यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स (19 जून 2020)


यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स

Daily Hindi Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC, RPSC and All State PCS Examinations


कानून का शासन सूचकांक (Rule of Law Index)

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में उच्चतम न्यायालय ने 2020 कानून का शासन सूचकांक के सन्दर्भ में वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। इस याचिका में भारत के सूचकांक में निम्न स्थिति पर केन्द्र, राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को विशेषज्ञों की समितियां गठित करने की मांग की गयी थी।
  • हालाँकि न्यायालय ने कहा कि इस संबंध में उचित कार्रवाई के लिये वह सरकार को प्रतिवेदन दे सकते हैं एवं सरकार कानून का शासन वाले देशों के सूचकांक में भारत के स्थान में सुधार के लिये आज से छह महीने के भीतर समितियां गठित करने का निर्णय ले सकती है।

Rule of Law Index 2020

पृष्ठभूमि

  • भारत की कानून के सूचकांक में भारत के स्थान में सुधार के लिये एक याचिका प्रस्तुत की गयी थी। इसके लिए इसमें केन्द्र, राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को विशेषज्ञों की समितियों के गठन की मांग की गयी थी। इसके साथ ही इस याचिका में विधि आयोग को इस सूचकांक में शामिल शीर्ष 20 देशों की व्यवस्थाओं का अध्ययन करके भारत की अंतरराष्ट्रीय रैंकिंग में सुधार के उपायों के बारे में सुझाव देने की भी मांग की गयी थी।

क्या है कानून का शासन सूचकांक?

  • कानून का शासन सूचकांक प्रतिवर्ष एक स्वतंत्र संगठन ‘वर्ल्ड जस्टिस प्रोजेक्ट’ द्वारा तैयार किया जाता है। इसमें किसी देश की रैंकिंग का आधार उस देश शासकीय खुलापन, मौलिक अधिकार, दीवानी और फौजदारी न्याय व्यवस्था तथा भ्रष्टाचार पर अंकुश पाने जैसे कई बिन्दुओं के आधार पर तैयार की जाती है।

कानून का शासन सूचकांक 2020 से सम्बंधित महत्वपूर्ण तथ्य

  • 128 देशों की सूची में डेनमार्क प्रथम स्थान पर रहा। नॉर्वे और फीनलैंड को क्रमशः दुसरे और तीसरे स्थान पर रहे। इस सूचकांक में भारत को 69 वीं रैंकिंग प्राप्त हुई। इस सूचकांक में सबसे निम्न स्थिति वेनेजुएला की रही एवं यह 128 स्थान पर रहा। इसके अलावा कम्बोडिया को इस सूची में 127 स्थान प्राप्त हुआ।

गरीब कल्याण रोजगार अभियान

चर्चा में क्यों?

  • वापस आए प्रवासी श्रमिकों और गांव के लोगों को सशक्त बनाने और आजीविका के अवसर प्रदान करने के लिए भारत सरकार ने एक व्यापक ग्रामीण सार्वजनिक कार्य योजना 'गरीब कल्याण रोजगार अभियान' शुरू करने का निर्णय लिया है।

पृष्ठभूमि

  • कोविड 19 के कारण बड़ी मात्रा में श्रमिकों का रिवर्स माइग्रेशन हुआ है। इससे ग्रामीण अवसंरचना पर भार बढ़ गया है, इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर आजीविका उपलब्ध करवाने के चुनौती सरकार के समक्ष बनी हुई थी।

गरीब कल्याण रोजगार अभियान के बारे

  • इस अभियान के तहत प्रवासी मजदूरों को रोजगार के अवसरों को बढ़ाने के साथ ही स्थायी बुनियादी ढांचा तैयार किया जाएगा। पीएम मोदी 20 जून, 2020 को सुबह 11 बजे बिहार के मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री की मौजूदगी में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम में इस अभियान की शुरुआत करेंगे। यह अभियान बिहार के खगड़िया जिले के ग्राम-तेलिहार, ब्लॉक- बेलदौर से लॉन्च किया जाएगा। आगे पांच अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री और संबंधित मंत्रालयों के केंद्रीय मंत्री भी इस वर्चुअल लॉन्च में भाग लेंगे।
  • 125 दिनों का यह अभियान मिशन मोड में चलाया जाएगा। 50 हजार करोड़ रुपये के फंड से एक तरफ प्रवासी श्रमिकों को रोजगार देने के लिए विभिन्न प्रकार के 25 कार्यों का तीव्र और केंद्रित होकर क्रियान्वयन होगा, तो दूसरी तरफ देश के ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे का निर्माण किया जाएगा।
  • 116 जिलों के 25 हजार से ज्यादा प्रवासी श्रमिकों के साथ इस अभियान में बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड और ओडिशा इन 6 राज्यों को चुना गया है, जिसमें इच्छा जताने वाले 27 जिले शामिल हैं। इन जिलों से दो तिहाई प्रवासी श्रमिकों के लाभान्वित होने का अनुमान है।

अभियान से जुड़ें मंत्रालय

  • यह अभियान 12 विभिन्न मंत्रालयों/विभागों जैसे ग्रामीण विकास, पंचायती राज, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, खान, पेयजल और स्वच्छता, पर्यावरण, रेलवे, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस, नई और नवीकरणीय ऊर्जा, सीमा सड़क, दूरसंचार और कृषि का एक समन्वित प्रयास होगा।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council)

  • हाल ही में भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थाई सदस्य चुन लिया गया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के लिए बुधवार को हुई वोटिंग में महासभा के 193 देशों ने हिस्सा लिया। कुल 192 मतों में से 184 मत भारत के पक्ष में पड़ा। भारत 8 वीं बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थाई सदस्य बना है।
  • भारत 2021-22 के कार्यकाल के लिए एशिया-प्रशांत श्रेणी से गैर-स्थायी सीट के लिए एकमात्र उम्मीदवार था।
  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का अस्थाई सदस्यों में भारत के साथ आयरलैंड, मैक्सिको और नॉर्वे भी अस्थाई सदस्य चुने गए हैं।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council)

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद क्या है?

  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, संयुक्त राष्ट्र का एक प्रमुख अंग है जिसका मुख्य कार्य अर्न्तराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को बनाये रखना है।
  • इसकी शक्तियों में अस्थिर देशों या युद्ध से ग्रसित देशों में शांति स्थापित करने के अभियानों को चलाना, सम्पूर्ण अर्न्तराष्ट्रीय जगत के लिए खतरा उत्पन्न करने वाले देशों पर अर्न्तराष्ट्रीय प्रतिबंध लगाना, और सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के माध्यम से सैन्य कार्यवाही करना इत्यादि शामिल है।
  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के आदेश प्रस्तावों या Resolutions के माध्यम से जारी किये जाते हैं जो सदस्य देशों के लिए बाध्यकारी होते हैं।
  • सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं, जिसमें कुल 5 सदस्य देश इसके स्थाई सदस्य होते हैं, जिन्हें P-5 देश कहा जाता है। ये 5 सदस्य देश हैं- रूस, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस , चीन एवं अमेरिका। इन P-5 सदस्यों के पास किसी भी निर्णय पर वीटो लगाने की शक्ति होती है।
  • इन P-5 देशों के अलावा सुरक्षा परिषद में 10 गैर-स्थाई सदस्य भी होते हैं, जिन्हें दो साल के लिए क्षेत्रीय आधार पर चुना जाता है।
  • इस इकाई की अध्यता मासिक रूप से हर सदस्य देश के द्वारा जारी है।
  • सुरक्षा परिषद का मुख्यालय न्यूयार्क में स्थित है।
  • इन दस गैर-स्थाई देशों का कार्यकाल 1 January को आधिकारिक रूप से शुरू होता है, जिसमें से 5 सदस्य हर साल बाहर निकल जाते हैं।
  • गैर स्थाई सदस्य बनने के लिए हर उम्मीदवार देश को उस सीट के लिए पड़े कुल वोटों की संख्या का 2/3 वोट प्राप्त करना होता है।

कोविड-19 की संभावित दवा उमीफेनोविर (Umifenovir)

चर्चा में क्यों

  • हाल ही में औषधि महानियंत्रक, भारत सरकार (Drug Controller General of India-DGCI) द्वारा
  • से वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) की लखनऊ स्थित प्रयोगशाला सेंट्रल ड्रग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीडीआरआई) को एंटी-वायरल दवा उमिफेनोविर के तीसरे चरण के चिकित्सीय परीक्षण के लिए मंजूरी प्रदान की गयी है।

Novel Coronavirus Disease COVID-19

उमीफेनोविर

  • उमीफेनोविर एक एंटी-वायरल दवा है जो कोशिकाओं को वायरस के प्रवेश को रोकने और प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय करने के माध्यम से कार्य करती है। यह एक विश्वसनीय और सुरक्षित दवा है।
  • चीन और रूस में उमिफेनोविर का उपयोग मुख्य रूप से इन्फ्लुएंजा के इलाज के लिए किया जाता है एवं अन्य किसी देश में फिलहाल यह उपलब्ध नहीं है ।हाल ही में कोविड-19 के रोगियों के उपचार के लिए इस दवा के संभावित उपयोग को चिह्नित किया गया है।
  • दवा के निर्माण और विपणन के लिए संस्थान द्वारा विकसित किफायती प्रक्रिया प्रौद्योगिकी को मेडिज़ेस्ट फार्मास्यूटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड गोवा, को लाइसेंस किया गया है।
  • दवा के लिए सभी एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट (कच्चे माल) स्वदेशी रूप से उपलब्ध हैं और यदि क्लीनिकल परीक्षण सफल रहा है, तो उमिफेनोविर कोविड-19 के खिलाफ एक सुरक्षित, प्रभावकारी, सस्ती दवा हो सकती है और राष्ट्रीय कार्यक्रम का हिस्सा हो सकती है।
  • डीसीजीआई की मंजूरी मिलने के बाद अब इस दवा के प्रभाव, सुरक्षा और सहनशीलता के आकलन के लिए रेंडम, डबल ब्लाइंडेड, प्लेसबो नियंत्रित चिकित्सीय परीक्षण किए जा सकेंगे। यह मंजूरी मिलने के बाद भारतीय रोगियों पर इस दवा का परीक्षण किया जा सकेगा।

औषधि महानियंत्रक, भारत सरकार

  • औषधि महानियंत्रक, भारत सरकार (DCGI) भारत सरकार के सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) का एक विभाग है। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत आता है।
  • डीसीजीआई भारत में दवाओं के विनिर्माण, बिक्री, आयात और वितरण के मानक और गुणवत्ता को सुनिश्चित करने का कार्य करता है। वर्तमान में ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) वी जी सोमानी हैं।

पार्टिसिपेटरी नोट्स (P-Notes)

चर्चा में क्यों

  • घरेलू पूंजी बाजार में पार्टिसिपेटरी नोट्स (पी-नोट्स) के माध्यम से होने वाला निवेश मई अंत तक बढ़कर 60,027 करोड़ रुपये पर पहुंच गया।
  • भारतीय प्रतिभूति एवं विनियम बोर्ड (सेबी) के आंकड़ों के अनुसार अप्रैल के अंत तक भारतीय घरेलू पूंजी बाजारों...शेयर, बांड, हाइब्रिड प्रतिभूतियों और डेरिवेटिव्स में पी-नोट्स के जरिये निवेश का आंकड़ा 57,100 करोड़ रुपये था।

क्या है पार्टिसिपेटरी नोट्स (P-Notes)?

  • पी-नोट्स पंजीकृत विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) द्वारा ऐसे विदेशी निवेशकों को जारी किए जाते हैं जो सेबी में सीधे अपना पंजीकरण कराए बिना भारतीय शेयर बाजार में निवेश करना चाहते हैं। पी-नोट्स को भागीदार नोट्स या ऑफशोर डेरिवेटिव इंट्रूमेंट (ODI) भी कहा जाता है।
  • निवेशकों को पी-नोट्स सेबी के पास रजिस्‍टर्ड विदेशी ब्रोक्रेज हाउस द्वारा जारी किया जाता है जिसमे निवेशकों को निवेश के समय अलग से पहचान बताना और पूरा ब्योरा सेबी को को देना जरूरी नहीं होता है।
  • भारतीय पूंजी बाजार में 1992 में सेबी ने रजिस्‍टर्ड विदेशी ब्रोक्रेज हाउस को पी-नोट्स के जरिए निवेश करने की इजाजत दी थी।
  • यद्यपि पी-नोट्स को पूरी जांच-परख की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है फिर भी इनकी अपारदर्शी प्रकृति के कारण इन्हे काले धन का निवेश करने के साधन के रूप में जाना जाता रहा है।

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