यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स (01 सितंबर 2020)

Daily Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC, RPSC and All State PCS Examinations


यूपीएससी और सभी राज्य लोक सेवा आयोग परीक्षाओं के लिए हिंदी में डेली करेंट अफेयर्स

Daily Hindi Current Affairs for UPSC, IAS, UPPSC/UPPCS, BPSC, MPPSC, RPSC and All State PCS Examinations


क्वांटम स्टेट इंटरफेरोग्राफी

चर्चा में क्यों?

  • रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट (आरआरआई) के वैज्ञानिकों ने क्वांटम अवस्था के आकलन के लिए एक नए तरीके का पता लगाया है, जो महत्वपूर्ण क्वांटम कार्य-विधि को सरल बना सकता है।

Quantum State Interferography

क्या होता है क्वांटम प्रौद्योगिकी?

  • क्वांटम ब्रह्मांड के मूल कणों का अध्ययन करता है, जो अणु से भी छोटे हैं। लेकिन ये अति सूक्ष्म कण अजीब तरीके से व्यवहार करते हैं जिन्हें एडवांस गणित से ही समझा जा सकता है। क्वांटम टेक्नोलॉजी फीजिक्स और इंजीनियरिंग का एक उभरता हुआ क्षेत्र है, जो क्वांटम फीजिक्स के सिद्धांतों पर निर्भर है। व्यावहारिक अनुप्रयोग के बारे में बात करें तो क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम सेंसर, क्वांटम क्रिप्टोग्राफी, क्वांटम सिमुलेशन, क्वांटम मेट्रोलॉजी और क्वांटम इमेजिंग - क्वांटम यांत्रिकी, विशेष रूप से क्वांटम एनटैंगलमेंट, क्वांटम सुपरस्पेशलिटी और क्वांटम टनलिंग के गुणों पर आधारित है।

क्या है क्वांटम स्टेट इंटरफेरोग्राफी?

  • क्वांटम अवस्थाओं में बदलाव के लिए नए तरीकों के साथ प्रयोग करने वाले वैज्ञानिकों ने इन अवस्थाओं की विशेषता जानने और अनुमान लगाने के लिए एक नए तरीके की खोज की है।
  • क्वांटम अवस्थाओं की विशेषता निर्धारित करने इस विधि को क्वांटम स्टेट इंटरफेरोग्राफी नाम दिया गया है।
  • जिसका उपयोग कंप्यूटिंग, संचार और मेट्रोलॉजी के लिए किया जा सकता है। जो इन बदलाव या जोड़-तोड़ को सरल बना देगा।
  • इससे क्वांटम प्रौद्योगिकियों की कई महत्वपूर्ण कार्य-विधियां आसान हो जायेंगी।
  • यह कार्य, आंशिक रूप से डीएसटी के क्यूयूईएसटी नेटवर्क कार्यक्रम द्वारा समर्थित है और इसे जर्नल फिजिकल रिव्यू लेटर्स में प्रकाशन के लिए स्वीकार किया गया है।

रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट (आरआरआई) के बारे में

  • रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के एक स्वायत्त संस्थान है।
  • यह प्रसिद्ध आधारभूत वैज्ञानिक अनुसंधान संस्थान बंगलुरु में स्थित है।
  • इसकी स्थापना 1948 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित भारतीय वैज्ञानिक चन्द्रशेखर वेंकट रमन द्वारा निजी संस्थान के रूप में की गयी थी।
  • भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग से निधि प्राप्त करने हेतु सन् 1972 में, आर.आर.आई को सहायता प्राप्त स्वायत्त अनुसंधान के रूप में पुनर्गठित किया गया।

भारत रत्न पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी

चर्चा में क्यों?

  • देश के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न से सम्मानित पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का 84 वर्ष की आयु में 31 अगस्त को आर्मी आरआर (रिसर्च एंड रेफरल) अस्पताल में निधन हो गया।

पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से संबन्धित जानकारी

  • 2012 से 2017 तक देश के 13वें राष्ट्रपति रहे श्री प्रणव मुखर्जी का जन्म का जन्म पश्चिम बंगाल के वीरभूम जिले के मिराती गाँव के एक ब्राह्मण परिवार में हुआ था।
  • इनके माता-पिता श्रीमती राजलक्ष्मी मुखर्जी और श्री कामदा किंकर मुखर्जी थे।
  • श्री मुखर्जी पहली बार 1969 में कांग्रेस पार्टी के राज्यसभा सदस्य के रूप में (उच्च सदन) में पहुंचे थे।
  • 1973 में वे औद्योगिक विकास विभाग के केंद्रीय उप मन्त्री के रूप में पहली बार मन्त्रिमण्डल में शामिल हुए।
  • 1984 में उन्हें भारत के वित्त मंत्री के रूप में नियुक्त किया गया और इसी वर्ष यूरोमनी पत्रिका के एक सर्वेक्षण में उन्हें विश्व के सबसे अच्छे वित्त मंत्री के रूप में मूल्यांकन किया गया।
  • वे अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक और अफ्रीकी विकास बैंक के प्रशासक बोर्ड के सदस्य भी रह चुके हैं।
  • उन्हें सन् 1997 में सर्वश्रेष्ठ सांसद का सम्मान और सन् 2008 के दौरान सार्वजनिक मामलों में उनके योगदान के लिए भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म विभूषण प्रदान गया।
  • श्री प्रणव मुखर्जी को 26 जनवरी 2019 में भारत रत्न से सम्मानित होने वाले 6वें राष्ट्रपति बने।

वर्ष (2020-21) की पहली तिमाही के जीडीपी के आंकड़े

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में भारत सरकार के सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (Ministry of Statistics and Programme Implementation- MoSPI) के अंतर्गत आने वाले राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने मौजूदा वित्त वर्ष (2020-21) की पहली तिमाही के जीडीपी के आंकड़े जारी किये हैं।
  • भारत में वर्ष 1996 में जीडीपी के तिमाही आंकड़े जारी होना शुरू हुए थे। तब से लेकर अब तक यह देश की जीडीपी में सबसे बड़ी गिरावट है। साथ ही यह एशिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से भी सबसे अधिक गिरावट है।

वर्तमान जीडीपी के आंकड़े से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्य

  • राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही (अप्रैल,2020 से जून, 2020 तक ) में जीडीपी में 23.9 फीसद की नकारात्मक वृद्धि दर(negative growth rate) दर्ज की गई है। इसकी तुलना में पिछली तिमाही में जीडीपी में 3.1 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। 2019-20 की समान तिमाही में 5.2 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।
  • जीडीपी के आंकड़ों में यह गिरावट इसलिए है, क्योंकि मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही में कोरोना वायरस महामारी और लॉकडाउन के चलते औद्योगिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित रही थीं। कड़े देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान तो सिर्फ आवश्यक सामानों और आवश्यक सेवाओं को छोड़कर सभी आर्थिक गतिविधियां ठप रहीं।
  • आंकड़ों के अनुसार 2020-21 की पहली तिमाही में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सकल मूल्य वर्धन (GVA) ‘ – 39.3’ फीसदी रहा। कंस्ट्रक्शन सेक्टर में यह ‘- 50.3’ फीसदी रहा है। बिजली क्षेत्र में यह ‘-7’ फीसदी है। उद्योग में सकल मूल्य वर्धन ‘-38.1’ फीसदी और सर्विस सेक्टर में ‘-20.6 ‘फीसदी रहा है।
  • आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि मैन्युफैक्चरिंग, निर्माण, व्यापार, होटल, ट्रांसपोर्ट, संचार आदि सेक्टर देश की जीडीपी में करीब 45 फीसदी का योगदान रखते हैं और पहली तिमाही में इन सभी सेक्टर के कारोबार पर काफी बुरा असर पड़ा है।

क्या होती है जीडीपी?

  • किसी देश की सीमा में एक निर्धारित समय-सीमा में उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं के कुल मौद्रिक या बाजार मूल्य को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) कहते हैं।
  • यह किसी देश के घरेलू उत्पादन का व्यापक मापन होता है और इससे किसी देश की अर्थव्यवस्था की सेहत पता चलती है।
  • इसकी गणना आमतौर पर वार्षिक होती है, लेकिन भारत में इसे हर तीन महीने यानी तिमाही भी आंका जाता है। कुछ वर्ष पूर्व इसमें शिक्षा, स्वास्थ्य, बैंकिंग और कंप्यूटर जैसी अलग-अलग सेवाओं यानी सर्विस सेक्टर को भी जोड़ दिया गया.
  • जीडीपी दो तरह की होती है- नॉमिनल और रियल ।
  • नॉमिनल जीडीपी सभी आंकड़ों का मौजूदा कीमतों पर योग होता है, लेकिन रियल जीडीपी में महंगाई के असर को भी समायोजित कर लिया जाता है अर्थात अगर किसी वस्तु के मूल्य में 10 रुपये की बढ़त हुई है और महंगाई 4 फीसदी है तो उसके रियल मूल्य में बढ़त 6 फीसदी ही मानी जाएगी। भारत में हर तिमाही जो आंकड़े जारी होते हैं वे रियल जीडीपी के होते हैं।

आठ कोर उद्योगों का सूचकांक

चर्चा में क्यों?

  • हाल ही में उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग के आर्थिक सलाहकार कार्यालय ने जुलाई, 2020 के लिए आठ कोर उद्योगों का सूचकांक जारी किया है।
  • देश के इन 8 सबसे प्रमुख उद्योगों के उत्पादन में जुलाई में 9.6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है ।

क्या होते है अर्थव्यवस्था के कोर उद्योग?

  • अर्थव्यवस्था के बुनियादी क्षेत्र में उन उद्योगों को रखा जाते है जो देश की अर्थव्यवस्था रीढ़ होते है तथा इनकी विकास दर में कमी या बढोत्‍तरी बताती है कि किसी देश की अर्थव्‍यवस्‍था की बुनियाद की हालत कैसी है?
  • अर्थव्यवस्था के बुनियादी क्षेत्र में अधिकतर ऐसे उद्योगों को शामिल किया जाता है जिनके स्थापना से अन्य उद्योगों की स्थापना का आधार बनती है।
  • ज्यादातर देशों में विशेष उद्योग स्थापित हैं जो अन्य सभी उद्योगों की रीढ़ (Backbone) माने जाते हैं तथा कोर उद्योग होने के योग्य प्रतीत होते हैं।
  • आठ प्रमुख उद्योगों में कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, रिफाइनरी उत्पाद, उर्वरक, इस्पात, सीमेंट और बिजली शामिल हैं।

कोर उद्योगों के सूचकांक से संबंधित प्रमुख तथ्य

  • जुलाई में मुख्य रूप से स्टील, रिफाइनरी उत्पाद और सीमेंट सेक्टर में गिरावट के कारण कोर सेक्टर में गिरावट आई है। जुलाई में फर्टिलाइजर्स को छोड़कर बाकी सभी 7 सेक्टरों के उत्पादन में गिरावट दर्ज की गई है।
  • वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक एक साल पहले यानी जुलाई 2019 में इन 8 प्रमुख उद्योगों के उत्पादन में 2.6 फीसदी की बढ़ोतरी हुई थी। इस साल जुलाई में लगातार पांचवें महीने कोर सेक्टर का उत्पादन गिरा है।
  • कोविड-19 महामारी के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए देश में लॉकडाउन लगाए जाने के बाद हर महीने कोर सेक्टर में गिरावट दर्ज की गई है । मार्च 2020 में कोर सेक्टर 8.6 फीसदी ,अप्रैल में 37 फीसदी, मई में इसमें 22 फीसदी और जून में इसमें 15 फीसदी की गिरावट दर्ज की गयी थी ।

आठ कोर उद्योगों के सूचकांक का प्रदर्शन

  • जुलाई में आठ कोर उद्योगों के सूचकांक का प्रदर्शन निम्नलिखित प्रकार रहा है-
  • कोयला : -5.7%
  • कच्चा तेल : -4.9
  • प्राकृतिक गैस : -10.2%
  • रिफाइनरी प्रोडक्ट्स : -13.9%
  • फर्टिलाइजर्स : +6.9%
  • स्टील : -16.5%
  • सीमेंट : -13.5%
  • बिजली : -2.3%
  • संपूर्ण कोर सेक्टर : -9.6%

औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) पर प्रभाव

  • आर्थिक विशेषज्ञों का अनुमान है कि कोर सेक्टर के उत्पादन में 9.6 फीसदी गिरावट को इस बात का संकेत माना जा सकता है कि जुलाई के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) के आंकड़े भी काफी खराब आ सकते हैं ।क्योंकि कोर सेक्टर का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) में 40.27 फीसदी योगदान होता है ।
  • गौरतलब है कि आईआईपी, अर्थव्यवस्था के विभिन्न उद्योग समूहों में एक निश्चित समय अवधि में विकास दर को प्रदर्शित करता है अर्थात आईआईपी, एक समग्र संकेतक है जो वर्गीकृत किये गए उद्योग समूहों की वृद्धि दर को मापता है । इसके आकलन के लिये आधार वर्ष ‘2011-2012’ है।
  • आईआईपी का संकलन मासिक आधार पर सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय तथा राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा मिलकर किया जाता है।
  • आईआईपी में आठ कोर उद्योग का भारांश घटते के क्रम में निम्न प्रकार से है : रिफाइनरी उत्पाद> विद्युत> इस्पात> कोयला> कच्चा तेल> प्राकृतिक गैस> सीमेंट> उर्वरक।
  • औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) का उपयोग भारतीय रिजर्व बैंक, वित्त मंत्रालय तथा अन्य सरकारी एजेंसियों व संगठनों द्वारा सार्वजनिक नीति-निर्माण में किया जाता है।