यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स (03 जुलाई 2020)


यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स

Daily Hindi Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC, RPSC and All State PCS Examinations


अंतरराष्ट्रीय थर्मोन्यूक्लियर प्रायोगिक रियेक्टर (ITER)

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में भारत के परियोजना प्रमुख द्वारा जानकारी दी गई है कि फ्रांस के कराहाश में तैयार किए जा रहे दुनिया के सबसे बड़े परमाणु संलयन रियेक्टर (ITER) में भारत ने अपने 50% योगदान को पूरा कर लिया है।

अंतरराष्ट्रीय थर्मोन्यूक्लियर प्रायोगिक रियेक्टर (International Thermonuclear Experimental Reactor - ITER)

पृष्ठभूमि

  • भारत औपचारिक रूप से इस परियोजना में 2005 में शामिल हुआ था। भारत को इस परियोजना में क्रायोस्टेट, इन-वॉल शील्डिंग, कूलिंग वाटर सिस्टम, क्रायोजेनिक सिस्टम, हीटिंग सिस्टम, डायग्नोस्टिक न्यूट्रल बीम सिस्टम, बिजली की आपूर्ति के साथ कुछ डायग्नोस्टिक्स सिस्टम का निर्माण करना था।
  • पिछले महीने भारत के लार्सन एंड टूब्रो द्वारा निर्मित क्रायोस्टैट को सफलतापूर्वक रियेक्टर भवन में स्थापित कर दिया गया है। निम्नतापस्थापी या क्रायोस्टैट एक ऐसी युक्ति है जो अपने अन्दर रखी वस्तुओं का तापमान अत्यन्त कम बनाये रखने के लिये प्रयुक्त होती है। एलएंडटी द्वारा निर्मित क्रायोस्टैट रियेक्टर के वैक्यूम वेसल के चारो ओर अभेद कंटेनर बनाकर एक बहुत बड़े रेफ्रिजरेटर की तरह काम करता है।

क्या है आईटीईआर प्रोजेक्ट?

  • यह दुनिया की सबसे बड़ी शोध परियोजनाओं में एक है, जिसके तहत संलयन शक्ति के वैज्ञानिक और तकनीकी व्यवहार्यता पर काम किया जा रहा है। लिटिल सन के नाम से जाने वाले इस प्रोजेक्ट को इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरिमेंटरल रिएक्टर यानी ITER कहा जाता है। ITER प्रोजेक्ट की शुरुआत साल 2013 में फ्रांस के कराहाश में की गई थी जिसके लिए सभी सदस्य देशों ने इसके निर्माण में वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई थी। इस परियोजना में भारत समेत सात सदस्य (अमेरिका, रूस, दक्षिण कोरिया, चीन, जापान, और यूरोपीय संघ) शामिल है।

परियोजना के लाभ

  • दरअसल परमाणु ऊर्जा दो तरह से हांसिल की जा सकती है। इनमें परमाणु के नाभिकों का विखंडन और परमाणु के नाभिकों के संलयन जैसे तरीके शामिल हैं।परमाणु नाभिकों के संलयन द्वारा प्राप्त उर्जा के जरिये उर्जा सुरक्षा के साथ पूरी दुनिया को परमाणु ऊर्जा के दुष्प्रभावों से बचाने में मददगार होगा। आज दुनिया में जितने भी परमाणु रिएक्टर मौजूद हैं इनसे कभी भी परमाणु दुर्घटना का खतरा समेत रिएक्टरों से निकलने वाला परमाणु कचरा से सैकड़ों सालों तक जहरीला विकिरण निकलता रहता है। जिसके निपटारे के लिए अभी कोई व्यवस्था नहीं है। हालाँकि अब परमाणु संलयन तकनीक के आधार पर बन रहे ये परमाणु रिएक्टर सुरक्षित होंगे और उनसे कोई ऐसा परमाणु कचरा भी नहीं निकलेगा।
  • ये प्रोजेक्ट साल 2025 से काम करना शुरू कर देगा जो प्रदूषण रहित ऊर्जा स्रोतों के विकास में मील का पत्थर साबित होगा। साथ ही इसके बाद 2040 तक एक डेमो रिएक्टर भी तैयार किया जाना प्रस्तावित है जो बिजली पैदा करने की बड़ी यूनिट होगी। भारत के लिहाज से भी काफी अहम क्योंकि भारत इस प्रोजेक्ट के जरिये 2050 तक परमाणु संलयन प्रक्रिया पर आधारित अपना रिएक्टर भी बना पाएगा।

शहरी वन (Urban Forest)

चर्चा में क्यों?

  • दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) वर्षों से चिंता का कारण बना हुआ है। इस तरह वायु प्रदूषण के बढ़ते स्तर और इस संबंध में सामुदायिक जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए दिल्ली के बहादुर शाह ज़फर मार्ग स्थित भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक कार्यालय ने कार्यालय पार्क में एक शहरी वन स्थापित करने के लिए कदम उठाया गया हैं।

पृष्ठभूमि

  • वर्ष 2020 के विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने इस वर्ष की थीम नगर वन (शहरी वन) पर ध्यान केंद्रित करते हुए अगले पांच वर्षों में देश भर में 200 शहरी वन विकसित करने के लिए नगर वन योजना को लागू करने की घोषणा की है। इसमें लोगों की भागीदारी और वन विभाग,नगर निकायों, गैर सरकारी संगठनों,कॉर्पोरेट और स्थानीय नागरिकों के बीच सहयोग परजोर दिया जाएगा।

शहरी वन (Urban Forest)

क्या होते है शहरी वन?

  • शहरी वन नगरीय अवसंरचना के साथ वृक्षों के रोपण, रखरखाव, देखभाल और संरक्षण के रूप में परिभाषित किया जाता है। इसमें शहरी नियोजन में नगरीय अवसंरचना के साथ पेड़ों की भूमिका पर बल दिया जाता है।
  • शहरी वन के रूप में एक घने जंगल के पारिस्थितिकी तंत्र को शहर के मध्य छोटे क्षेत्र में बनाया जाता है। बहु-स्तरीय वनों में झाड़ियां,छोटे से मध्यम आकार के पेड़ और लम्बे पेड़ होते हैं जिन्हें बड़ी सावधानी से परिधीय और कोर प्लांट समुदायों के रूप में लगाया जाता है।
  • शहरी वन एक ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र है जो पक्षियों,मधुमक्खियों,तितलियों और ऐसे ही अन्य सूक्ष्म जीव-जंतुओं के लिए निवास स्थान बन सकता है। ये फसलों और फलों के परागण के लिए और एक संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र को बनाए रखने में मदद करने के लिए आवश्यक हैं।
  • ये वन शहरों के फेफड़ों के रूप में काम करेंगे और मुख्य रूप से शहर की वन भूमि पर या स्थानीय शहरी निकायों द्वारा प्रस्तावित किसी अन्य खाली जगह इनको स्थापित किया जायेगा।

शहरी वन का महत्व

  • भारत पशुओं और पौधों की कई प्रजातियों से समृद्ध जैव विविधता से संपन्न है और जैव-विविधता से युक्‍त 35 वैश्विक हॉटस्पॉट्स में से 4 का मेजबान है, जिनमें अनेक स्थानिक प्रजातियां मौजूदहै। हालांकि बढ़ती जनसंख्या, वनों की कटाई, शहरीकरण और औद्योगीकरण ने हमारे प्राकृतिक संसाधनों पर भारी दबाव डाल दिया है, जिससे जैव विविधता की हानि हो रही है। जैव विविधता इस ग्रह पर सभी जीवन रूपों के अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण है और विभिन्न पारिस्थितिकीय सेवाएं प्रदान करने की कुंजी है।
  • पारंपरिक रूप से जैव विविधता संरक्षण को दूरस्थ वन क्षेत्रों तक ही सीमित माना जाता रहा है, लेकिन बढ़ते शहरीकरण के साथ शहरी क्षेत्रों में भी जैव विविधता को सुरक्षित रखने और बचाने के लिए आवश्यकता उत्पन्न हो गई है। शहरी वन इस अंतर को मिटाने का सबसे अच्छा तरीका है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने शहरी परिदृश्य में जैव विविधता के प्रोत्‍साहन और संरक्षण के लिए नगर वन को डब्‍ल्‍यूईडीसमारोह 2020 के थीम के रूप में अपनाया है।

रक्षा खरीद परिषद

चर्चा में क्यों?

  • रक्षा खरीद परिषद ने भारतीय सैन्य बलों के लिए रक्षा सामान सहित मिग-29 और सुखोई लडाकू विमानों की खरीद को स्वीकृति दी है।
  • इसके तहत आवश्यक उपकरणों की खरीद के लिए विभिन्न प्लेटफार्मों के अंतर्गत 38 हजार 900 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत के प्रस्तावों को मंजूरी मिली है।
  • उनमें भारतीय उद्योगों से 31 हजार 130 करोड़ रुपये तक की खरीद शामिल है।
  • भारतीय वायुसेना की लम्बे समय से महसूस की जा रही लड़ाकू दस्ते को बढ़ाने की आवश्यकता को पूरा करने के लिए परिषद ने 21 मिग-29 की खरीद के प्रस्ताव को भी मंजूरी दे दी है।
  • इसके अलावा मौजूदा 59 मिग-29 विमान के उन्नयन और 12 सुखोई-30 एमकेआई विमानों की खरीद को भी स्वीकृति दे दी गई है।

रक्षा खरीद परिषद

  • रक्षा खरीद परिषद, भारतीय सशस्त्र बलों द्वारा अग्रेषित पूंजी अधिग्रहण प्रस्तावों पर निर्णय लेने वाला रक्षा मंत्रालय का सर्वोच्च निर्णय निकाय है।
  • 1999 में कारगिल युद्ध के बाद 2001 में इस परिषद् का गठन किया गया था।
  • रक्षा खरीद परिषद की अध्यक्षता केन्द्रीय रक्षा मंत्री के द्वारा की जाती है।

उद्देश्य:

  • रक्षा खरीद परिषद का उद्देश्य सशस्त्र बलों की अनुमोदित आवश्यकताओं की निर्धारित समय सीमा के अंदर और आवंटित बजटीय संसाधनों का बेहतर उपयोग करके, शीघ्र खरीद सुनिश्चित करना है।

कार्य:

  • यह दीर्घावधि खरीद योजनाओं के लिए नीतिगत दिशानिर्देश तैयार करता है। यह सभी प्रकार की रक्षा खरीद के लिए मंजूरी प्रदान करता जिसमें विदेशी आयात के साथ-साथ स्वदेश निर्मित रक्षा साजो सामान भी शामिल है।

राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए)

चर्चा में क्यों?

  • सरकार कोविड-19 महामारी के मद्देनजर देश में कोविड-19 के नैदानिक प्रबंधन के लिए जरूरी चिकित्सा उपकरणों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने का प्रयास कर रही है।
  • इस संदर्भ में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (एमओएच एंड एफडब्ल्यू)ने जरूरी चिकित्सा उपकरणों की सूची बनाई है और देश में इनकी उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) से अनुरोध किया है।

राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) National Pharmaceutical Pricing Authority (NPPA)

पृष्ठभूमि

  • सरकार उपभोक्ताओं को सस्ती कीमतों पर जीवन रक्षक दवाओं/उपकरणों की उपलब्धता के लिए प्रतिबद्ध है। सभी चिकित्सा उपकरणों को दवा के रूप में अधिसूचित किया गया है और इन्हें 1 अप्रैल, 2020 से ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स अधिनियम,1940 और दवा (मूल्य नियंत्रण आदेश) के नियामक व्यवस्था के तहत रखा गया है।
  • एनपीपीए ने जरूरी चिकित्सा उपकरणों की मूल्य वृद्धि पर नजर रखने के लिए डीपीसीओ, 2013 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए (i) पल्स ऑक्सीमीटर और (ii) ऑक्सीजन कंसंट्रेटर के निर्माताओं / आयातकों से मूल्य संबंधित आंकड़ें मंगाए है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि 1 अप्रैल,2020 की मौजूदा कीमत में एक वर्ष में 10% से अधिक की बढ़ोतरी ना हो सके।

राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) क्या है?

  • राष्ट्रीय फार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (एनपीपीए) का गठन 29 अगस्त, 1997 को फार्मास्युटिकल विभाग (डीओपी), रसायन और उर्वरक मंत्रालय के एक संलग्न कार्यालय के रूप में दवाओं के मूल्य निर्धारण और सस्ती कीमतों पर दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एक स्वतंत्र नियामक के रूप में भारत सरकार के संकल्प के साथ किया गया था|
  • एनपीपीए डीपीसीओ, 2013 की अनुसूची -1 के तहत अधिसूचित सभी ड्रग्स को उच्चतम मूल्य प्रदान करता है साथ ही इनकी और गैर-अनुसूचित दवाओं के लिए वार्षिक मूल्य वृद्धि पर नज़र रखता है।
  • इसने अब तक 856 निर्धारित योगों और 950 नई दवाओं को सीलिंग मूल्य दिया है।
  • फार्मा निर्माताओं से ऑनलाइन सूचना संग्रह के लिए एकीकृत सार्वजनिक डेटाबेस प्रबंधन प्रणाली (IPDMS) लागू किया जा रहा है।

कार्य

  • दवा (कीमत नियंत्रण) आदेश के प्रावधनों का क्रियान्वयन करना।
  • दवाओं की उपलब्धता तथा कमी को चिन्हित करना।
  • दवाओं के उप्तादन, आयात, निर्यात, कंपनियों के मार्केट शेयर तथा लाभ को मॉनिटर करना।
  • दवाओं की कीमत के सन्दर्भ में अध्ययन इत्यादि करना।
  • दवा नीति में परिवर्तन अथवा संशोधन के लिए केंद्र सरकार को परामर्श प्रदान करना।

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