यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स (15 जून 2020)


यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स

Daily Hindi Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC, RPSC and All State PCS Examinations


पीएम केयर्स फंड (PM CARES Fund)

चर्चा में क्यों

  • दिल्ली स्थित चार्टर्ड अकाउंटेंसी फर्म SARC & Associates को आपातकालीन स्थिति के लिए प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और राहत (पीएम केयर) फंड के लेखा परीक्षण का कार्य सौंपा गया है। गौरतलब है कि इस स्वतंत्र लेखा परीक्षक को तीन साल के लिए नियुक्त किया गया है। जिसके द्वारा वित्तीय वर्ष के अंत में लेखा परीक्षण किया जाएगा।

पृष्ठभूमि

  • विपक्षी दलों समेत आलोचकों द्वारा इसके औचित्य पर प्रश्न उठाते हुए कहा गया कि “राहत कार्यों के लिए प्रधान मंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) पहले से ही मौजूद है; ऐसे में राहत कार्यों के लिए एक और राहत कोष किस आधार पर बनाया जा रहा है?
  • इसके अलावा इस नए राहत कोष किए जाने वाले धन के उपयोग के बारे में अधिक पारदर्शिता की भी मांग की जा रही थी।

क्या है पीएम केयर्स फंड?

  • कोविड-19 महामारी जैसी किसी भी तरह की आपातकालीन या संकट की स्थिति से निपटने के प्राथमिक उद्देश्य के साथ एक समर्पित राष्ट्रीय निधि की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए और उससे प्रभावित लोगों को राहत प्रदान करने के लिए ‘आपात स्थितियों में प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और राहत कोष (पीएम केयर्स फंड)’ के नाम से एक सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट बनाया गया है।

उद्देश्य:

  • संकट की स्थिति, चाहे प्राकृतिक हो या कोई और, में प्रभावित लोगों की पीड़ा को कम करने और बुनियादी ढांचागत सुविधाओं एवं क्षमताओं को हुए भारी नुकसान में कमी/नियंत्रण करने, इत्यादि के लिए त्‍वरित अवसंरचना और संस्थागत क्षमता के पुनर्निर्माण/विस्‍तार के साथ-साथ त्वरित आपातकालीन कदम उठाना और सामुदाय की प्रभावकारी सुदृढ़ता के लिए क्षमता निर्माण करने हेतु।
  • प्रभावित लोगों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए, पैसे के भुगतान हेतु अनुदान प्रदान करने या ऐसे अन्य कदम उठाने के लिए पैसे के भुगतान के लिए न्यासी बोर्ड द्वारा आवश्यक समझा जा सकता है।

ट्रस्ट की संरचना:

  • प्रधानमंत्री, PM CARES कोष के पदेन अध्यक्ष और रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और वित्त मंत्री, निधि के पदेन ट्रस्टी होते हैं।प्रधानमंत्री के पास 3 ट्रस्टीज को बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज में नामित करने की शक्ति होगी जो अनुसंधान, स्वास्थ्य, विज्ञान, सामाजिक कार्य, कानून, लोक प्रशासन और परोपकार के क्षेत्र में प्रतिष्ठित व्यक्ति होंगे।
  • ट्रस्टी नियुक्त किया गया कोई भी व्यक्ति निशुल्क रूप से कार्य करेगा।

अन्य जानकारी :

  • इस कोष में पूरी तरह से व्यक्तियों / संगठनों से स्वैच्छिक योगदान होता है और इसे कोई बजटीय सहायता नहीं मिलती है। निधि का उपयोग ऊपर बताए गए उद्देश्यों को पूरा करने में किया जाएगा।
  • पीएम-केयर्स फंड में दान दी गई रकम पर 80जी के तहत इनकम टैक्‍स से 100 फीसदी छूट मिलेगी।
  • पीएम-केयर्स फंड में दान भी कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत CSR व्यय के रूप में गिना जाएगा।
  • पीएम केयर्स फंड को भी FCRA के तहत छूट मिली है और विदेशों से दान प्राप्त करने के लिए एक अलग खाता खोला गया है। इससे विदेशों में स्थित व्यक्ति और संगठन पीएम केयर्स फंड में दान दे सकते हैं।

न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP)

चर्चा में क्यों

केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी ने मीडिया के एक वर्ग में एमएसपी में कमी किए जाने की संभावना की खबरों का खण्‍डन किया है, जिनमें उनका मिथ्‍या रूप से हवाला देते हुए कही गई है।

क्या होता न्यूनतम समर्थन मूल्य?

  • जब देश में फसल का उत्पादन बढ़ता है तो बिक्री मूल्य कम होने लगता है। कृषि उत्पादों के मूल्यों में गिरावट को रोकने के लिए सरकार मुख्य फसलों का एक न्यूनतम बिक्री मूल्य निर्धारित करती है, जो एक सत्र के लिए मान्य होता है।
  • किसानों के हितों की रक्षा करने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की व्यवस्था लागू की गई है। यदि फसलों की बाज़ार कीमत कम हो जाती है तो सरकार तय न्यूनतम समर्थन मूल्य पर ही किसानों से फसल खरीदती है।
  • इसके जरिये सरकार किसानों का नुकसान कम करने की कोशिश करती है।
  • भारत सरकार द्वारा कृषि लागत और मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिश पर कुछ फसलों का बुवाई सत्र से पहले ही न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया जाता है।

कृषि लागत एवं कीमत आयोग(CACP)

  • भारत में सर्वप्रथम 1955 में कृषि लागत आयोग का गठन किया गया था| इसके अध्यक्ष प्रोफेसर दंतेवाड़ा को बनाया गया था।
  • इस आयोग की स्थापना का मुख्य उद्देश्य किसानों को अधिक उत्पादन के लिए प्रेरित करने हेतु उन्हें उपज का न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रदान करना था।
  • 1985 में इसका नाम बदलकर कृषि लागत एवं कीमत आयोग(CACP) कर दिया गया। भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय का एक संलग्न कार्यालय है।
  • CACP का उद्देश्य कृषि उत्पादों की कीमत को स्थिर करना है जिससे पूरी अर्थव्यवस्था में कीमत को स्थिर किया जा सके।

कोविड-19 के बीच परिदृश्य -- जमीनी स्थिति एवं संभावित समाधान’: अध्यनन

चर्चा में क्यों

  • हाल ही में ‘स्माइल फाउंडेशन’ द्वारा कोविड-19 के बीच परिदृश्य -- जमीनी स्थिति एवं संभावित समाधान’ अध्यनन कराया गया जिसका उद्देश्य प्रौद्योगिकी की उपलब्धता का विश्लेषण करना था।
  • यह अध्ययन पहली कक्षा से लेकर 12 कक्षा तक के छात्रों पर किया गया। यह अध्ययन दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, गुजरात, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना सहित 23 राज्यों में 16 अप्रैल से 28 अप्रैल के बीच 12 दिनों की अवधि के दौरान किया गया।
  • स्कूली छात्रों पर किये गये एक अध्ययन के मुताबिक करीब 56 प्रतिशत बच्चों को स्मार्टफोन उपलब्ध नहीं है,

अध्ययन के निष्कर्ष

  • अध्ययन के नतीजों से यह प्रदर्शित होता है कि सर्वेक्षण में शामिल किये गये 43.99 प्रतिशत बच्चों को स्मार्टफोन उपलब्ध है और अन्य 43.99 प्रतिशत छात्रों को बेसिक फोन उपलब्ध है, जबकि 12.02 प्रतिशत के पास इन दोनों में से कोई भी फोन उपलब्ध नहीं है।
  • अध्ययन में कहा गया कि कुल 56.01 प्रतिशत बच्चों को स्मार्टफोन उपलब्ध नहीं है। ऐसे में जब लॉकडाउन के दौरान ‘ई-लर्निंग’ के लिये स्मार्टफोन एक आवश्यक उपकरण के रूप में उभरा है, का अधिकांश बच्चों के पास ना होना डिजिटल शिक्षा के प्रसार को हतोत्साहित करता है ।
  • अध्ययन के नतीजों से यह स्पष्ट रूप से प्रदर्शित होता है कि ‘डिजिटल डिवाइड’ एक असली चुनौती है तथा इसे पाटने के लिये पूरे राष्ट्र में विभिन्न कदम उठाये जाने की जरूरत है।

क्या होता है डिजिटल डिवाइड?

  • डिजिटल डिवाइड का तात्पर्य उन लोगों के बीच अंतर से है जो लोग प्रौद्योगिकी तक नियमित पहुंच रखते हैं और ऐसे लोग जिनके पास प्रौद्योगिकी तक पहुच नहीं है। आसान शब्दों में समाज के विभिन्न वर्गों के बिच प्रौद्योगिकी तक पहुच के अंतर को ही डिजिटल डिवाइड कहते है। इसको पाटने के लिए डिजिटल साक्षरता, अवसंरचना विकास, क्षमता संवर्धन इत्यादि पहल को सरकार द्वारा प्रारंभ किया गया है।

स्माइल फाउंडेशन

  • स्माइल फाउंडेशन नई दिल्ली में स्थित एक गैर-सरकारी संगठन है, यह संगठन बच्चों के कल्याण के लिए काम करता है। इसकी स्थापना वर्ष 2002 में संतनु मिश्रा द्वारा की गई थी।

आरोग्यपथ (AarogyaPath)

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में सीएसआईआर द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य देखभाल आपूर्ति श्रृंखला पोर्टल ‘आरोग्यपथ’ को लॉन्च किया गया।

क्या है आरोग्यपथ?

  • यह एक वेब आधारित समाधान प्रणाली है। इसका उद्देश्य वास्तविक समय पर महत्वपूर्ण स्वास्थ्य आपूर्ति की उपलब्धता प्रदान करना है। आरोग्यपथ निर्माताओं, आपूर्तिकर्ताओं और ग्राहकों की मदद करेगा। इस पोर्टल को सर्वोदय इन्फोटेक और संस्थागत उपयोगकर्ताओं की साझेदारी में विकसित किया गया है।

पृष्ठभूमि

  • कोविड-19 महामारी से उत्पन्न मौजूदा राष्ट्रीय स्वास्थ्य आपातकाल के दौरान आपूर्ति श्रृंखला में गंभीर व्यवधान को उजागर किया है। ऐसे में महत्वपूर्ण वस्तुओं के उत्पादन और वितरण की क्षमता विभिन्न कारणों से संकट में पड़ सकती है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए "किसी को अरोग्य (स्वस्थ जीवन) की ओर ले जाने वाला मार्ग उपलब्ध कराने” की दृष्टि से आरोग्यपथ नामक यह सूचना मंच विकसित किया गया।
  • भारत में महत्वपूर्ण स्वास्थ्य आपूर्ति में गंभीर मुद्दें विदमान है। इन मुद्दों में सीमित आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता,अच्छी गुणवत्ता वाले उत्पादों की पहचान करने में लगने वाला अधिक समय,वांछित समयसीमा के भीतर उचित मूल्य पर मानकीकृत उत्पादों की आपूर्ति करने वाले आपूर्तिकर्ताओं तक सीमित पहुंच,नवीनतम उत्पादों के बारे में जानकारी का अभाव इत्यादि शामिल हैं।

आरोग्यपथ के लाभ

  • आरोग्यपथ नाम का यह वेब आधारित सूचना मंच निर्माताओं और आपूर्तिकर्ताओं को पूरी कुशलता से ग्राहकों के एक विस्तृत नेटवर्क तक पहुंचने, उनके और आस-पास के चिकित्सा जांच केंद्रों, मेडिकल दुकानों, अस्पतालों इत्यादि जैसे मांग केंदों के बीच संपर्क की कमियों को दूर करने मदद करेगा।
  • यह ग्राहकों की विस्तृत सूची और उत्पादों के लिए दिखने वाली नई जरूरतों की वजह से व्यवसाय का विस्तार करने के अवसर भी उपलब्ध कराएगा।
  • यह अपर्याप्त पूर्वानुमान और अधिक विनिर्माण के कारण संसाधनों की बर्बादी को कम करने में मदद करेगा और नई प्रौद्योगिकियों की मांग के बारे में जागरूकता भी पैदा करेगा।
  • यह भारत में स्वास्थ्य देखभाल सामानों की आपूर्ति की उपलब्धता और उन्हें किफायती बनाते हुए रोगियों के लिए अंतिम समय में जरूरी सामानों की आपूर्ति की खाई को पाटने का कार्य करेगा।

पारासेल आइलैंड और दक्षिण चीन सागर

चर्चा में क्यों

  • वियतनाम ने पारासेल आइलैंड में समंदर के नीचे चीन के कथित रूप से केबल बिछाने पर आपत्ति जाहिर की है. वियतनाम ने इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताया है।

पारासेल द्वीपसमूह:

  • वियतनाम और चीन दोनों दक्षिण चीन सागर के उत्तर में चट्टानों और चट्टानों की एक श्रृंखला, पारासेल द्वीप समूह का दावा करते हैं। इसके अलावा पारासेल द्वीपसमूह को लेकर ताइवान भी अपना दावा प्रस्तुत करता है। वियतनाम के अनुसार उनके पास पर्याप्त ऐतिहासिक साक्ष्य और कानूनी आधार हैं जो पारासेल और स्प्रैटली द्वीपसमूह पर अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुसार अपनी संप्रभुता की पुष्टि करते हैं।

दक्षिण चीन सागर:-

  • दक्षिण चीन सागर एक सीमांत सागर है, जो प्रशांत महासागर का हिस्सा है, जिसमें करीमाता और मलक्का क्षेत्र से क्षेत्र सम्मिलित हैं। जो ताइवान के स्ट्रेट से अधिक वर्ग किलोमीटर (1,400,000 वर्ग मील) तक फैला है।
  • समुद्र अत्यंत सामरिक महत्व रखता है; दुनिया का एक-तिहाई शिपिंग हर साल 3 ट्रिलियन डॉलर से अधिक का व्यापार इसी क्षेत्र से होता है ।
  • इसमें आकर्षक मछलियां शामिल हैं, जो दक्षिण पूर्व एशिया में लाखों लोगों की खाद्य सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। माना जाता है कि इसके सीबेड के नीचे विशाल तेल और गैस का भंडार है। जो इसे आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण बनाती हैं।
  • चीन का 80 प्रतिशत ऊर्जा आयात और चीन का कुल व्यापार का 39.5 प्रतिशत दक्षिण चीन सागर से होकर गुजरता है

दक्षिण चीन सागर का विवाद

  • दक्षिण चीन सागर विवाद में क्षेत्र के भीतर कई संप्रभु राज्यों के बीच द्वीप और समुद्री दावे शामिल हैं, जैसे ब्रुनेई, पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (पीआरसी), (आरओसी / ताइवान), इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, और वियतनाम।

विवादों में समुद्री सीमा और द्वीप दोनों शामिल हैं कई विवाद हैं,:

  • चीन गणराज्य द्वारा दावा किया गया नौ-डैश लाइन क्षेत्र, बाद में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (पीआरसी), जो दक्षिण चीन सागर के अधिकांश भाग को कवर करता है और ब्रुनेई, इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस ,ताइवान और वियतनाम के विशेष आर्थिक क्षेत्र के दावों के साथ ओवरलैप करता है, ।
  • पीआरसी, ताइवान और वियतनाम के बीच वियतनामी तट के साथ समुद्री सीमा विवाद
  • पीआरसी, मलेशिया, ब्रुनेई, फिलीपींस और ताइवान के बीच बोर्नियो के उत्तर की समुद्री सीमा विवाद
  • दक्षिण चीन सागर में द्वीप समूह, रीफ्स, बैंक और शॉल्स, जिनमें पैरासेल द्वीप समूह, प्रैटस द्वीप समूह, मैक्स्सफील्ड बैंक , स्कारबोरो शोल और पीआरसी, ताइवान और वियतनाम के बीच स्प्रैटली द्वीप समूह शामिल हैं, और क्षेत्र के कुछ हिस्सों में मलेशिया ने भी दावा किया था।
  • पीआरसी, इंडोनेशिया और ताइवान के बीच नटुना द्वीप के उत्तर में जल में समुद्री सीमा।
  • पीआरसी, फिलीपींस और ताइवान के बीच पलावन और लूजोन के तट से समुद्री सीमा।
  • समुद्री सीमा, भूमि क्षेत्र और इंडोनेशिया, मलेशिया और फिलीपींस के बीच अंबाला सहित सबा के द्वीप।
  • PRC, फिलीपींस और ताइवान के बीच लूजॉन स्ट्रेट में समुद्री सीमा और द्वीप।

भारत-नेपाल सीमा विवाद

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में नेपाल की संसद ने विवादित राजनीतिक नक्शे को लेकर पेश किए गए संविधान की तीसरी अनुसूची में संशोधन विधेयक को मंजूरी दे दी है।
  • मतदान के दौरान संसद में विपक्षी नेपाली कांग्रेस, जनता समाजवादी पार्टी- नेपाल, राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी ने संविधान की तीसरी अनुसूची में संशोधन से संबंधित सरकार के विधेयक का समर्थन किया। भारत के साथ सीमा गतिरोध के बीच इस नए नक्शे में लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को नेपाल ने अपने क्षेत्र में दिखाया है।

पृष्ठभूमि

  • कुछ दिनों पहले भारत द्वारा 17000 फुट की ऊंचाई पर स्थित लिपूलेख दर्रे को उत्तराखंड के धारचूला से जोड़ने वाली 80 किलोमीटर लंबें रणनीति सर्कुलर लिंक रोड का उद्घाटन किया गया है। जिसको लेकर नेपाल द्वारा आपत्ति जताई गयी थी एवं प्रतिक्रिया स्वरुप नेपाल के कैबिनेट ने एक नया राजनीतिक मानचित्र को अपनाया जिसमें लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को नेपाली क्षेत्र में दर्शाया गया है।

लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा की भौगोलिक अवस्थिति और महत्व

  • लिपुलेख दर्रा कालापानी के निकट सबसे पश्चिमी क्षेत्र है जिसके जरिये प्राचीन काल से 1962 तक चीन से भारत का व्यापार समेत कैलाश मानसरोवर यात्रा में इस मार्ग का इस्तेमाल होता रहा है। पुनः1991-92 में में लिपुलेख दर्रे को व्यापारिक मार्ग हेतु खोला गया। लिम्पियाधुरा, कालापानी के सुदूर उत्तर पश्चिम में स्थित एक महत्वपूर्ण इलाका है जहाँ से काली नदी की एक धारा का उद्गम होता है।
  • काली नदी का उद्गम स्थल वाले कालापानी 372 वर्ग किलोमीटर में फैला एक मत्वपूर्ण सामरिक इलाका है। इसे भारत-चीन और नेपाल का ट्राई जंक्शन भी कहा जाता है। भारत इसे जहाँ उत्तराखंड के पिथौरागढ़ का हिस्सा मानता वाही नेपाल इसे दार्चुला जिले का हिस्सा बताता है।
  • चीन हिमालय क्षेत्र में प्रभाव बनाने के लिए अंधाधुंध निर्माण कार्य कर रहा है जिससे यहाँ चीनी सेना की पकड़ बहुत मजबूत हो गई है। चीन-नेपाल के बढ़ते प्रगाढ़ संबंध के बीच चीनी सेना पर नजर रखने एवं सैन्य संतुलन स्थापित करने के लिए इस क्षेत्र का बड़ा ही रणनीतिक महत्व है।

क्या है नेपाल का दृष्टिकोण?

  • नेपाल सुगौली समझौते (1816) के तहत काली नदी के पूर्वी क्षेत्र, लिंपियादुरा, कालापानी और लिपुलेख पर अपना दावा करता है। इसी आधार पर नेपाल भारतीय उपस्थिति को अवैध बताता है। लिपूलेख दर्रे-धारचूला लिंक रोड के साथ-साथ जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन कानून के उपरान्त जारी नए राजनीतिक नक्शा पर भी नेपाल ने आपत्ति जताई थी।

क्या है सुगौली संधि?

  • नेपाल और ब्रिटिश इंडिया के बीच 1816 में सुगौली संधि हुई थी। इस संधि में तहत काली(महाकाली) नदी के पूरब का इलाका नेपाल का माना गया। इसके अलावा सुगौली संधि के तहत ही गंडक नदी को भारत-नेपाल के बीच की सीमा माना गया है। जहाँ काली नदी के कई धाराओं के होने एवं इसके अलग-अलग उदगम होने से वही दूसरी गंडक नदी की धारा का प्रवाह बदलने से भारत और नेपाल सीमा को लेकर विवाद कायम है।

सीमा विवादों को हल करने के प्रयास

  • नेपाल-भारत तकनीकी स्तर संयुक्त सीमा कार्य समूह की स्थापना 1981 में सीमा मुद्दों को सुलझाने, अंतर्राष्ट्रीय सीमा के सीमांकन और सीमा स्तंभों के प्रबंधन के लिए की गई थी। 2007 तक, समूह ने 182 स्ट्रिप मानचित्रों की तैयारी पूरी कर ली, दोनों पक्षों के सर्वेक्षणकर्ताओं ने हस्ताक्षर किए, सीमा के लगभग 98% को कवर किया, कालापानी और सुस्ता (Susta) के दो विवादित क्षेत्रों को छोड़कर सभी पर विवाद समाप्त हो चूका है।

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