यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स (07 सितंबर 2020)

Daily Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC, RPSC and All State PCS Examinations


यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स

Daily Hindi Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC, RPSC and All State PCS Examinations


केशवानंद भारती

चर्चा में क्यों?

  • केरल के महंत 1973 के प्रसिद्ध केशवानंद भारती वाद के याचिका कर्ता केरल के कासरगोड स्थित इदनीर हिंदू मठ के वंशानुगत प्रमुख केशवानंद भारती का 79 साल की उम्र में निधन हो गया।

कौन थे केशवानंद भारती?

  • केशवानंद भारती 1961 में केरल के कासरगोड़ में इदनीर नामक स्थान पर एक शैव मठ के प्रमुख बने प्रमुख बने जिसका इतिहास आदि शंकराचार्य से जुड़ा है। शंकराचार्य के शिष्य तोटकाचार्य की परंपरा में यह मठ स्थापित यह मठ तांत्रिक पद्धति का अनुसरण करने वाली स्मार्त भागवत परंपरा को मानता है।
  • केशवानंद भारती की याचिका पर केशवानंद भारती बनाम केरल सरकार वाद 1973 में सुप्रीम कोर्ट से ऐतिहासिक 'संविधान के मूल ढांचे' के सिद्धांत पर फैसला आया, जिसने संविधान में संशोधन को लेकर संसद के अधिकारों को न केवल सीमित किया बल्कि साथ-साथ न्यायपालिका को संशोधन की समीक्षा का अधिकार मिला।
  • केशवानंद भारती बनाम केरल सरकार वाद 1973 में सुप्रीम कोर्ट की 13 सदस्यीय संविधान पीठ ने बहुमत (7-6) के आधार पर यह फैसला दिया था कि किसी भी स्थिति में संविधान की ‘मूलभूत संरचना’ में बदलाव नहीं किया जा सकता और संसद द्वारा परिवर्तित नहीं किया जा सकता है। क्या था केशवानंद भारती बनाम केरल सरकार वाद 1973?
  • केशवानंद भारती ने अपनी याचिका में केरल भूमि सुधार संशोधन कानून 1969 और 1971 को संविधान के अनुच्छेद 26 के उलंघन के आधार पर चुनौती दी थी। इन दोनों कानूनों को न्यायिक समीक्षा से बचाने के लिए संविधान की नौवीं अनुसूची में रखा गया था।
  • केशवानंद भारती मामले में सुप्रीम कोर्ट की 13 सदस्यीय संविधान पीठ ने बहुमत (7-6) के आधार पर यह फैसला दिया था कि किसी भी स्थिति में संविधान की ‘मूलभूत संरचना’ में बदलाव नहीं किया जा सकता है।

क्या है संविधान की मूलभूत संरचना का सिद्धांत?

  • सर्वोच्च न्यायालय ने केशवानन्द भारती वाद में संविधान की मूल संरचना का सिद्धांत दिया था।
  • इसमें सर्वोच्च न्यायालय ने व्यवस्था दी कि संविधान का अनुच्छेद 368 के अंतर्गत संसद को प्राप्त अधिकार उसे संविधान की मूल संरचना को संशोधित करने का अधिकार नहीं देते है।
  • हालांकि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा अभी तक “मूल संरचना” को स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया गया है। फिर विभिन्न फैसलों के आधार पर मूल संरचना के तत्वों कि पहचान की जा सकती है। जैसे-
  • संविधान की सर्वोच्चता
  • संविधान का धर्मनिरपेक्ष चरित्र
  • न्यायिक समीक्षा
  • शक्तियों का विभाजन
  • संसदीय प्रणाली
  • कानून का शासन
  • मौलिक अधिकारों और नीतिनिदेशक सिद्धांतों के बीच का संतुलन
  • स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव

चंद्रयान-3 परियोजना

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के प्रमुख ने पुष्टि की है कि चंद्रमा के लिए इसरो ‘चंद्रयान-3 परियोजना’ पर काम कर रहा है और इसे 2021 तक प्रक्षेपित किया जा सकता है।

चंद्रयान-3 के बारे में

  • चंद्रयान-2 के विपरित चंद्रयान-3 में 'ऑर्बिटर' नहीं होगा, लेकिन इसमें एक 'लैंडर' और एक 'रोवर' होगा।
  • चंद्रयान-3, चंद्रयान-2 का ही पुन: अभियान होगा ।
  • चंद्रयान-2 की चंद्रमा की सतह पर हार्ड लैंडिंग के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने 2020 के अंत तक एक अन्य अभियान (चंद्रयान-3) को लांच करने की योजना बनाई थी लेकिन कोरोना के चलते अब यह अभियान 2021 में लांच किया जाएगा।

चंद्रयान-2 के बारे में

  • चंद्रयान-2 को 22 जुलाई,2019 को प्रक्षेपित किया गया था।
  • इसके चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने की योजना थी। लेकिन लैंडर विक्रम ने सात सितंबर को हार्ड लैंडिंग की और अपने प्रथम प्रयास में ही पृथ्वी के उपग्रह की सतह को छूने का भारत का सपना टूट गया था।
  • हालांकि चंद्रयान-2 अभियान के तहत भेजा गया आर्बिटर अच्छा काम कर रहा है और जानकारी भेज रहा है।

चंद्रयान-1

  • चंद्रयान-1 को वर्ष 2008 में प्रक्षेपित किया गया था।
  • हाल ही में ‘चंद्रयान-1’ अभियान ने कुछ चित्र भेजे हैं जो प्रदर्शित करते हैं कि चंद्रमा के ध्रुवों पर जंग सा लगता दिख रहा है।
  • नासा(NASA) के वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-1 के द्वारा भेजी गयी तस्वीरों के आधार पर कहा है कि ऐसा हो सकता है कि पृथ्वी का वातावरण चंद्रमा की भी रक्षा कर रहा हो।
  • चंद्रयान-1 के द्वारा भेजे गए आंकड़ों से यह भी संकेत मिलता है कि चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पानी हो सकता है।

क्रा कैनाल प्रोजेक्ट’ (Kra Canal Project)

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में थाईलैंड सरकार ने चीन के साथ हुआ ‘क्रा कैनाल प्रोजेक्ट’ (Kra Canal project) रद्द कर दिया है।

प्रमुख बिन्दु

  • कुछ दिन पूर्व थाईलैंड सरकार ने चीन से पनडुब्बी सौदा भी टाल दिया था।
  • थाईलैंड ने चीन के क्रा कनाल ( Kra Canal ) प्रॉजेक्ट को कैंसल कर दिया है जिससे उसे स्ट्रेट ऑफ मलक्का से रास्ता मिलना अब मुश्किल हो गया है।
  • उल्लेखनीय है कि पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में तनाव के बाद भारत ने यहीं पर अपने जहाज तैनात कर दिए थे। क्रा कैनाल प्रोजेक्ट के बारे में
  • ‘क्रा कैनाल प्रोजेक्ट’, दक्षिणी थाईलैंड में उपस्थित ‘क्रा स्थलडमरूमध्य’(Kra Isthmus) को गहरा करके परिवहन हेतु सुगम बनाना था।
  • वर्ष 2015 में इसके लिए थाईलैंड व चीन सरकार ने समझौता किया था। इसे 102 किलोमीटर लंबी व 400 मीटर चौड़ी बनाना था।
  • ‘क्रा स्थलडमरूमध्य’, अंडमान सागर के साथ थाईलैंड की खाड़ी को जोड़ती है।

थाईलैंड सरकार का पक्ष

  • शुरुआत में ‘क्रा कैनाल प्रोजेक्ट’ को थाईलैंड सरकार का महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट बताया गया था, लेकिन अब थाईलैंड को लगता है कि इस परियोजना से उसे कोई लाभ नहीं है।
  • थाईलैंड की योजना पनामा नहर की तरह यहां एक नहर बनाने की थी, जो दक्षिण चीन सागर को सीधे हिंद महासागर से जोड़ती। लेकिन अब वह जान चुकी है कि मलक्का, सुंडा या लोम्बोक स्ट्रेट के जरिये क्रा कैनाल ज्यादा राजस्व पैदा नहीं होगा।

‘क्रा कैनाल प्रोजेक्ट’ का चीन के लिए महत्व

  • चीन किसी भी कीमत पर इस ‘क्रा कैनाल प्रोजेक्ट’ को पूरा होते देखना चाहता था, क्योंकि इससे हिंद महासागर तक उसकी पहुंच आसान हो जाती।
  • चीन की नौसेना को ‘क्रा कैनाल’ से दक्षिण चीन सागर और हिंद महासागर के बीच बने बेस के बीच से गुजरने में मदद मिलती। दूसरे शब्दों में कहें तो करीब 102 किलोमीटर लंबी ‘क्रा कैनाल या नहर’ के अस्तित्व में आने के बाद चीन दक्षिण चीन सागर और हिंद महासागर में अपने नवनिर्मित ठिकानों तक आसानी से पहुंच सकता। अभी उसे इसके लिए 1,100 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है।
  • मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, क्रा प्रोजेक्ट से चीन का इरादा स्ट्रेट ऑफ मलक्का को बायपास करते हुए दक्षिण चीन सागर पर एकाधिकार जमाने का रहा है, ताकि हिंद प्रशांत क्षेत्र में उसे कोई चुनौती नहीं दे पाए। लेकिन थाई सरकार ने इस परियोजना से हाथ पीछे खींचने का मन बनाकर उसके मंसूबों पर पानी फेर दिया है।

अन्य देशों पर प्रभाव

  • अगर ‘क्रा कैनाल प्रोजेक्ट’ पूरा होता तो थाईलैंड के भारत और अमेरिका समेत कई देशों से रिश्तेखराब हो सकते थे।
  • हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में भारत, अमेरिका, आस्ट्रेलिया और जापान सहित लगभग सभी देश चाहते हैं कि यहाँ नौवहन स्वतंत्र व अंतरराष्ट्रीय नियमों के मुताबिक हो न कि किसी एक देश का प्रभुत्व स्थापित हो।
  • ‘क्रा कैनाल प्रोजेक्ट’ म्यांमार और कंबोडिया जैसे गरीब दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों की स्वतंत्रता के नुकसानदायक हो सकता था, जो चीन के दखल से पहले से ही परेशान हैं।

डायबिटीज़ (मधुमेह)

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में हुए एक अध्ययन में पाया गया है कि नियमित रूप से सफेद चावल का अधिक सेवन करने से मधुमेह का खतरा बढ़ता है।

शोध से संबन्धित जानकारी

  • 21 देशों के 1,32,373 व्यक्तियों में 9.5 वर्षों तक किए गए अध्ययन के बाद यह शोधपत्र प्रकाशित क्या गया है। यह शोधपत्र पीयर-रिव्यू जर्नल- डायबिटीज केयर के हालिया संस्करण में प्रकाशित हुआ है।
  • शोधपत्र के अनुसार इस अवधि में 6,129 नए व्यक्तियों में मधुमेह की बीमारी उत्पन्न हो गयी।
  • जोकि इंगित करता है कि सफेद चावल की खपत जितनी अधिक होगी, मधुमेह के विकास का खतरा उतना ही अधिक होगा।
  • अतिरिक्त चावल के सेवन से भोजन के बाद शरीर में ग्लूकोज के स्तर में तेज़ वृद्धि होती है, जिससे शरीर में सामान्य रक्त शर्करा के स्तर (Euglycemia) को बनाए रखने के लिए अग्नाशय की β-कोशिकाओं द्वारा अतिरिक्त इंसुलिन (Hyperinsulinemia) स्राव किया जाता है।
  • समय के साथ, β-कोशिकाओं की इंसुलिन स्राव क्षमता कम होने लगती है और वे समाप्त हो जाती है। जिससे β-कोशिकाओं की विफलता के कारण मधुमेह का खतरा बढ़ जाता है।
  • इसके शारीरिक श्रम, मोटापा और मधुमेह ग्रसित पारिवारिक इतिहास जैसे कारण भी इसमें योगदान देते हैं।

मधुमेह

  • यह एक उपापचयी रोग है जिसके कारण शरीर में रक्त शर्करा का स्तर उच्च हो जाता है। इंसुलिन हार्मोन रक्त से शर्करा कम करता है और इसे कोशिकाओं तक ले जाता है, जिसे ऊर्जा के लिए संग्रहीत या उपयोग किया जाता है।
  • मधुमेह एक गैर-संचारी रोग (एनसीडी) है और यह तब उत्पन्न होता है जब अग्नाशय पर्याप्त इंसुलिन का उत्पादन नहीं करता है, या जब शरीर प्रभावी रूप से उत्पन्न इंसुलिन का उपयोग नहीं कर पाता है।
  • अग्नाशय द्वारा इंसुलिन का उत्पादन न होना टाइप-1 डायबिटीज़ कहलाता है जबकि शरीर की कोशिकाओं द्वारा प्रभावी रूप से इंसुलिन का उपयोग न कर पाना टाइप-2 डायबिटीज़ कहलाता है।
  • मधुमेह नसों, आंखों, गुर्दे और अन्य अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है।