यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स (12 सितंबर 2020)

Daily Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC, RPSC and All State PCS Examinations


यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स

Daily Hindi Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC, RPSC and All State PCS Examinations


औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी)

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में भारत सरकार के सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्‍वयन मंत्रालय ने औद्योगिक उत्पादन सूचकांक(आईआईपी) के आंकड़े जारी किए हैं।

जुलाई, 2020 में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) से जुड़े प्रमुख बिंदु

  • सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्‍वयन मंत्रालय के द्वारा जारी आंकणों के अनुसार जुलाई,2020 में देश का औद्योगिक उत्पादन 10.4 फीसदी घट गया है(पिछले साल के जुलाई माह की तुलना में)। इसके मुताबिक मैन्युफैक्चरिंग, माइनिंग और बिजली उत्पादन घटने से आईआईपी में गिरावट आई है।
  • जुलाई, 2020 में 2011-12 के आधार के साथ औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) का त्वरित अनुमान 118.1रहा है। जुलाई, 2020 के महीने में खनन, विनिर्माण और बिजली क्षेत्रों के लिए औद्योगिक उत्पादन के सूचकांक क्रमशः 87.2, 118.8 और 166.3पर रहे हैं।
  • जुलाई में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के उत्पादन में 11.1 फीसदी कमी आयी तथा माइनिंग व बिजली उत्पादन में क्रमश: 13 फीसदी और 2.5 फीसदी गिरावट आयी है।
  • सरकार ने कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए मार्च,2020 के अंतिम हफ्ते में राष्ट्रव्यापी लॉकडाउन का फैसला किया था। इसके चलते औद्योगिक उत्पादन लगभग ठप हो गया था। लॉकडाउन का असर फैक्ट्रियों में उत्पादित होने वाली चीजों के उत्पादन पर पड़ा। बाद में लॉकडाउन के तहत पाबंदियां कम की गयीं, जिससे धीरे-धीरे औद्योगिक गतिविधियां बढ़ रही हैं।

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के बारे में

  • औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) , भारतीय अर्थव्यवस्था में विभिन्न क्षेत्रों के वृद्धि या विकास का विवरण प्रस्तुत करता है, यथा- रिफाइनरी उत्पाद, खनिज खनन, बिजली, विनिर्माण, सीमेंट आदि।
  • इसे सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (National Statistical Office -NSO) द्वारा, मासिक रूप से संकलित और प्रकाशित किया जाता है।
  • दरअसल यह सूचकांक अर्थव्यवस्था का एक समग्र संकेतक है जो कि प्रमुख क्षेत्र (Core Sectors) एवं उपयोग आधारित क्षेत्र के आधार पर आँकड़े उपलब्ध कराता है।
  • कोर सेक्टर का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में लगभग 40.27 फीसदी योगदान होता है ।
  • गौरतलब है कि आईआईपी, अर्थव्यवस्था के विभिन्न उद्योग समूहों में एक निश्चित समय अवधि में विकास दर को प्रदर्शित करता है अर्थात आईआईपी, एक समग्र संकेतक है जो वर्गीकृत किये गए उद्योग समूहों की वृद्धि दर को मापता है । इसके आकलन के लिये आधार वर्ष ‘2011-2012’ है।
  • आईआईपी में आठ कोर उद्योग का भारांश घटते के क्रम में निम्न प्रकार से है : रिफाइनरी उत्पाद> विद्युत> इस्पात> कोयला> कच्चा तेल> प्राकृतिक गैस> सीमेंट> उर्वरक।
  • औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) का उपयोग भारतीय रिजर्व बैंक, वित्त मंत्रालय तथा अन्य सरकारी एजेंसियों व संगठनों द्वारा सार्वजनिक नीति-निर्माण में किया जाता है।

जलवायु स्मार्ट शहर आकलन ढांचा और स्ट्रीट्स फॉर पीपल चैलेंज अभियान

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय मंत्रालय द्वारा जलवायु स्मार्ट शहर आकलन ढांचा (क्लाइमेट स्मार्ट सिटीज़ अससेसमेंट फ्रमेवर्क- सीएससीएएफ) और स्ट्रीट्स फॉर पीपल चैलेंज अभियान को शुरू किया गया।

स्मार्ट शहर आकलन ढांचा (सीएससीएएफ) के बारे में

  • स्मार्ट शहर आकलन ढांचा (क्लाइमेट स्मार्ट सिटीज़ अससेसमेंट फ्रमेवर्क- सीएससीएएफ) का उद्देश्य शहरों को निवेश समेत अपनी योजनाओं को क्रियान्वित करने के दौरान सामने आने वाली जलवायु चुनौतियों से निपटने के लिए स्पष्ट खाका उपलब्ध कराना है।
  • पिछले एक दशक में शहरों के समक्ष चक्रवाती तूफान, बाढ़, लू का प्रकोप, पानी की समस्या और सूखे जैसी विषम स्थितियां आई है। इससे जान और माल दोनों के नुकसान के साथ-साथ आर्थिक विकास भी प्रभावित हुआ है। इस संदर्भ में सीएससीएएफ़ पहल जलवायु परिवर्तन संबंधी पहलुओं के मद्देनजर भारत में शहरी नियोजन और विकास में मदद करेगी।
  • सीएससीएएफ फ्रेमवर्क में पांच श्रेणियों में 28 संकेतक को शामिल किया है, जिसमें
  1. ऊर्जा एवं हरित निर्माण
  2. शहरी नियोजन, हरित क्षेत्रों और जैव विविधता
  3. आवागमन तथा वायु गुणवत्ता
  4. जल प्रबंधन एवं
  5. कचरा प्रबंधन शामिल हैं।

स्ट्रीट्स फॉर पीपल चैलेंज के बारे में

  • स्ट्रीट्स फॉर पीपल चैलेंज इसलिए शुरू किया गया ताकि हमारे शहरों की गलियों को पैदल चलने वालों के लिए और अधिक सुरक्षित बनाया जा सके।
  • यह चैलेंज आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा जारी उस एडवाइजरी पर आधारित है जिसमें इस साल की शुरुआत में बाजारों को पैदल चलने वालों के अनुकूल बनाने के लिए कहा गया था।
  • यह चैलेंज देशभर के शहरों को एक समान गलियों के निर्माण में मदद करेगा, जो विभिन्न पक्षकारों और नागरिकों से परामर्श पर आधारित होगा।
  • इसका उद्देश्य कम लागत वाले नए विचारों के साथ गलियों के निर्माण की शुरुआत है जो पैदल चलने वालों के अनुकूल हो। इससे प्रतिस्पर्धा में शामिल होने वाले सभी शहरों को टेस्ट-लर्न-स्केल अप्रोच के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे महत्वाकांक्षी और आसपास के खाली पड़े क्षेत्रों में पैदल चलने वाले रास्तों को बेहतर किया जा सके।

स्टार्टअप पारितंत्र को समर्थन के लिए राज्यों की रैंकिंग : 2019

चर्चा में क्यों?

  • वाणिज्य एवं उद्योग और रेल मंत्री श्री पीयूष गोयल ने वर्चुअल समारोह के माध्यम से स्टार्टअप पारितंत्र के लिए समर्थन पर राज्यों की रैकिंग के दूसरे संस्करण के परिणाम जारी किए।

States Startup Ranking 2019

राज्यों की स्टार्टअप पारितंत्र रैंकिंग 2019 से संबंधित जानकारी

  • उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने राज्यों और संघ शासित क्षेत्रों के बीच प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने और स्टार्टअप पारितंत्र के सन्दर्भ में सक्रियता से काम करने के लिए राज्यों की स्टार्टअप रैंकिंग के दूसरे संस्करण का संचालन किया।
  • कार्यक्रम की परिकल्पना इस रूप में की गई है कि इससे राज्यों की क्षमता का विकास होगा, राज्य आपसी सहयोग के जरिये अपने अनुभव साझा करने के लिए प्रोत्साहित होंगे तथा इससे नीति निर्माण और कार्यान्वयन में सहायता मिलेगी।
  • राज्य स्टार्टअप रैंकिंग फ्रेमवर्क 2019 में 7 व्यापक सुधार क्षेत्र हैं, जिसमें 30 कार्य बिंदु (एक्शन पॉइंट) हैं।
  • इनमें से कुछ प्रमुख कार्य बिन्दु निम्नलिखित हैं-
  1. संस्थागत समर्थन,
  2. आसान अनुपालन,
  3. सार्वजनिक खरीद मानदंडों में छूट,
  4. इन्क्यूबेशन समर्थन,
  5. सीड फंडिंग सहायता,
  6. उद्यम अनुदान सहायता और
  7. जागरूकता एवं आउटरीच।
  • रैंकिंग प्रक्रिया में एकरूपता स्थापित करने और मानकीकरण सुनिश्चित करने के लिए, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को दो समूहों में विभाजित किया गया है।
  • दिल्ली को छोड़कर सभी संघ शासित क्षेत्र और असम को छोड़कर पूर्वोत्तर के सभी राज्य श्रेणी वाई में रखे गए हैं।
  • वहीं अन्य राज्यों और संघ शासित क्षेत्र दिल्ली को श्रेणी एक्स में रखा गया है।
  • इस प्रक्रिया में कुल 22 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों ने भाग लिया।
  • रैंकिंग के उद्देश्यों के अनुरूप, राज्यों को 5 उप-श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है:
  1. सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाला,
  2. उत्तम प्रदर्शन,
  3. अग्रणी (लीडर),
  4. आकांक्षी अग्रणी और
  5. उभरता हुआ स्टार्टअप पारितंत्र।

राज्य स्टार्टअप रैंकिंग परिणाम 2019

श्रेणी एक्स

श्रेणी राज्य
सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन गुजरात
उत्तम प्रदर्शन (टॉप परफॉर्मर) कर्नाटक
केरल
अग्रणी बिहार
महाराष्ट्र
ओडिशा
राजस्थान
आकांक्षी अग्रणी हरियाणा
झारखंड
पंजाब
तेलंगाना
उत्तराखंड
उभरते हुए स्टार्टअप पारितंत्र आंध्र प्रदेश
असम
छत्तीसगढ़
दिल्ली
हिमाचल प्रदेश
मध्य प्रदेश
तमिलनाडु
उत्तर प्रदेश

इस समूह में श्रेणी वाई को छोड़कर सभी राज्य और संघ शासित क्षेत्र हैं।

श्रेणी वाई

श्रेणी राज्य
सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह
अग्रणी चंडीगढ़
आकांक्षी अग्रणी नागालैंड
उभरते हुए स्टार्टअप परितंत्र मिजोरम
सिक्किम

इस समूह में असम को छोड़कर सभी पूर्वोत्तर राज्य और दिल्ली को छोड़कर सभी संघ शासित क्षेत्र शामिल हैं।

सभी 7 सुधार क्षेत्रों में अग्रणी

प्रत्येक सुधार क्षेत्र में सबसे ज्यादा अंक हासिल करने वाले राज्यों को अग्रणी (लीडर) के रूप में मान्यता दी गई है।

क्र. सं. आधार अग्रणी का नाम
1. संस्थागत अग्रणी कर्नाटक
केरल
ओडिशा
2. विनियामकीय बदलाव चैम्पियन कर्नाटक
केरल
ओडिशा
उत्तराखंड
3. खरीद में अग्रणी कर्नाटक
केरल
तेलंगाना
4. इनक्यूबेशन हब गुजरात
केरल
5. नवाचार की शुरुआत (सीडिंग इनोवेशन) में अग्रणी बिहार
केरल
महाराष्ट्र
6. परिमाण नवाचार (क्लेकिंग इनोवेशन) में अग्रणी गुजरात
केरल
महाराष्ट्र
राजस्थान
7. जागरूकता और पहुंच (आउटरीच) में चैंपियन गुजरात
महाराष्ट्र
राजस्थान

पीएम केयर्स फंड और विदेशी अभिदान (विनियमन) अधिनियम

चर्चा में क्यों?

  • गृह मंत्रालय ने FCRA मिली छूट के संदर्भ में एक आरटीआई का जवाब देने से यह कहते हुए मना कर दिया कि पीएम केयर्स फंड आरटीआई अधिनियम के तहत तीसरा पक्ष है जिसकी सूचना गृह मंत्रालय नहीं दे सकता।

क्या है मामला?

  • पीएम केयर्स फंड को विदेशी अभिदान (अधिनियम) 2010 (FCRA) के सभी प्रावधानों से छूट मिली है।
  • मार्च में पीएम केयर्स फंड में रु39.68 लाख का विदेशी मुद्रा में दान मिला था।
  • आरटीआई अधिनियम के तहत पीएम केयर्स फंड को मिली इसी छूट की जानकारी मांगी गई थी।
  • गौरतलब है कि पीएम केयर्स फंड पंजीकरण अधिनियम 1908 के तहत एक पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट है।
  • पीएम केयर्स फंड को किसी राज्य सरकार या केंद्र सरकार के अधिनियम द्वारा नहीं बनाया गया है इसलिए यह आरटीआई के दायरे में नहीं आता है।
  • पीएम केयर्स फंड का लेखा परीक्षण स्वतंत्र लेखा परीक्षक द्वारा किया जाता है न कि CAG के द्वारा।

FCRA के प्रावधान

  • एफसीआरए लोक कल्याण के नाम पर संस्थानों द्वारा स्वीकार किए जाने वाले विदेशी अभिदान का विनियमन करता है ताकि उसका दुरुपयोग रोका जा सके।
  • विदेशी अभिदान लेने वाली सभी संस्थाओं को एफसीआरए के अंतर्गत पंजीयन कराना पड़ता है साथ ही सरकार से अनापत्ति प्रमाण पत्र भी लेना पड़ता है।
  • FCRA की धारा 50 के तहत केंद्र सरकार लोकहित में कारण बताते हुए ऐसे आदेश जारी कर सकती है जिसमें राजनीतिक दलों को छोड़कर किसी संस्था को एफसीआरए से छूट दी गई हो।
  • एफसीआरए के इसी प्रावधान के तहत सरकार द्वारा 30 जनवरी 2020 को अपने एक आदेश में निम्नलिखित प्रकार से स्थापित संस्थाओं को एफसीआरए से छूट प्रदान की गई थी
  • केंद्र या राज्य सरकार के अधिनियम द्वारा स्थापित संस्था
  • केंद्र या राज्य सरकार के कार्यकारी प्रशासनिक आदेश से स्थापित संस्था जिसमें संबंधित सरकार का पूर्ण स्वामित्व हो
  • CAG या उसकी अधिकृत एजेंसी से अनिवार्यता लेखा परीक्षण की जाने वाली संस्था।

क्या है पीएम केयर्स फंड?

  • कोविड-19 महामारी जैसी किसी भी तरह की आपातकालीन या संकट की स्थिति से निपटने के प्राथमिक उद्देश्य के साथ एक समर्पित राष्ट्रीय निधि की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए और उससे प्रभावित लोगों को राहत प्रदान करने के लिए ‘आपात स्थितियों में प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और राहत कोष (पीएम केयर्स फंड)’ के नाम से एक सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट बनाया गया है।
  • प्रधानमंत्री, PM CARES कोष के पदेन अध्यक्ष और रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और वित्त मंत्री, निधि के पदेन ट्रस्टी होते हैं।प्रधानमंत्री के पास 3 ट्रस्टीज को बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज में नामित करने की शक्ति होगी जो अनुसंधान, स्वास्थ्य, विज्ञान, सामाजिक कार्य, कानून, लोक प्रशासन और परोपकार के क्षेत्र में प्रतिष्ठित व्यक्ति होंगे।
  • इस कोष में पूरी तरह से व्यक्तियों / संगठनों से स्वैच्छिक योगदान होता है और इसे कोई बजटीय सहायता नहीं मिलती है। निधि का उपयोग ऊपर बताए गए उद्देश्यों को पूरा करने में किया जाएगा।
  • पीएम-केयर्स फंड में दान दी गई रकम पर 80जी के तहत इनकम टैक्‍स से 100 फीसदी छूट मिलेगी।
  • पीएम-केयर्स फंड में दान भी कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत CSR व्यय के रूप में गिना जाएगा।
  • पीएम केयर्स फंड को भी FCRA के तहत छूट मिली है और विदेशों से दान प्राप्त करने के लिए एक अलग खाता खोला गया है। इससे विदेशों में स्थित व्यक्ति और संगठन पीएम केयर्स फंड में दान दे सकते हैं।