यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स (08 जुलाई 2020)


यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स

Daily Hindi Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC, RPSC and All State PCS Examinations


उइगर समुदाय (Uygar Community)

चर्चा में क्यों?

  • निर्वासित उइगरों के एक समूह ने उइगर समुदाय के नरसंहार और मानवता के खिलाफ अपराध की जांच कर रहे अंतरराष्ट्रीय आपराधिक अदालत में शी जिनपिंग सहित वरिष्ठ चीनी अधिकारियों के शामिल होने के सबूत पेश किए हैं।
  • उइगर समुदाय के दो संगठनों ने इंटरनेशनल कोर्ट में मामला दाखिल किया है, उनमें ईस्ट तुर्किस्तान गवर्नमेंट इन एक्जाइल (ETGE) और ईस्ट तुर्किस्तान नेशनल अवेकेनिंग मूवमेंट (ETNAM) का नाम शामिल है।

उइगर समुदाय (Uygar Community)

कौन है उइगर समुदाय?

  • उइगर मुसलमान एक तुर्क जातीय समूह है, जो कि चीन के शिनजियांग प्रांत में रहते हैं। तुर्क मूल के उइगर मुसलमानों की इस क्षेत्र में आबादी एक करोड़ से ऊपर है।
  • शिनजियांग प्रांत में इस बहुसंख्यक उइगर समुदाय को संतुलित करने के लिन चीन की सरकार ने हान समुदाय के लोगों को यहाँ बसाना शुरू किया।
  • साथ ही चीन की सरकार द्वारा उइगर मुस्लिमों पर कई तरह की पाबंदियां भी लगाई गई हैं। उन्हे धार्मिक स्वतंत्रता नहीं है, रमजान के महीने में मुस्लिम कर्मचारियों के रोजा रखने और मुस्लिम नागरिकों के दाढ़ी बढ़ाने पर पाबंदी है।
  • इसके अलावा दस लाख से ज्यादा उइगरों को हिरासत केंद्रों में रखा गया है। चीन इन हिरासत केंद्रों को व्यावसायिक शिक्षा केंद्र कहता है।
  • शिनजियांग, उत्तर पश्चिमी चीन का सबसे बड़ा स्वायत्त क्षेत्र है और खनिजों से समृद्ध है। इस प्रांत की सीमायें भारत, पाकिस्तान, रूस और अफगानिस्तान सहित आठ देशों के साथ मिलती है।
  • चीन और मध्य पूर्व को जोड़ने वाला प्राचीन सिल्क रोड व्यापार मार्ग शिनजियांग से होकर गुजरता है। चीन CPEC के माध्यम से शिनजियांग को पाकिस्तान के ग्वादर बन्दरगाह से जोड़ रहा है।

अंतरराष्ट्रीय आपराधिक अदालत के बारे में

  • ICC एक अर्न्तसरकारी अन्तर्राष्ट्रीय न्यायाधिकरण है जो कि दुनिया भर में हुई आपराधिक घटनाओं की सुनवाई करता है।
  • ICC मुख्यतः 4 मुद्दों से सम्बन्धित सुनवाई ही करता है जिनमे मानवता के खिलाफ अपराध (Crime against humanity), जनसंहार (Genocide), युद्ध के दौरान हुए अपराध (War Crime)और Crime of aggression आते हैं।
  • ICC की नींव 1 जुलाई 2002 को अपनाये गये रोम कानून के साथ की गई थी और इसका मुख्यालय नीदरलैड्स के हेग में स्थित है।
  • ICC में कुल 123 देश सदस्य हैं। गौरतलब है की भारत अमेरिका, चीन, इजराइल और रूस आदि ICC के सदस्य नहीं है।

बर्डविंग तितली (Birdwing Butterfly)

चर्चा में क्यों?

हाल ही में 88 साल बाद गोल्डन बर्डविंग नामक हिमालयी तितली की एक प्रजाति की खोज की गई है जो अपने आकार के संदर्भ में भारत की सबसे बड़ी तितली बन गई है। गोल्डन बर्डविंग नाम की यह मादा तितली के पंखों का आकार 194 मिलीमीटर है जोकि 1932 में ब्रिगेडियर विलियम हैरी इवांस द्वारा खोजे गए दक्षिणी बर्डविंग प्रजाति की तितली (190 मिलीमीटर) से बड़ा है।

Himalayan Butterfly is India’s Largest

बर्डविंग तितलियां के बारे में

  • बर्डविंग्स तितलियां स्वालोटेल (swallowtail) परिवार का भाग है जोकि ट्रोगोनोप्टेरा, टॉराइड्स और ओरनिथोप्टेरा कुल से संबंधित है। अभी तक संबंधित संस्थाओं के द्वारा इसके 36 प्रजातियां को मान्यता दी गई है लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार इस कुल में और भी प्रजातियां भी शामिल हैं।
  • बर्डविंग्स तितलियां ही कुछ अनूठी विशेषताएं होती है जिसमें उनका असाधारण आकार, कोणीय पंख और पक्षियों की तरह उड़ान शामिल है।
  • अपने आकर्षक चमकीले रंग के कारण नर तितली, तितलियों के संग्राहकों में काफी लोकप्रिय हैं।
  • इस प्रजाति में सबसे छोटी तितली क्वेकर (Neopithecops zalmora) है जिसका पंख का आकार 18 मिमी और अग्रभाग की लंबाई 8 मिमी है। इस प्रजाति में सबसे बड़ी आकार की मादा गोल्डन बर्डविंग होती हैं जिसकी अग्रभाग की लंबाई 90 मिमी है।
  • बर्डविंग्स तितलियां एशिया के उष्णकटिबंधीय क्षेत्र, दक्षिण पूर्व एशिया (मुख्य भूमि समेत द्वीप समूह) और ऑस्ट्रेलिया में पाए जाते हैं।
  • सभी बर्डविंग्स तितलियां CITES (संकटग्रस्त जीवों के अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर अभिसमय) के परिशिष्ट II में सूचीबद्ध हैं जिसके कारण अंतरराष्ट्रीय व्यापार सीमित/प्रतिबंधित है। इसके साथ ही बर्डविंग्स तितलियां IUCN के संकटमुक्त (Least Concern) श्रेणी में शामिल है।

मियावाकी पद्धति (Miyawaki Method)

चर्चा में क्यों है?

हाल ही में प्रयागराज नगर निगम द्वारा पहली बार जापान की मियावाकी पद्धति से पौधरोपण का कार्य किये जाने की घोषणा की गयी है। इस पद्धति से कई देशों में सफलता पूर्वक पौधरोपण का कार्य किया जा चुका है तथा वर्तमान में भारत वर्ष के कई शहरों में इसका प्रयोग किया जा रहा है। केरल सरकार द्वारा भी वन रोपण के लिए ‘‘मियावाकी वनीकरण विधि’’ को अपनाया गया है।

क्या है मियावाकी पद्धति?

  • जापानी पर्यावरण विशेषज्ञ डी. अकीरा मियावाकी ने वृक्षारोपण की इस तकनीक की खोज की थी। इस पद्धति में पौधों को एक-दूसरे से बहुत कम दूरी पर लगाया जाता है जिससे पौधे केवल ऊपर से सूर्य का प्रकाश प्राप्त करते है और बग़ल की तुलना में ऊपर की ओर वृद्धि करते हैं। इस पद्धति द्वारा सीमित संसाधनों में तीव्रता से वृक्षारोपण द्वारा हरियाली सुनिश्चित की जा सकती है।

मियावाकी सिद्धान्त के मुख्य बिन्दु

  • पेड़ पौधों के बीच कोई निश्चित दूरी नहीं रखनी चाहिए।
  • वनीकरण से पहले जमीन को उपजाऊ बनाने के प्रयास करने चाहिए।
  • बंजर जमीन में पेड़ पौधों, वनस्पतियों, झांड़ियों और वृक्षों का सघन रोपण किया जाना चाहिए। एक हेक्टेयर में 10,000 पौधे लगाये जा सकते हैं।
  • स्थानीय प्रजातियों के बीज को रोपकर वनों को और घना बनाया जा सकता है।
  • पौधों को रोपने के बाद कम से कम अगला बरसाती मौसम आने तक उनकी सिंचाई की जानी चाहिए।
  • खरपतवार की रोकथाम और मिट्टी में वाष्पन से नमी की कमी को दूर करने के लिए पलवार बिछानी चाहिए।
  • नालियों में पानी बहाकर सिंचाई के स्थान पर स्प्रिंकलर विधि अपनाई जानी चाहिए।
  • बरगद जैसे पेड़ जिनका वितान बहुत बड़ा होता है उन्हें नहीं लगाना चाहिए।
  • 2 से 3 वर्ष तक इस वन की देखभाल करनी होगी इसके बाद यह आत्म निर्भर हो जायेगा।
  • इस तकनीक के माध्यम से मानव निर्मित वन लगाने के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता है।

मियावाकी वनीकरण सिद्धान्त के लाभ

  • इस सिद्धान्त के द्वारा 2 फीट चौड़ी और 30 फीट पट्टी में 100 से भी अधिक पौधे लगाये जा सकते हैं।
  • इसमें कम खर्च में पौधे को 10 गुना तेजी से उगाया जा सकता है जिससे वृक्ष शीघ्र ही घने हो जाते हैं।
  • पौधों को पास-पास लगाने से इन पर खराब मौसम का असर नहीं होता, न ही गर्मी में नमी का अभाव होता है जिससे ये हरे-भरे रहते हैं।
  • इससे पौधों में दुगनी तेजी से वृद्धि होती है। और तीन वर्ष बाद उनकी देखभाल नहीं करनी पड़ती है।
  • कम क्षेत्र में घने वृक्ष ऑक्सीजन बैंक का काम करते हैं। इस तकनीक का प्रयोग न केवल वनों के लिए बल्कि आवासीय परिसर में भी किया जा सकता है।

प्रारंभिक परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न

प्रश्न: उइगर समुदाय के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

1. उइगर मुसलमान एक तुर्क जातीय समूह है।
2. ये चीन के शिनजियांग प्रांत में रहते हैं।
3. शिनजियांग, चीन के उत्तर में स्थित एक स्वायत्त क्षेत्र है जिसकी सिमाए सिर्फ मंगोलिया से लगती है।

उपरोक्त में से कौन सा/से कथन सही नहीं है/हैं?

(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) केवल 3
(d) 1, 2 और 3

उत्तर : (c)

व्याख्या:

  • उइगर मुसलमान एक तुर्क जातीय समूह है, जो कि चीन के शिनजियांग प्रांत में रहते हैं।
  • शिनजियांग, उत्तर पश्चिमी चीन का सबसे बड़ा स्वायत्त क्षेत्र है और खनिजों से समृद्ध है। इस प्रांत की सीमायें भारत, पाकिस्तान, रूस और अफगानिस्तान सहित आठ देशों के साथ मिलती है।