यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स (04 सितंबर 2020)

Daily Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC, RPSC and All State PCS Examinations


यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स

Daily Hindi Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC, RPSC and All State PCS Examinations


ताना भगत आंदोलन

चर्चा में क्यों?

  • महात्मा गांधी के अनुयायी, ताना भगत आदिवासी समुदाय के लोगों ने रेल की पटरियों पर बैठकर भूमि अधिकार और छोटानागपुर टेनेंसी एक्ट में संशोधन की मांग की।

Tana Bhagat Tribe

पपृष्ठभूमि

  • ताना भगत आदिवासी समुदाय द्वारा छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम के तहत अपनी जमीन वापस करने की मांग कर रहे हैं। इसके साथ ही वे अपनी जमीन को लगान मुक्‍त करने की भी मांग कर रहे हैं।

ताना भगत आंदोलन

  • मुंडा और ओरांव जनजातियों द्वारा चलये गए इस आंदोलन का नेतृत्व जतरा भगत (जतरा उरांव) और बलराम भगत ने किया था।
  • 1914-15 के दौरान इन्होने छोटनागपुर के क्षेत्र में दिकुओं के हस्तक्षेप का विरोध किया था।
  • जतरा उरांव का जन्म वर्तमान झारखंड के गुमला जिला के बिशुनपुर प्रखंड के चिंगारी गांव में 1888 में हुआ था।
  • जतरा भगत के नेतृत्व में ऐलान हुआ- माल गुजारी नहीं देंगे, बेगारी नहीं करेंगे और टैक्स नहीं देंगे।
  • उसके साथ ही जतरा भगत का विद्रोह 'टाना भगत आंदोलन' के रूप में सुर्खियों में आ गया।
  • अंग्रेज सरकार द्वारा जतरा उरांव को 1914 में गिरफ्तार कर लिया, और डेढ़ साल की सजा के बाद जतरा उरांव का अचानक देहांत हो गया।
  • साल 1919 जब टाना भगतों का आंदोलन महात्मा गांधी के आंदोलनों से जा मिला और अहिंसा की विचारधार को एक बड़ा जनसमर्थन मिला।
  • वे महात्मा गांधी के साथ 1922 के आंदोलन, नमक आंदोलन, असहयोग आंदोलन, 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन आदि में कदम से कदम मिलाकर चले।
  • ताना भगत महात्मा गांधी की तरह खादी पहनते हैं और चरखा चलाते हैं। ताना भगत खुद से ही बनाकर खाते हैं। किसी दूसरे के द्वारा बनाकर दिए जाने पर नहीं खाते हैं।

छोटानागपुर टेनेंसी एक्ट

  • अंग्रेजों ने 1908 में सीएनटी छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम बनाया था।
  • आदिवासियों की जमीन को बाहरी लोगो से बचाने के लिए यह कानून अस्तित्व में आया था।
  • सीएनटी एक्ट में अब तक 26 संशोधन हो चुके हैं। इनमें वर्ष 1947, 1969 व 1996 का संशोधन महत्वपूर्ण है।

प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल व अवशेष अधिनियम, 1958

चर्चा में क्यों?

  • भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल व अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के सादिकपुर सिनौली में स्थित पुरातात्विक स्थल व अवशेषों को राष्ट्रीय महत्व (national importance) का घोषित किया है।

प्रमुख बिन्दु

  • एएसआई ने इस अधिसूचना को प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल व अवशेष अधिनियम, 1958(Ancient Monuments and Archaeological Sites and Remains Act, 1958) के प्रावधानों के तहत जारी किया है।
  • अब इस साइट(site) का अनुरक्षण एएसआई द्वारा किया जाएगा और इसके आसपास के विकास कार्य केंद्रीय नियमों के अधीन होंगे।

क्यों घोषित किया गया सिनौली को राष्ट्रीय महत्व का स्थल?

  • भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा किये गए उत्खनन में उत्तर प्रदेश के बागपत जिले के सादिकपुर सिनौली से तीन चरणों के उत्खनन में शाही ताबूत, रथ, महिला का कंकाल, धनुष, और तांबे की तलवार समेत कई चीजें सामने आ चुकी हैं।
  • सिनौली से प्राप्त यह अवशेष महाभारतकालीन से संबंधित है। यहां से मिले पुरावशेषों में मानव बस्ती के प्रमाण, ईंटों की दीवार, महिला का कंकाल, जिसके कानों से सोने के आभूषण शाही ताबूत के अलावा महाभारतकालीन इस प्राचीन स्थल से मिट्टी की भट्टी, धनुष, मृद भांड़ और तांबे की तलवार मिल चुकी है।

प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल व अवशेष अधिनियम, 1958

  • भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरु ने यह विचार दिया था कि विरासत भवनों के चारों ओर एक सुरक्षा जाल का निर्माण किया जाना चहिये।
  • उनके इस विचार के परिणामस्वरूप प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल व अवशेष अधिनियम, 1958 लाया गया । इस कानून का विस्तार संपूर्ण भारत पर है ।
  • वर्ष 2010 में भारत सरकार ने एक समिति का गठन किया, जिसने इस अधिनियम में संशोधन की सिफ़ारिश की। जिसके उपरांत 2010 में ही इस काननों में संशोधन किए गए ।
  • संशोधित अधिनियम में पुरास्थलों व स्मारकों के चारों ओर के प्रतिबंधित और नियामकीय क्षेत्र को अधिनियम के दायरे में लाया गया है।
  • इस काननों में संशोधन हेतु पुनः वर्ष 2017 में विधेयक लोकसभ में लाया गया, किन्तु फिर इसे सिलेक्ट कमेटी के पास भेज दिया गया है । इस प्रकार यह संसोधन विधेयक अभी तक पारित नहीं हो सका है ।
  • भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण , भारत में राष्ट्रीय महत्व के स्मारक अथवा पुरातात्विक संरचनाएँ, स्थल आदि को इसी अधिनियम के तहत संरक्षित करता है।

भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण के बारे में

  • भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के संस्कृति विभाग के अंतर्गत पुरातत्व अध्ययन और सांस्कृतिक स्मारकों के अनुरक्षण के लिये उत्तरदायी संगठन है।
  • इसका प्रमुख कार्य राष्ट्रीय महत्‍व के प्राचीन स्‍मारकों तथा पुरातत्‍वीय स्‍थलों और अवशेषों का रखरखाव करना है।
  • इसकी स्‍थापना वर्ष 1861 में हुई थी।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 अलकायदा प्रतिबंध समिति

चर्चा में क्यों?

  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने बुधवार को 1267 प्रतिबंध समिति प्रक्रिया के तहत दो भारतीय नागरिकों को आतंकवादी के रूप में नामित करने के पाकिस्तान के प्रयासों को खारिज कर दिया।

पृष्ठभूमि

  • पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कुल चार भारतीयों को आतंकवादी के रूप में नामित करने के लिए एक पहल शुरू की थी।
  • पाकिस्तान का आरोप था कि ये सभी अफगानिस्तान-आधारित समूह का हिस्सा थे, जिसने तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान और जमात-उल-अहरार द्वारा आतंकवादी हमलों को संगठित करने में मदद की।
  • पाकिस्तान ने जिन भारतीयों को नामित करने के प्रयास किए उनमें वेणुमाधव डोंगरा के नाम पर अमेरिका द्वारा 19 जून तथा अजॉय मिस्त्री के नाम पर 16 जुलाई को अमेरिका, ब्रिटेन, फ्राँस, जर्मनी एवं बेल्जियम द्वारा पहले ही रोक लगा दी गई थी।
  • 2 सितंबर, 2020 को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की इस समिति ने ‘अंगारा अप्पाजी’ और ‘गोविंद पटनायक’ नामक दो भारतीय नागरिकों को आतंकवादी घोषित किये जाने की पाकिस्तान की मांग को भी रद्द कर दिया है।
  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में इन भारतियों को आतंकवादी घोषित करने के पाकिस्तान के प्रयास को अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और बेल्जियम ने विफल कर दिया।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 प्रतिबंध समिति के बारे में

  • संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ‘1267 प्रतिबंध समिति’ को 1999 में 1267वें संकल्प के द्वारा स्थापित किया गया था।
  • यह समिति ऐसे संगठनों एवं व्यक्तियों को प्रतिबंधित सूची में शामिल करने का फैसला लेती है, जो अंतर्राष्ट्रीय शांति व सुरक्षा के लिए खतरा हैं।
  • इस सूची के तहत आने वाले संगठन या व्यक्ति को निम्नलिखित तीन प्रकार के वैश्विक प्रतिबंधों का सामना करना पड़ता है-
  • सूची में शामिल व्यक्ति या संगठन की सभी प्रकार की सम्पत्तियां जब्त हो जाती हैं।
  • प्रतिबंधित संगठन या व्यक्ति की यात्रा पर भी प्रतिबंध लगा दिया जाता है।
  • कोई भी देश इन प्रतिबंधित संगठन या व्यक्तियों को किसी भी प्रकार की सहायता (यथा- हथियार, प्रौद्योगिकी या वित्तीय सहायता आदि) नहीं दे सकता है।
  • गौरतलब है कि मई 2019 में ‘यूएनएससी 1267 प्रतिबंध समिति’ के तहत ‘जैश-ए-मोहम्मद’ प्रमुख मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकवादी नामित करने में भारत सफल हुआ था।

प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (पीएमबीजेपी)

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय ने प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (पीएमबीजेपी) के तहत प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले आठ प्रकार के पोषणयुक्त उत्पाद (न्यूट्रास्यूटिकल्स) जारी किये हैं। इनकी बिक्री देशभर में जन औषधि केन्द्रों के माध्यम से की जाएगी।

Pradhan Mantri Bhartiya Janaushadhi Priyojana

प्रमुख बिन्दु

  • कोरोना-19 महामारी के मद्देनजर ऐसे पोषण युक्त उत्पादों को लाया जाना महत्वपूर्ण है। ये उत्पाद लोगों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करेंगे।
  • जनऔषधि केंद्रों के विशाल नेटवर्क के माध्यम से ये प्रोटीनयुक्त उत्पाद बड़ी आबादी तक पहुंच सकेंगे।
  • सरकार अब लोगों के समग्र स्वास्थ्य और पोषण की स्थिति में सुधार लाने के लिए कई पूरक आहार जैसे प्रोटीन सप्लीमेंट, माल्ट-आधारित पोषण पेय, प्रतिरक्षा बूस्टर आदि उपलब्ध करा रही है।

प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (पीएमबीजेपी)

  • भारत सरकार सरकार के ‘रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय’ के अंतर्गत कार्यरत ‘फार्मास्यूटिकल्स विभाग’ द्वारा प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (पीएमबीजेपी) की शुरुआत वर्ष 2016 में बदले हुए नाम, संरचना और रूप में की गयी थी।
  • वर्ष 2008 में जन औषधि योजना (Jan Aushadhi Scheme) की शुरुआत की गयी थी। वर्ष 2015 में इसका नाम बदलकर ‘प्रधानमंत्री जनऔषधि योजना’ (PMJAY) किया गया। किन्तु वर्ष 2106 के अंत में फिर से इस योजना का नाम बदलकर प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (पीएमबीजेपी) कर दिया गया।
  • प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (पीएमबीजेपी) का मूलभूत उद्देश्य ‘प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों’ के माध्यम से देश की जनता को सस्ती एवं गुणवत्ता युक्त दवाइयाँ प्रदान करना है।
  • प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्रों या संक्षेप में जन औषधि केन्द्रों को महँगी ब्रांडेड दवाओं की जगह गुणवत्ता एवं प्रभावकारिता में बराबर जेनेरिक दवाइयों को कम कीमतों पर उपलब्ध कराने के लिये स्थापित किया गया है।
  • रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय के अनुसार , गुणवत्ता वाली सस्ती जेनेरिक दवाओं को खरीदने के लिए लगभग 65 मिलियन रोगी प्रति दिन देशभर में फैले 6500 से अधिक जनऔषधि केन्द्रों पर आते हैं। यह योजना उन रोगियों के लिए एक वरदान साबित हो रही है जो मधुमेह, रक्तचाप और मनोरोग जैसी पुरानी बीमारियां के लिए दवाएं ले रहे हैं।
  • प्रधानमंत्री ने अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में महिलाओं के लिए मासिक धर्म के दौरान स्वच्छता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सुविधा योजना के नाम से 1 रुपए प्रति पैड के हिसाब से सैनिटरी नैपकिन बेचने वाले जनौषधि केंद्रों का उल्लेख कर इन केन्द्रों के महत्व पर प्रकाश डाला था। उन्होंने कहा था कि ये पैड ऑक्सो-बायोडिग्रेडेबल सामग्री से बनाए जाते हैं जिसके कारण न केवल सस्ते हैं बल्कि पर्यावरण के अनुकूल भी हैं।