं की बजाय मुख्‍य रूप से तकनीकी प्रदर्शन और कार्यात्मक गुणों के लिए निर्मित होते हैं।
  • तकनीकी कपड़ा उत्पादों को उनके इस्‍तेमाल क्षेत्रों के आधार पर 12 विभिन्‍न श्रेणियों (एग्रोटेक, बिल्डटेक, क्लोथेक, जियोटेक, होमटेक, इंडिटेक, मोबिलटेक, मेडिक, प्रोटेक, स्पोर्ट्सटेक, ओएकोटेक, पैकटेक) में बांटा गया है।
  • यह मिशन रणनीतिक क्षेत्रों सहित देश के विभिन्‍न मिशनों, कार्यक्रमों आदि में तकनीकी कपड़ों के उपयोग पर ध्यान केंद्रित करेगा।
  • कृषि, जलीय कृषि, डेयरी, मुर्गीपालन आदि में तकनीकी कपड़ों का उपयोग।
  • जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन, आयुष्मान भारत से अर्थव्‍यवस्‍था में लागत, विनिर्माण और निर्यात गतिविधियों को बढ़ावा देने के अलावा, प्रति एकड़ भूमि जोतने वाले किसानों कर बेहतर आय, जल एवं मृदा संरक्षण, बेहतर कृषि उत्पादकता और उच्च आय में समग्र सुधार आएगा।
  • राजमार्ग, रेलवे और बंदरगाहों में जियो-टेक्‍सटाइल्‍स के उपयोग से बुनियादी ढांचा बेहतर होगा, रखरखाव लागत में कमी आएगी और बुनियादी ढांचा परिसंपत्तियों का जीवन चक्र बेहतर होगा।

क्रा नहर परियोजना

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में थाईलैंड ने दावा किया है कि हिंद महासागर में बनने वाली क्रा नहर परियोजना के निर्माण को लेकर भारत समेत अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कई देशों ने रुचि दिखाई है और इसके बारे में वह विचार करेगा।

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क्रा नहर परियोजना

  • क्रा नहर को थाई नहर के नाम से भी जाना जाता है। इसका निर्माण थाईलैंड की खाड़ी को अंडमान सागर से जोड़ने के लिए क्रा स्थलडमरूमध्य को काट कर किया जाना है।
  • इसके बनने से इस क्षेत्र में समुद्री परिवहन को आसान बनाया जा सकेगा।
  • यह नहर मलक्का जलसन्धि से होने वाले यातायात के लिए एक आसान विकल्प उपलब्ध करा सकता है। जिससे हिन्द महासागर से चीन और जापान के व्यापारिक मार्ग में 1200 किमी की कमी हो सकती है।
  • चीन ने इसे 21वीं सदी के समुद्री सिल्क रोड की संज्ञा दी है। चीन इस नहर परियोजना को किसी भी सूरत में पूरा करना चाहता है क्योंकि इसके बाद उसकी हिंद महासागर तक पहुंच आसान हो जाएगी।
  • हालांकि थाईलैंड सरकार ‘क्रा कैनाल प्रोजेक्ट’ को रद्द कर दिया था और अब उसने दावा किया है कि भारत समेत अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कई देशों ने इस नहर परियोजना में रुचि दिखाई है।

इंटरनेशनल कोस्टल क्लीन-अप डे और ब्लू फ्लैग प्रमाण-पत्र

चर्चा में क्यों?

  • 'इंटरनेशनल कोस्टल क्लीन-अप डे’(International Coastal Clean-Up Day) के मौके पर भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री ने कहा कि देश के आठ समुद्री तटों को प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन 'ब्लू फ्लैग'(Blue Flag) के लिए अनुशंसित किया गया है।

इंटरनेशनल कोस्टल क्लीन-अप डे

  • हर वर्ष सितंबर माह के तीसरे शनिवार को ‘इंटरनेशनल कोस्टल क्लीन-अप डे’ (अंतर्राष्ट्रीय तटीय सफाई दिवस) के रूप में चिह्नित किया जाता है। इसे 1986 से मनाया जा रहा है।
  • इस वर्ष 21 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय तटीय सफाई दिवस के रूप में मनाया जा रहा है।
  • यह दिवस लोगों को समुद्र तटों को साफ करने, कचरे को हटाने आदि के लिए प्रोत्साहित करता है।

क्या होता है 'ब्लू फ्लैग'(Blue Flag) प्रमाण-पत्र?

  • ‘ब्लू फ्लैग’ किसी भी समुद्री तट यानी बीच को दिया जाने वाला एक ख़ास क़िस्म का प्रमाण-पत्र होता है जो ‘फ़ाउंडेशन फॉर इनवॉयरमेंटल एजुकेशन’ नाम के एक अंतर्राष्ट्रीय गैर-सरकारी संगठन द्वारा दिया जाता है। इस संगठन का मक़सद पर्यावरणीय जागरुकता के ज़रिए सतत विकास को बढ़ावा देना है। डेनमार्क के कोपनहेगन शहर स्थित इस संगठन द्वारा ‘ब्लू फ्लैग’ सर्टिफ़िकेट की शुरुआत साल 1985 में की गई थी।
  • ब्लू फ्लैग मानकों के तहत समुद्र तट को पर्यावरण और पर्यटन से जुड़े 33 शर्तों को पूरा करना होता है। इन शर्तों को चार व्यापक वर्गों में बाँटा गया है-
  1. पर्यावरण शिक्षा और सूचना
  2. नहाने वाले पानी की गुणवत्ता
  3. पर्यावरण प्रबंधन
  4. सुरक्षा समेत अन्य सेवाएं
  • अगर किसी समुद्री तट को ब्लू फ्लैग का सर्टिफिकेट मिल जाता है तो इसका मतलब वो समुद्री तट या बीच प्लास्टिक मुक्त, गंदगी मुक्त और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन जैसी सुविधाओं से लैस है। साथ ही, वहां आने वाले सैलानियों के लिए साफ पानी की मौजूदगी, अंतरराष्ट्रीय मानकों के मुताबिक पर्यटन सुविधाएँ और समुद्र तट के आसपास पर्यावरणीय प्रभावों की जानकारी जैसी सुविधाएँ भी चुस्त-दुरुस्त होनी चाहिए।

भारत के आठ समुद्री तट

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा देश के जिन आठ समुद्री तटों को प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन 'ब्लू फ्लैग'(Blue Flag) के लिए अनुशंसित किया गया है, वे निम्नलिखित हैं-

  • गुजरात का शिवराजपुर
  • ओडिशा का गोल्डन तट
  • केरल का कप्पड़
  • आंध्र प्रदेश का रुशीकोंडा
  • कर्नाटक का पदुबिद्री और कासरकोड़ (Padubidri and Kasarkod)
  • अंडमान एवं निकोबार का राधानगर एक तट
  • दमन-दीव का घोघला (Ghoghla)

भारत सरकार के प्रयास

  • भारत ने ‘ब्लू फ्लैग’ मानकों के मुताबिक अपने समुद्र तटों को विकसित करने का पायलट प्रोजेक्ट दिसंबर 2017 में शुरु किया था।
  • इस परियोजना के दो मूल मक़सद हैं। पहला, भारत में लगातार गंदगी और प्रदूषण के शिकार होते समुद्र तटों को इस समस्या से निजात दिलाकर इनका पर्यावास दुरुस्त करना और दूसरा, सतत विकास और पर्यटन सुविधाओं को बढ़ाकर भारत में इको फ्रेंडली पर्यटन विकसित करना है।
  • भारत में, समुद्री तटों को ‘ब्लू फ्लैग’ के मानकों के मुताबिक विकसित करने का काम ‘सोसायटी फॉर इंटीग्रेटेड कोस्टल मैनेजमेंट’ (SICM) नाम की संस्था कर रही है। यह संस्था पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करती है।
  • भारत ने एकीकृत तटीय क्षेत्र प्रबंधन (ICZM- Integrated Coastal Zone Management) के तहत अपना इको-लेबल “BEAMS” (Beach Environment & Aesthetics Management Services) को भी लांच किया है।

होम्योपैथी केंद्रीय परिषद और भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद (संशोधन विधेयक, 2020)

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में राज्य सभा ने होम्योपैथी केंद्रीय परिषद संशोधन विधेयक, 2020 और भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद संशोधन विधेयक, 2020 को पारित कर दिया है।

परिचय

  • उपर्युक्त विधेयक देश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली तथा होम्योपैथी और ऐलोपैथी चिकित्सा प्रणालियों में एकीकृत अनुसंधान को भी सुनिश्चित करेगा।
  • भारत सरकार उत्‍कृष्‍ट स्‍वाथ्य देखभाल सुविधाएं उपलब्‍ध कराने के लिए पारदर्शी ढंग से भारतीय चिकित्‍सा पद्धतियों में सकारात्‍मक परिवर्तन के लिए प्रतिबद्ध है।
  • होम्‍योपैथी, योग और प्राकृतिक चिकित्‍सा प्राचीन चिकित्‍सा पद्धतियां हैं और इनका वैज्ञानिक आधार है।

होम्योपैथी केंद्रीय परिषद संशोधन विधेयक, 2020

  • होम्योपैथी केंद्रीय परिषद संशोधन विधेयक, 2020 के द्वारा होम्योपैथी केंद्रीय परिषद अधिनियम, 1973 में संशोधन किया गया है।
  • इस संशोधन के माध्यम से देश में केंद्रीय होम्योपैथी परिषद की व्यवस्था की गई है जो होम्योपैथिक शिक्षा और प्रैक्टिस को नियंत्रित करेगी।
  • यह विधेयक अप्रैल में जारी होम्योपैथी केंद्रीय परिषद संशोधन अध्यादेश का स्थान लेगा। इसके तहत केंद्रीय परिषद की अवधि को दो साल से बढ़ाकर तीन साल करने के लिए 1973 के कानून में संशोधन किया गया है।

भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद संशोधन विधेयक, 2020

  • भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद संशोधन विधेयक, 2020 को 1970 के भारतीय चिकित्‍सा केन्‍द्रीय परिषद कानून में संशोधन के लिए लाया गया है।
  • यह संशोधन अधिनियिम आर्युवेद, योग और नेचुरोपैथिक सहित भारतीय चिकित्‍सा पद्धति की शिक्षा और अभ्‍यास को नियंत्रित करता है।
  • इस विधेयक में एक वर्ष के अंदर केन्‍द्रीय परिषद के पुनर्गठन का प्रस्‍ताव है। यह केन्‍द्रीय परिषद अप्रैल से एक वर्ष के लिए निलंबित रहेगी। तब तक केन्‍द्र सरकार निदेशक मंडल का गठन करेगी जिसे केन्‍द्रीय परिषद के अधिकार होंगे। निदेशक मंडल में दस सदस्‍य होंगे।