यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स (12 जून 2020)


यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स

Daily Hindi Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC, RPSC and All State PCS Examinations


प्रकृति सूचकांक 2020

चर्चा में क्यों

  • भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के तीन स्वायत्तशासी संस्थानों ने अनुसंधान गुणवत्ता के एक मापक, शीर्ष जर्नल में प्रकाशित अनुसंधान पर आधारित ‘प्रकृति सूचकांक 2020’ रैंकिंग में अपनी जगह बनाई है।

क्या है प्रकृति सूचकांक?

  • प्रकृति सूचकांक स्वतंत्र रूप से चयनित 82 उच्च गुणवत्ता वाले विज्ञान पत्रिकाओं के समूह में प्रकाशित शोध लेखों से संबंधित जानकारी का एक डेटाबेस है।
  • इस डेटाबेस को नेचर रिसर्च द्वारा संकलित किया गया है।
  • रैंकिंग कुल अनुसंधान आउटपुट पर आधारित है जिसे संस्थानों ने 1 अप्रैल 2019 से 31 मार्च 2020 तक प्रकाशित करवाया है।

सूचकांक में भारत की स्थिति

  • प्रकृति सूचकांक 2020 में शीर्ष 30 भारतीय संस्थानों में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की 3 संस्थाएं को स्थान मिला है।
  • इसमें इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ साइंस (आईएसीएस), कोलकाता 7वें स्थान पर, जवाहर लाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साईटिफिक रिसर्च (जेएनसीएएसआर), बंगलुरु 14वें स्थान पर एवं एस एन बोस नेशनल सेंटर फॉर बेसिक साईंसेज, कोलकाता 30वें स्थान पर हैं।
  • इस सूची में वैश्विक स्तर पर शीर्ष आंके गए भारतीय संस्थानों में 39 संस्थानों के एक समूह के रूप में वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) को 160वां स्थान मिला है।
  • भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) बंगलुरु ने 184वां स्थान प्राप्त किया है।

प्रकृति सूचकांक में शामिल शीर्ष 10 संस्थाएं

  1. चाइनीज़ अकेडमी ऑफ साइंस(CAS), चीन
  2. हार्वर्ड विश्वविद्यालय ,यूएसए
  3. मैक्स प्लांक सोसाइटी, जर्मनी
  4. फ्रेंच नेशनल सेंटर फॉर साइंटिफिक रिसर्च (CNRS), फ़्रांस
  5. स्टेनफोर्ड विश्वविद्यालय, यूएसए
  6. मैसाचुएट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT), यूएसए
  7. हेल्महोल्टज़ एसोसिएशन ऑफ जर्मन रिसर्च सेंटर, जर्मनी
  8. यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी ऑफ चाइना(USTC), चीन
  9. ऑक्सफ़ोर्ड विश्विद्यालय, ब्रिटेन
  10. पेकिंग विश्वविद्यालय, चीन

मुंबई के लिए बाढ़ चेतावनी प्रणाली “IFLOWS-Mumbai”

चर्चा में क्यों

  • मुंबई शहर के लिए एक अत्‍याधुनिक एकीकृत बाढ़ चेतावनी प्रणाली के रूप में IFLOWS-Mumbai को विकसित किया गया है।

क्या है IFLOWS-Mumbai?

  • पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने ग्रेटर मुंबई नगर निगम के साथ मिलकर मंत्रालय के भीतर उपलब्‍ध विभागीय दक्षता के बल पर जुलाई 2019 में IFLOWS-Mumbai का विकास प्रारंभ किया था।
  • IFLOWS- Mumbai को मुंबई शहर के लिए अत्‍याधुनिक एकीकृत बाढ़ चेतावनी प्रणाली के रूप में विकसित किया गया है, जिसमें शहर की प्रतिरोध क्षमता में सुधार के लिए विशेष रूप से अत्‍याधिक वर्षा की घटनाओं और चक्रवातों के दौरान मुंबई के लिए प्रारंभिक चेतावनी का प्रावधान किया गया है।
  • I-FLOWS एक मॉड्यूलर संरचना पर बनाया गया है और इसमें डेटा एसिमिलेशन, बाढ़, सैलाब, भेद्यता, जोखिम, प्रसार मॉड्यूल और निर्णय समर्थन प्रणाली जैसे सात मॉड्यूल हैं।

आवश्यकता क्यों

  • पिछले कुछ सालों से जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ते तापमान और मानसून में बदलाव से भारत में वर्षा की अनिश्चित घटनाएं बढ़ रही हैं।
  • विगत कुछ वर्षों में अरब सागर में उतने वाले चक्रवाती तूफानों में तीव्रता आई है उदाहरण के लिए तूफान निसर्ग 2020, चक्रवाती तूफान महा 2019,ओखी तूफान 2017 इत्यादि ।
  • महाराष्ट्र की राजधानी और भारत की वित्तीय राजधानी, मुंबई महानगर लंबे समय से बाढ़ की त्रासदी झेलता रहा है।
  • 29 अगस्त 2017 को मुंबई ताज़ा बाढ़ से जूझना पड़ा, जिसकी वजह से अपनी जल निकासी प्रणालियों के बावजूद भी शहर ठहर गया था।
  • इसी प्रकार 26 जुलाई 2005 को आई बाढ़ ने पूरी मुंबई को जलमग्न कर डिगा था जब शहर में 24 घंटे में 100 साल के कालखण्‍ड में सबसे अधिक 94 सेमी वर्षा हुई थी।
  • अतः बाढ़ के लिए पूर्व तैयारी करने और लोगों को आने वाले खतरों से आगाह करने के उद्देश्य से इस एकीकृत बाढ़ चेतावनी प्रणाली को विकसित किया गया है।

लोनार झील के पानी का रंग गुलाबी होना

चर्चा में क्यों

  • महाराष्ट्र की लोनार झील के पानी का रंग बदलकर गुलाबी हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि लवणता और जलाशय में शैवालों की मौजूदगी से पानी के रंग में यह परिवर्तन हुआ है। इसके पाहे ईरान की एक झील का पानी भी लवणता के कारण लाल रंग का हो गया था।
  • विशेषज्ञों का यह मानना है कि यह पहली बार नहीं है जब झील के पानी का रंग बदला है लेकिन इस बार यह एकदम साफ नजर आ रहा है।

क्यों बदलता है जलीय तंत्र का रंग?

  • झीलों का रंग बदलने की पीछे कई कारक उत्तरदाई होते हैं। इसमें सबसे प्रमुख शैवालों का बढ़ना माना जाता है । दरसल सुपोषण (Eutrophication)की प्रक्रिया में जलाशय में पौधों तथा शैवाल का विकास बड़ी तेजी से होता है।ऐसी दशा में शैवाल प्रस्फुटन (Algae Bloom) के कारण झील का रंग बदल जाता है। इसके अलावा लवणता का बढ़ना और प्रदूषण के बढ़ने से भी झीलों के रंग प्रभावित होते हैं।

लोनार झील के बारे में

  • लोनार झील महाराष्ट्र के बुलढ़ाणा ज़िले में स्थित एक क्रेटर झील है। यह पर्यटकों के बीच काफी लोकप्रिय है।
  • इस झील का निर्माण करीब 50,000 साल पहले एक उल्का पिंड के पृथ्वी से टकराने के कारण हुआ था।
  • करीब 1.2 किमी के व्यास वाली झील का पानी खारा है और इसका पीएच स्तर 10.5 है।
  • गौरतलब है कि भारत में खारे पानी की सबसे बाद स्थलबद्ध झील राजस्थान की सांभर झील है।

क्या होती है क्रेटर झील

  • क्रेटर किसी खगोलीय वस्तु पर एक गोल या लगभग गोल आकार के गड्ढे को कहते हैं जो किसी ज्वालामुखी विस्फोट, अंतरिक्ष से गिरे उल्कापिंड के प्रहार या फिर ज़मीन के अन्दर किसी अन्य विस्फोट जैसे परमाणु बम आदि के कारण बनते हैं। इन गड्ढो में पानी भर जाने से जो झील बनती है उसे ही क्रेटर झील करते है।

विदेशी (एक्सोटिक) जीवित प्रजातियां, के सम्बन्ध में दिशा निर्देश

चर्चा में क्यों?

  • विदेशी जीवित प्रजातियों के आयात और निर्यात के महत्व को ध्यान में रखते हुए, पर्यावरण ,वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने विदेशी जीवित प्रजातियों के आयात और अधिकार के लिए प्रक्रिया को और बेहतर बनाने हेतु दिशा निर्देश दिए हैं।

मंत्रालय के कदम का कारण :

  • विदेशी (एक्सोटिक) जीवित प्रजातियां, पशु या पौधों की उन प्रजातियों को कहा जाता है, जिन्हें अपने मूल स्थान से नए स्थान पर ले जाया जाता है। इन प्रजातियों को अक्सर लोगों द्वारा नए स्थान पर ले जाया जाता है। देश के बहुत से नागरिकों ने ऐसे विदेशी जीवित प्रजातियों का संग्रह किया है जिन्हे सीआईटीईएस (संकटग्रस्त प्रजाति अंतर्राष्ट्रीय व्यापार सम्मेलन) सूची में सूचीबद्ध किया गया है। लेकिन राज्य/केंद्र स्तर पर ऐसी प्रजातियों के स्टॉक से सम्बंधित कोई एकीकृत सूचना प्रणाली उपलब्ध नहीं है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने अगले छह महीनों में स्वैच्छिक जानकारी देने के माध्यम से ऐसी प्रजातियों के धारकों से स्टॉक जानकारी एकत्र करने का निर्णय लिया है।

दिशानिर्देश के बारे में

  • इससे मंत्रालय CITES द्वारा निर्धारित अनुदेशों के पालन हेतु स्वैच्छिक प्रकटीकरण योजना के माध्यम से भारत में विदेशी जीवित प्रजातियों की एक सूची विकसित करेगी ।
  • विदेशी जीवित प्रजातियों के आयात की प्रक्रिया को विनियमित करेगी ।
  • इसमें आयातित विदेशी जीवित प्रजातियों के संततियों का पंजीकरण / घोषणा की जाएगी।
  • इस दिशा निर्देश के अंतर्गत आने वाली प्रक्रियाओं को परवेश पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन निदान होगा।
  • घोषणाकर्ता को विदेशी जीवित प्रजातियों के संबंध में किसी भी दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी, यदि परामर्श जारी करने की तारीख के छह महीने के भीतर घोषणा की जाती है। 6 महीने के बाद की गई किसी भी घोषणा के लिए, घोषणाकर्ता को मौजूदा कानूनों और नियमों के तहत दस्तावेज की आवश्यकता के नियम का पालन करना होगा।

प्रभाव :-

  • इससे प्रजातियों के बेहतर प्रबंधन में मदद मिलेगी
  • यह धारकों को उचित पशु चिकित्सा देखभाल, आवास और प्रजातियों की भलाई के अन्य पहलुओं के बारे में मार्गदर्शन करेगा। विदेशी पशुओं के डेटाबेस से पशु-रोगों के नियंत्रण और प्रबंधन में मदद मिलेगी।
  • जानवरों और मनुष्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए समय-समय पर मार्गदर्शन भी उपलब्ध होगा।

CITES के बारे में

  • CITES (वन्य जीवों और वनस्पतियों की लुप्तप्राय प्रजातियों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर सम्मेलन) सरकारों के बीच एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जंगली जानवरों और पौधों के नमूनों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार उनके अस्तित्व के लिए खतरा नहीं है।
  • यह कन्वेंशन को 1 जुलाई 1975 को अस्तित्व में आया एवं 1976 से भारत भी इसका एक पक्षकार के रूप में शामिल हुआ।
  • जंगली जानवरों और पौधों का व्यापार देशों के बीच की सीमाओं के पारगमन से सम्बंधित है इसलिए इसे विनियमित करने तथा कुछ प्रजातियों के संरक्षण हेतु अंतर्राष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता होती है। सीआईटीईएस की कल्पना ऐसे सहयोग की भावना से की गई थी। आज, यह जानवरों और पौधों की 37,000 से अधिक प्रजातियों के संरक्षण हेतु उत्तरदायी है
  • सीआईटीईएस एक अंतरराष्ट्रीय समझौता है जिसके लिए राज्य और क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण संगठन स्वेच्छा से पालन करते हैं। वे राज्य जो कन्वेंशन द्वारा बाध्य होने के लिए सहमत हुए हैं ('सीआईटीईएस' में शामिल हुए) को पार्टी के रूप में जाना जाता है।जिसमें अब 183 पार्टियां हैं।
  • हालाँकि CITES कानूनी रूप से पार्टियों पर बाध्यकारी है - दूसरे शब्दों में उन्हें कन्वेंशन को लागू करना है - यह राष्ट्रीय कानूनों की जगह नहीं लेता है। बल्कि यह प्रत्येक पार्टी को एक संरचना प्रदान करता है जिससे राष्ट्रीय स्तर पर सीआईटीईएस लागू करने के लिए अपने देश में विधि निर्माण करना पड़ता है।

उच्च शैक्षणिक संस्थानों के लिए "इंडिया रैंकिंग 2020

चर्चा में क्यों:

  • केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री ने नई दिल्ली में उच्च शैक्षणिक संस्थानों के लिए "इंडिया रैंकिंग 2020" जारी की है

"इंडिया रैंकिंग 2020 रिपोर्ट से सम्बंधित मुख्य तथ्य :

  • आईआईटी मद्रास इंजीनियरिंग में पहला स्थान बरकरार रखते हुए समग्र रैंकिंग में सर्वोच्च स्थान पर है
  • विश्वविद्यालयों की सूची में भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु प्रथम स्थान पर है
  • प्रबंधन श्रेणी में आईआईएम, अहमदाबाद शीर्ष पर है और मेडिकल श्रेणी में एम्स लगातार तीन वर्षों से शीर्ष स्थान पर बरकरार है
  • महाविद्यालयों में मिरांडा कॉलेज लगातार तीसरे वर्ष प्रथम स्थान पर कायम है
  • डेंटल श्रेणी में मौलाना आजाद इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज, दिल्ली ने प्रथम स्थान हासिल किया, इंडिया रैंकिंग 2020 में डेंटल संस्थानों को पहली बार शामिल किया गया है

NIRF के विषय में

  • इसे 2015 में मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा लांच किया गया था। यह भारत के उच्च शिक्षण संस्थानों की रैंकिंग स्थापित करने हेतु स्थापित एक पद्धति है।

रिपोर्ट के विषय में

  • समग्र रैंकिंग के अलावा, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के लिए श्रेणी-विशिष्ट रैंकिंग की जाती है और इंजीनियरिंग, प्रबंधन, फार्मेसी, वास्तुकला, कानून और चिकित्सा के लिए विषय-विशिष्ट रैंकिंग की जाती है। वर्ष 2020 से एक नया विषय क्षेत्र यानी "डेंटल" कोशामिल किया गया है।
  • भारत के संदर्भ में देश-विशिष्ट मापदंडों जैसे क्षेत्रीय विविधता, पहुंच, लैंगिक समानता और समाज के वंचित वर्गों को शामिल करना रैंकिंग पद्धति में शामिल हैं। सभी मापदंडों और उप-मापदंडों को विधिवत सामान्य बनाया गया है ताकि बड़े और पुराने संस्थानों को अपने आकार या उम्र के आधार पर अनुचित लाभ न हो।
  • इस वर्ष इंजीनियरिंग क्षेत्र में 200 संस्थानों, समग्र रूप सेविश्वविद्यालय और कॉलेज की श्रेणियों में 100 संस्थानों, प्रबंधन और फार्मेसी प्रत्येक में 75 संस्थानों, चिकित्सा में 40 संस्थानों, वास्तुकला और काननू प्रत्येक में 20 और पहली बार दंत चिकित्सा के क्षेत्र में 30 संस्थानों को रैंक प्रदान किया गया।

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