यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स (08 सितंबर 2020)

Daily Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC, RPSC and All State PCS Examinations


यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स

Daily Hindi Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC, RPSC and All State PCS Examinations


हाइपरसोनिक प्रौद्योगिकी प्रदर्शन वाहन (एचएसडीटीवी)

चर्चा में क्यों?

  • रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) ने हाइपरसोनिक प्रौद्योगिकी प्रदर्शन वाहन (एचएसडीटीवी) का ओडिशा के व्हीलर द्वीप स्थित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्रक्षेपण केन्द्र से सफल प्रक्षेपण किया। इसके माध्यम से हाइपरसोनिक स्क्रैमजेट प्रौद्योगिकी का सफल प्रदर्शन किया गया।
  • इस सफल प्रदर्शन के साथ ही कई महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियां जैसे कि हाइपरसोनिक प्रौद्योगिकी के माध्यम से हवा में दक्ष परिचालन के साथ, प्रज्वलन के लिए स्क्रैमजेट प्रणोदन का उपयोग और हाइपरसोनिक प्रवाह में निरंतर दहन, उच्च तापमान सामग्री के थर्मो-संरचनात्मक लक्षण और हाइपरसोनिक वेग पर पृथक्करण प्रणाली की दक्षता साबित की गई।

हाइपरसोनिक प्रौद्योगिकी प्रदर्शन वाहन के बारे में

  • हाइपरसोनिक प्रौद्योगिकी प्रदर्शक वाहन (Hypersonic Technology Demonstrator Vehicle या HSTDV) एक मानव रहित इस्क्रेमजेट प्रदर्शन विमान है।
  • इसका विकास विकास रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन द्वारा हाइपरसोनिक गति उड़ान भरने के लिए किया जा रहा है।
  • ध्वनि की गति से भी तीव्र गति को हाइपरसोनिक गति कहा जाता है।
  • रक्षा अनुसंधान और विकास प्रयोगशाला ने हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल के आगे के विकास और उड़ान परीक्षण के लिए हाइपरसोनिक प्रौद्योगिकी प्रदर्शक वाहन ( HSTDV) परीक्षण किया है।
  • यह एक ठोस रॉकेट प्रक्षेपण बूस्टर का उपयोग कर 20 सेकंड के लिए स्वायत्त सक्रेमजेट उड़ान प्राप्त कर सकता है। इसकी गति ध्वनि की गति से 6 गुना अधिक होने के साथ ही यह आसमान में 20 सेकेंड में लगभग 32.5 किलोमीटर की ऊँचाई तक पहुँच जाता है।

स्क्रैमजेट प्रौद्योगिकी के बारे में

  • स्क्रैमजेट इंजन एक प्रकार का एयर ब्रीदिंग इंजन अर्थात् वायुश्वसन इंजन होता है जो उड़ान के दौरान ईंधन के दहन के लिए वायुमंडलीय आक्सीजन का प्रयोग करता हैं।
  • इसे अपने साथ प्रणोद उत्पन्न करने के लिये ईंधन के साथ-साथ दहन हेतु ऑक्सीडाइज़र ले जाने की आवश्यकता नहीं होती है।
  • स्क्रैमजेट इंजन, रैमजेट इंजन का ही एक उन्नत संस्करण है क्योंकि यह हाइपरसोनिक गति में भी कुशलतापूर्वक संचालित होता है।
  • ब्रीदिंग इंजन तीन प्रकार के होते हैं- रैमजेट इंजन, स्क्रैमजेट इंजन, डुअल मोड रैमजेट (DMRJ) इंजन।

नीले आसमान हेतु अंतरराष्ट्रीय स्वच्छ वायु दिवस

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में संयुक्त राष्‍ट्र संघ (यूएनओ) के आह्वान पर 7 सितंबर, 2020 को पहला ‘नीले आसमान हेतु पहले अंतरराष्ट्रीय स्वच्छ वायु दिवस’ (International Day of Clean Air for blue skies) मनाया गया।

‘नीले आसमान हेतु पहले अंतरराष्ट्रीय स्वच्छ वायु दिवस’

  • 19 दिसंबर 2019 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 2020 से हर साल 7 सितंबर को ‘नीले आसमान हेतु अंतरराष्ट्रीय स्वच्छ वायु दिवस’ मनाने का एक मसौदा स्वीकार किया था।
  • संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 19 दिसंबर, 2019 को अपने 74 वें सत्र के दौरान ‘नीले आसमान हेतु अंतर्राष्ट्रीय स्वच्छ वायु दिवस’ मनाने का प्रस्ताव अपनाया और संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) को अन्य प्रासंगिक संगठनों के साथ मिलकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इस दिवस मनाए जाने का आवाह्न किया था।
  • ‘नीले आसमान हेतु अंतरराष्ट्रीय स्वच्छ वायु दिवस’ को मनाए जाने का उद्देश्य व्यक्तिगत, सामुदायिक, कॉर्पोरेट, सरकार आदि सभी स्तरों के साथ–साथ आमजन में भी स्वच्छ वायु व पर्यावरण जागरूकता बढ़ाना है।

भारत सरकार द्वारा स्वच्छ वायु के लिए किये गए प्रयास

  • सरकार 122 सबसे प्रदूषित शहरों में वायु प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार द्वारा इस दिशा में निम्न कदम उठाये गए है
  • वायु प्रदूषण की समस्या को रेखांकित करते हुए पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने वर्ष 2014 में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) शुरू किया था और आज मंत्रालय आठ मानकों पर वायु प्रदूषण के स्तर पर नजर रख रहा है।
  • स्वतंत्रता दिवस पर अपने भाषण में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने वायु प्रदूषण के मुद्दे का जिक्र करते हुए भारत के 100 शहरों में वायु गुणवत्ता में समग्र सुधार के लक्ष्य को रेखांकित किया था।
  • जनवरी,2019 में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) की शुरुआत की थी, जिसमें वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए 2017 को आधार वर्ष मानते हुए प्रदूषणकारी कणों पीएम 10 और पीएम 2.5 के अनुपात को 2024 तक 20 से 30 प्रतिशत तक घटाने का लक्ष्य रखा गया है। इस योजना में 23 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 102 शहरों की पहचान हुई थी। वायु गुणवत्ता पर नवीनतम डेटा ट्रेंड के आधार पर 20 और शहरों को एनसीएपी के तहत शामिल किया गया है।
  • भारत में अब बीएस-VI मानकों को अपनाया गया है और गुणवत्ता वाले पेट्रोल और डीजल उपलब्ध कराए गए हैं, जो प्रदूषण से लड़ने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल है।
  • पिछले कुछ वर्षों में सरकार द्वारा सड़कों और राजमार्गों का निर्माण रिकॉर्ड गति से किया जा रहा है और इसके कारण पिछले समय की तुलना में प्रदूषण कम हो रहा है।

वायु प्रदूषण के स्तर को कम करने के लिए अपेक्षित सुझाव

  • राज्यों को अब शहर केंद्रित योजनाओं के साथ काम करना चाहिए क्योंकि हर शहर में प्रदूषण के अलग-अलग स्रोत हैं।
  • पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय का कहना है कि इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
  • विभिन्न राज्यों में ईंट भट्ठों को उनमें से निकलने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए जिग- जैग तकनीक अपनानी चाहिए।
  • पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय का कहना है कि हवा को स्वच्छ करने के लिए लोगों की भागीदारी आवश्यक है। कार-पूलिंग और सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

पहला विश्व सौर प्रौद्योगिकी शिखर सम्मेलन (डब्ल्यूएसटीएस)

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में 8 सितंबर, 2020 को अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) द्वारा आभासी मंच(virtual platform) पर पहला विश्व सौर प्रौद्योगिकी शिखर सम्मेलन(World Solar Technology Summit-WSTS) आयोजित किया गया।

Daily Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC ...

प्रमुख बिन्दु

  • 149 देशों के 26000 से अधिक प्रतिभागियों ने इस वर्चुअल शिखर सम्‍मेलन में भाग लेने हेतु पंजीकरण कराया ।
  • इस सम्‍मेलन में सौर ऊर्जा में अगली पीढ़ी की प्रौद्योगिकियों की नवाचार स्थिति के बारे में प्रदर्शन और विचार-विमर्श के द्वारा सस्ती और टिकाऊ स्वच्छ हरित ऊर्जा के उत्‍पादन में तेजी लाने के बारे में चर्चा की गयी तथा विचारों का आदान-प्रदान किया गया।
  • अनेक आईएसए सदस्य देशों के मंत्री उच्च-स्तरीय गणमान्य व्यक्ति, नेशनल फोकल पॉइंट्स और वरिष्ठ सरकारी अधिकारी, राजनयिक मिशनों के प्रतिनिधि, आईएसए भागीदार, व्यापार और उद्योग के दिग्‍गज, सौर परियोजना डेवलपर्स, सौर विनिर्माता, रिचर्स अनुसंधान और विकास संस्थानों के प्रतिनिधि, शिक्षाविद और थिंक टैंक, सिविल सोसायटी, अंतर्राष्ट्रीय संगठन और डोनर्स, गैर-सरकारी और समुदाय- आधारित संगठनों के प्रतिनिधि, शिक्षाविद, अनुसंधान और प्रशिक्षण संस्थान, अंतर्राष्ट्रीय मीडिया, बहुपक्षीय और द्विपक्षीय एजेंसियों के प्रति‍निधियों ने इस सम्‍मेलन में भाग लिया।

प्रथम विश्व सौर प्रौद्योगिकी शिखर सम्मेलन के बारे में

  • सौर फोटो वाल्विक क्रांति में सदस्य देशों के बीच आपसी सहयोग महत्वपूर्ण स्तंभ रहा है। आईएस को हर घर में बिजली पहुंचाने के अपने सपने को पूरा करने के लिये नवप्रवर्तनशील और सस्ती प्रौद्योगिकी की जरूरत है। विश्व सौर प्रौद्योगिकी शिखर सम्मेलन इस दिशा में उठाया गया कदम है।
  • 08 सितंबर, 2020 को आयोजित होने वाले इस सम्मेलन में आईएसए का उद्देश्य अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के साथ अगली पीढ़ी की तकनीक को सामने लाना है जो सौर ऊर्जा के अधिक कुशलता से उपयोग की दिशा में प्रयासों को गति देगी ।

अन्तर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन के बारे में

  • अन्तर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन , एक ऐसा गठबंधन है जिसका उद्देश्य सम्पूर्ण विश्व में सौर ऊर्जा की भागीदारी को बढ़ाना है तथा साथ ही हरित ऊर्जा के उद्देश्य को प्राप्त करना है।
  • इस संगठन में 122 से भी ज्यादा देश सम्मिलित हैं । हाल में हुए संशोधन के अनुसार संयुक्त राष्ट्र के सभी देश इस संगठन के सदस्य हो सकते है।
  • इस संगठन को बनाने का मुख्य श्रेय भारत व फ्रांस को जाता है।
  • इस संगठन में मुख्यतः Sunshine देश ही सदस्य है Sunshine देश वे देश है जो प्राकृतिक रूप से लगभग साल भर सूर्य का प्रकाश ग्रहण करतें है जिनमें से Tropical Region यानि विषुवतीय प्रदेश के देश मुख्य हैं।
  • इस संगठन का मुख्यालय भारत के गुरूग्राम शहर में स्थित है।
  • भारत के प्रधानमंत्री ने ISA के सदस्य देशों को सूर्यपुत्र की संज्ञा दी है।

बहुआयामी गरीबी सूचकांक समन्वय समिति (MPICC)

चर्चा में क्यों?

  • नीति आयोग ने एक बहुआयामी गरीबी सूचकांक समन्वय समिति (MPICC) का गठन किया है।

संबन्धित जानकारी

  • नीति आयोग को नोडल एजेंसी के रूप में वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI) के निगरानी तंत्र के आधार पर सुधारों को लागू करने के लिए जिम्मेदारी सौंपी गई है।
  • जिसके लिए नीति आयोग ने एक बहुआयामी गरीबी सूचकांक समन्वय समिति (Multidimensional Poverty Index Coordination Committee-MPICC) का गठन किया है।
  • सुश्री संयुक्ता समदर को इस बहुआयामी गरीबी सूचकांक समन्वय समिति MPICC की अध्यक्षता सौंपी गयी है।

पवैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक

  • वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक, 107 विकासशील देशों में बहुआयामी गरीबी के आंकलन का एक अंतरराष्ट्रीय उपाय है।
  • इसे पहली बार 2010 में ऑक्सफोर्ड गरीबी और मानव विकास पहल (OPHI) और UNDP की मानव विकास रिपोर्ट के लिए संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) द्वारा विकसित किया गया था।
  • वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक को प्रत्येक वर्ष जुलाई में संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास पर उच्च-स्तरीय राजनीतिक फोरम (एचएलपीएफ) में जारी किया जाता है।
  • वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक की गणना के लिए परिवारों का 10 मापदंडों पर सर्वेक्षण किया जाता है, ये मानदंड है-
  1. पोषण,
  2. बाल मृत्यु दर,
  3. स्कूली शिक्षा के वर्ष,
  4. स्कूल में उपस्थिति,
  5. खाना पकाने के ईंधन,
  6. स्वच्छता,
  7. पेयजल,
  8. बिजली,
  9. आवास
  10. घरेलू परिसंपत्ति
  • इसमें स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा कराये जाने वाले राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS) और अंतर्राष्ट्रीय जनसंख्या विज्ञान संस्थान (IIPS) के आंकड़ों का उपयोग किया जाता है।
  • वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक-2020 के अनुसार, 107 देशों में भारत 62 वें स्थान पर है। इस सूचकांक में भारत के पड़ोसी देश जैसे श्रीलंका (25 वाँ), भूटान (68 वाँ), नेपाल (65 वाँ), बांग्लादेश (58 वाँ), चीन (30 वाँ), म्यांमार (69 वाँ) और पाकिस्तान (73 वाँ) भी स्थान पर हैं।