यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स (13 जून 2020)


यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स

Daily Hindi Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC, RPSC and All State PCS Examinations


जीएसटी परिषद

चर्चा में क्यों

केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में जीएसटी परिषद की 40वीं बैठक वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से संपन्न हुई।

इस बैठक में केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य राज्य मंत्री श्री अनुराग ठाकुर के अलावा राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्रियों तथा वित्त मंत्रालय एवं राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया।

बैठक का निष्कर्ष

  • इस बैठक में जीएसटी परिषद ने कानून और प्रक्रिया से संबंधित सिफारिशें कीं।
  • पिछले रिटर्न के लिए विलंब शुल्क में कमी करके अधिकतम 500 रूपये प्रति रिटर्न कर दिया गया है और यदि कुछ भी कर देनदारी नहीं है, तो विलंब शुल्क ‘शून्य’ कर दिया गया है।
  • सीजीएसटी अधिनियम 2017 और आईजीएसटी अधिनियम, 2017 में संशोधन करने वाले वित्त अधिनियम, 2020 के कुछ अनुच्‍छेदों को 30.06.2020 से प्रभावी करने की भी सिफारिश की गई है।

जीएसटी परिषद के बारे में

  • वस्तु एवं सेवा कर प्रणाली के तहत जीएसटी परिषद एक मुख्य निर्णय लेने वाली संस्था है जो की जीएसटी कानून के अंतर्गत होने वाले कार्यो के संबंध में सभी महत्वपूर्ण निर्णय लेती है।
  • 101वें संविधान संशोधन अधिनियम से संविधान में अनुच्छेद 279A जोड़ा गया, जिसमें वस्तु एवं सेवा कर को लागू करने के लिए जीएसटी परिषद के गठन की बात कही गयी हैं।
  • गठन: जीएसटी परिषद केंद्र और राज्यों के लिए एक संयुक्त मंच होता है। इसमें निम्नलिखित सदस्य होते हैं :-
  • केंद्रीय वित्त मंत्री, (अध्यक्ष)
  • सदस्य के रूप में, केंद्रीय राज्य मंत्री (राजस्व)
  • प्रत्येक राज्य और दिल्ली, पुदुचेरी एवं जम्मू-कश्मीर केंद्र-शासित प्रदेशों के वित्त या कराधान के प्रभारी मंत्री या सदस्य के रूप में नामित कोई अन्य मंत्री।
  • जीएसटी परिषद का प्रत्येक निर्णय बैठक में कम से कम कुल उपस्थित सदस्यों के 3/4 के बहुमत से मतदान करने के बाद लिया जाता है।
  • बैठक में कुल डाले गये मतों के 1/3 हिस्से मूल्य केंद्र सरकार के मतों का होता है बाकी सभी राज्य सरकारों का एक साथ मिलकर कुल डाले गये मतों का मूल्य 2/3 होता है।
  • जीएसटी परिषद के सदस्यों की कुल संख्या में से आधे के साथ बैठकों का कोरम गठित होता है।
  • गौरतलब है कि जीएसटी परिषद सहकारी संघवाद का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है जहाँ केंद्र और राज्यों दोनों को उचित प्रतिनिधित्व मिलता है।

कोविड -19 और बाल श्रम

चर्चा में क्यों

संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) और अन्तराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) ने 12 जून को विश्व बाल श्रम दिवस पर संयुक्त रूप से ‘COVID-19 and child labour: A time of crisis, a time to act’ रिपोर्ट जारी की।
इस रिपोर्ट के अनुसार, COVID-19 संकट भारत, ब्राजील और मैक्सिको जैसे देशों में लाखों से अधिक बच्चों को बाल श्रम में धकेल सकता है।

रिपोर्ट के महत्वपूर्ण निष्कर्ष

  • अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) और यूनिसेफ इस रिपोर्ट में कहा गया है कि 2000 के बाद से बाल श्रम में 94 मिलियन की कमी आई है, लेकिन कोविड-19 के कारण एक बार फिर यह जोखिम बढ़ सकता है।
  • COVID-19 संकट के परिणामस्वरूप लाखों से अधिक बच्चों को बाल श्रम में धकेला जा सकता है, जिससे 20 साल की प्रगति के बाद एक बार फिर बाल श्रम में वृद्धि हो सकती है।
  • बाल श्रम में पहले से ही बच्चे कठिन परिस्थितियों में घंटों काम करते हैं और इन परिस्थितियों में उनमें से कई बच्चों को श्रम के सबसे बुरे स्वरूपों में काम करने के लिए मजबूर किया जा सकता है, जो उनके स्वास्थ्य और सुरक्षा को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।
  • पूर्व में किए गए अध्ययनों में पाया गया है कि गरीबी में एक प्रतिशत की वृद्धि से बाल श्रम में कम से कम 0.7 प्रतिशत प्रतिशत वृद्धि होती है।
  • बीमारी के प्रसार को रोकने के लिए अस्थायी रूप से स्कूल बंद होने के कारण कम से कम 130 देशों में 1 बिलियन से अधिक छात्र प्रभावित हो रहे हैं। यहां तक कि जब कक्षाएं पुनः शुरू होंगी तो बहुत से परिवार आर्थिक परेशानियों के कारण अपने बच्चों को स्कूल भेजने का जोखिम नहीं उठा सकते हैं।
  • बालिकाओं के साथ लैंगिक असमानताएं और अधिक बढ़ने की संभावना है विशेष रूप से कृषि और घरेलू कार्यों में।

बच्चो को इस समस्या से बचाने के उपाय

  • संकट के समय में सामाजिक सुरक्षा महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उन लोगों को सहायता प्रदान करती है जो सबसे कमजोर हैं। शिक्षा, सामाजिक सुरक्षा, न्याय, श्रम बाजार और अंतरराष्ट्रीय मानव और श्रम अधिकारों के लिए व्यापक नीतियों के साथ बाल श्रम चिंताओं को एकीकृत करना एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
  • लॉकडाउन के बाद स्कूल तक बच्चों को लाने और कुछ विशेष प्रकार के व्यावसायिक प्रशिक्षण के समर्थन के लिए परिवार के साथ मिलकर काम करने की आवश्यकता है।
  • परिवारों, समुदायों और व्यवसायों को एक मंच पर लाया जाना चाहिए ताकि सभी स्तरों पर निजी क्षेत्र ऊपर सही काम करने के लिए दबाव महसूस करें और कानूनों का सही से अनुपालन संभव हो सके।

अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC)

चर्चा में क्यों

अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय ने ट्रम्प प्रशासन द्वारा अदालत के कर्मचारियों के खिलाफ प्रतिबंधों को अधिरोपित करने के फैसले की निंदा कहते हुए कहा कि "कानून के शासन और न्यायालय की न्यायिक कार्यवाही में हस्तक्षेप करने का प्रयास अस्वीकार्य है।"

पृष्ठभूमि

  • अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन द्वारा अफगानिस्तान और अन्य जगहों पर संभावित युद्ध अपराधों के लिए अमेरिकी सैनिकों, खुफिया अधिकारियों और इजरायल सहित संबद्ध देशों के खिलाफ जांच कर रहे हैं अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय के कर्मचारियों पर प्रतिबंध लगाने वाला एक कार्यकारी आदेश को पारित किया गया।
  • राष्ट्रपति ट्रम्प के आदेश से अदालत के कर्मचारियों की वित्तीय संपत्ति जब्त कर ली जाएगी और उनके संयुक्त राज्य में प्रवेश करने पर रोक लगा दी जाएगी।

क्या है ICC?

  • ICC एक अर्न्तसरकारी अन्तर्राष्ट्रीय न्यायाधिकरण है यानि Intergovernmental- International Tribunal है जो कि दुनिया भर में हुई आपराधिक घटनाओं की सुनवाई करता है
  • ICC मुख्यतः 4 मुद्दो से सम्बन्धित सुनवाई ही करता है जिनमे मानवता के खिलाफ अपराध,यानि Crime against humanity, Genocide यानि जनसंचार War Crime यानि युद्ध के दौरान हुए अपराध और Crime of aggression आते हैं।
  • ICC की नींव 1 जुलाई 2002 को अपनाये गये रोम कानून के साथ की गई।
  • ICC का मुख्यालय नीदरलैड्स की राजधानी हेग में लेकिन इसकी कार्यवाही कहीं भी की जा सकती है।

ICC का स्वरूप

  • दरअसल वे सभी देश जो रोम कानून या Rome Statute के सदस्य थे वे सभी ICC के भी सदस्य है।
  • ICC संयुक्त राष्ट्र यानि UN का हिस्सा नहीं है लेकिन फिर भी United Nations के साथ इसने सहयोग के लिये समझौता कर रखा है।
  • यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि International Criminal Court और International Court of Justice दोनों पूर्णतः अलग है व इनका एक दूसरे से कोई सम्बन्ध नहीं है

अधिकार क्षेत्र

दरअसल ICC तक मामला ले जाने की कुछ शर्ते भी है

  • पहली यह कि जब किसी देश की राष्ट्रीय अदालत ने उस मुद्दे या अपराध को सुनने से या जाँच करने से इंकार किया हो।
  • तथा दूसरी यह कि संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद यानि UN Security Council ने उस मुद्दे को ICC के पास भेजा हो।
  • गौरतलब है ICC केवल सदस्य देशों के मुकदमों या मामलो की सुनवाई ही कर सकता है।

सदस्य देश

  • इस समय ICC के कुल 123 सदस्य देश हैं
  • भारत ICC का सदस्य देश नहीं है तथा इसके साथ ही अमेरिका, चीन, इजराइल और रूस भी ICC के सदस्य नहीं है।

सहकार मित्र : इंटर्नशिप कार्यक्रम पर योजना

चर्चा में क्यों :

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’ बनाने के आह्वान, जिसमें स्वदेशी उत्पादों का से प्रचार करने पर विशेष जोर दिया गया है, को ध्यान में रखते हुए ‘सहकार मित्र: इंटर्नशिप कार्यक्रम पर योजना (सिप)’ का शुभारंभ केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर द्वारा किया गया।

योजना के विषय में :

  • यह राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) द्वारा प्रारम्भ की गई एक पहल है
  • एनसीडीसी की अनेक पहलों की श्रृंखला में ‘सहकार मित्र: इंटर्नशिप कार्यक्रम पर योजना (सिप)’ स्कीम से युवा प्रोफेशनलों को सवेतन इंटर्न के रूप में एनसीडीसी और सहकारी समितियों के कामकाज से व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने एवं सीखने का अवसर मिलेगा।
  • यह स्टार्ट-अप सहकारी उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए एक पूरक योजना के रूप में भी होगी।
  • ‘सहकार मित्र’ योजना इसके साथ ही अकादमिक संस्थानों के प्रोफेशनलों को किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) के रूप में सहकारी समितियों के माध्यम से नेतृत्व और उद्यमशीलता की भूमिकाओं को विकसित करने का भी अवसर प्रदान करेगी।

योजना का संभावित प्रभाव :

  • सहकार मित्र योजना सहकारी संस्थाओं को युवा प्रोफेशनलों के नए और अभिनव विचारों तक पहुंचने में मदद करेगी,
  • इंटर्न को क्षेत्र यानी फील्ड में काम करने का अनुभव प्राप्त होगा जो उन्हें आत्मनिर्भर होने का विश्वास दिलाएगा।
  • इसके सहकारी समितियों के साथ-साथ युवा प्रोफेशनलों के लिए भी लाभप्रद साबित होने की उम्मीद है।

कौन हैं पात्र :

  • इस योजना के तहत कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों और आईटी जैसे विषयों के प्रोफेशनल स्नातक ‘इंटर्नशिप’ के लिए पात्र होंगे।
  • कृषि-व्यवसाय, सहयोग, वित्त, अंतर्राष्ट्रीय व्यापार, वानिकी, ग्रामीण विकास, परियोजना प्रबंधन, इत्यादि में एमबीए की डिग्री के लिए पढ़ाई कर रहे या अपनी पढ़ाई पूरी कर चुके प्रोफेशनल भी इसके लिए पात्र होंगे।

आवंटन प्रक्रिया :

  • एनसीडीसी ने सहकार मित्र सवेतन इंटर्नशिप कार्यक्रम के लिए धनराशि अलग से आवंटित कर दी है जिसके तहत प्रत्येक इंटर्न को 4 माह की इंटर्नशिप अवधि के दौरान वित्तीय सहायता मिलेगी।
  • यह योजना एनसीडीसी द्वारा सृजित 1000 करोड़ रुपये के 'सहकारिता स्टार्ट अप एवं नवाचार निधि (सीएसआईएफ) से लिंक्ड होगी।
  • यह पूर्वोत्तर क्षेत्रों, महत्वाकांक्षी जिलों तथा महिलाओं अथवा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति व दिव्यांग सदस्यों की सहकारिताओं हेतु युवा अनुकूल पहलों में शामिल होगी। इन विशेष श्रेणियों के लिए वित्त पोषण परियोजना लागत का 80% तक होगा अन्य के लिए यह 70% होगा।
  • जिन प्रोजेक्ट की लागत 3 करोड़ तक है उनके प्रोत्साहन के लिए योजना में ब्याज दर प्रचलित टर्म लोन पर लागू ब्याज दर से 2% कम होगी, साथ ही मूलधन के भुगतान पर 2 साल का अधिस्थगन दिया जायेगा। योजना का लाभ लेने हेतु कम से कम एक वर्ष से संचालित सभी प्रकार की सहकारी समितियां पात्र हैं।
  • एनसीडीसी की वेबसाइट पर उपलब्ध इंटर्नशिप आवेदन के लिए ऑनलाइन आवेदन पोर्टल भी उपलब्ध है।

सहकारी समितियां क्या हैं :

  • सहकारी समिति (cooperative) लोगों का ऐसा संघ है जो अपने पारस्परिक लाभ (सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक) के लिए स्वेच्छापूर्वक सहयोग करते हैं। इसकी प्रवृत्ति लोकतान्त्रिक है।
  • अनुच्छेद 19 1(c) के अनुसार सहकारी समितियों का गठन करना एक मूल अधिकार है और नीति निर्देशक तत्वों का अनुच्छेद 43(ब) सहकारी समितियों के विकास को बढावा देता है|
  • संविधान के भाग 9 (ख) में सहकारी समिति का विशेष उल्लेख है।

राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी)

  • राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) की स्थापना 1963 में संसद के एक अधिनियम द्वारा कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के तहत एक सांविधिक निगम के रूप में की गई थी।
  • इसका मुख्य कार्य कृषि उत्पादन, खाद्य सामग्री, कुछ अन्य अधिसूचित वस्तुओं के उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन, भंडारण, निर्यात और आयात के लिए कार्यक्रमों की योजना, प्रचार और वित्तपोषण है ।
  • यह उर्वरक, कीटनाशक, कृषि यंत्र, लाख, साबुन, मिट्टी का तेल, कपड़ा, रबर आदि, उपभोक्ता वस्तुओं की आपूर्ति और सहकारी समितियों के माध्यम से सुनिश्चित करता है।
  • यह डेयरी, मत्स्य पालन, सेरीकल्चर, हैंडलूम आदि तथा गौण वन उपज का संग्रह, प्रसंस्करण, विपणन, भंडारण और निर्यात, इसके अलावा मुर्गीपालन जैसी गतिविधियों की आय सृजन में सहायक होता है ।

भारतीय-अमेरिकी मृदा वैज्ञानिक डॉ रतन लाल को विश्व खाद्य पुरस्कार 2020

चर्चा में क्यों :

भारतीय मूल के और अमेरिकी नागरिक, डॉ रतन लाल को खाद्य उत्पादन बढ़ाने के लिए मृदा केंद्रित उपागम विकसित करने और उसे मुख्यधारा विषयक बनाकर प्राकृतिक संसाधनों को बरकरार एवं संरक्षित रखने तथा जलवायु परिवर्तन के असर को कम करने के लिए 2020 का विश्व खाद्य पुरस्कार दिया जाएगा।”

पुरस्कार प्रदान करने का कारण :-

  • डॉक्टर लाल ने अपने पांच दशक से अधिक के करियर में मिट्टी की गुणवत्ता को बचाए रखने की नवीन तकनीकों को बढ़ावा देकर चार महाद्वीपों के 50 करोड़ से अधिक छोटे किसानों की आजीविका को लाभ पहुचाते दो अरब से ज्यादा लोगों की खाद्य एवं पोषण सुरक्षा में सुधार किया है। इसके अलावा इन्होने करोड़ों हेक्टेयर प्राकृतिक उष्णकटिबंधीय पारिस्थितिकी तंत्रों को संरक्षित किया है।
  • डॉक्टर रतन लाल के इस कार्य से न सिर्फ खाद्य उत्पादन बढ़ेगा बल्कि जलवायु परिवर्तन का असर भी कम होगा।
  • इस पुरस्कार के उपरांत मृदा विज्ञान की ओर लोगों का रुझान बढ़ेगा

विश्व खाद्य पुरस्कार के विषय में:

  • विश्व खाद्य पुरस्कार को कृषि के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार के बराबर माना जाता है और प्राप्तकर्ता को भोजन की गुणवत्ता और उपलब्धता में सुधार के लिए 250,000 डॉलर प्रदान किए जाते हैं।
  • नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नॉर्मन बोरलॉग द्वारा कल्पित यह पुरस्कार सभी लोगों के लिए एक पौष्टिक और टिकाऊ खाद्य आपूर्ति के महत्व पर जोर देता है। बोरलॉग ने पुरस्कार को रोल मॉडल स्थापित करने के साधन के रूप में देखा जो दूसरों को प्रेरित करेगा।
  • यह पुरस्कार विश्व खाद्य पुरस्कार फाउंडेशन द्वारा 1987 से प्रचलन में है।
  • विश्व खाद्य पुरस्कार फाउंडेशन का मुख्यालय आइओवा ,संयुक्त राष्ट्र अमेरिका में स्थित है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा H -1 B वीजा निलंबन

चर्चा में क्यों :-

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कोरोनवायरस महामारी के कारण अमेरिका में बड़े पैमाने पर बेरोजगारी को ध्यान में रखते हुए भारतीय आईटी पेशेवरों के बीच सबसे अधिक मांग वाले एच - B वीजा सहित कई रोजगार वीजा को निलंबित करने पर विचार कर रहे हैं।

पृष्ठभूमि

  • 2008 की मंदी के उपरांत ही अमेरिका सहित कई विकसित देशों में संरक्षणवाद की मांग आरम्भ हो गई थी। कोरोना वायरस से उत्पन्न बेरोजगारी संकट में अमेरिका फर्स्ट की नीति के अंतर्गत यह कदम उठाया गया है।
  • कोरोना वायरस की महामारी उपरान्त अमेरिका में बेरोजगारी शीर्ष पर है जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार बढाने हेतु इस कवायद की शुरूआत की गयी है
  • वॉल स्ट्रीट जर्नल ने बताया कि प्रस्तावित निलंबन 1 अक्टूबर से शुरू होने वाले सरकार के नए वित्तीय वर्ष में विस्तारित हो सकता है, जब कई नए वीजा जारी किए जाते हैं,अथवा निलंबित किये जाते हैं।
  • दैनिक रिपोर्ट में कहा गया है कि निलंबन खत्म होने तक देश के बाहर कोई भी नया एच -1 बी धारक काम करने से रोक सकता है, हालांकि देश में पहले से ही वीजा धारकों के प्रभावित होने की संभावना नहीं है।
  • H-1B भारत के प्रौद्योगिकी पेशेवरों के लिए सबसे प्रतिष्ठित विदेशी कार्य वीजा है।

H-1B वीजा के विषय में :-

  • एच -1 बी आव्रजन और राष्ट्रीयता अधिनियम, धारा 101 (ए) (15) (एच) के तहत संयुक्त राज्य में एक वीजा है जो अमेरिकी नियोक्ताओं को विदेशी कर्मचारियों को अस्थायी रूप से विशेष व्यवसायों में नियोजित करने की अनुमति देता है।
  • इसको प्राप्त करने के लिए एक विशेष व्यवसाय में पेशेवर ज्ञान के साथ स्नातक की डिग्री या कार्य अनुभव के समकक्ष की आवश्यकता होती है। इसमें रहने की अवधि तीन साल है,जो छह साल तक बढ़ाई जा सकती है; जिसके बाद वीजा धारक को फिर से आवेदन करना पड़ सकता है।
  • कानून के जरिये हर साल जारी किए जाने वाले H-1B वीजा की संख्या पर नियंत्रण कराया जाता है: 2017 में 180,440 नए और शुरुआती H-1B वीजा जारी किए गए।

भारत व H-1 B वीजा :-

  • प्रतिवर्ष जारी होने वाले H-1 B वीसा का लगभग 70 % भारत के पेशेवरों द्वारा प्रयोग किया जाता है।
  • भारतीय आईटी कम्पनियाँ इस वीजा पर निर्भर हैं तथा भारत सेवा क्षेत्र में सकल निर्यातक है।
  • निश्चित ही अभी रहने वाले बीजा धारकों पर नए वीजा नियमो का प्रभाव नहीं पड़ेगा ,परन्तु नवीन प्रोफेशनल्स तथा वीज़ा पुनरानवीकरण में समस्या हो सकती है।
  • इसके साथ ही विदेश जाने वाले पेशेवर का भार भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
  • यह भारत के रेमिटेंस और विदेशी मुद्रा अर्जन की क्षमता को कमजोर कर सकता है ।

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