यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स (16 सितंबर 2020)

Daily Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC, RPSC and All State PCS Examinations


यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स

Daily Hindi Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC, RPSC and All State PCS Examinations


नमामि गंगे और अमृत योजना

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने बिहार राज्य में “नमामि गंगे” और “अमृत योजना” से जुड़ी चार विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन किया। इनमें पटना सिटी के बेउर और करम-लीचक में जलमल शोधन संयंत्र के साथ ही अमृत योजना के तहत सिवान और छपरा में जलापूर्ति से संबंधित परियोजनाएं शामिल हैं।
  • इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने मुंगेर और जमालपुर में जलापूर्ति योजनाओं और मुजफ्फरपुर में नमामि गंगे योजना के तहत रिवर फ्रंट विकास परियोजना की आधारशिला भी रखी। इसके साथ ही गंगा के किनारे के गाँवों को भी 'गंगा ग्राम' के रूप में विकसित किया जा रहा है।

नमामि गंगे

  • भारत सरकार ने गंगा नदी के प्रदूषण को समाप्त करने और नदी को पुनर्जीवित करने के लिए 2014 में ‘नमामि गंगे’ नामक एक एकीकृत गंगा संरक्षण मिशन का शुभारंभ किया।
  • नमामि गंगे कार्यक्रम के कार्यान्वयन को शुरूआती स्तर की गतिविधियों (तत्काल प्रभाव दिखने के लिए), मध्यम अवधि की गतिविधियों (समय सीमा के 5 साल के भीतर लागू किया जाना है) और लंबी अवधि की गतिविधियों (10 साल के भीतर लागू किया जाना है) में बांटा गया है।
  • शुरूआती स्तर की गतिविधियों के अंतर्गत नदी की उपरी सतह की सफ़ाई से लेकर बहते हुए ठोस कचरे की समस्या को हल करने; ग्रामीण क्षेत्रों की सफ़ाई से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों की नालियों से आते मैले पदार्थ (ठोस एवं तरल) और शौचालयों के निर्माण; शवदाह गृह का नवीकरण, आधुनिकीकरण और निर्माण ताकि अधजले या आंशिक रूप से जले हुए शव को नदी में बहाने से रोका जा सके, लोगों और नदियों के बीच संबंध को बेहतर करने के लिए घाटों के निर्माण, मरम्मत और आधुनिकीकरण का लक्ष्य निर्धारित है।
  • मध्यम अवधि की गतिविधियों के अंतर्गत नदी में नगर निगम और उद्योगों से आने वाले कचरे की समस्या को हल करने पर ध्यान दिया जाएगा।
  • लंबी अवधि के तहत ई-फ़्लो के निर्धारण, बेहतर जल उपयोग क्षमता, और सतही सिंचाई की क्षमता को बेहतर बना कर नदी का पर्याप्त प्रवाह सुनिश्चित किया जाएगा।

अमृत योजना के बारे

  • अटल मिशन फॉर रेजुवनेशन एंड अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन (अमृत) की शुरुआत 25 जून, 2015में की गयी थी।
  • अमृत योजना या मिशन का लक्ष्य पीने के पानी की आपूर्ति का सार्वभौमिक कवरेज तथा वर्षा जल निकासी के साथ-साथ सीवरेज एवं सेप्टेज की कवरेज एवं उपचार क्षमताओं में उल्लेखनीय बढ़ोतरी, गैर-मोटरीकृत शहरी परिवहन एवं हरित स्थान, पार्क आदि सुनिश्चित करना है।

लघु वन उपज (एमएफपी) के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी)

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में जनजातीय कार्य मंत्रालय ने कहा है इस बेहद अशांत और चुनौतीपूर्ण साल(वर्ष 2020 ) में एक बेहतर उपलब्धि लघु वन उपजों (एमएफपी) के लिए न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य (एमएसपी) योजना के तहत एमएफपी की रिकॉर्ड खरीदारी रही है। परिचय
  • जनजातीय कार्य मंत्रालय के द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार इस वर्ष कुल खरीदारी (सरकारी और निजी व्‍यापार दोनों को मिलाकर) 3000 करोड़ रुपये को पार कर गई है । इसके अतिरिक्त , 16 राज्‍यों में वन उपजों की खरीद अब 148.12 करोड़ रुपये का आंकड़ा छू रही है।
  • सरकार ने लघु वन उपजों (एमएफपी) के लिए न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य (एमएसपी) उपलब्ध कराने हेतु ‘वन धन योजना’ जैसी प्रमुख योजनाओं का सहारा लिया है। वन धन योजना के द्वारा लगभग 3.6 लाख आदिवासियों को लाभ पहुंचा है। यह योजना 22 राज्यों में सफलतापूर्वक कार्यान्वयित हुई है।
  • ट्राईफेड द्वारा राज्यों से लगातार संपर्क और उन्हें जोड़कर रखने के प्रयास ने एमएफपी के लिए एमएसपी योजना को सही रास्ते पर रखने में एक प्रेरक जैसा काम किया है।
  • कोविड -19 महामारी के कारण गिरती आदिवासी अर्थव्यवस्था को संभालने के उद्देश्य से 1 मई, 2020 को एमएफपी के लिए संशोधित एमएसपी जारी की गई, जिससे एमएफपी का एमएसपी मूल्य 90% तक बढ़ गया और इस तरह आदिवासियों की ऊंची आय सुनिश्चित करने में मदद मिली।
  • जनजातीय कार्य मंत्रालय ने 26 मई, 2020 को एमएफपी के लिए एमएसपी सूची में 23 अतिरिक्त नए मदों को शामिल करने की सिफारिश की। इन मदों में आदिवासियों द्वारा उगाए गए कृषि और बागवानी उत्पाद शामिल हैं।

प्रधानमंत्री वन धन योजना (PMVDY) के बारे में

  • जनजातीय समुदाय के लोगों सशक्तिकरण हेतु प्रधानमंत्री मोदी ने 14 अप्रैल 2018 ने बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर के जन्‍मदिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ के बीजापुर में ‘प्रधानमंत्री वन धन विकास योजना’ को लांच किया था।
  • प्रधानमंत्री वन धन योजना का उद्देश्य जनजातीय उद्यम का सृजन करना है।
  • ट्राइफेड इसकी नोडल एजेंसी है एवं ट्राइफेड ने अब तक 26 राज्यों और एक केन्द्र शासित प्रदेश में 1101 वन धन केन्द्रों की स्थापना से जुड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी है।

ट्राइफेड के बारे में

  • बहु-राज्यीय सहकारी समिति अधिनियम, 1984 के तहत पंजीकृत ट्राइफेड की स्थापना जनजातीय कार्य मंत्रालय के अंतर्गत एक राष्ट्रीय नोडल एजेंसी के रूप में 1987 में की गई थी। यह सभी राज्यों के आदिवासी लोगों के सामाजिक-आर्थिक विकास की दिशा में काम कर रही है।
  • यह मुख्य रूप से दो कार्य करती है। पहला-लघु वन उपज विकास, दूसरा- खुदरा विपणन एवं विकास।
  • ट्राइफेड का मूल उद्देश्य आदिवासी लोगों द्वारा जंगल से एकत्र किये गए या इनके द्वारा बनाये गए उत्पादों को बाजार में सही दामों पर बिकवाने की व्यवस्था करना है। गेहूं और धान की सरकारी खरीद के लिए ट्राईफेड, भारतीय खाद्य निगम (FCI) के एजेंट और मोटे अनाजों ,दालों और तिलहनों की सहकारी खरीद में कृषि एवं सहकारिता विभाग के एजेंट के रूप में काम करता है।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के द्वि-राष्ट्रीय केंद्र

चर्चा में क्यों?

    स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण मंत्री, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री और पृथ्‍वी वि ज्ञान मंत्री, डा. हर्ष वर्धनने राज्य सभा में एक लिखित जवाब के माध्यम से यह जानकारी दी कि वर्तमान में, भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के पास तीन द्वि-राष्ट्रीय केंद्र हैं।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के द्वि-राष्ट्रीय केंद्र

  • फ्रांस के साथ विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग के लिए 1987 में इंडो-फ्रेंच सेंटर फॉर प्रमोशनल ऑफ एडवांस्ड रिसर्च (आईएफसीपीएआर) की स्थापना की गयी थी।
  • वर्ष 2000 में अमरीका के साथ विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सहयोग के लिए इंडो-यूएस साइंस एंड टेक्नोलॉजी फोरम (आईयूएसएसटीएफ़)स्‍थापित किया गया था।
  • भारत-जर्मनी विज्ञान और प्रौद्योगिकी केंद्र (आईजीएसटीसी) की स्थापना 2010 में अंतर-सरकारी करारों के तहत की गयी थी।

द्वि-राष्ट्रीय केंद्रों द्वारा शुरू किए गए प्रमुख कार्यक्रम

पिछले तीन वर्षों के दौरान, निम्नलिखित नए कार्यक्रम इन द्वि-राष्ट्रीय केंद्रों द्वारा शुरू किए गए हैं:

  • भारत – अमरीका विज्ञान और प्रौद्योगिकी फोरम:
  • संयुक्त स्वच्छ ऊर्जा अनुसंधान और विकास केंद्र (जेसीईआरडीसी) का द्वितीय चरण
  • वास्तविक- समय नदी जल और वायु गुणवत्ता निगरानी (डबल्यूएक्यूएम) अनुसंधान पहल कार्यक्रम
  • विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रि‍की, गणित और चिकित्सार्थ (डबल्यूआईए सटीईएमएम) भारत – अमरीका महिला अध्येतावृत्ति
  • जेसीईआरडीसी चरण-II कार्यक्रम के तहत, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर और वाशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटीपुलमैन के सह-नेतृत्व में "भंडारण के साथ सुव्‍यवस्थित वितरण प्रणाली के लिए यूआई-असिस्ट: अमेरिका- भारत सहयोग" परियोजना को सितंबर 2017 में पुरस्कृत किया गया था।
  • इस परियोजना का उद्देश्य स्मार्ट ग्रिड संकल्‍पनाओं के अंगीकरण और इस्‍तेमाल तथा वितरण नेटवर्क में भंडारण सहित वितरित ऊर्जा संपदा (डीईआर) से संबंधित महत्‍वपूर्ण मुद्दों का समाधानकारी प्रयत्‍न करना है ताकि नेटवर्क का प्रचालन अपव्‍यय निवारक तथा भरोसेमंद हो सके।
  • ऑनलाइन नदी जल और वायु गुणवत्ता निगरानी (डबल्यूएक्यूएम) प्रणाली, के विकास के महत्व को मान्‍यता देते हुए विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी), भारत सरकार और इंटेल ® ने नदी जल और वायु गुणवत्ता की वास्तविक समय पर निगरानी कार्यक्रम के लिए अनुसंधान पहल संयुक्त रूप से शुरू करने में सहयोग किया।
  • "विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियात्रिकी, गणित और चिकित्सार्थ (डबल्यूआईएसटीईएमएम) भारत-अमरीका महिला अध्‍येतावृत्ति एक फैलोशिप" कार्यक्रम है, जो विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के साथ साझेदारी में आईयूएसएसटीएफ़ द्वारा संकल्पनाकृत किया गया है।
  • यह बुद्धिमती भारतीय महिला छात्रों और वैज्ञानिकों को क्षमता निर्माण, एक्सपोजर और अमेरिका के शिक्षा संस्‍थानों और प्रयोगशालाओं में उत्कृष्ट अनुसंधान सुविधाओं तक पहुंच के लिए अवसर प्रदान करने में सहायक है।
  • भारत-जर्मनी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी केंद्र:
  • आईजीएसटीसी और अलेक्जेंडर वॉन हम्बोल्ट फाउंडेशन (एवीएच) ने आईजीएसटीसी-कनेक्ट प्लस कार्यक्रम मई 2018 में संयुक्त रूप से शुरू किया।
  • इस कार्यक्रम का उद्देश्य उस इंडो-जर्मन फ्रंटियर्स ऑफ इंजीनियरिंग सिम्पोसिया (इंडोजीएफ़ओई) के सहभागियों के बीच इंडो-जर्मन नेटवर्किंग और दीर्घकालिक सहयोग को बढ़ावा देना है, जिसका सह- आयोजन विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) और अलेक्जेंडर वॉन हम्बोल्ट फाउंडेशन द्वारा किया जाता है।

हरीकेन सैली

चर्चा में क्यों?

  • हरीकेन सैली अमेरिकी मेक्सिको कि खाड़ी तट के करीब धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है, जिससे ऐतिहासिक बाढ़ का खतरा पैदा हो गया।

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संबन्धित जानकारी

  • बारिश और तूफानी हवाओं के तट नजदीक पहुँचने के साथ ही चार राज्यों के लोगों से समुद्र तट दूर जाने का आग्रह किया गया है।
  • नैशनल हरीकेन सेंटर (एनएचसी) के अनुसार हरीकेन अलबामा, फ्लोरिडा और मिसिसिपी के तटों पर बड़े पैमाने पर बाढ़ और तूफ़ान के साथ बारिश आने की आशंका है।
  • इसकी सुस्त गति के कारण इसकी तुलना 2017 के तूफान हार्वे से की जा रही है, जिससे कारण ह्यूस्टन क्षेत्र में कई दिनों भारी बारिश और बड़ी क्षति हुई थी।
  • तूफान सैली से $ 2 बिलियन से $ 3 बिलियन तक नुकसान पहुंचने की उम्मीद है। हरीकेन
  • अटलांटिक महासागर के पश्चिमी तक पर आने वाले उष्ण कटिबंधीय चक्रवात को हरीकेन के नाम से जाना है।
  • उष्ण कटिबन्धीय चक्रवात आक्रामक तूफान होते हैं, जिनकी उत्पत्ति उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों के महासागरों पर होती है।
  • जिसके बाद ये तटीय क्षेत्रों की ओर गतिमान होते हैं। ये चक्रवात आक्रामक पवनों के कारण वृहद स्तर पर विनाश, अत्याधिक वर्षा और तूफान लाते हैं ये चक्रवात विध्वंसक प्राकृतिक आपदाओं में से एक हैं।
  • हिंद महासागर में इनको चक्रवात, अटलांटिक महासागर में हरीकेन, पश्चिमी प्रशांत और दक्षिणी चीन सागर में टाइफून और पश्चिमी आस्ट्रेलिया में विली-विली कहा जाता है।