यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स (18 सितंबर 2020)

Daily Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC, RPSC and All State PCS Examinations


यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स

Daily Hindi Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC, RPSC and All State PCS Examinations


ग्लोबल स्मार्ट सिटी इंडेक्स 2020

चर्चा में क्यों?

  • ग्लोबल स्मार्ट सिटी (Global Smart Cities) की सूची में भारत के 4 बड़े शहरों- नई दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और बेंगलुरु की रैंक में गिरावट आई है। वहीं सिंगापुर (Singapore) इस सूची में सबसे ऊपर है।

ग्लोबल स्मार्ट सिटी इंडेक्स के बारे में

  • यह इंडेक्स इंस्टीट्यूट फॉर मैनेजमेंट डेवलपमेंट (IMD) द्वारा सिंगापुर यूनिवर्सिटी फॉर टेक्नोलॉजी एंड डिजाइन (SUTD) के साथ मिलकर जारी किया गया है।
  • ग्लोबल स्मार्ट सिटी इंडेक्स के तहत शहरीकरण की कमियों को कम करने के लिए टेक्नोलॉजी के विकास के आधार पर रैंक दी जाती है।
  • इस इंडेक्स को तैयार करते समय कोरोना काल में टेक्नोलॉजी की क्या भूमिका को भी ध्यान में रखा गया है।
  • ग्लोबल स्मार्ट सिटी इंडेक्स 2020 की सूची में हैदराबाद को 85वां (2019 में 67वां) स्थान और दिल्ली को 86वां (2019 में 68वां) स्थान मिला है।
  • वहीं मुंबई को 93वीं रैंक और बेंगलुरु को 95वीं रैंक दी गई है, जबकि साल 2019 में मुंबई को 78 और बेंगलुरु को 79वां स्थान मिला था।

रैंकिंग में गिरावट का कारण

  • रिपोर्ट के अनुसार भारत के शहरों- नई दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और बेंगलुरु की रैंकिंग में उल्लेखनीय गिरावट का मुख्य कारण तकनीकी विकास (Development of Technology) का न होना है
  • भारतीय शहर कोरोनावायरस (Coronavirus) से ज्यादा प्रभावित हुए हैं, क्योंकि वे इसके लिए तकनीकी रूप से तैयार नहीं थे।
  • इसी के साथ इन शहरों में एक समस्या वायु प्रदूषण की भी रही है।

रैंकिंग में शीर्ष 10 शहर

  1. सिंगापुर
  2. हेलसिंकी
  3. ज्यूरिख
  4. ऑकलैंड
  5. ओस्लो
  6. कोपेनहेगन
  7. जिनेवा
  8. ताइपे
  9. एम्सटर्डम
  10. न्यूयॉर्क
  • इस साल की रैंकिंग में यह बताया गया है कि अलग-अलग शहरों में टेक्नोलॉजी के विकास को लेकर अलग-अलग धारणाएं (अप्रोच) हैं, क्योंकि महामारी से निपटना प्राथमिकता बन गई है। हालांकि, IMD के प्रोफेसर का मानना है कि कोरोना के प्रभाव को तो नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है, लेकिन तकनीकी विकास ऐसे संकट से निपटने में ज्यादा मदद करता है।

गंगा नदी में आठ अनोखी प्रजातियों की मछलियों की मौजूदगी

चर्चा में क्यों?

  • जलशक्ति राज्य मंत्री रतनलाल कटारिया ने लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि एक अध्ययन के माध्यम से पता चला है कि गंगा नदी में आठ अलग-अलग एवं अनोखी प्रजातियों की मछलियां मौजूद हैं। ‘मछलियों एवं मत्स्य पालन के आकलन’ की परियोजना के तहत इन आठ अनोखी प्रजातियों की मछलियों की मौजूदगी के बारे में पता लगाया गया।

‘मछलियों एवं मत्स्य पालन के आकलन’ परियोजना के बारे में

  • नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत सात करोड़ रुपये से अधिक की लागत से ‘मछलियों एवं मत्स्य पालन के आकलन’ की परियोजना आरंभ की गई थी।
  • इस परियोजना के तहत कराए गए अध्ययन में गंगा नदी की मुख्य धारा में 190 प्रजाति की मछलियों के बारे में पता चला। इनमें आठ अनोखी किस्म की मछलियां हैं।
  • ‘मछलियों एवं मत्स्य पालन के आकलन’ की यह परियोजना केंद्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान (CIFRI) द्वारा संचालित की गयी थी।
  • इस परियोजना के मिम्नलिखित उद्देश्य थे-
  • गंगा नदी की मछली और मत्स्य पालन का अध्ययन,
  • मछली वितरण के संबंध में उनके प्रमुख आवास का आकलन
  • मछलियों की विभिन्न जैविक गतिविधियों का आकलन,
  • चयनित मछली प्रजातियों के बीज उत्पादन (स्व-स्थाने),
  • नदी के जिस भाग में मछलियाँ नहीं वहाँ उन्हें बढ़ाने का प्रयास
  • स्थायी मत्स्य पालन और स्थानीय मछुआरों के संरक्षण पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करना।

कौन से आठ अनोखी मछलियों की प्रजातियां पाई गयी?

इन आठ अनोखी मछलियों की प्रजातियों में शामिल हैं

  1. हाइपोफाल्मिचथिस मोलिट्रिक्स (Hypophthalmichthys molitrix-silver carp)
  2. एरिस्टिचिस नोबिलिस (Aristichthys nobilis-big head carp)
  3. केटेनोफ्रींजोडोन आइडेला (Ctenopharyngodon Idella-grass carp)
  4. साइप्रिनस पर्पियो वर्ल स्पेक्युलैरिस (Cyprinus carpio var specularis)
  5. साइप्रिनस कार्पियो वर् कम्युनिस (Cyprinus carpio var communis-common carp)
  6. क्लारियास गार्सपैंसिन (Clarias gariepinus-African magur)
  7. Pterygoplichthys disjunctivus (suckermouth armoured sailfin cat fish)
  8. ओरोक्रोमिस नीलोटिक (Oreochromis niloticus -tilapia)

केंद्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान

  • भारत सरकार ने 19 मार्च 1947 को कलकत्ता (बैरकपुर) में एक केंद्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान स्टेशन की स्थापना की थी।
  • वर्ष 1959 में केंद्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान स्टेशन को पूर्णतः एक अनुसंधान संस्थान में परिवर्तित करके इसका नाम केंद्रीय अंतर्देशीय मत्स्य अनुसंधान संस्थान कर दिया गया था।
  • वर्ष 1967 में इसे कृषि मंत्रालय के आई.सी.ए.आर. (Indian Council of Agricultural Research) विभाग के अधीन लाया गया।
  • यह संस्थान सतत् मत्स्यन, जलीय जैव-विविधता के संरक्षण, पारिस्थितिक सेवाओं की अखंडता एवं इस जल से सामाजिक लाभ पहुँचाने वाली गतिविधियों के संबंध में ज्ञान आधारित प्रबंधन की व्यवस्था सुनिश्चित करता है।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और मैंग्रोव वन

चर्चा में क्यों?

  • नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल(एनजीटी) ने हाल ही में भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और गुजरात सरकार को कच्छ जिले में मैंग्रोव वनों के विनाश के लिए जिम्मेदार उल्लंघनकर्ताओं से जुर्माना वसूलने का निर्देश दिया है।

एनजीटी द्वारा दिए गए निर्णय के बारे में

  • एनजीटी की पीठ ने कहा कि मैंग्रोव को नुकसान पहुंचाया गया लेकिन इसे नुकसान पहुंचाने वालों की पहचान नहीं की गयी जबकि दीन दयाल पोर्ट ट्रस्ट को इसकी जिम्मेदारी सौंपी गयी थी।
  • इस पीठ ने कहा कि एनजीटी के 11 सितंबर ,2019 के आदेश को लागू करने के लिए सरकार द्वारा कदम उठाए जाएं। मैंग्रोव वनों के विनाश के एवज में निर्धारित किया गया जुर्माना शीघ्र ही वसूला जाए और उन स्थानों को पहले की तरह बनाने का काम शुरू किया जाए जिन्हें क्षति पहुँचाई गयी है।
  • एनजीटी के मुताबिक वन विभाग और गुजरात तटीय जोन प्रबंधन प्राधिकरण की एक संयुक्त कमेटी इसकी निगरानी कर सकती है।
  • एनजीटी ने बताया कि आदेश का पालन करवाने के लिए वन विभाग नोडल एजेंसी की तरह काम करेगा । पृष्ठभूमि
  • एनजीटी गुजरात के कच्छ ऊंट प्रजनन संगठन की तरफ से दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा है, जिसमें एनजीटी के 11 सितम्बर 2019 के आदेशों को लागू करने की मांग की गई है।
  • याचिका में आरोप लगाया गया था कि दीन दयाल पोर्ट ट्रस्ट गुजरात के कच्छ जिले में मैंग्रोव को बचाने के लिए कदम नहीं उठा रहा है । मामले में केंद्र और अन्य के जवाब मांगे गए थे ।
  • गौरतलब है कि गुजरात के कच्छ में मैंग्रोव के नष्ट होने से ना केवल वन संरक्षण कानून, 1980 और तटीय विनियमन क्षेत्र अधिसूचना, 2011 का उल्लंघन हो रहा है बल्कि स्थानीय खरई ऊंट प्रजाति को उनके भोजन के सबसे बड़े स्रोत से वंचित किया जा रहा है। खरई ऊंट के भोजन पर संकट से इस क्षेत्र के ऊंट प्रजनन करने वालों की आजीविका भी प्रभावित हो रही है। इसके साथ ही मैंग्रोव के नष्ट होने से स्थानीय खरई ऊंटों का प्राकृतिक आवास खत्म होता जा रहा है।

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी)

  • राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण अधिनियम, 2010 द्वारा भारत में एक राष्ट्रीय हरित अधिकरण (National Green Tribunal-NGT) की स्थापना की गई है।
  • यह एक विशेष पर्यावरण अदालत है जो पर्यावरण संरक्षण और वनों का संरक्षण से संबंधित मामलों कि सुनवाई करती है।
  • अधिकरण की प्रधान पीठ नई-दिल्ली में और भोपाल, पुणे, कोलकाता और चेन्नई अधिकरण के अन्य चार पीठें हैं।
  • इसमें पूर्णकालिक अध्यक्ष के रूप में भारत के सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश या उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, न्यायिक सदस्य और विशेषज्ञ सदस्य शामिल होते हैं।
  • प्रत्येक श्रेणी में निर्धारित न्यायिक और विशेषज्ञ सदस्यों की न्यूनतम संख्या 10 अधिकतम संख्या 20 होती है।

मेंग्रोव वन

  • मेंग्रोव वनों को ज्वारीय वन, दलदली (Swampy) अथवा डेल्टाई वन (Delta Forest) भी कहा जाता है । ये वन भारत में ज्वारीय दलदलों, तटीय लैगून, डेल्टा तथा पश्च-जल झीलों के समीप मिलते हैं।
  • इन वनों का सबसे प्रसिद्ध वृक्ष सुन्दरी नामक वृक्ष है इसी के नाम पर गंगा- ब्रह्मपुत्र डेल्टाई वन को सुन्दरवन कहा जाता है।
  • इसके अलावा गुजरात के कच्छ क्षेत्र में भी ये वन पाए जाते हैं । इसलिए इन वनों को ‘कच्छ’ या ‘गरान वनस्पति’ भी कहते हैं।

कच्छ ऊंट (खराई ऊंट)

  • गुजरात, खराई ऊंट का एकमात्र घर है, जो कच्छ के रण की विषम जलवायु और उच्च लवणता उथले समुद्रों के प्रति अनुकूलित हैं।
  • खराई ऊंट तटीय द्वीपों के मेंग्रोव को अपने भोजन के रूप में उपयोग करते है। ये समुद्रों में तैरने में माहिर होते है।
  • इनकी संख्या 10000 से भी कम है और इन्हें आईयूसीएन की रेड सूची में लुप्तप्राय प्रजाति घोषित किया गया है।

ब्लैकरॉक मैलवेयर (BlackRock Malware)

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ने संसद में कहा है कि डेटा चोरी करने की क्षमताओं से लैस ‘ब्लैकरॉक’ (BlackRock) नाम के एक मैलवेयर(malware) का पता लगाया गया है।

ब्लैकरॉक मैलवेयर के बारे में

  • ब्लैकरॉक मैलवेयर , एक एंड्रॉइड मैलवेयर है। यह मैलवेयर इतना शक्तिशाली है कि यह एंटी-वायरस एप्लीकेशन को भी असफल कर सकता है तथा यह तुलनात्मक रूप से अधिक एप्स को लक्षित कर सकता है।
  • हालाँकि ब्लैकरॉक मैलवेयर, कोई नया मैलवेयर नहीं है, बल्कि यह ‘ज़ेरेस मैलवेयर (Xeres Malware) के लीक हुए सोर्स कोड (Source Code) पर आधारित है।
  • ‘ब्लैकरॉक’ (BlackRock) नामक मैलवेयर(malware) एंड्रॉइड मोबाइल उपकरणों को लक्षित करता है।
  • संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ने कहा कि यह (ब्लैकरॉक) मैलवेयर ईमेल एकाउंट , ई-कॉमर्स एप्स, मैसेजिंग / सोशल मीडिया एप्स, एंटरटेनमेंट एप्स, बैंकिंग, फाइनेंशियल एप्स आदि जैसे 300 से ज्यादा एप्स से क्रेडेंशियल्स चुरा सकता है।
  • इंडियन कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पांस टीम ( Indian Computer Emergency Response Team, CERT-In) ने जुलाई 2020 में अपनी वेबसाइट के साथ-साथ साइबर स्वच्छ केंद्र पर इस वायरस के बारे में अलर्ट प्रकाशित किया था।
  • इसके अतिरिक्त , संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ने कहा कि भारत सरकार ने दुर्भावनापूर्ण कोड (malicious code) का पता लगाने और क्लीनिंग (cleaning ) को सक्षम करने हेतु साइबर स्वच्छ केंद्र (Cyber Swachhta Kendra) का संचालन किया जा रहा है।
  • साइबर स्वच्छ केंद्र, इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (internet service providers-ISPs) और उद्योगों के साथ मिलकर अपना संचालन करता है।
  • ब्लैकरॉक मैलवेयर द्वारा इस प्रकार की घुसपैठ न केवल देश के नागरिकों के अधिकारों के लिए बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी एक चुनौती है।
  • इस प्रकार के मैलवेयर हमलों से डिजिटल प्लेटफार्मों पर हमारी अक्षमता पता चलती है।

क्या होता है मैलवेयर(malware)?

  • मैलवेयर(malware) एक तरह का ऐसा सॉफ्टवेयर(software) है जो किसी भी कंप्यूटर , लैपटॉप , मोबाइल आदि के डाटा की चोरी, उसे नष्ट करना या फिर उसको को ख़राब करने या हैक करने के काम आता है।
  • मैलवेयर प्रकार के सॉफ्टवेयर के निर्माण का उद्देश्य किसी कंप्यूटर , लैपटॉप , मोबाइल आदि उपकरणों को नुकसान पहुँचाना और संवेदनशील व्यक्तिगत जांकरियों को चुराना होता है।
  • चोरी किए हुए डाटा को हैकर डार्क वेब (Dark Web) पर बेंच देते है या फिर संबन्धित व्यक्ति से फिरौती मांगते हैं।