यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स (09 सितंबर 2020)

Daily Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC, RPSC and All State PCS Examinations


यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स

Daily Hindi Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC, RPSC and All State PCS Examinations


राष्‍ट्रीय बांस मिशन (एनबीएम)

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय ने 9 राज्यों (मध्य प्रदेश, असम, कर्नाटक, नागालैंड, त्रिपुरा, ओडिशा, गुजरात, उत्तराखंड व महाराष्ट्र) के 22 बांस क्लस्टरों की शुरूआत की है ।
  • इसके साथ ही मंत्रालय ने राष्‍ट्रीय बांस मिशन (एनबीएम) के लोगो का भी विमोचन किया।

राष्‍ट्रीय बांस मिशन -एनबीएम (National Bamboo Mission -NBM)

बांस उत्पादन से जुड़े महत्वपूर्ण बिन्दु

  • बांस, ग्रामीण भारत के किसान और उद्योग के लिए समान रूप से महत्वपूर्ण रहा है।
  • देश में एक बड़ा रकबा ऐसा है जहां फसलों की खेती नहीं हो सकती लेकिन बांस का उत्पादन किया जा सकता है। मेढ़ पर भी बांस उगाकर किसान अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकता है।
  • देश में एक बड़ा रकबा ऐसा है जहां फसलों की खेती नहीं हो सकती लेकिन बांस का उत्पादन किया जा सकता है। मेढ़ पर भी बांस उगाकर किसान अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकता है। बांस उत्पादन को बढ़ावा देने हेतु भारतीय वन अधिनियम,1972 में संशोधन
  • बांस के महत्‍व को देखते हुए सरकार ने ‘पेड़’(tree) की परिभाषा से बांस को हटाने के लिए भारतीय वन अधिनियम,1972 का वर्ष 2017 में संशोधन किया, जिससे किसानों को बांस व बांस आधारित उत्‍पादों की सुगम आवाजाही में सहायता हुई हैं। आज सभी लोग बांस की खेती और व्यवसाय करने के लिए स्वतंत्र है।
  • ध्यान दें कि ऐसा सिर्फ निजी जमीन के लिए किया गया है, फॉरेस्ट विभाग की जमीन पर जो बांस लगे हैं उन पर वन कानून पहले की तरह ही लागू है।

एनबीएम का लोगो (logo)

  • लोगो(logo) में बांस की छवि भारत के विभिन्न हिस्सों में बांस की खेती को चित्रित करती है।
  • लोगो के चारों ओर औद्योगिक पहिया बांस क्षेत्र के औद्योगीकरण के महत्व को दर्शाता है। लोगो में सुनहरे पीले व हरे रंग का संयोजन दर्शाता है कि बांस 'हरा सोना' है। आधा औद्योगिक पहिया और आधा किसान सर्कल किसानों और उद्योग दोनों के लिए बांस के महत्व को दर्शाता है।

राष्‍ट्रीय बांस मिशन (एनबीएम) के बारे में

  • राष्ट्रीय बांस मिशन (NBM) को 2006-07 में एक केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में शुरू किया गया था, जिसे वर्ष 2108 में पुनर्गठित राष्ट्रीय बाँस मिशन (restructured National Bamboo Mission) के रूप में 14 वें वित्त आयोग के अंत तक (अर्थात 2019-2020) के लिए मंजूरी प्रदान की गयी।
  • यह मिशन क्षेत्र आधारित, क्षेत्रीय रूप से विभेदित रणनीति को अपनाकर और बांस की खेती और विपणन के तहत क्षेत्र में वृद्धि करके बांस क्षेत्र के समग्र विकास को बढ़ावा देने की परिकल्पना करता है।
  • देश में बांस मिशन सफल हो रहा है, भारत अब बांस के उत्पादों का निर्यात बढ़ाने की दिशा में अग्रसर होगा।
  • आयात नीति में भी परिवर्तन के साथ ही बांस मिशन की उपयोगिता को दृष्टिगत रखते हुए सरकार तेजी से काम कर रही है, जिससे यह व्यवसाय बढ़ रहा है और रोजगार के अवसर भी उपलब्ध हो रहे है।

राष्‍ट्रीय बांस मिशन (एनबीएम) के लक्ष्य

  • बांस की खेती में विकास करना
  • जहां पर बांस की खेती की जा सकती है, वहां पर बांस की खेती को और बढ़ाना
  • बांस से बनाए गए उत्पादों की मार्केटिंग करना और उनको प्रोमोट करना
  • बांस के विकास के लिए स्टेक होल्डर्स के बीच तालमेल स्थापित करना
  • बांस की खेती के जरिए स्किल्ड और नॉन स्किल्ड लोगों में रोजगार के मौके पैदा करना, जिसमें से मुख्यता बेरोजगारों पर जोर दिया जाएगा

भारत में डिजिटल डिवाइड (Digital Divide): NSO

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में राष्ट्रीय सांख्यिकी संगठन (National Statistical Organisation-NSO) की हालिया रिपोर्ट से पता चलता है कि भारत में विभिन्न राज्यों, शहरों और गांवों तथा विभिन्न आय समूहों में डिजिटल डिवाइड (Digital Divide) काफी अधिक है।

डिजिटल डिवाइड (Digital Divide)

परिचय

  • भारत में शिक्षा क्षेत्र से संबंधित घरेलू सामाजिक उपभोग( household social consumption) का सर्वेक्षण जुलाई 2017 से जून 2018 तक आयोजित राष्ट्रीय सांख्यिकी संगठन (एनएसओ) के 75 वें दौर का हिस्सा था। जिसकी अंतिम रिपोर्ट हाल ही में जारी की गई है ।
  • इस रिपोर्ट में भारत में डिजिटल डिवाइड की स्थिति के संबंध में कई महत्वपूर्ण आंकड़े दिये गए हैं।

रिपोर्ट की मुख्य बातें

  • रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में, दस में से केवल एक घर में एक कंप्यूटर(डेस्कटॉप, लैपटॉप या टैबलेट) है ।
  • भारत के में सभी घरों में से लगभग एक चौथाई घरों में इंटरनेट की सुविधाएं उपलब्ध हैं, जो एक निश्चित(fixed) या मोबाइल नेटवर्क के माध्यम से एक्सेस की जाती हैं ।
  • भारत के इन इंटरनेट-सक्षम घरों(Internet-enabled homes) में से अधिकांश घर शहरों में ही स्थित हैं। जहां शहरों के कुल घरों में से 42% घरों में इंटरनेट का उपयोग होता है, तो वहीं ग्रामीण क्षेत्र के कुल घरों में से केवल 15% ही घर इंटरनेट से जुड़े हैं।
  • राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में सबसे अधिक इंटरनेट का उपयोग होता है, यहाँ लगभग 55% घरों में इंटरनेट की सुविधाएं हैं। दिल्ली के अतिरिक्त , हिमाचल प्रदेश और केरल ही ऐसे राज्य हैं जहाँ आधे से अधिक घरों में इंटरनेट है।
  • इंटरनेट के मामले में ओडिशा की स्थिति काफी चिंताजनक है , यहाँ दस घरों में से केवल एक में ही इंटरनेट है।
  • 20% से कम इंटरनेट की पहुंच वाले दस अन्य राज्य हैं, जिनमें कर्नाटक और तमिलनाडु जैसे सॉफ्टवेयर हब शामिल हैं।
  • एनएसओ ने रिपोर्ट में बताया है कि देश में डिजिटल डिवाइड का सर्वप्रमुख कारक आर्थिक स्थिति है।
  • राष्ट्रीय स्तर पर केरल राज्य में सबसे कम डिजिटल डिवाइड की स्थिति दिखती है जबकि असम में यह सबसे अधिक है।
  • एनएसओ की रिपोर्ट बताती है कि 5 वर्ष से अधिक आयु के 20% भारतीयों में बुनियादी डिजिटल साक्षरता है, जबकि 15 से 29 वर्ष के महत्वपूर्ण आयु समूह में यह 40% है।

डिजिटल डिवाइड

  • इंटरनेट और संचार प्रौद्योगिकियों के उपयोग और प्रभाव के संबंध में आर्थिक और सामाजिक असमानता को ‘डिजिटल डिवाइड’ की संज्ञा दी जाती है।
  • सामान्यतया ‘डिजिटल डिवाइड’, इंटरनेट व संचार प्रौद्योगिकियों के उपयोग को लेकर विभिन्न सामाजिक, आर्थिक स्तरों या अन्य जनसांख्यिकीय श्रेणियों में व्यक्तियों, घरों, व्यवसायों या भौगोलिक क्षेत्रों के बीच असमानता का उल्लेख करता है।

राष्ट्रीय सांख्यिकी संगठन (एनएसओ)

  • राष्ट्रीय सांख्यिकी संगठन (एनएसओ), भारत सरकार के सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (Ministry of Statistics and Programme Implementation- MoSPI) के अंतर्गत आता है।
  • यह देश में सांख्यिकीय क्रियाकलापों में समन्‍वय करता है और सांख्यिकीय मानक तैयार करता है।

54वां अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस

चर्चा में क्यों?

  • शिक्षा मंत्रालय द्वारा 8 सितंबर को ऑनलाइन माध्यम से 54वें अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस का आयोजन किया गया।

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस 2020 के बारे में

  • इस वर्ष अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस 2020 में ‘साक्षरता, शिक्षण और शिक्षा कोविड-19 संकट के दौरान और उसके बाद’ और विशेष रूप से शिक्षकों की भूमिका और बदलते शिक्षाशास्त्र पर केन्द्रित किया गया है।
  • इसके विषय-वस्तु में आजीवन सीखने के दृष्टिकोण से साक्षरता शिक्षा पर प्रकाश डाला गया है, और इसलिए, यह मुख्य रूप से युवाओं और वयस्कों पर केंद्रित है।
  • अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस, 2020 महामारी और उससे बाद युवाओं और वयस्क साक्षरता कार्यक्रमों में अभिनव और प्रभावी शिक्षाशास्त्र और शिक्षण पद्धतियों का उपयोग पर चिंतन करने और चर्चा करने का अवसर प्रदान करता है।

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस के बारे में

  • प्रत्येक वर्ष 8 सितंबर को पूरी दुनिया में अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाता है।
  • अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के आयोजन की शुरूआत, सितंबर 1965 में तेहरान में निरक्षरता उन्मूलन पर शिक्षा मंत्रियों के वैश्विक सम्मेलन की सिफारिश के बाद हुई थी।
  • सम्मेलन में सिफारिश की गई कि सम्मेलन के उद्घाटन की तारीख यानि 8 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के रूप में घोषित किया जाए और इसे विश्व व्यापी रूप से मनाया जाए।
  • यूनेस्को द्वारा नवंबर 1966 में पेरिस में आयोजित हुए महासम्मेलन के 14वें सत्र में औपचारिक रूप से 8 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस के रूप में घोषित किया गया।
  • तब से, यूनेस्को द्वारा अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जा रहा है जिसका उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय जनमानस को जागरूक करना और उन्हें संगठित करना और साक्षरता गतिविधियों के लिए उनका लगाव और सक्रिय समर्थन प्राप्त करना है।
  • भारत में आजादी के बाद से ही साक्षरता और विशेष रूप से प्रौढ़ साक्षरता राष्ट्रीय प्राथमिकता रही है। निरक्षरता को समाप्त करने और प्रौढ़ शिक्षा को कार्यात्मक साक्षरता और आजीवन शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से भारत सरकार द्वारा 1988 में राष्ट्रीय साक्षरता अभियान शुरू किया गया था।
  • तब से, भारत साक्षरता के लक्ष्य और उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए अपनी राष्ट्रीय प्रतिबद्धता की पुष्टि करने और निरक्षरता को समाप्त करने के प्रयासों में अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ एकजुटता का प्रदर्शन करने के लिए 8 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस मना रहा है।

बायो-बबल (Bio-Bubble)

चर्चा में क्यों?

  • दुबई में होने वाले आईपीएल 2020 के दौरान सभी खिलाड़ी, कोच, सपोर्ट स्टाफ और मैच ऑफिशियल्स को बायो-सिक्योर इन्वारयर्मेंट, जिसे बायो-बबल भी कहा जा रहा है, में रखा गया है।

क्या होता है बायो-बबल?

  • बायो-बबल एक ऐसा जैव-सुरक्षित वातावरण होता है, जिसमें रहने वाला व्यक्ति बाहर की दुनिया से कोई संपर्क स्थापित नहीं करता है।
  • इस साल मार्च में विश्वव्यापी लॉकडाउन की घोषणाओं के बाद इंग्लैंड में वेस्टइंडीज और इंग्लैंड के बीच पहली बार अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच बायो सिक्योर फॉर्मूले के तहत संपन्न कराया गया।
  • इसी प्रकार के बायो सिक्योर वातावरण में आईपीएल-2020 के आयोजन का निर्णय भी किया गया है।
  • किसी भी संक्रमण के जोखिम से बचने में तकनीकी की उपयोगिता अत्यंत महत्वपूर्ण होती है। आईपीएल के लिए सुरक्षित बियों-बबल का निर्माण यूके की सुरक्षा और तकनीकी कंपनी रेस्ट्राटा (Restrata) द्वारा किया गया है।
  • इसके सॉफ्टवेर में कोविड-19 के नियंत्रण और विनियमन के लिए जाँच, संपर्क अनुरेखण और कृतिम बुद्धिमत्ता तीनों का उपयोग किया गया है।

कैसे काम करता है बायो-बबल?

  • आईपीएल में हिस्सा ले रहे सभी खिलाड़ियों, कोच, सपोर्ट स्टाफ का दुबई पहुंचने से पहले दो बार कोरोना टेस्ट हुआ।
  • दुबई पहुंचने पर सभी को सात दिन के लिए क्वारैंटाइन किया गया। इस दौरान तीन बार कोरोना टेस्ट हुए। जिनकी रिपोर्ट निगेटिव आई वो इस बबल में शामिल हुए।
  • बबल में शामिल सभी सदस्यों को केवल मैदान और अपने होटल में जाने की अनुमति होगी। उन्हें बायो-बबल के बाहर के किसी भी व्यक्ति से, यहाँ तक कि अपने नजदीकी पारिवारिक सदस्यों से भी मिलने की अनुमति नहीं होगी ।
  • बबल में शामिल किसी भी शख्स को टूर्नामेंट खत्म होने तक इसके बाहर जाने की अनुमति नहीं होगी।