यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स (15 सितंबर 2020)

Daily Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC, RPSC and All State PCS Examinations


यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स

Daily Hindi Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC, RPSC and All State PCS Examinations


होम्‍योपैथी आयोग और भारतीय चिकित्‍सा पद्धति आयोग विधेयक

चर्चा में क्यों?

  • संसद ने लोकसभा की मंजूरी के साथ राष्‍ट्रीय होम्‍योपैथी आयोग विधेयक- 2020 और राष्‍ट्रीय भारतीय चिकित्‍सा पद्धति विधेयक-2020 पारित कर दिया है।
  • इस वर्ष बजट सत्र के दौरान 19 मार्च को राज्‍यसभा पहले ही इन विधेयकों को पारित कर चुकी है।
  • इन विधेयकों का उद्देश्‍य होम्‍योपैथी तथा भारतीय चिकित्सा पद्धति के लिए उच्‍चस्‍तरीय चिकित्‍सकों की उपलब्‍धता सुनिश्चित करना है।

राष्‍ट्रीय होम्‍योपैथी आयोग विधेयक-2020 के बारे में

  • राष्‍ट्रीय होम्‍योपैथी आयोग विधेयक-2020, राष्‍ट्रीय होम्‍योपैथी आयोग की स्‍थापना के लिए होम्‍योपैथी केंद्रीय परिषद अधिनियम 1973 का स्‍थान लेगा।
  • होम्‍योपैथी आयोग, होम्‍योपैथी पद्धति के लिए उच्‍चस्‍तरीय चिकित्‍सकों की उपलब्‍धता सुनिश्चित करेगा।
  • इस आयोग में 20 सदस्‍य होंगे जिसमें एक अध्‍यक्ष के अलावा होम्‍योपैथी शिक्षा बोर्ड के अध्‍यक्ष, राष्‍ट्रीय होम्‍योपैथी संस्‍थान के महानिदेशक और होम्‍योपैथी के लिए चिकित्‍सा समीक्षा और रेटिंग बोर्ड के अध्‍यक्ष सदस्य के रूप में शामिल होंगे।
  • इस विधेयक में होम्‍योपैथी सलाहकार परिषद का भी गठन करने का प्रस्‍ताव किया गया है।
  • यह परिषद राज्‍य और केंद्रशासित प्रदेशों को राष्‍ट्रीय होम्‍योपैथी आयोग के समक्ष अपने विचार और समस्याएं रखने के लिए प्रारंभिक मंच होगी। राष्‍ट्रीय भारतीय चिकित्‍सा पद्धति आयोग विधेयक-2020 के बारे में
  • राष्‍ट्रीय भारतीय चिकित्‍सा पद्धति आयोग विधेयक-2020, भारतीय चिकित्‍सा केंद्रीय परिषद अधिनियम 1970 का स्‍थान लेगा।
  • इसके तहत भारतीय चिकित्सा पद्धति परिषद के स्‍थान पर राष्‍ट्रीय भारतीय चिकित्‍सा पद्धति आयोग का गठन किया जाएगा।
  • यह आयोग 29 सदस्यीय निकाय होगा जिसमें एक अध्‍यक्ष के अलावा सदस्य के रूप में आयुर्वेद बोर्ड के अध्‍यक्ष, यूनानी बोर्ड के अध्‍यक्ष, सिद्धा और सोवारिग्‍पा के अध्यक्ष सहित अन्य सदस्‍य शामिल होंगे।
  • इस विधेयक में एक भारतीय चिकित्‍सा पद्धति सलाहकार परिषद के भी गठन प्रावधान भी किया गया है।
  • यह परिषद राज्‍य और केंद्रशासित प्रदेशों को राष्‍ट्रीय भारतीय चिकित्‍सा पद्धति आयोग के समक्ष अपने विचार और समस्याएं रखने के लिए प्रारंभिक मंच प्रदान करेगी।

स्काईफॉल परमाणु मिसाइल

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में ब्रिटेन के रक्षा खुफिया विभाग ने रूस की नई ‘स्काईफॉल मिसाइल’ के बारे में चेतावनी दी है जोकि कई वर्षों तक पृथ्वी के चारों चक्कर लगाने और किसी भी क्षण परमाणु हमले के लिए तैयार रहने में सक्षम है।
  • ब्रिटेन के रक्षा खुफिया विभाग द्वारा फाइव आइज़ इंटेलिजेंस हब की बैठक में यह जानकारी दी गयी है। आपको बता दे फाइव आईज एक खुफिया गठबंधन है जिसमें यूके, यूएस, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और कनाडा के खुफिया विशेषज्ञ शामिल हैं।

स्काईफॉल परमाणु मिसाइल

  • रूस एक ऐसी परमाणु मिसाइल को विकसित कर रहा है, जो कई साल तक अंतरिक्ष में धरती का चक्कर लगा सकती है और आदेश मिलते ही यह मिसाइल दुनिया के किसी भी कोने को पल भर में नेस्ताबूत करने में सक्षम है।
  • रूस ने इस मिसाइल को 9M730 Burevestnik नाम दिया है। यह एक सबसोनिक न्यूक्लियर पॉवर्ड क्रूज मिसाइल सिस्टम होगा।
  • परमाणु ऊर्जा से संचालित होने वाली यह मिसाइल लगभग अनिश्चित समय तक अंतरिक्ष में रह सकती है।
  • इस मिसाइल को ब्रिटेन और अमेरिका सहित नाटो देशों में स्काईफॉल मिसाइल के नाम से जाना जाता है।
  • रूस द्वारा इस असीमित रेंज और असीमित विनशकारी क्षमता वाली मिसाइल को 2025 तक लांच करने की योजना है।

कृषि में बदलाव और किसानों की आय बढ़ाने हेतु लोक सभा में तीन विधेयक प्रस्तुत

चर्चा में क्यों?

  • देश में कृषि में बदलाव और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्‍य से आज लोक सभा में तीन विधेयक प्रस्‍तुत किए गए ये 5 जून, 2020 को घोषित अध्‍यादेशों का स्‍थान लेंगे –
    1. किसान उपज व्‍यापार एवं वाणिज्‍य (संवर्धन एवं सुविधा) विधेयक, 2020
    2. किसानों (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) का मूल्‍य आश्‍वासन अनुबंध एवं कृषि सेवाएं विधेयक, 2020
    3. आवश्‍यक वस्‍तु (संशोधन) विधेयक, 2020
  • इन विधेयकों में निहित उपायों से कृषि उपज का बाधा-रहित व्‍यापार हो सकेगा और इनसे किसान अपनी पसंद के निवेशकों के साथ जुड़ने में भी सशक्‍त होंगे। ये उपाय सरकार द्वारा किए गए उपायों की श्रृंखला में नवीनतम हैं जो देश के किसानों के कल्‍याण के लिए सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

किसान उपज व्‍यापार एवं वाणिज्‍य (संवर्धन एवं सुविधा) विधेयक, 2020

  • देश में किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए विभिन्‍न प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता है। ये प्रतिबंध मुख्यतः राज्य सरकारों के एपीएमसी एक्ट के तहत लगाए जाते हैं। इसके तहत किसान अपनी उपज को एपीएमसी मंडियों के बाहर नहीं बेंच सकते हैं।
  • किसानों पर राज्‍य सरकारों के पंजीकृत लाइसेंस धारकों को ही अपनी उपज बेचने के लिए प्रतिबंध लगाया जाता है। इसके अलावा, राज्‍य सरकारों द्वारा लागू किए गए विभिन्‍न एपीएमसी विधानों की मौजूदगी के चलते एक राज्य से दूसरे राज्य में बाधारहित कृषि उपज के आवागमन में भी अनेक बाधाएं मौजूद हैं।
  • इन चुनौतियों को देखते हुए भारत सरकार किसान उपज व्‍यापार एवं वाणिज्‍य (संवर्धन एवं सुविधा) विधेयक, 2020 लेकर आयी है । इसके तहत व्यापारी , किसानों से एपीएमसी क़ानूनों के दायरे से बाहर रहकर उनकी उपज खरीद सकेंगे।
  • यह कानून देश में व्‍यापक रूप से विनियमित कृषि बाजारों को बाधारहित बनाने के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। यह किसानों के लिए अधिक विकल्‍प खोलेगा, किसानों के लिए विपणन लागत कम करेगा और उन्‍हें बेहतर मूल्‍य प्राप्‍त करने में भी मदद करेगा। यह कानून अधिक (सरप्‍लस) उत्‍पादन वाले क्षेत्रों के किसानों को बेहतर मूल्‍य प्राप्‍त करने और उत्‍पाद की कमी वाले क्षेत्रों के उपभोक्‍ताओं को कम कीमत पर उत्‍पाद मिलने में मदद करेगा।

किसानों (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) का मूल्‍य आश्‍वासन अनुबंध एवं कृषि सेवाएं विधेयक, 2020

  • भारतीय कृषि की विशेषता भूमि के छोटी जोत के कारण हो रहा विखंडन हैं और इसकी मौसम पर निर्भरता, उत्‍पादन की अनिश्चितताएं, बाजार की अस्थिरता जैसी कुछ कमजोरियां भी हैं। ये कृषि लागत और उत्‍पादन प्रबंधन दोनों के संबंध मेंकृषि को जोखिम भरा और अक्षम बनाती हैं।
  • यह कानून बाजार की अस्थिरता के जोखिम को किसान से हटाकर प्रायोजक के पास ले जाएगा और किसान की आधुनिक तकनीक और बेहतर कृषि इनपुट से पहुंच को भी सक्षम बनाएगा।
  • यह कानून विपणन की लागत कम करेगा और किसानों की आय में सुधार करेगा।
  • किसान सीधे विपणन में शामिल होंगे जिससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी और किसानों को पूरा मूल्‍य प्राप्‍त होगा।
  • इसमें किसानों को पर्याप्‍त संरक्षण प्रदान किया गया है।समय पर विवाद निवारण के लिए प्रभावी विवाद समाधान तंत्र उपलब्‍ध कराया गया है।

आवश्‍यक वस्‍तु (संशोधन) विधेयक, 2020

  • यह विधेयक अनाज, दलहन, तिलहन, खाद्य तेल, प्‍याज और आलू को आवश्‍यक वस्‍तुओं की सूची से हटाने का प्रावधान करता है। इससे निजी निवेशकों को उनके व्‍यापार के परिचालन में अत्‍यधिक नियामक हस्‍तक्षेपों की आशंका दूर हो जाएगी। उत्‍पाद, उत्‍पाद सीमा, आवाजाही, वितरण और आपूर्ति की स्‍वतंत्रता से बिक्री की अर्थव्‍यवस्‍था को बढ़ाने में मदद मिलेगी और कृषि क्षेत्र में निजी क्षेत्र/विदेशी प्रत्‍यक्ष निवेश आकर्षित होगा।
  • भारत में अधिकांश कृषि वस्‍तुएं सरप्‍लस हो गई हैं। किसान कोल्‍ड स्‍टोरेज, वेयरहाउस, प्रोसेसिंग और एक्‍सपोर्ट में निवेश की कमी के कारण बेहतर मूल्‍य प्राप्‍त करने में असमर्थ रहता है, क्‍योंकि आवश्‍यक वस्‍तु अधिनियम के कारण उद्यमशीलता की भावना कम हो जाती है।
  • भारी फसल होने पर(विशेष रूप से जल्‍दी खराब होने वाली वस्‍तुओं के मामले में)किसानों को भारी हानि उठानी पड़ती है। यह कानून मूल्‍य स्थिरता लाते हुए किसान और उपभोक्‍ता दोनों की ही मदद करेगा।
  • यह प्रतिस्‍पर्धी बाजार का माहौल बनाएगा और भंडारण सुविधाओं की कमी के कारण होने वाली कृषि उत्‍पादों की बर्बादी भी रोकेगा।

बैंकिंग विनियमन (संशोधन) विधेयक, 2020

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में बैंकिंग विनियमन (संशोधन) विधेयक, 2020 को लोकसभा में पेश किया गया ।

बैंकिंग विनियमन (संशोधन) विधेयक, 2020 के बारे में

  • सरकार ने सहकारी बैंकों (Cooperative Banks) को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के दायरे में लाने के लिए बैंकिंग विनियमन कानून, 1949 (Banking Regulation Act, 1949) में संशोधन हेतु विधेयक लोकसभा में पेश किया।
  • इस संशोधन विधेयक का उद्देश्य जमाकर्ताओं के हितों की रक्षा करना है। प्रस्तावित कानून का मकसद सहकारी बैंकों को ऐसे नियमों के दायरे में लाना है जो दूसरे बैंकों पर लागू होते हैं।
  • यह संशोधन विधेयक मुख्य रूप से सहकारी बैंकों में जमाकर्ताओं की सुरक्षा के उद्देश्य से है और यह केवल उन सहकारी समितियों पर केंद्रित है जो 'बैंक’ शब्द का उपयोग करते हैं।
  • देश में सहकारी बैंकों को 1965 से आरबीआई द्वारा विनियमित किया गया है और यह विधेयक केवल प्रयोज्यता का विस्तार करना चाहता है ताकि कुछ बैंकिंग विनियमन कानून उन पर भी लागू हों।

बैंकिंग विनियमन (संशोधन) विधेयक, 2020 के लाभ

  • आर्थिक विशेषज्ञों के मुताबिक यदि बैंकिंग विनियमन (संशोधन) विधेयक, 2020 संसद में पारित हो जाता है तो सहकारी बैंक में पैसा रखने वाले ग्राहकों को फायदा होगा।
  • यदि कोई सहकारी बैंक डिफॉल्ट करता है तो बैंक में ग्राहकों की जमा 5 लाख रुपये तक की राशि पूरी तरह से सुरक्षित है। क्योंकि सहकारी बैंक, भारतीय रिजर्व बैंक की बीमा सुरक्षा के अंतर्गत आ जाएंगे।
  • उल्लेखनीय है कि भारत सरकार ने केंदीय बजट 2020-21 में प्रावधान किया है कि बैंक डिफॉल्ट की स्थिति में 5 लाख रुपये तक की जमा राशि पर बीमा मिलेगा। पहले यह 1 लाख रुपये थी।
  • सहकारी बैंकों के भारतीय रिज़र्व बैंक के अधीन आने पर इन्हें भी अब आरबीआई के नियम मानने होंगे , जिससे देश की मौद्रिक नीति को सफल बनाने में आसानी होगी। साथ ही, इन बैंकों को भी अपनी कुछ पूंजी भारतीय रिज़र्व बैंक के पास रखनी होगी, ऐसे में इनके डूबने की आशंका कम हो जाएंगी।
  • सरकार के इस फैसले से जनता का विश्वास देश के सहकारी बैंकों में और बढ़ेगा और देश में बैंकों की वित्तीय हालात ठीक होने के आसार बढ़ेंगे।
  • प्रस्तावित कानून से पंजाब एंड महाराष्ट्र कोऑपरेटिव बैंक (PMC Bank) जैसे संकट की पुनरावृत्ति को रोका जा सकेगा।
  • देश में कुल 1,540 सहकारी बैंक हैं। इनमें बैंकों के जमाकर्ताओं की संख्या 8.60 करोड़ है। इन जमाकर्ताओं की सहकारी बैंकों में कुल जमा पांच लाख करोड़ रुपये है। भारतीय रिजर्व बैंक सामान्य बैंकिंग संस्थाओं की तरह को- ऑपरेटिव बैंकों के विनियमन का भी पूरा अधिकार चाहता है।

विवाद

  • विपक्षी दलों का कहना है कि केंद्र सरकार बैंकिंग विनियमन (संशोधन) विधेयक, 2020 के माध्यम से राज्यों के मामले दखल दे रही है, जबकि सहकारिता से संबन्धित प्रावधान हमारे देश के सहकारी संघवाद के तहत आते हैं। भारतीय संविधान के ‘भाग 9-ख’ में सहकारिता से संबन्धित प्रावधान किए गए हैं।
  • किन्तु केंद्र सरकार का कहना है कि भारतीय संविधान की सातवीं अनुसूची की संघ सूची के प्रविष्ट(प्रवेश) संख्या 45 में बैंककारी (banking) शब्द का उल्लेख है अर्थात बैंकिंग से संबन्धित विनियम केंद्र सरकार बना सकती है। प्रस्तावित संशोधन विधेयक केवल उन सहकारी समितियों पर लागू होगा जो शब्द बैंक, बैंकर या बैंकिंग का उपयोग करते हैं।