यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स (11 सितंबर 2020)

Daily Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC, RPSC and All State PCS Examinations


यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स

Daily Hindi Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC, RPSC and All State PCS Examinations


फाइव स्टार गांव योजना

चर्चा में क्यों?

  • डाक विभाग ने देश के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रमुख डाक योजनाओं की सार्वभौमिक पहुँच सुनिश्चित करने के लिए, “फाइव स्टार गांव” के नाम से एक योजना शुरू की है।

“फाइव स्टार गांव” योजना के बारे में

  • यह योजना विशेष रूप से सुदूरवर्ती गांवों में जन जागरूकता और डाक उत्पादों और सेवाओं तक पहुंचने की खाई को पाटने का प्रयास करेगी।
  • फाइव स्टार गांवों की योजना के तहत सभी डाक उत्पादों और सेवाओं को ग्रामीण स्तर पर उपलब्ध और विपणन और प्रचारित किया जाएगा।
  • शाखा कार्यालय ग्रामीणों की सभी संबंधित जरूरतों को पूरा करने के लिए वन-स्टॉप शॉप के रूप में कार्य करेंगे।
  • फाइव स्टार योजना के अंतर्गत आने वाली योजनाओं में शामिल हैं:
  • बचत बैंक खाते, आवर्ती जमा खाते, एनएससी/केवीपीप्रमाण पत्र,
  • सुकन्या समृद्धि खाते / पीपीएफखाते,
  • वित्त पोषित डाकघर बचत खाता भारतीय डाक पेमेंट बैंक खाते,
  • पोस्टल लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी / ग्रामीण डाक जीवन बीमा पॉलिसी और
  • प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना खाता / प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना खाता।
  • यदि किसी गाँव में उपरोक्त सूची में से चार योजनाओं की सार्वभौमिक पहुँच सुनिश्चित हो जाती है तो उस गाँव को फोर-स्‍टार दर्जा मिल जाएगा; यदि कोई गाँव तीन योजनाओं को पूरा करता है, तो उस गाँव को थ्री-स्‍टार दर्जा दिया जाएगा।
  • यह योजना महाराष्ट्र में प्रारंभिक आधार पर शुरू की जा रही है; यहां के अनुभव के आधार पर, इसे देश भर में लागू किया जाएगा।

योजना कार्यान्वयन दल

  • इस योजना को पांच ग्रामीण डाक सेवकों की टीम द्वारा कार्यान्वित किया जाएगा जिन्हें डाक विभाग के सभी उत्पादों, बचत और बीमा योजनाओं के विपणन के लिए एक गाँव सौंपा जाएगा।
  • इस टीम का नेतृत्व संबंधित शाखा कार्यालय के शाखा पोस्ट मास्टर करेंगे।
  • डाक निरीक्षक दैनिक आधार पर टीम की प्रगति पर व्यक्तिगत निगरानी रखेंगे।
  • टीमों का नेतृत्व और निगरानी संबंधित प्रभागीय प्रमुख, सहायक अधीक्षक डाक और निरीक्षक पदों द्वारा की जाएगी।

अभियान

  • ग्रामीण डाक सेवकों की टीम सभी पात्र ग्रामीणों को कवर करते हुए सभी योजनाओं के बारे में घर-घर जाकर जागरूकता अभियान चलाएगी।
  • शाखा कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर सूचना प्रदर्शित करके व्यापक प्रचार किया जाएगा।
  • पंचायत कार्यालयों, स्कूलों, ग्राम औषधालयों, बस डिपो, बाजारों जैसे लक्षित गांवों के प्रमुख स्थानों का उपयोग विज्ञापन के लिए भी किया जाएगा और पर्चे वितरित किए जाएंगे।
  • कोविड-19 सुरक्षा दिशानिर्देशों को ध्यान में रखते हुए छोटे मेलों का आयोजन किया जाएगा।

प्रशिक्षण और निगरानी

  • सभी योजनाओं को शामिल करने के लिए आवश्यक प्रशिक्षण और बुनियादी ढांचा, पहचाने गए गांवों में सभी शाखा कार्यालयों को प्रदान किया जाएगा।
  • योजना की प्रगति और लक्ष्य उपलब्धि को सर्कल, क्षेत्रीय और मंडल स्तरों पर बारीकी से देखा जाएगा। मुख्य पोस्ट मास्टर जनरल द्वारा मासिक प्रगति की समीक्षा की जाएगी।

'म्यूचुअल लॉजिस्टिक सपोर्ट अरेंजमेंट' (MLSA)

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में भारत और जापान ने दोनों देशों की सेनाओं के बीच'म्यूचुअल लॉजिस्टिक सपोर्ट अरेंजमेंट' (MLSA) के अनुबंध पर हस्ताक्षर किया है।

'म्यूचुअल लॉजिस्टिक सपोर्ट अरेंजमेंट' (MLSA) के बारे में

  • भारत और जापान ने भारत के सशस्‍त्र बलों तथा जापान के आत्‍मरक्षा बलों के मध्‍य आपूर्ति और सेवाओं के पारस्‍परिक आदान-प्रदान हेतु 'म्यूचुअल लॉजिस्टिक सपोर्ट अरेंजमेंट' (MLSA) पर हस्‍ताक्षर किए हैं।
  • इस समझौते से भारत और जापान के सशस्‍त्र बलों के मध्‍य द्विपक्षीय प्रशिक्षण गतिविधियों संयुक्‍त राष्‍ट्र शान्ति स्‍थापना संचालनों, मानवतावादी अंतर्राष्‍ट्रीय राहत और पारस्‍परिक रूप से सहमत अन्‍य गतिविधियों में संलग्‍न रहते हुए आपूर्ति और सेवाओं के परस्‍पर प्रावधान में भारत और जापान दोनों देशों के सशस्‍त्र बलों के बीच घनिष्‍ठ सहयोग के लिए सक्षम ढांचा स्‍थापित होगा।
  • यह अनुबंध भारत और जापान के सशस्‍त्र बलों के बीच अंतरसंक्रियता बढ़ाने के साथ-साथ दोनों देशों के मध्‍य विशेष रणनीतिक और वैश्विक भागीदारी के तहत द्विपक्षीय रक्षा गतिविधियों में और बढ़ोतरी करेगा। लाभ
  • समझौते के बाद भारतीय सेनाओं को जापानी सेनाएं अपने अड्डों पर जरूरी सामग्री की आपूर्ति कर सकेंगी। साथ ही भारतीय सेनाओं के रक्षा साजो सामान की सर्विसिंग भी देंगी। यह सुविधा भारतीय सैन्य अड्डों पर जापानी सेनाओं को भी मिलेंगी। युद्ध की स्थिति में ये सेवाएं बेहद अहम मानी जाती हैं।
  • सीमा विवाद को लेकर एलएसी पर चल रहे टकराव के बीच भारत ने हिंद महासागर में भी चीन की घेराबंदी तेज कर दी है। भारत और जापान के बीच हुए ऐतिहासिक रक्षा समझौते को बेहद अहम माना जा रहा है।

अन्य देशों के साथ भारत का सैन्य समझौता

  • इससे पहले भी भारत ने अमेरिका, फ्रांस, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया से ऐसा ही सैन्य समझौता कर चुका है।
  • गौरतलब है कि भारत और अमेरिका ने वर्ष 2016 में ‘द लॉजिस्टिक एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट’ (The Logistics Exchange Memorandum of Agreement - LEMOA) नामक सैन्य समझौता किया था। इसके तहत भारत को अमेरिकी सैन्य बेस जिबूती, डिएगो गार्सिया, गुआम और सुबिक बे में ईंधन भरने और आवाजाही की अनुमति है।

सोसाइटी फॉर अफोर्डेबल रिड्रेसल ऑफ डिस्प्यूट्स (सरोद-पोर्ट्स)

चर्चा में क्यों?

  • केंद्रीय नौवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री मनसुख मंडाविया ने नई दिल्ली में वर्चुअल समारोह के माध्यम से सरोद-पोर्ट्स (सोसाइटी फॉर अफोर्डेबल रिड्रेसल ऑफ डिस्प्यूट्स (विवादों के किफायती समाधान के लिए समिति) - पोर्ट्स) का शुभारंभ किया।

पृष्ठभूमि

  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जनवरी, 2018 में मॉडल रियायत समझौते (एमसीए) में संशोधन को मंजूरी दी थी। एमसीए के संशोधन में, प्रमुख बंदरगाहों की पीपीपी परियोजनाओं के लिए विवाद समाधान तंत्र के रूप में सरोद – पोर्ट्स की परिकल्पना की गई है।

क्या है सरोद-पोर्ट्स?

  • सरोद - पोर्ट्स की स्थापना सोसाइटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत निम्नलिखित उद्देश्यों के साथ की गई है:
  1. न्यायपूर्ण तरीके से विवादों का किफायती और समयबद्ध समाधान
  2. मध्यस्थों के रूप में तकनीकी विशेषज्ञों के पैनल के साथ विवाद समाधान तंत्र का संवर्धन।
  • सरोद - पोर्ट्स में इंडियन पोर्ट्स एसोसिएशन (आईपीए) और इंडियन प्राइवेट पोर्ट्स एंड टर्मिनल्स एसोसिएशन (आईपीटीटीए) के सदस्य शामिल हैं।
  • सरोद - पोर्ट्स समुद्री क्षेत्र में मध्यस्थों के माध्यम से विवादों के निपटान में सलाह और सहायता प्रदान करेंगे। जिनमें प्रमुख बंदरगाह और निजी बंदरगाह, जेटी, टर्मिनल, गैर-प्रमुख बंदरगाह, पोर्ट और शिपिंग क्षेत्र शामिल हैं।
  • यह प्राधिकरण और लाइसेंसधारी / रियायत प्राप्तकर्ता / ठेकेदार देने के बीच के विवादों को भी कवर करेगा और विभिन्न अनुबंधों के निष्पादन के दौरान लाइसेंसधारी / रियायत प्राप्तकर्ता और उनके ठेकेदारों के बीच होने वाले विवाद भी इसमें शामिल होंगे।
  • सरोद – पोर्ट्स के प्रावधान राजमार्ग क्षेत्र में एनएचएआई द्वारा गठित सरोद – रोड्स के समान हैं।

भारत-चीन विदेश मंत्री की बैठक

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में लद्दाख में भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर जारी तनाव को कम करने के लिए दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की मॉस्को में बैठक हुई।

पृष्ठभूमि

  • पिछले कई महीनों से भारत और चीन के बीच लद्दाख सीमा को लेकर गतिरोध बना हुआ है।भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच तीखी झड़प से भारत में सख्त रूख अपनाते हुए लद्दाख में गलवान घाटी और पांगोंग त्सो झील के आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती कर दी है। 15-16 जून की रात गलवान में दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुए संघर्ष में भारत के 20 जवान मारे गए थे। चीन जहां भारतीय क्षेत्रों पर लगातार अपने दावे प्रस्तुत कर पांगोंग त्सो झील और गलवान घाटी को अपना बता आक्रामक रुख अपना रहा है तो वही भारतीय सेना भी चीन सेना का डटकर मुकाबला कर रही है।

भारत-चीन विदेश मंत्री की बैठक से जुड़े बिंदु

  • भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और उनके चीनी समकक्ष वाँग यी के बीच गुरुवार को मॉस्को में मुलाक़ात हुई और दोनों देशों के बीच पाँच बिंदुओं पर सहमति बन गई है-
  • भारत-चीन सीमा के इलाक़ों में शांति और सौहार्द्य बनाए रखने और सीमा मामलों को लेकर दोनों पक्ष सभी मौजूदा समझौतों और प्रोटोकॉल का पालन करेंगे और तनाव बढ़ाने जैसी कोई कार्रवाई न की जाए।
  • जैसे-जैसे तनाव कम होगा दोनों पक्षों को सीमा इलाक़ों में शांति बनाए रखने के लिए आपस में भरोसा बढ़ाने के लिए कदम उठाने चाहिए।
  • भारत और चीन के बीच संबंध बढ़ाने को लेकर दोनों पक्ष नेताओं के बीच हुई सहमतियों से सलाह लेंगे। इसमें असहमतियों को तनाव का रूप अख्तियार नहीं करने देना भी शामिल है।
  • दोनों नेताओं ने माना कि सीमा को लेकर मौजूदा स्थिति दोनों पक्षों के हित में नहीं है। दोनों पक्ष की सेनाओं को बातचीत जारी रखनी चाहिए , जल्द से जल्द डिस्इनगेज करना चाहिए, एक दूसरे से उचित दूरी बनाए रखना चाहिए और तनाव कम करना चाहिए।
  • भारत-चीन मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच स्पेशल रिप्रेज़ेन्टेटिव मेकनिज़्म के ज़रिए बातचीत जारी रखी जाए। साथ ही सीमा मामलों में कन्सल्टेशन और कोऑर्डिनेशन पर वर्किंग मेकानिज़्म के तहत भी बातचीत जारी रखी जाएगी।

पैंगोंग-त्सो झील (pangong tso lake)

  • पैंगोंग-त्सो झील (pangong tso lake), लद्दाख में भारत-चीन सीमा के विवादित क्षेत्र में स्थित है। यह खारे पानी की झील है , इसलिए इसमें जलीय जीवन लगभग न के बराबर है। लेकिन पैंगोंग-त्सो झील कई प्रवासी पक्षियों के लिये एक महत्त्वपूर्ण प्रजनन स्थल है। यही कारण है कि इस झील को रैमसर कन्वेंशन के तहत अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व की नमभूमि (Wet land) स्थल घोषित किये जाने की चर्चा चल रही है। भारत सरकार सुरक्षा कारणों के चलते इस झील में नौकायन आदि की अनुमति नहीं देती है। इस झील के क्षेत्र में भ्रमण करने हेतु इनर लाईन परमिट की आवश्यकता होती है।
  • दरअसल पैंगोंग-त्सो झील, लद्दाख से लेकर तिब्बत तक फैली हुई है और इसकी ऊँचाई लगभग 4350 मीटर तथा लंबाई 134 किलोमीटर है।यह एक लंबी, संकरी, गहरी, एंडोर्फिक (लैंडलॉक) झील है।
  • वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) , पैंगोंग-त्सो झील के मध्य से गुज़रती है।
  • पहले पैंगोंग-त्सो झील से होकर सिंधु नदी की एक सहायक नदी ‘श्याक नदी’ बहती थी लेकिन अब यह नदी विलुप्त हो गयी है।

पैंगोंग-त्सो झील का रणनीतिक महत्व

  • पैंगोंग-त्सो झील का रणनीतिक महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि यह भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर स्थिति है। पैंगोंग-त्सो झील का पश्चिमी भाग (लगभग 45 किलोमीटर लंबा) भारतीय नियंत्रण में है , जबकि झील का शेष भाग चीन के नियंत्रण में है।
  • भारत और चीन की सेनाओं के बीच संघर्ष पैंगोंग-त्सो झील के विवादित हिस्से में होता है।
  • पैंगोंग-त्सो झील , चुशूल घाटी (Chushul Valley) क्षेत्र के पास स्थित है । उल्लेखनीय है कि चीन ने 1962 के युद्ध के समय भारत पर आक्रमण करने हेतु चुशूल घाटी मार्ग को ही चुना था। जिसके जवाब में भारतीय सेना ने चुशूल घाटी के दक्षिण-पूर्वी छोर के पहाड़ी दर्रे रेज़ांग ला (Rezang La) से डटकर मुक़ाबला किया था।

पैंगोंग-त्सो झील के फिंगर्स(Fingers)

  • पैंगोंग-त्सो झील के उत्तरी छोर पर कई पहाड़ उपस्थित हैं , इन्हें सेना ‘फिंगर्स’ (Fingers) के नाम से संबोधित करती है। ये पहाड़ रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण हैं।
  • भारत का कहना है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) ‘फिंगर- 8’ से जुड़ी है।
  • हाल ही में भारतीय सैनिक रणनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण ‘फिंगर- 4’ (Finger 4) पर भी पहुंच गए हैं। अब भारतीय सैनिक और चीनी सैनिक आमने -सामने हैं।